आज की पॉजिटिव खबर:राजस्थान के विमल ने मां के साथ मिलकर रिन्यूएबल प्रोडक्ट का स्टार्टअप शुरू किया, पहले ही साल 50 लाख रुपए का बिजनेस

नई दिल्लीएक वर्ष पहले

पिछले कुछ सालों में रिन्यूएबल एनर्जी बेस्ड प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ी है। हालांकि, एग्रीकल्चर के फील्ड में इस तरह के कम ही प्लेटफॉर्म हैं, जहां ऐसे प्रोडक्ट मिलते हैं। इस कमी को देखते हुए राजस्थान के अजमेर में रहने वाले विमल पंजवानी ने पिछले साल कोरोना के दौरान एक स्टार्टअप की शुरुआत की। अपनी मां शोभा चंचलानी के साथ मिलकर वे सोलर पंप, बायोगैस डाइजेस्टर, इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर सहित कई रिन्यूएबल प्रोडक्ट की देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। अब तक वे 50 लाख से ज्यादा का बिजनेस कर चुके हैं।

32 साल के विमल ने पहले इंजीनियरिंग की और फिर साल 2012 में MBA की डिग्री हासिल की। इसके बाद उनकी नौकरी लग गई। लंबे वक्त तक उन्होंने अलग-अलग सेक्टर में काम किया। इस दौरान एक बैंक में भी उनकी जॉब लगी, जहां वे किसानों को लोन दिलाने का काम करते थे। यहीं से एग्रीकल्चर सेक्टर में उनकी दिलचस्पी बढ़ने लगी। फिर वे नौकरी छोड़कर एग्रीकल्चर बेस्ड स्टार्टअप के साथ जुड़ गए। यहां कुछ सालों तक उन्होंने सोलर बेस्ड स्टार्टअप और बायोगैस स्टार्टअप के साथ काम किया। कई स्टार्टअप को गाइड करने का भी काम किया। इस वजह से एग्रीकल्चर सेक्टर में उनकी अच्छी खासी समझ हो गई।

कोरोना के दौरान शुरू किया स्टार्टअप

विमल ने अपने इस स्टार्टअप के जरिए कई युवाओं को रोजगार दिया है। आगे आने वाले दिनों में वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की योजना पर काम कर रहे हैं।
विमल ने अपने इस स्टार्टअप के जरिए कई युवाओं को रोजगार दिया है। आगे आने वाले दिनों में वे ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार देने की योजना पर काम कर रहे हैं।

विमल बताते हैं, 'साल 2020 की शुरुआत में मैं जॉब चेंज करना चाहता था, लेकिन तभी कोरोना आ गया। इस वजह से नई नौकरी जॉइन नहीं कर सका। कुछ दिनों तक ऐसे ही खाली बैठा रहा, तब मेरी मां ने कहा - तुम सबके लिए स्टार्टअप प्लान बनाते हो, उसे जमाने में मदद करते हो, तो खुद का ही कुछ काम क्यों नहीं शुरू करते हो। अगर खुद का कुछ शुरू करते हो तो मैं भी उससे जुड़कर काम करूंगी।'

विमल कहते हैं, 'मां सरकारी नौकरी से रिटायर्ड हो चुकी थीं। घर में खाली बैठे उनका मन नहीं लगा रहा था। मुझे भी उनका आइडिया अच्छा लगा कि अब खुद का ही कुछ करना चाहिए। इसके बाद हमने खुद के स्टार्टअप को लेकर रिसर्च करना शुरू कर दिया। कुछ दिनों तक रिसर्च के बाद जुलाई 2020 में हमने एग्री विजय नाम से स्टार्टअप शुरू किया। चूंकि अपने पास बजट सीमित था, इसलिए घर से काम करना शुरू किया। एक स्टार्टअप की मदद से हमने कंपनी को रजिस्टर कराया फिर स्टार्टअप इंडिया से सर्टिफिकेशन के लिए अप्लाई किया। फिर नवंबर 2020 से हमने काम करना शुरू कर दिया।'

विमल कहते हैं कि सोलर सिस्टम और सोलर वॉटर पंप की वजह से किसानों को कम खर्च में सिंचाई की सुविधा मिल रही है।
विमल कहते हैं कि सोलर सिस्टम और सोलर वॉटर पंप की वजह से किसानों को कम खर्च में सिंचाई की सुविधा मिल रही है।

विमल कहते हैं कि हमने अपने बिजनेस की शुरुआत सोलर वॉटर पंप के साथ की थी। बाद में हमने बायोगैस डाइजेस्टर, सोलर इन्वर्टर, बायोगैस जेनरेटर और इलेक्ट्रिक ट्रैक्टर को भी शामिल कर लिया। ये सभी प्रोडक्ट रिन्यूएबल एनर्जी बेस्ड हैं। इससे पर्यावरण को भी फायदा होता है और किसानों को भी इससे लाभ मिलता है। इसी के चलते हमने इसकी कीमत भी उतनी ही रखी जिसे एक आम किसान भी खरीद सके। हमारे प्रोडक्ट की कीमत 10 हजार रुपए से शुरू होती है। यही वजह है कि हमें शुरुआत से ही बढ़िया रिस्पॉन्स मिला और जल्द ही अच्छा मुनाफा मिलने लगा।

