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आज की पॉजिटिव खबर:वेल्डिंग का काम छोड़ रुद्रप्रयाग के बलजीत ऑक्सीजन फ्लो मीटर बांट रहे, मुंबई के चंचल 6 हजार लोगों को ऑनलाइन प्लाज्मा दिला चुके हैं

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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देश कोरोना के कहर से जूझ रहा है। दिन पर दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। कहीं लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिल रहा है तो कोई तो कोई प्लाज्मा के लिए इधर-उधर गुहार लगा रहा है। परिजन अपनों को बचाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं। इन सब के बीच देश के अलग-अलग शहरों से कई युवा सामने आये हैं, जो अपने नए-नए इनोवेशन और टेक्नोलॉजी के जरिए लोगों की जिंदगी बचाने की कोशिश कर रहे हैं। पॉजिटिव खबर में हम ऐसे ही दो युवाओं की कहानी बता रहे हैं...

पहली कहानी रुद्रप्रयाग के बलजीत सिंह चावला की, जो एक हफ्ते में 600 लोगों को ऑक्सीजन फ्लो मीटर बांट चुके हैं

बलजीत सालों से ऑक्सीजन रिलेटेड पार्ट्स की रिपेयरिंग और वेल्डिंग का काम करते हैं। कोरोना महामारी के बीच जब उन्हें पता चला कि देशभर में ऑक्सीजन फ्लो मीटर की कमी हो गई है। लोग कालाबाजारी कर रहे हैं, जिसे जरूरत है, उसे फ्लो मीटर नहीं मिल पा रहा है। तो ऐसे में बलजीत ने तय किया कि वे खुद ही ऑक्सीजन फ्लो मीटर तैयार करेंगे और जरूरतमंदों को उपलब्ध कराएंगे। महज एक हफ्ते में ही 600 लोगों को वे ऑक्सीजन फ्लो मीटर दे चुके हैं।

ऑक्सीजन फ्लो मीटर तैयार करते बलजीत सिंह। इससे पहले वे वेल्डिंग का काम करते थे।
ऑक्सीजन फ्लो मीटर तैयार करते बलजीत सिंह। इससे पहले वे वेल्डिंग का काम करते थे।

दिल्ली से पार्ट्स मंगाते हैं, खुद की दुकान पर तैयार करते हैं

38 साल के बलजीत कहते हैं कि मैंने अपने पिता से रिपेयरिंग और वेल्डिंग का काम सीखा है। अभी मैं ऑक्सीजन फ्लो मीटर तैयार कर रहा हूं। मेरे साथ एक वर्कर भी है। हम लोग अपनी दुकान पर ही इसे तैयार करते हैं। इसमें लगने वाले पार्ट्स हम दिल्ली या दूसरे शहरों से मंगा रहे हैं। हर दिन हम 17-18 घंटे काम कर रहे हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा प्रोडक्ट तैयार किया जा सके।

वे कहते हैं कि अभी डिमांड इतनी बढ़ गई है कि फ्लो मीटर की बात छोड़िए, इसमें लगने वाले पार्ट्स भी मुश्किल से मिल रहे हैं। वो भी महंगे दामों पर। जो पार्ट्स पहले मुझे 50 रुपए में मिल रहे थे, अब हमें उसके लिए 200 से 250 रुपए कीमत चुकानी पड़ रही है।

हर दिन 70 से 80 लोगों की कर रहे हैं मदद

बलजीत बताते हैं कि वे हर दिन 70 से 80 लोगों को ऑक्सीजन फ्लो मीटर उपलब्ध करा रहे हैं। इसके लिए सिर्फ रुद्रप्रयाग ही नहीं बल्कि दिल्ली, गाजियाबाद, बरेली जैसे शहरों से भी लोग आ रहे हैं। वे कहते हैं कि हमारी पूरी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों की मदद की जाए। जो लोग सक्षम होते हैं हम उनसे पैसे लेते हैं, लेकिन जो गरीब होते हैं, उन्हें हम कम कीमत या मुफ्त में भी फ्लो मीटर उपलब्ध करा रहे हैं।

आधार कार्ड और डॉक्टर की स्लिप देखकर ही देते हैं फ्लो मीटर

बलजीत सिंह अभी तक दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली के सैकड़ों लोगों को ऑक्सीजन फ्लो मीटर मुहैया करा चुके हैं।
बलजीत सिंह अभी तक दिल्ली, गाजियाबाद और बरेली के सैकड़ों लोगों को ऑक्सीजन फ्लो मीटर मुहैया करा चुके हैं।

