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रिटायर्ड आर्मी जनरल सतीश दुआ के मुताबिक:हर काम में अव्वल रहे रावत, उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर मिला था, LAC से लेकर LOC तक पोस्टेड रहे

नईदिल्ली2 महीने पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी

जनरल बिपिन रावत नहीं रहे। वे देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) थे। बहुत ही डायनामिक मिलिट्री अफसर थे। देश के अलग-अलग हिस्सों में काम कर चुके थे। खतरों वाले एरिया में उन्होंने बहुत काम किया।

जम्मू-कश्मीर से लेकर नॉर्थ ईस्ट के राज्यों तक में वे रहे। एलएसी, एलओसी पर रहे। इसी कारण उन्हें बहुत लंबा ऑपरेशनल एक्सपीरियंस था। इन्हीं खूबियों के चलते पहले उन्हें पहले आर्मी चीफ बनाया गया और फिर देश का पहला चीफ ऑफ डिफेंस (CDS) नियुक्त किया गया।

मेरा उनसे काफी क्लोज इंटरेक्शन हुआ करता था। उनकी सबसे बड़ी खूबी ये थी कि वे बहुत शार्प थे। वे जहां भी रहे, वहां अव्वल रहे। उन्हें स्वॉर्ड ऑफ ऑनर मिला था। 26 नवंबर को एक इवेंट में मेरी उनसे मुलाकात हुई थी। तब वे ट्रांसफॉर्मेशन ऑफ ऑर्म्ड फोर्सेज पर एक टॉक देने आए थे। उनकी टॉक के बाद चाय पर हम सभी सीनियर अफसरों की चर्चा भी हुई थी।

जब वे कोर कमांडर थे, तब भी उनका प्लेन एक बार क्रैश हुआ था लेकिन वो हादसा बहुत छोटा था उसमें उन्हें ज्यादा चोट नहीं आई थी। यह बात शायद साल 2014 के आसपास की है, तब वे नगालैंड के दीमापुर में पोस्टेड थे और कोर कमांडर हुआ करते थे।

CDS नियुक्त करने के बाद उन्हें तीनों सर्विसेज को इंटीग्रेड करने के आदेश थे। इसके लिए उनके पास तीन साल का वक्त था। वे बहुत कुछ काम कर चुके थे। जैसे डिपार्टमेट ऑफ मिलिट्री अफेयर्स को वे खड़ा कर चुके थे। तमाम दूसरे प्रोजेक्ट्स पर वे काम कर रहे थे।

उन्होंने देश-विदेश में तमाम जगह पढ़ाई की थी। यूएस में भी रहे। प्रोफेशनली बहुत ही कॉम्पीटेंट थे। उन्हें बहुत एक्सपोजर मिला। बहुत ज्यादा फ्रेंक थे। जो बोलना होता था, बोल देते थे घबराते नहीं थे। बिना झिझक के अपनी बात रखते थे। यदि नेगेटिव न्यूज भी होती थी तो वो उसे भी उतनी ही दमदारी से बोलते थे। उन्हें ताउम्र भुलाया नहीं जा सकता।

(रिटायर्ड आर्मी जनरल सतीश दुआ सीडीएस बिपिन रावत के जूनियर और करीबी दोस्त रहे हैं।)