ऑनलाइन- ऑफलाइनल दोनों ही मोड से मार्केटिंग

विमल कहते हैं कि हम अभी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही प्लेटफॉर्म से मार्केटिंग कर रहे हैं। ऑनलाइन के लिए हमारी वेबसाइट और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से लोग कोई भी प्रोडक्ट खरीद ऑर्डर कर सकते हैं। हमारी टीम जल्द से जल्द कस्टमर्स के घर प्रोडक्ट पहुंचाने की कोशिश करती है। इतना ही नहीं अगर किसी कस्टमर को मशीन इंस्टॉल करने में दिक्कत होती है तो हम अपने टीम मेंबर्स को भी कस्टमर के घर मदद के लिए भेज देते हैं।

इसके साथ ही ऑफलाइन लेवर पर भी देश के कई हिस्सों में हमारी टीम काम कर रही है। हमने राजस्थान और महाराष्ट्र में करीब 40 जगहों पर अपने स्टोर खोले हैं। इसके जरिए हम अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर रहे हैं। हर महीने करीब 10 ऑर्डर हमें मिल जाते हैं। अब तक हम लोग 50 लाख रुपए का बिजनेस कर चुके हैं।

विमल बताते हैं कि हमारे सभी प्रोडक्ट रिन्यूएबल एनर्जी बेस्ड हैं। इससे किसानों को तो फायदा होता ही है साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता है।
विमल बताते हैं कि हमारे सभी प्रोडक्ट रिन्यूएबल एनर्जी बेस्ड हैं। इससे किसानों को तो फायदा होता ही है साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होता है।

किसानों की मदद के लिए लोकल लैंग्वेज में कॉल सेंटर

विमल बताते हैं कि देश के ज्यादातर किसान अंग्रेजी नहीं समझ पाते हैं। भाषाई राज्यों के किसानों को तो हिंदी में भी दिक्कत होती है। इसलिए हमने हिंदी के साथ ही राजस्थानी और मराठी लैंग्वेज में कॉल सेंटर की शुरुआत की, ताकि किसी भी किसान को प्रोडक्ट के बारे में कोई जानकारी लेनी हो तो वह आसानी से प्राप्त कर सके। इस वजह से गांवों में भी हमारा प्रोडक्ट पहुंच रहा है और किसान इसे खरीदने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

विमल कहते हैं कि प्रोडक्ट तैयार करने को लेकर हमने प्रोटोटाइप तैयार कर रखा है। उसके आधार पर हम मैन्युफैक्चरर से मशीनें तैयार करवाते हैं। यानी आइडिया हमारा होता है और उसका निर्माण दूसरी कंपनियां करती हैं। फिर हम उसे अपने यहां लाते हैं, क्वालिटी टेस्टिंग करते हैं और फिर उसकी मार्केटिंग करते हैं। फिलहाल 13 लोगों की टीम विमल के साथ काम कर रही है।

किसानों को मिल रहा है स्टार्टअप से फायदा

विमल के मुताबिक उनके स्टार्टअप की वजह से किसानों को काफी फायदा मिल रहा है। जिन जगहों पर बिजली की पहुंच नहीं है, वहां किसानों को डीजल से सिंचाई करनी पड़ती थी। इसमें उनका अच्छा-खासा पैसा खर्च होता था, लेकिन सोलर पंप की मदद से किसान आसानी से सिंचाई कर पा रहे हैं। इसके साथ ही हमने कई जगहों पर सोलर इन्वर्टर भी इंस्टॉल किए हैं, इसकी मदद से काफी हद तक बिजली बिल की बचत हो रही है। इसी तरह गोबर से चलने वाले गोबर गैस से भी किसानों की लाइफ में अच्छा खासा बदलाव देखने को मिल रहा है।

विमल और उनके टीम के साथी अलग-अलग जगहों पर स्टॉल लगाकर भी अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं।
विमल और उनके टीम के साथी अलग-अलग जगहों पर स्टॉल लगाकर भी अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं।

किसानों से जुड़े स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो यह खबर आपके काम की है

किसानों के लिए उनकी फसल की सुरक्षा सबसे बड़ा इश्यू है। कई बार जंगली जानवर उनकी फसल नष्ट कर देते हैं। इस वजह से उन्हें इकोनॉमिक लेवल पर नुकसान तो होता ही है, साथ ही फसल की रखवाली में उनका अच्छा खासा वक्त भी जाया होता है। इस परेशानी को दूर करने के लिए दिल्ली में रहने वाले 24 साल के अभय शर्मा ने एक पहल की है। उन्होंने एक ऐसी मशीन तैयार की है, जो अपनी साउंड के जरिए जानवरों को खेत में घुसने से रोकती है। इतना ही नहीं उन्होंने एक स्मार्ट स्टिक भी बनाई है, जो फॉरेस्ट गार्ड्स और आम लोगों को बड़े जानवरों के हमले से बचाती है। (पढ़िए पूरी खबर)

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