ग्राउंड रिपोर्टजयराम रमेश ने 4 महीने प्लानिंग की:दिग्विजय को भारत जोड़ो यात्रा की तैयारी का जिम्मा, राहुल ने हर 10 दिन में रिव्यू किया

तिरुवनंतपुरम2 महीने पहलेलेखक: आशीष राय

तमिलनाडु के कन्याकुमारी से शुरू हुई कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा का आज 7वां दिन है। 150 दिन और 3,570 किमी चलने वाली ये यात्रा अभी केरल में है। राहुल गांधी के साथ 119 यात्री हर रोज 7 घंटे पैदल चल रहे हैं। इस दौरान वे 20 से 22 किमी की दूरी तय करते हैं। यात्रियों में 32 महिलाएं भी हैं।

सभी के रहने, खाने-पीने और आराम करने के इंतजाम भी साथ चलते हैं। यात्रा के लिए 50 हजार एप्लिकेशन आई थीं, इनमें से सिर्फ 119 को चुना गया।

12 राज्यों और दो केंद्रशासित प्रदेशों से गुजरकर भारत जोड़ो यात्रा जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में खत्म होगी। हमने यात्रा का मैनेजमेंट संभाल रहे दिग्विजय सिंह और जयराम रमेश से बात की। उनसे जाना कि इतने लंबे इवेंट की प्लानिंग और तैयारी कैसे हुई।

जयराम रमेश यात्रा के मीडिया कोऑर्डिनेटर भी हैं। उन्होंने बताया कि इसके पीछे 4 महीने की मेहनत है। यात्रा का आइडिया मई में उदयपुर में हुए चिंतन शिविर में आया था। दिग्विजय सिंह और दूसरे नेताओं से बातचीत के बाद 15 मई को सोनिया गांधी ने ऐलान किया कि पार्टी कन्याकुमारी से कश्मीर तक भारत जोड़ो यात्रा निकालेगी।

हर राज्य में को-ऑर्डिनेटर, हर जिले में टीम बनी
यात्रा का कॉन्सेप्ट महात्मा गांधी के ‘दांडी मार्च’ से लिया गया है। इसे जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई दिग्विजय सिंह को। वे 2017 में 3300 किलोमीटर की ‘नर्मदा परिक्रमा’ कर चुके हैं।

दिग्विजय की अध्यक्षता में भारत जोड़ो प्लानिंग कमेटी बनी। हर राज्य में कोऑर्डिनेटर बनाए गए। इसके बाद हर जिले में एक टीम तैयार हुई। दिल्ली में भी 20 से ज्यादा लोग प्लानिंग से जुड़े रहे। इनमें मुकुल वासनिक और केसी वेणुगोपाल के अलावा कांग्रेस से जुड़े संगठनों के लोग भी थे।

हर 10 दिन में राहुल प्रोग्रेस रिपोर्ट देखते थे
प्रियंका और राहुल गांधी ने यात्रा की प्लानिंग पर नजर बनाए रखी। हर 10 दिन पर जयराम रमेश तैयारियों की प्रोग्रेस रिपोर्ट लेकर राहुल के पास जाते थे। यात्रा के दौरान राहुल गांधी की सिक्योरिटी बड़ी चिंता थी। इसे ध्यान में रखते हुए 150 दिन की प्लानिंग पहले पेपर पर, फिर ग्राउंड पर की गई। सब ओके होने के बाद फाइनल ड्राफ्ट तैयार हुआ।

हर दिन 7 से 8 घंटे चली प्लानिंग
हर दिन में 7 से 8 घंटे प्लानिंग पर काम चला। इसमें पब्लिसिटी, मटेरियल जमा करना, कम्युनिकेशन, लॉजिस्टिक, पूरे सिस्टम का एक से दूसरी जगह मूवमेंट, जगह फाइनल करना, यात्रा की परमिशन लेना, मीडिया मैनेजमेंट और लोकल सिस्टम तैयार करना शामिल था।

राहुल ने बस, ट्रेन या कार से चलने का सुझाव ठुकराया
राहुल गांधी को सुझाव दिया गया कि वे थोड़ा बस में, थोड़ा ट्रेन और फिर पैदल चलते हुए 3570 किलोमीटर का सफर पूरा करें। पर राहुल पैदल देश के सबसे बड़े मार्च को पूरा करना चाहते हैं।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा उनके लिए तपस्या है। राहुल कहते हैं कि वे इस यात्रा का नेतृत्व नहीं कर रहे, सिर्फ इसमें हिस्सा ले रहे हैं।

‘भारत जोड़ो सह यात्रा’ भी शुरू होंगी
भारत जोड़ो यात्रा, जिन राज्यों में नहीं जाएगी, वहां ‘भारत जोड़ो सह यात्रा’ शुरू होगी। इसकी जिम्मेदारी भी जयराम रमेश और दिग्विजय सिंह के पास है। इसके लिए 16 सितंबर को दोनों असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल जाने वाले हैं।

यात्रा तय वक्त से एक महीने पहले शुरू हुई
पहले तय हुआ था कि यात्रा 2 अक्टूबर 2022 से शुरू होगी, लेकिन राहुल गांधी ने कहा कि इसे पहले करना चाहिए। इसके बाद यात्रा एक महीने पहले शुरू की गई। उसी हिसाब से तैयारियां भी पूरी की गईं।

सभी को राहुल के करीब जाने की इजाजत नहीं
राहुल की सुरक्षा के लिहाज से तय किया गया कि जो लोग उनके साथ रहेंगे, उनकी पूरी जांच होगी। यात्रा में हर तरह के लोग हैं, पर राहुल के करीब जाने की इजाजत सभी को नहीं है।

