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आज की पॉजिटिव खबर:इंदौर के रोहित ने 2 साल पहले छोटे स्टार्टअप्स की मदद के लिए ऐप लॉन्च किया;14 हजार से ज्यादा बिजनेस जुड़े, 40 लोगों को नौकरी भी दी

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

हाइपर लोकल मार्केटिंग, नाम जरूर नया है, लेकिन काफी ज्यादा ट्रेंडिंग है। पिछले कुछ सालों में इसकी डिमांड बढ़ी है। हम लोग अक्सर इसका इस्तेमाल भी करते हैं। मान लीजिए आप किसी शहर में नए हैं, आपको अपनी लोकेशन के आसपास किसी शॉप, होटल या मेडिकल की जरूरत है। तो आप क्या करेंगे? आम तौर पर हम इसके लिए गूगल करते हैं। कई बार हमें जानकारी मिल जाती है, लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि उस जगह पर मौजूद छोटी दुकानों या प्रोडक्ट के बारे में गूगल पर जानकारी उपलब्ध नहीं होती है। अगर कोई दुकान मिल भी जाए तो हम यह तय नहीं कर पाते कि वह सही है या नहीं, वैरिफाइड है या नहीं।

इतना ही नहीं, अगर आप छोटा-मोटा बिजनेस चलाते हैं, लेकिन आप उसकी मार्केटिंग नहीं कर पा रहे हैं। तो इस परेशानी को दूर करने के लिए इंदौर के रहने वाले रोहित वर्मा ने दो साल पहले एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की शुरुआत की। उनके ऐप के जरिए देश के 41 से ज्यादा शहरों में 14 हजार से अधिक छोटे-बड़े बिजनेस जुड़े हैं। इनमें मध्य प्रदेश और राजस्थान के शहर भी शामिल हैं। इनकी मदद से कोई भी कस्टमर एक क्लिक पर इन जगहों पर अपनी पसंद की दुकानें ढूंढ सकता है। उसकी पूरी डिटेल्स ऐप पर मिल जाएगी। होटल, मेडिकल, डॉक्टर, पार्क, सैलून सहित 50 से ज्यादा कैटेगरी के बिजनेस उनके साथ जुड़े हैं। और हर दिन इनकी संख्या बढ़ती ही जा रही है। 40 से ज्यादा लोगों को उन्होंने रोजगार भी दिया है। फिलहाल यह ऐप बीटा यूजर्स के लिए है।

इंटर्न के रूप में नौकरी शुरू की, अब CEO हैं

इंदौर के रहने वाले रोहित ने सॉफ्टवेयर और डिजिटल मार्केटिंग की फील्ड में लंबे समय तक काम किया है।
इंदौर के रहने वाले रोहित ने सॉफ्टवेयर और डिजिटल मार्केटिंग की फील्ड में लंबे समय तक काम किया है।

26 साल के रोहित की पढ़ाई-लिखाई इंदौर में हुई। वे एक मारवाड़ी फैमिली से ताल्लुक रखते हैं। पहले उनका परिवार कंस्ट्रक्शन के बिजनेस से जुड़ा था। रोहित कहते हैं कि बिजनेस में मेरी पहले से दिलचस्पी रही है। इसलिए 12वीं के बाद मैंने BBA करने के लिए इंदौर के एक कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद मेरे मन में UK जाकर पढ़ाई करने का ख्याल आ गया और मैंने कॉलेज से ड्रॉप ले लिया। मैंने UK में एडमिशन के लिए तैयारी भी शुरू कर दी, लेकिन तभी अचानक कुछ ऐसा हुआ कि प्लान चेंज हो गया। अब मेरा हाल यह रहा कि मैं न तो इधर का रहा, न उधर का रहा। तीन-चार महीने ऐसे ही खाली बैठा रहा।

इसके बाद रोहित ने इंटर्न के रूप में एक सॉफ्टवेयर कंपनी में काम करना शुरू किया। इसमें उनका मन लग गया और वे आगे बढ़ते गए, नए काम सीखते गए। इस दौरान उन्होंने 400 से ज्यादा स्टार्टअप के साथ काम किया। कई देशों के बिजनेस मैन से उनका इंटरैक्शन हुआ। करीब 5 साल काम करने के बाद उन्होंने नौकरी छोड़ दी और खुद का स्टार्टअप शुरू किया।

