स्टार राइटरराजू श्रीवास्तव थे देश के पहले ऑब्जर्वेशनल कॉमेडियन:राजू तो बेजान चीजों की भी नकल कर लेते थे...मैंने भी कोशिश की, हो नहीं पाया

2 महीने पहले
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ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज टीवी का संभवत: ऐसा पहला शो था जिसने स्टैंड-अप कॉमेडी को उसके असली रूप में एक स्टेज दिया। एक ऐसा स्टेज जिस पर पहली बार सिर्फ एक माइक और उसके सामने खड़ा एक आदमी ही पूरी एंटरटेनमेंट पैकेज होता है। …और इस शो को याद करें तो सबसे पहले राजू श्रीवास्तव का नाम ही याद आता है।

मैं जानता हूं वो इस रियलिटी शो में जीते नहीं थे, फिर भी सबसे ज्यादा याद किए जाने वाले कॉमेडी एक्ट उन्हीं के थे। इसकी ठोस वजह भी है। राजू श्रीवास्तव संभवत: हमारे देश के पहले ऑब्जर्वेशनल कॉमेडियन थे। उन्होंने जिस तरह जिंदगी की बारीकियों को एक खास अंदाज में लोगों के सामने पेश किया, वो बिल्कुल नया था।

जॉनी लीवर को संभवत: देश में मिमिक्री को पॉपुलर बनाने का श्रेय जाएगा। उन्होंने बड़े कलाकारों जैसे- अशोक कुमार या अमिताभ बच्चन की मिमिक्री को पॉपुलर बना दिया। मिमिक्री राजू श्रीवास्तव ने भी की, मगर इस काम में जिस बात ने उन्हें एक खास मुकाम पर पहुंचाया, वो थी कि उन्होंने सिर्फ बड़े स्टार्स की नहीं…आम आदमी की नकल की।

आम इंसान को उन्होंने स्टार बना दिया। उन्होंने ऐसे किरदार बनाए जो आने वाले कई सालों तक जिंदा रहेंगे। गजोधर हों या संकठा…ये नाम और हर नाम से जुड़ी शख्सियत हमारे जेहन में बैठ चुकी है।

राजू श्रीवास्तव का ये पोज गजोधर की पहचान बन गया है।
राजू श्रीवास्तव का ये पोज गजोधर की पहचान बन गया है।

राजू श्रीवास्तव जब स्टेज पर आते थे और दोनों हाथ उठाकर सिर के पीछे रखते थे तो ऑडियंस समझ जाती थी कि अब वो गजोधर बन गए हैं। ऐसे हर किरदार को देख हर आदमी मुस्कुरा देता था, क्योंकि ऐसे किरदार हम सभी ने अपने आस-पास देखे हैं।

इन किरदारों में भी उन्होंने जितनी वैरायटी दिखाई है, वो और कोई नहीं कर पाया। मुझे याद है उनका एक एक्ट था बारात और दुल्हन की विदाई को लेकर। मैंने यह एक्ट कम से कम 50 बार देखा होगा। इस 6-7 मिनट के एक्ट में उन्होंने कम से कम 10 किरदार कर के दिखाए। वो दुल्हन बने, दुल्हन की मां-दुल्हन के बाप, दुल्हन के भाई और यहां तक कि दूल्हा तक बन गए। हर बार, हर किरदार के साथ सिर्फ उनकी आवाज ही नहीं बदलती थी, बल्कि पूरी बॉडी लैंग्वेज ही बदल जाती थी। उनका खड़े होने का तरीका, हाथ हिलाने का तरीका…सब बदल जाता था। यह टैलेंट मैंने आज तक किसी और में नहीं देखा।

सिर्फ यही नहीं, एक और बात थी जो अक्सर एक्ट लिखने वाले लेखक भी मिस कर जाते हैं। हर कैरेक्टर के साथ भाषा और आवाज ही नहीं, उसकी सोच भी बदल जाती है। राजू हर बार हर किरदार के साथ उसकी सोच को भी अपनी अदायगी में ले आते थे। ऐसा और कोई नहीं कर पाया है।

राजू श्रीवास्तव की पहली हिंदी फिल्म 1988 में आई तेजाब थी।
राजू श्रीवास्तव की पहली हिंदी फिल्म 1988 में आई तेजाब थी।

एक चीज जो शायद आपने नोटिस न की हो…राजू श्रीवास्तव के बहुत ज्यादा इंटरव्यू आपको नहीं मिलेंगे। ये शायद हमारी सोच बन गई है कि सिर्फ बड़े बॉलीवुड स्टार्स को ही हम इतनी तवज्जो देते हैं…उनके कई इंटरव्यू आपको मिल जाएंगे। मगर राजू श्रीवास्तव का कोई भी इंटरव्यू मुझे किसी बड़े प्लेटफॉर्म पर नहीं मिला।

लेकिन जो एक-दो इंटरव्यू मुझे मिले, अगर आप उन्हें सुनें तो पाएंगे कि हर इंटरव्यू अपने आप में कई कॉमेडी एक्ट समेटे हुए है। राजू मानो हर सवाल के जवाब में उसी समय एक कॉमेडी एक्ट लिख डालते थे। वो जिस अंदाज में बताते थे कि शुरुआती दौर में जब जॉनी लीवर के घर जाते थे तो क्या होता था…जॉनी लीवर की मिमिक्री भी करते थे। या उनकी शादी में क्या-क्या हुआ…हर घटना को वो एक कॉमेडी एक्ट में बदल देते थे।