दिग्विजय सिंह के मुताबिक, RSS के एक कार्यकर्ता ने नांदेड़ में एफिडेविट दिया है कि किस तरह उसे मानव बम के तौर पर तैयार किया गया था। RSS से जुड़े लोगों पर आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने के आरोप हैं। संगठन के इंद्रेश कुमार आतंक के आरोपी हैं। इसलिए राहुल के लिए सुरक्षित जगह तैयार करना बड़ी चुनौती थी।

यात्रा के दौरान, राहुल गांधी के आसपास चार लेयर की सुरक्षा रहती है। उन्हें Z+ कैटेगरी के तहत CRPF का सिक्योरिटी कवर मिला है। इसके बाद लोकल पुलिस, कांग्रेस सेवादल और पार्टी वॉलंटियर्स का सुरक्षा घेरा रहता है।

यात्रियों को कंटेनर में ठहराया, क्योंकि इन्हें शिफ्ट करना आसान
रुकने के लिए टेंट की जगह कंटेनर इस्तेमाल किए जा रहे हैं, क्योंकि टेंट एक से दूसरी जगह शिफ्ट करना मुश्किल होता है। यह काफी महंगा भी है। 60 से ज्यादा कंटेनरों को ट्रेन की सेकेंड और थर्ड क्लास एसी बोगी की तरह डेवलप किया गया है। यात्रा का पूरा खर्च पार्टी फंड से उठाया जा रहा है।

राहुल के कहने पर यात्रा 7 सितंबर से शुरू हुई
सेंट्रल लेवल पर यात्रा की प्लानिंग में 20 से 25 लोग जुड़े थे। राहुल गांधी ने यात्रियों को चुनने से लेकर इसके पूरे एग्जीक्यूशन का जिम्मा दिग्विजय सिंह को सौंपा। वे बताते हैं कि राहुल ने मुझसे कहा कि 7 सितंबर को यात्रा शुरू करनी है। मैंने कर दी। हालांकि राहुल ने कहा था- आप जैसा कहेंगे मैं चल पड़ूंगा।

सभी इंतजाम हटाने और दोबारा लगाने में खर्च हो रहे 7 घंटे
गौरव पांधी भारत जोड़ो यात्रा की कोऑर्डिनेशन टीम के मेंबर हैं। उन्होंने बताया कि कॉन्सेप्ट तैयार करने के बाद लॉजिस्टिक, मीडिया और सोशल मीडिया मैनेजमेंट, यात्रियों को एक जगह से दूसरी जगह पर मूव कराने के लिए कई टीमें बनाई गईं। हमने यात्रा के लिए ऐसे कंटेनरों को चुना, जो इस्तेमाल में नहीं हैं।

उन्हें इस तरह से बनवाया गया कि उसमें सर्दी या गर्मी का असर न रहे। हर दिन 200 से ज्यादा लोग 2 घंटे में एक लोकेशन से कंटेनर, बिजली, कॉमन एरिया, दरी, टॉयलेट, सब कुछ हटाते हैं और अगली लोकेशन पर 5 घंटे में उसे फिर से लगाते हैं। आप कह सकते हैं कि हम हर दिन एक नया गांव बसाते हैं।

भारत टूट रहा है, इसलिए यात्रा निकाल रहे हैं
जयराम रमेश कहते हैं कि महंगाई और बेरोजगारी बहुत बढ़ गई है। दो पूंजीपतियों को सब सौंप दिया गया है। ध्रुवीकरण के कारण समाज कमजोर हो रहा है। राज्यों के अधिकार छीने जा रहे हैं, संवैधानिक संस्थाएं काम नहीं कर पा रही हैं। इसलिए भारत टूट रहा है। हम बिखर रहे हैं। भारत को जोड़ने के लिए हम ये यात्रा निकाल रहे हैं।

गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव की वजह से यात्रा में बफर डेज रखे गए हैं। इस दौरान राहुल प्रचार के लिए इन राज्यों में जाएंगे। तब तक यात्रा रुकी रहेगी। राहुल के दोबारा जॉइन करने पर यात्रा शुरू होगी। इसलिए इसका टाइम 150 दिन का रखा गया है।
गुजरात और हिमाचल प्रदेश में चुनाव की वजह से यात्रा में बफर डेज रखे गए हैं। इस दौरान राहुल प्रचार के लिए इन राज्यों में जाएंगे। तब तक यात्रा रुकी रहेगी। राहुल के दोबारा जॉइन करने पर यात्रा शुरू होगी। इसलिए इसका टाइम 150 दिन का रखा गया है।

80 साल पहले 9 अगस्त 1942 में महात्मा गांधी ने ‘अंग्रेजों भारत छोड़ो’ का नारा दिया था। उस वक्त भी RSS के लोगों ने इसका विरोध किया था और आज भी ये ‘भारत जोड़ो’ के खिलाफ खड़े हैं। BJP देश तोड़ रही है, हम इसे जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

गांधीजी ने दांडी मार्च से दिखाई थी पदयात्रा की ताकत
देश में पदयात्रा की शुरुआत महात्मा गांधी ने की थी। नमक कानून तोड़ने के मकसद से उन्होंने 12 मार्च 1930 से साबरमती आश्रम से दांडी मार्च शुरू किया था। वे 78 स्वयंसेवकों के साथ 385 किलोमीटर पैदल चले। ये दूरी उन्होंने 26 दिन में पूरी की थी।

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