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  • Rahul Gandhi Is A Gentleman, The Reason For The Disintegration Of The Congress In The States Is Not He, But The State Leadership, Who Does What They Want.

कांग्रेस छोड़ने वाले सीनियर लीडर का दर्द:राहुल गांधी तो जेंटलमैन हैं, राज्यों में कांग्रेस के बिखरने की वजह वह नहीं बल्कि प्रदेश नेतृत्व, जो अपनी मनमर्जी करता है

कोलकाता21 दिन पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
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  • बोले, बंगाल में 15-20 सीटें तो जीत जाते, लेकिन हमारे नेता के गलत निर्णय ने जीरो पर ला दिया

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस छोड़ने वाले एक सीनियर लीडर का कहना है कि, राहुल गांधी तो जेंटलमैन हैं, राज्यों में कांग्रेस के टूटने की वजह वे नहीं हैं, बल्कि प्रदेश नेतृत्व है। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस 15 से 20 सीटें तो जीत ही जाती, लेकिन वामपंथियों से गठबंधन के चलते हम जीरो पर आ गए। विरोध करने के बावजूद प्रदेश नेतृत्व ने किसी एक नहीं सुनी। अब गांधी पार्टी को कहां-कहां देखेंगे।

अधीर रंजन चौधरी बंगाल में कांग्रेस के डूबने की वजह
सीनियर लीडर ने कहा कि इतनी सीनियरटी के बावजूद मैं दो साल से निष्क्रिय बैठा था। न मुझे किसी कार्यक्रम में बुलाया जाता था और न ही महत्व दिया जाता था। जबकि मैं तो नौकरी छोड़कर काम करने पार्टी में आया था। मेरे लिए पद मायने नहीं रखता, लेकिन जिम्मेदारी और इन्वॉलमेंट चाहता था, जो उन्होंने नहीं दिया। बस इसी कारण कांग्रेस छोड़ दी।

कांग्रेस में सोनिया-राहुल का विकल्प नहीं
कांग्रेस में सोनिया-राहुल गांधी का कोई दूसरा विकल्प नहीं है। राहुल गांधी जेंटलमैन हैं, लेकिन गांधी अकेले कहां-कहां पार्टी को संभालेंगे। यूपी में जितिन प्रसाद को भी कांग्रेस की प्रदेश कार्यकारिणी के चलते ही पार्टी से जाना पड़ा। लगभग हर राज्य में पार्टी के साथ यही हो रहा है। अब आपका लीडर अच्छा है, आपके पास हथियार भी हैं, ट्रेनिंग भी दे दी गई है, लेकिन आदमी परफॉर्म ही नहीं कर रहा तो आप हार ही जाओगे।

उन्होंने कहा कि बंगाल में हम अकेले लड़ते तो आराम से 20 से 25 सीट तो जीत ही जाते। मालदा-मुर्शिदाबाद में तो 10 से 15 सीटें जीत ही जाते। लेकिन गठबंधन के चलते वो भी हार गए। अब अगले दस साल तक बंगाल में तो कांग्रेस का कोई भविष्य नहीं दिख रहा।

लड़ाई मोदी नहीं, बीजेपी के खिलाफ
कांग्रेस नेता ने कहा कि विपक्ष की लड़ाई नरेंद्र मोदी से नहीं, बल्कि बीजेपी के खिलाफ है। 2024 में कांग्रेस से ही निकली क्षेत्रीय पार्टियां गठबंधन में चुनाव लड़ेंगी तो बीजेपी को हरा सकती हैं। गठबंधन का चेहरा कौन होगा यह बाद में तय हो जाएगा। मैं तो चाहूंगा कि ममता बनर्जी ही चेहरा बनें क्योंकि वे बीजेपी को बंगाल में हरा चुकी हैं। कांग्रेस आज नहीं तो कल अच्छा जरूर करेगी।

उन्होंने कहा कि नए लीडर्स पार्टी से जुड़ रहे हैं। अच्छा काम कर रहे हैं। बंगाल की हिंसा पर यही कहूंगा कि, यहां कोई दो साल रहेगा तो समझ जाएगा कि हिंसा कैसे होती है और कौन करता है। यहां हिंसा को कम्यूनल नहीं, बल्कि पॉलिटिकल रंग दिया जाता है। लोकल लोगों को सच्चाई पता है। इस बार तो हिंसा बहुत कंट्रोल में है।

शीर्ष नेतृत्व ही जिम्मेदार, पंजाब-राजस्थान में भी टूट का डर
मध्यप्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया, उत्तरप्रदेश में जितिन प्रसाद और बंगाल में अभिजीत बनर्जी कांग्रेस छोड़ चुके हैं। राजस्थान में भी सचिन पायलट में लंबे समय से असंतोष है। पंजाब में सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह सिद्धू की नहीं जम रही।

वरिष्ठ पत्रकार राशिद किदवई कहते हैं, कांग्रेस अभी कहीं जीत नहीं रही इसलिए पार्टी में भगदड़ का माहौल होना स्वाभाविक है। राजनीतिक निष्ठा कंडीशनल होती है। अभिजीत बनर्जी इसलिए कांग्रेस से गए क्योंकि उन्हें लगता है कि वे टीएमसी से सांसद या विधायक बन जाएंगे। हालांकि, इस सबका जिम्मेदार शीर्ष नेतृत्व ही है।