रोहित कहते हैं कि मुझे काम के दौरान डिजिटल मार्केट की अच्छी-खासी समझ हो गई थी। मुझे अक्सर ऐसा लगता था कि आज के जमाने में भी हमारे देश में डिजिटलाइजेशन को लेकर बहुत बड़ा गैप है। खास करके छोटे बिजनेस वालों के लिए। उन्हें ऑनलाइन मार्केटिंग की समझ ही नहीं है। अगर वे सोशल मीडिया का इस्तेमाल भी करते हैं तो मार्केटिंग के लिहाज से वे बेहतर नहीं कर पाते हैं। उन्हें प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता है। यहीं दिक्कत आम कस्टमर्स को भी है। उसे पता ही नहीं होता है कि वह जो सामान दूसरे शहर से अधिक कीमत देकर मंगा रहा है, वह उसके शहर में उसके आसपास भी उपलब्ध है। हमने इस प्रॉब्लम को पहचाना और तय किया कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म होना चाहिए, जहां लोकल मर्चेंट अपने बिजनेस को जोड़ सकें और कस्टमर भी अपने शहर में ही चीजें खरीद सकें।

पहले मार्केट रिसर्च और सर्वे किया, लोगों के फीडबैक के बाद शुरू किया स्टार्टअप

रोहित की टीम में फिलहाल 20 से 25 लोग रेगुलर बेसिस पर जुड़े हैं। जबकि कई लोग पार्ट टाइम भी उनके साथ काम करते हैं।
रोहित की टीम में फिलहाल 20 से 25 लोग रेगुलर बेसिस पर जुड़े हैं। जबकि कई लोग पार्ट टाइम भी उनके साथ काम करते हैं।

रोहित कहते हैं कि हमने इस ऐप को लॉन्च करने से पहले मार्केट रिसर्च और सर्वे किया। हमने अलग-अलग शहरों में लोगों से बात की, उनकी राय जानी, वे कस्टमर के रूप में ऑनलाइन क्या-क्या सर्च करते हैं, उनकी शॉपिंग का पैटर्न क्या है, जिन चीजों के लिए वे ऑनलाइन ऑर्डर कर रहे हैं, वे ऑफलाइन उनके आसपास ही मिल जाएं तो वे उसे खरीदेंगे या नहीं? ये कुछ ऐसे सवाल थे जिसको लेकर हमारी टीम ने सर्वे किया और उसकी रिपोर्ट के आधार पर हमने 2019 में यह ऐप लॉन्च किया।

रोहित कहते हैं कि पिछले कुछ सालों में ऑनलाइन मार्केटिंग की वजह से छोटे बिजनेस और धंधे पर निगेटिव असर पड़ा है। यह हमारे देश की इकोनॉमी के लिहाज से सही नहीं है, क्योंकि हमारी इकोनॉमी में छोटे बिजनेस का बड़ा रोल है। मेरे इस अभियान के जरिए ऐसे बिजनेस को काफी सपोर्ट मिलेगा। हम SOSO यानी सर्च ऑनलाइन और शॉप ऑफलाइन को प्रमोट कर रहे हैं। ताकि कस्टमर अपनी पसंद की चीजें खरीद सके और मर्चेंट को भी फायदा मिल सके।

कैसे काम करता है यह ऐप?

रोहित ने अपने प्लेटफॉर्म का नाम byloapp रखा है। यानी बाई (Buy) लोकल, बाई (By) लोकेशन। यह गूगल की तरह सर्च इंजन बेस्ड ऐप है। आप इसकी वेबसाइट byloapp.com पर जाइए, अपनी लोकेशन ऐड कीजिए और आपको जिस चीज की जरूरत हो, उसका नाम टाइप करिए और फिर सर्च बटन पर क्लिक करिए।

यह प्लेटफॉर्म उस लोकेशन की हिसाब से आपको वहां मौजूद दुकानों, होटल, हॉस्पिटल या आपको जिस चीज की जरूरत है, उसकी पूरी लिस्ट मुहैया करा देगा। उस दुकान पर उपलब्ध प्रोडक्ट की क्वालिटी क्या है, उसकी कीमत कितनी है, कितना स्टॉक है। इन सबकी जानकारी आपको मिल जाएगी।

