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आज की पॉजिटिव खबर:बिहार के राजेश ने 2 साल पहले किसानों की मदद के लिए ऑनलाइन ऐप लॉन्च किया, अब तक 35 लाख से ज्यादा किसान जुड़े, करोड़ों में कमाई

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

देश के ज्यादातर किसानों को खेती के बारे में सही जानकारी और इन्फॉर्मेशन को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। किन फसलों की खेती करनी है, उनकी लागत क्या होगी, कमाई कितनी होगी? फसल तैयार होने के बाद वे अपने प्रोडक्ट को कैसे बेच सकते हैं? खेती को लेकर सरकार की कौन-कौन सी योजनाएं हैं, उनका लाभ कैसे लिया जा सकता है? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो अमूमन हर किसान के मन में होते हैं। बहुत कम किसानों को ही इस तरह की जानकारी आसानी से मिल पाती है।

बिहार के पटना जिले में रहने वाले राजेश रंजन ने किसानों की इन परेशानियों को दूर करने के लिए एक ऐप लॉन्च किया है। इसके जरिए किसान खेती से जुड़ी हर चीज की जानकारी ले सकते हैं। एक्सपर्ट्स से बातचीत कर सकते हैं और अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर सकते हैं। देशभर से 35 लाख से ज्यादा किसान उनके साथ जुड़े हैं। इनमें से ज्यादातर एक्टिव यूजर्स हैं। पिछले दो साल में इस स्टार्टअप के जरिए किसानों ने 200 करोड़ से ज्यादा का बिजनेस किया है।

बाएं से दाएं - राजेश रंजन और उनके साथी अविनाश कुमार और मनीष अग्रवाल। अभी इनकी टीम में 24 लोग काम करते हैं।
बाएं से दाएं - राजेश रंजन और उनके साथी अविनाश कुमार और मनीष अग्रवाल। अभी इनकी टीम में 24 लोग काम करते हैं।

29 साल के राजेश एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। 2015 में IIT खड़गपुर से इंजीनियरिंग के बाद उन्होंने खुद का स्टार्टअप लॉन्च किया। इसके जरिए वे रिटेल और सप्लाई चेन को लेकर काम करते थे। कुछ साल बाद एक बड़ी कंपनी ने उनका स्टार्टअप टेकओवर कर लिया। इसके बाद उन्होंने दो अलग-अलग कंपनियों में काम किया।

कुछ ऐसा काम किया जाए जिससे किसानों को फायदा हो

राजेश कहते हैं कि नौकरी के दौरान मुझे रियलाइज हुआ कि सिर्फ पैसा कमाना हमारा मोटिव नहीं हो सकता। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठता रहता था कि मैं जिस इलाके और बैकग्राउंड से निकलकर यहां तक पहुंचा हूं, क्या मैं उन लोगों के लिए कुछ कर पा रहा हूं? क्या मेरे काम से उन्हें कोई मदद मिल रही है? अगर नहीं तो फिर बड़े संस्थान से पढ़ाई करने और पैसे कमाने का क्या मतलब है। यही सोचकर मैंने 2019 में नौकरी छोड़ दी।

नौकरी छोड़ने के बाद राजेश ने अलग-अलग गांवों में जाना शुरू किया। वे बिहार, झारखंड, मध्यप्रदेश, राजस्थान जैसे राज्यों में गए। वहां के किसानों से मिले। उनकी दिक्कतों को समझा। तब उन्हें पता चला कि ज्यादातर किसान खेती से कमाई नहीं कर पा रहे हैं, लेकिन उसी इलाके में कुछ गिने-चुने किसान अच्छी कमाई कर रहे हैं। राजेश कहते हैं- ऐसे में मेरे मन में सवाल उठा कि जब दोनों के लिए जमीन और क्लाइमेटिक कंडीशन एक जैसी है, तो फिर आमदनी में इतना बड़ा फासला क्यों है?

किसानों के साथ खड़े राजेश रंजन। स्टार्टअप लॉन्च करने से पहले वे गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते थे।
किसानों के साथ खड़े राजेश रंजन। स्टार्टअप लॉन्च करने से पहले वे गांव-गांव जाकर किसानों की समस्याओं को समझने की कोशिश करते थे।

राजेश कहते हैं कि उन चंद प्रगतिशील किसानों से मिलने के बाद मुझे पता चला कि ये लोग काफी ज्यादा अवेयर हैं। इन्हें खेती से जुड़ी हर तरह की जरूरी जानकारी है। वे सरकार की योजनाओं का आसानी से लाभ ले पा रहे हैं और अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर पा रहे हैं। इससे इनकी कमाई बेहतर हो रही है।

राजेश कहते हैं कि पिछले कुछ सालों से गांवों में भी स्मार्टफोन और इंटरनेट पहुंच गया। बड़ी संख्या में किसान भी इसका इस्तेमाल करते हैं। इसे देखते हुए मैंने तय किया कि क्यों न एक ऐसा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म लॉन्च किया जाए जिससे जुड़कर कोई भी किसान खेती से रिलेटेड जानकारी हासिल कर सके, अपनी समस्याओं का हल ढूंढ सके और अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर सके। इसके बाद 2019 में उन्होंने करीब चार से पांच लाख रुपए के बजट से krishify नाम से अपना स्टार्टअप लॉन्च किया।

कैसे तैयार किया किसानों का नेटवर्क?

