हिंदी बोलनेवाले पोलिश एक्सपर्ट का इंटरव्यू:बोले– हमारे इलाके में रूस वैसा ही खतरा, जैसे भारत के लिए पाकिस्तान

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू हुए 20 दिन हो चुके हैं। इस दौरान 20 लाख से अधिक लोग यूक्रेन से पड़ोसी देश पोलैंड पहुंचे हैं। पोलैंड यूक्रेन का बड़ा पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच 535 किलोमीटर लंबी जमीनी सीमा है। हाल में रूस ने पोलैंड सीमा के पास बड़ा हमला किया है। इसके बाद मंगलवार रात पोलैंड के प्रधानमंत्री मातेउज मोराविएत्स्की ट्रेन से यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। गौरतलब है कि कीव रशियन सेनाओं से घिरा हुआ है। उनके साथ चेक गणराज्य और स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री भी थे।

यूक्रेन युद्ध में पोलैंड की क्या भूमिका है और इसका पोलैंड पर क्या असर हो रहा है, इसे समझने के लिए हमने बात की पोलैंड में वॉर स्टडीज यूनिवर्सिटी से जुड़े क्षिश्तौफ इवानेक से जो भारत पर भी नजर रखते हैं। वह द डिप्लोमैट पोर्टल के लिए लेख भी लिखते हैं।

यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे स्लोवेनिया के पीएम जानेज जान्जा (बाएं से पहले), पोलैंड के पीएम मातेउज मोराविएत्स्की (बाएं से दूसरे) और चेक गणराज्य के पीएम पेट्र फिआला (दाएं से पहले) ने आगे की रणनीति पर चर्चा की।
यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे स्लोवेनिया के पीएम जानेज जान्जा (बाएं से पहले), पोलैंड के पीएम मातेउज मोराविएत्स्की (बाएं से दूसरे) और चेक गणराज्य के पीएम पेट्र फिआला (दाएं से पहले) ने आगे की रणनीति पर चर्चा की।

दिल्ली में पढ़ चुके क्षिश्तौफ इवानेक हिंदी भाषा बोलते और समझते हैं। उन्होंने भास्कर के सवालों के जवाब हिंदी में ही दिए…

सवाल: पोलैंड के प्रधानमंत्री की कीव यात्रा के क्या मायने हैं?

जवाब: पोलैंड के प्रधानमंत्री हमारे देश का समर्थन दिखाने के लिए कीव गए हैं। दूसरे देशों के नेताओं का यूक्रेन की राजधानी जाना रूस के लिए समस्या होगी। क्या रूसी सेना तब कीव पर हमला कर सकती है जब वहां दूसरे देश के प्रधानमंत्री या राष्ट्रपति मौजूद हों? जब रूस जॉर्जिया पर हमला कर रहा था तब भी पोलैंड और यूरोप के कुछ नेता जॉर्जिया की राजधानी गए थे।

सवाल: यूक्रेन में चल रही लड़ाई का पोलैंड पर क्या असर हो रहा है। पोलैंड इन हालातों से कैसे निबट रहा है?

जवाब: इस लड़ाई का पोलैंड पर बहुत असर पड़ रहा है। हमारे देश में तकरीबन 20 लाख यूक्रेनी शरणार्थी आ चुके हैं जबकि हमारे देश की आबादी चार करोड़ से कम है। हम इन शरणार्थियों की हर संभव मदद करने की कोशिश कर रहे हैं और हम ये मानते हैं कि ये सहारा बहुत जरूरी है।

लेकिन इससे हमारी अर्थव्यवस्था पर भी काफी दबाव आ जाएगा। इन हालात से निपटने के लिए पोलैंड को पश्चिमी देशों की मदद की जरूरत है। हम उम्मीद करते हैं कि पश्चिमी देश अधिक तादाद में यूक्रेनी शरणार्थियों को स्वीकार करेंगे।

अब तक इन देशों ने बहुत कम तादाद में शरणार्थियों को स्वीकार किया है। हम ये भी उम्मीद करते हैं कि पश्चिमी देश यूक्रेन के शरणार्थियों के लिए मदद भेजेंगे।

सवाल: क्या यूक्रेन की मौजूदा परिस्थितियां पोलैंड को बाकी यूरोपीय देशों के मुकाबले अधिक प्रभावित करेंगी?