इस ऐप के जरिए कोई भी यूजर या मर्चेंट अपनी जानकारी सर्च कर सकता है। वह खुद का अकाउंट बना सकता है।
इस ऐप के जरिए कोई भी यूजर या मर्चेंट अपनी जानकारी सर्च कर सकता है। वह खुद का अकाउंट बना सकता है।

इतना ही नहीं, आप चाहें तो उस दुकानदार को कॉल भी कर सकते हैं। अपनी जरूरतें शेयर कर सकते हैं। आप चाहें तो चैट भी कर सकते है। इससे आपको उस प्रोडक्ट या दुकान के बारे में और अधिक जानकारी मिल जाएगी।

आप अपना बिजनेस इस प्लेटफॉर्म से कैसे जोड़ सकते हैं?

यूजर्स के साथ-साथ मर्चेंट या छोटे-बड़े बिजनेस के लिए भी यह ऐप उपयोगी है। कोई भी मर्चेंट मुफ्त में इससे जुड़ सकता है। इस ऐप पर अपने बिजनेस को लिस्ट कर सकता है। इससे जुड़ने का प्रोसेस भी बेहद आसान है। रोहित के मुताबिक अगर आप अपना बिजनेस इस ऐप पर लिस्ट करना चाहते हैं तो सबसे पहले आपको अपने काम के बारे में बेसिक इन्फॉर्मेशन प्रोवाइड करानी होगी, आपकी दुकान की फोटो, लोगो, लाइसेंस और कैटलॉग इस ऐप पर अपलोड करना होगा।

इसके बाद हमारी टीम उसे वैरिफाई करेगी। अगर कोई डॉक्युमेंट सही नहीं है या कम है तो उसको लेकर हमारी टीम आपसे कॉन्टेक्ट करेगी और उसे सही करने की प्रोसेस समझाएगी। वे कहते हैं कि पूरी तरह संतुष्ट होने के बाद ही हम किसी मर्चेंट को वैरिफाई करते हैं। कोविड के पहले हमारी टीम फिजिकल लेवल पर भी वैरिफिकेशन का काम करती थी। हालांकि अब पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन हो रही है।

रोहित कहते हैं कि अगर किसी यूजर या मर्चेंट को किसी तरह की दिक्कत आती है तो हमारी टीम उसे सपोर्ट करती है।
रोहित कहते हैं कि अगर किसी यूजर या मर्चेंट को किसी तरह की दिक्कत आती है तो हमारी टीम उसे सपोर्ट करती है।

रोहित कहते हैं कि फिलहाल हम रेवेन्यू को लेकर काम नहीं कर रहे हैं। अभी हमारा पूरा फोकस ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ना है। इसलिए हम फंड खुद से ही लगा रहे हैं। आगे हम सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करेंगे। एक मिनिमम फीस पर हम मर्चेंट को अपने साथ जोड़ेंगे। कई इन्वेस्टर्स भी अब हमारे साथ काम करने के लिए दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

हाइपर लोकल मार्केट क्या है, बिजनेस के लिहाज से इसमें कितना स्कोप है?

हाइपर लोकल मार्केट यानी शहरों में गलियों के बीच काम करने वाले मर्चेंट। जैसे कोई छोटी दुकान हो, चाय की टपरी हो, कोई कोचिंग संस्थान हो, कोई लोकल कारीगर हो या छोटा-मोटा स्टार्टअप हो। यानी जिसकी पहले से कोई खास पहचान नहीं हो। ऐसे बिजनेस को एक प्लेटफॉर्म प्रोवाइड कराना ताकि उन्हें मुनाफा हो सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक हाइपर लोकल मार्केट का साइज तीन हजार बिलियन डॉलर है। भारत में भी यह तेजी से उभर रहा है। जोमैटो, बिगबास्केट सहित कुछ ऐसे प्लेटफॉर्म हैं जो इसे बढ़ावा दे रहे हैं।

बिहार के पटना जिले में रहने वाले राजेश रंजन ने किसानों के लिए हाइपर लोकल मार्केट की शुरुआत की है। उनके ऐप के जरिए किसान खेती से जुड़ी हर चीज की जानकारी ले सकते हैं। एक्सपर्ट्स से बातचीत कर सकते हैं और अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग भी कर सकते हैं। देशभर से 35 लाख से ज्यादा किसान उनके साथ जुड़े हैं। (पढ़िए पूरी खबर)

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