बलजीत कहते हैं कि अभी इसकी कालाबाजारी बढ़ गई है। लोग जरूरत से ज्यादा कीमत वसूल रहे हैं। कई लोग कम कीमत में खरीदकर अधिक मुनाफे पर बेच रहे हैं। ऐसे में जिनके पास पैसे हैं, उन्हें तो बहुत दिक्कत नहीं हो रही, लेकिन जो गरीब या मध्यम वर्ग के लोग हैं, उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसलिए हम सिर्फ उन्हीं को फ्लो मीटर दे रहे हैं, जिनके पास आधार कार्ड और डॉक्टर की स्लिप है।

दूसरी कहानी की मुंबई के चंचल की जो प्लाज्मा डोनेशन की मुहिम चला रहे हैं

मुंबई के रहने वाले चंचल कुमार दगड़े खुद का बिजनेस चलाते हैं। वे पिछले 15 साल से सॉफ्टवेयर और टेक्नोलॉजी की फील्ड में काम कर रहे हैं। पिछले साल जब कोविड आया और लोगों को ब्लड प्लाज्मा की जरूरत पड़ने लगी, तभी से चंचल एक ऑर्गेनाइजेशन के साथ मिलकर प्लाज्मा डोनेट कराने और लोगों को उपलब्ध कराने की मुहिम में जुटे हैं। पिछले तीन से चार महीने में उनकी टीम 6 हजार से ज्यादा लोगों को प्लाज्मा उपलब्ध करा चुकी है।

वे कहते हैं कि अभी हमारी टीम में 100 से ज्यादा लोग काम कर रहे हैं। इनमें से ज्यादातर वर्किंग प्रोफेशनल हैं। जबकि कई अभी पढ़ाई कर रहे हैं। इसके साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों से कई वॉलंटियर्स भी हमसे जुड़े हैं। चंचल के मुताबिक हर दिन 150 से ज्यादा लोगों की रिक्वेस्ट उनके पास प्लाज्मा को लेकर आ रही है। इनमें से ज्यादातर लोगों की मदद करने की वे कोशिश करते हैं। डोनर्स की कमी के चलते सबको प्लाज्मा उपलब्ध कराना सम्भव नहीं हो पाता है।

तस्वीर मुंबई की है। जहां चंचल की टीम का एक वॉलंटियर प्लाज्मा डोनेट कर रहा है।
तस्वीर मुंबई की है। जहां चंचल की टीम का एक वॉलंटियर प्लाज्मा डोनेट कर रहा है।

जॉब के साथ-साथ लोगों की जिंदगी बचाने का काम भी

चंचल कहते हैं कि हम लोग अभी 17-18 घंटे से ज्यादा काम कर रहे हैं, क्योंकि लोगों की जान बचाना जरूरी है। हम अपनी जॉब के साथ इस काम पर फोकस कर रहे हैं। हम लोगों ने अपनी-अपनी शिफ्ट बांट ली है। जॉब की ड्यूटी के बाद जो भी वक्त हमारे पास बचता है, उसे हम इस काम के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों को मदद दिलाने का काम कर रहे हैं।

कैसे करते हैं काम?

चंचल कहते हैं कि प्लाज्मा डोनेट करने वाले और प्लाज्मा की जिसे जरूरत है, दोनों तरह के लोग हमारी वेबसाइट www.friends2support.org के जरिये या हमारे ऐप के माध्यम से अपनी रिक्वेस्ट दर्ज कर सकते हैं। उसके लिए वेबसाइट पर डिटेल्ड इन्फॉर्मेशन दी गई है। इसके बाद लोकेशन के हिसाब से हमारी टीम उसकी मॉनिटरिंग करती है और फिर डोनर्स और डिमांड करने वालों की सेपरेट लिस्ट तैयार की जाती है। वे कहते हैं कि हम लोग सोशल मीडिया के हर प्लेटफॉर्म पर लगातार कैंपेन करते रहते हैं। लोगों को प्लाज्मा डोनेट करने के लिए अवेयर करते रहते हैं।

जैसे मान लीजिए कि भोपाल में किसी को प्लाज्मा की जरूरत है, तो वह व्यक्ति अपनी डिटेल्ड इन्फॉर्मेशन के साथ वेबसाइट पर जाकर रजिस्ट्रेशन करेगा। उसके बाद हमारी टीम वहां के उपलब्ध डोनर्स से कॉन्टैक्ट करेगी। डोनर्स से बातचीत होने के बाद किसी हॉस्पिटल में जाकर वह प्लाज्मा डोनेट कर देगा। इसके साथ ही हमने अपनी वेबसाइट पर लोकेशन वाइज लिस्ट डाल रखी है। लोग चाहें तो खुद भी डोनर से बात करके प्लाज्मा की रिक्वेस्ट कर सकते हैं।

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