राजेश कहते हैं कि सोशल मीडिया पर हम लगातार अपडेट करते रहते हैं। इससे किसान तो जुड़ते ही हैं, लेकिन असल नेटवर्क इन किसानों ने खुद से ही तैयार किया है। शुरुआत में हम लोग जिन किसानों के पास गए, उन्हीं किसानों से होते हुए आज इतना बड़ा नेटवर्क बना है। हमारे ऐप का इस्तेमाल करने के बाद किसान उसे आपस में शेयर करते रहते हैं। हम लोग भी ऐप का इस्तेमाल करने वाले किसानों की राय को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते रहते हैं।

राजेश रंजन अभी भी गांवों में जाते हैं, किसानों से मिलते हैं और खेती को लेकर उनका फीडबैक जुटाते हैं।
राजेश रंजन अभी भी गांवों में जाते हैं, किसानों से मिलते हैं और खेती को लेकर उनका फीडबैक जुटाते हैं।

वे कहते हैं कि हमारा ऐप यूजर फ्रेंडली है और भाषा हिंदी है। इस वजह से किसानों को लैंग्वेज की दिक्कत नहीं आती। अभी मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, बिहार, यूपी, महाराष्ट्र सहित पूरे भारत से 35 लाख से ज्यादा किसान हमसे जुड़े हैं। और हर दिन ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। जल्द ही स्थानीय भाषाओं में भी यह ऐप उपलब्ध होगा।

एक ऐप से किसानों की हर समस्या का निपटारा

राजेश कहते हैं कि यह एक तरह से किसानों का फेसबुक है। यहां वे खेती से जुड़ी हर तरह की जानकारी ले सकते हैं। वे इस ऐप के जरिए किसानों से दोस्ती कर सकते हैं, उनसे चैटिंग कर सकते हैं। एक-दूसरे से अपनी दिक्कतें और जानकारियां शेयर कर सकते हैं। यहां किसान खेती और फसल संबंधी जानकारी हासिल करने के साथ ही अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर सकता है। वह अपनी उपज के साथ गाय-भैंस, ट्रैक्टर और खेती से जुड़े उपकरणों की खरीद-बिक्री भी कर सकता है।

इतना ही नहीं, इस ऐप के जरिए किसान सरकारी योजनाओं के बारे में जानकारी ले सकता है। योजना के बारे में पूरी जानकारी के साथ ही उसे हासिल करने की प्रोसेस भी ऐप पर उपलब्ध है। अगर कोई किसान कम पढ़ा-लिखा है तो राजेश की टीम उसकी मदद करती है। उसे फॉर्म भरने और जरूरी डॉक्युमेंट जुटाने में हेल्प करती है। राजेश की टीम ने कुछ प्रगतिशील किसानों का एक अलग ग्रुप भी तैयार किया है। ये लोग दूसरे किसानों को गाइड करने का काम करते हैं।

किसान इससे कैसे जुड़ सकता है?

राजेश के मुताबिक इस प्लेटफॉर्म से जुड़ने के लिए स्मार्टफोन और इंटरनेट कनेक्टिविटी जरूरी है। गूगल प्ले स्टोर से krishify ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है। इसके बाद मोबाइल नंबर ऐड करने के बाद OTP के जरिए उसका वैरिफिकेशन होता है। फिर उसे अपनी लोकेशन की जानकारी देनी होती है।

गूगल प्ले स्टोर से किसान इस ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अकाउंट क्रिएट करने के बाद आप ऐप पर उपलब्ध सभी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।
गूगल प्ले स्टोर से किसान इस ऐप को डाउनलोड कर सकते हैं। अकाउंट क्रिएट करने के बाद आप ऐप पर उपलब्ध सभी सुविधाओं का लाभ ले सकते हैं।

फेसबुक की तरह ही इसमें उम्र, एजुकेशन, प्रोफेशन, इंटरेस्ट जैसे कॉलम होते हैं। उसे भरने के बाद किसान खुद की प्रोफाइल क्रिएट कर सकते हैं। इसके जरिये वे एक-दूसरे से दोस्ती और बातचीत भी कर सकते हैं। राजेश कहते हैं कि हमारी टीम हर एक किसान से उसका फीडबैक भी लेती रहती है, ताकि उसकी दिक्कतों को समझा जा सके।

क्या है बिजनेस और मार्केटिंग मॉडल?

राजेश की टीम में अभी 24 लोग जुड़े हैं। इसमें अलग-अलग बैकग्राउंड के एक्सपर्ट शामिल हैं, जो किसानों की मदद करते हैं। राजेश कहते हैं कि हम लोग किसानों से कोई चार्ज नहीं लेते हैं। उनके लिए पूरी तरह मुफ्त सर्विस है। वे बताते हैं कि कुछ कंपनियों के साथ हमारा टाइअप है। उनसे हम कमाई करते हैं। जैसे कोई कंपनी इस ऐप के जरिए ट्रैक्टर बेच रही है या कोई और उपकरण बेच रही है तो उसमें से कुछ हिस्सा हमारी टीम का होता है। इसी तरह बड़े-बड़े डेयरी वाले या पशुपालक अपने मवेशी बेचते हैं, तो उनसे भी हम एक मिनिमम चार्ज लेते हैं।

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