मुझे लगता है कि यहां लोगों ने और खुद राजू श्रीवास्तव ने भी उनका एक टैलेंट अनदेखा कर दिया। वो जिस अंदाज में ये सारी बातें कहते थे, वो एक अच्छे लेखक की सारी खूबियां बताता है। वो अगर चाहते तो एक बहुत ही अच्छे लेखक भी बन सकते थे। कहानियां न सही, मगर कई किरदार ऐसे बना सकते थे जिन्हें हम फिल्मों या शोज में देखते-पसंद करते और हमेशा याद रखते।

एक और बात राजू श्रीवास्तव को खास बनाती है। आज के स्टैंड-अप कॉमेडियन कई बार एक शब्द का इस्तेमाल करते हैं- सोशल कमेंट्री। यानी हमारे आस-पास समाज में जो हो रहा है, जो समस्याएं हैं उन्हें हम किस तरह से अपनी कॉमेडी में दिखा पाएं, उन पर कमेंट भी कर पाएं। यह काम राजू श्रीवास्तव ने बहुत पहले किया था। वो कई ऐसी समस्याओं को अपने एक्ट्स में इतनी खूबसूरती से दिखाते थे कि आदमी हंसता भी था और उन समस्याओं से रिलेट भी कर पाता था।

मुझे याद है उन्होंने एक एक्ट किया था जिसमें एक रिपोर्टर, एक बाढ़ग्रस्त इलाके में गया है। रिपोर्टर का पूरा फोकस लोगों के इंटरव्यू-बाइट लेने पर है और उसे उनकी समस्याओं से मतलब नहीं है। यह पूरा एक्ट इतना यादगार है कि लोग बार-बार देखना चाहेंगे। उन्होंने लोगों को हंसाते हुए भी गांव की मुश्किलों के बारे में अवेयर किया।

उनका एक एक्ट है जो अगर किसी विदेशी कॉमेडियन ने किया होता तो शायद सुनहरे अक्षरों में दर्ज किया जाता। इस एक्ट में उन्होंने दिखाया था कि अगर बॉलीवुड के किसी बड़े स्टार की मौत हो जाती है तो क्या होता है। श्मशान घाट आने वालों के क्या रिएक्शन होते हैं। इसमें वो किसी की मिमिक्री नहीं करते, मगर बताते हैं कि वहां आए आम लोग क्या करते। लोगों को फर्क नहीं पड़ता कि एक सितारा मर गया वो उस बहाने वहां आए दूसरे एक्टर्स को देखने की कोशिश करते। ये डार्क कॉमेडी का ही उदाहरण है।

आज स्टैंड-अप कॉमेडी में इसकी बात बहुत की जाती है कि किसे कौन देख रहा है। किसे शहरी ऑडियंस पसंद करती है, कौन छोटे शहरों में ज्यादा देखा जाता है। किसे 18 से 22 साल के लोग पसंद करते हैं। हमने ऑडियंस को एजग्रुप या लोकेशन पर बांटा है, मगर राजू श्रीवास्तव की कॉमेडी की खासियत ये थी कि उसे हर उम्र का आदमी देखता है। चाहे बड़ा शहर हो, छोटा शहर हो या गांव…हर जगह का आदमी उनके किरदारों से खुद को रिलेट कर पाता है।

टीवी शोज, खासतौर पर दूरदर्शन के न्यू ईयर प्रोग्राम्स के जरिये राजू श्रीवास्तव एक पहचान बना चुके थे। मगर ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज ने उन्हें हर घर तक पहुंचा दिया।
टीवी शोज, खासतौर पर दूरदर्शन के न्यू ईयर प्रोग्राम्स के जरिये राजू श्रीवास्तव एक पहचान बना चुके थे। मगर ग्रेट इंडियन लाफ्टर चैलेंज ने उन्हें हर घर तक पहुंचा दिया।

उनका ऑब्जर्वेशन और उनका परफॉर्मेंस इतना कमाल का था कि वो इंसानों की नकल ही नहीं, बेजान चीजों की भी नकल कर लेते थे। मैं सच कह रहा हूं…मैंने भी ऐसा करने की कई बार कोशिश की लेकिन कभी कर नहीं पाया। राजू श्रीवास्तव हमें मोमबत्ती के बारे में बताते थे, चेहरे के एक्सप्रेशन से…और हम मोमबत्ती विजुअलाइज कर पाते थे। वो ट्यूबलाइट की नकल करते थे और हमें ट्यूबलाइट दिखती थी।

आज अगर वो जिंदा होते, मैं उनसे मिल पाता तो शायद मेरी यही शिकायत होती कि उनमें जितना टैलेंट था, उन्होंने उतना काम नहीं किया। अभी वो और बहुत कुछ कर पाते, कई नए किरदार गढ़ पाते। इंटरव्यूज में उन्होंने निजी जिंदगी से जुड़े कई ऐसे किरदार, एक्ट दिखाए। लेकिन स्टेज पर यह किरदार नहीं पहुंचे…उनके चुनिंदा किरदार ही स्टेज पर पहुंचे, और जो पहुंचे वो हमारे दिमाग में अमर हो गए। मेरी यही शिकायत रह गई कि अभी उन्हें और बहुत कुछ करना था…अभी तो वो 100-150 और नए एक्ट्स हमें दे पाते। राजू श्रीवास्तव को देखकर कभी जी नहीं भरता…उनकी ये कमी हमेशा खलेगी।