कार्यकाल खत्म होने पर कोविंद को मिलेगा सबसे चर्चित बंगला:विवादों के बाद चिराग पासवान ने छोड़ा; सोनिया गांधी होंगी पड़ोसी

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी

25 जुलाई से मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का नया ठिकाना, कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के बंगले के बिल्कुल करीब होगा। शहरी एवं आवास मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 12, जनपथ, में उनके लिए बंगला अलॉट किया जा चुका है। साफ-सफाई, रंग-रोगन जारी है।

जनपथ के सबसे चर्चित और हाल में सबसे विवादित रहे इस बंगले को अलॉट तो किया गया था रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के लिए, लेकिन उन्होंने इसे कभी आवास बनाया नहीं। लेकिन इस बंगले में पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने तीन दशक गुजारे। उनकी मौत के बाद उनके बेटे चिराग पासवान से काफी विवाद के बाद यह बंगला 30 मार्च 2022 में खाली करवाया गया।

नए बंगले में शिफ्ट होने के बाद कुछ दिन के लिए जाएंगे अपने गांव

राष्ट्रपति कोविंद के लिए बंगले को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए दिन-रात काम जोरों पर चल रहा है। 15 जुलाई तक बंगला तैयार कर लिए जाने का टारगेट है।
राष्ट्रपति कोविंद के लिए बंगले को तैयार किया जा रहा है। इसके लिए दिन-रात काम जोरों पर चल रहा है। 15 जुलाई तक बंगला तैयार कर लिए जाने का टारगेट है।

सूत्रों के मुताबिक बंगले की साफ सफाई के साथ ही पेंटिंग का काम भी कुछ हिस्सों में चल रहा है। 15 जुलाई तक काम पूरा कर लिए जाने का टारगेट है। कोविंद यहां अपनी पत्नी 25 जुलाई को शिफ्ट हो जाएंगे। कानपुर में उनके गांव के सूत्रों के मुताबिक जनपथ में शिफ्ट होने के बाद वे कुछ दिन के लिए कानपुर देहात में स्थित अपने गांव परखवां भी जाने का मन बना रहे हैं।

अपने लोगों के बीच वे वहां कुछ वक्त गुजारेंगे। अपनी कुल देवी के दर्शन करेंगे। यह टूर करीब 15-20 दिन का होगा। सूत्र ने बताया उनके गांव के लोग उनके लिए एक कार्यक्रम भी रखना चाहते हैं। अभी यह पूरी तरह कन्फर्म नहीं है कि वे नए आवास में शिफ्ट होने के बाद तुरंत आएंगे या कुछ वक्त गुजारने के बाद।

रिटायर होने के बाद राष्ट्रपति कोविंद कुछ दिनों के लिए अपने पैतृक गांव कानपुर के परखवां भी जाएंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद अपने गांव पहुंचने पर उन्होंने अपनी मिट्‌टी को नमन किया था।
रिटायर होने के बाद राष्ट्रपति कोविंद कुछ दिनों के लिए अपने पैतृक गांव कानपुर के परखवां भी जाएंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद अपने गांव पहुंचने पर उन्होंने अपनी मिट्‌टी को नमन किया था।
राष्ट्रपति कोविंद ने अपने पैतृक गांव कानपुर के परखवां में कुलदेवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया था।
राष्ट्रपति कोविंद ने अपने पैतृक गांव कानपुर के परखवां में कुलदेवी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया था।

शाही इमारत और हाईप्रोफाइल प्रोटोकॉल को छोड़ने के बाद कैसे कटती है जिंदगी?

कोई भी सरकार रहे, उसे पूर्व राष्ट्रपति का ख्याल रखना पड़ता है। मेडिकल टीम समय-समय पर उनकी जांच करती है। उनकी सेहत का खयाल रखती है।

आने जाने के लिए फ्लाइट की व्यवस्था रहती है। उनके बंगले पर सुरक्षा व्यवस्था हमेशा चाक चौबंद रहती है।

और तो और शाही इमारत भले छूट जाए लेकिन शाही किचन की व्यवस्था उनके नए बंगले में मौजूद रहती है। बेहतरीन खानसामा लजीज व्यंजन पूर्व राष्ट्रपति की डिमांड पर बनाता है। लॉन्ड्री से लेकर साफ सफाई तक का खर्च सरकार के जिम्मे होता है। इसके अलावा और भी कई तरह के भत्ते उन्हें मिलते हैं।

ड्राइवर और गाड़ी हमेशा उनके लिए तैनात रहती है। पूर्व राष्ट्रपति अकेले कभी नहीं चलते। सुरक्षा के लिहाज से आगे पीछे चलने के लिए गाड़ियां तैनात रहती हैं। कोविंद एमपी भी रहे हैं, इसलिए उन्हें उस पद के हिसाब से पेंशन भी मिलती रहेगी।

खबरें और भी हैं...