जवाब: जी बिलकुल। जो देश यूक्रेन के नजदीक हैं, जैसे पोलैंड, रोमानिया, स्लोवाकिया, मोल्दोवा और हंगरी, उन्हें यूक्रेन के हालात अधिक प्रभावित कर रहे हैं। मोल्दोवा ने जब से यूक्रेन के शरणार्थियों को जगह दी है तब से उस देश की आबादी लगभग चार प्रतिशत बढ़ गई है। जबकि, मोल्दोवा एक गरीब देश है। बेलारूस भी यूक्रेन का पड़ोसी है, लेकिन वहां की सरकार रूस की मदद कर रही है, शरणार्थियों की नहीं।

सवाल: इस लड़ाई में अभी पोलैंड की स्थिति क्या है, क्या पोलैंड अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित है?

जवाब: हम पोलैंड के लोग थोड़े चिंतित हैं, क्योंकि रूस का व्यवहार बड़ा ही आक्रामक है। देखिए हमारे लिए रूस का खतरा ऐसा है जैसे भारत के लिए पाकिस्तान। पाकिस्तान की तरह ही रूस भी यूरोप के भीतर अलगाववादी आंदोलनों को बढ़ावा देता है और आतंकवादी हमले भी करवाता है।

रूस ने पहले चेचेन्या और फिर जॉर्जिया पर हमला किया था। 2014 के बाद से रूस लगातार यूक्रेन पर हमला कर रहा है। 2014 में रूसी जासूसों ने चेक गणराज्य के चेजिया में एक मैग्जीन पर हमला किया था जबकि 2018 में ब्रिटेन में अपने ही नागरिक सर्गेई स्क्रीपाल की हत्या करने की कोशिश की है।

हम उम्मीद करते हैं कि रूस की फौज आखिर यूक्रेन में पूरी तरह नहीं जीत पाएगी और रूस पोलैंड पर हमला करने की हिम्मत नहीं करेगा क्योंकि हम नाटो का हिस्सा हैं और अमेरिका हमारा सहयोगी है।

यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहरी इलाकों पर रूस के हमले तेज हो गए हैं।
यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहरी इलाकों पर रूस के हमले तेज हो गए हैं।

सवाल: यूक्रेन संकट में आप भारत की क्या भूमिका देखते हैं? क्या भारत किसी तरह यूक्रेन की परिस्थितियों को प्रभावित कर सकता है?

जवाब: मेरे विचार से भारत इस लड़ाई को प्रभावित नहीं कर सकता है और इसमें भारत का रोल भी नहीं है। भारत रूस सरकार को प्रभावित नहीं कर सकता है, क्योंकि रूस की सरकार बाकी देशों की बात नहीं मानेगी।

रूस को या तो आर्थिक तनाव या सेना की ताकत के दम पर ही प्रभावित किया जा सकता है। मैं यहां ये भी साफ करना चाहता हूं कि यूरोप में कोई देश रूस से लड़ाई नहीं करना चाहता है। हम ये उम्मीद करते हैं कि आर्थिक तनाव से और यूक्रेन के लोगों के विद्रोह से आखिरकार रूस का आक्रमण रुक जाएगा।

सवाल: भारत अब तक रूस की तरफ झुका नजर आया है, इसके आप क्या कारण देखते हैं, भारत के इस रवैये पर आपकी क्या टिप्पणी है?

जवाब: मैं समझता हूं कि भारत न्यूट्रल (तटस्थ) रहना चाहता है लेकिन ये सच है कि पश्चिम में भारत रूस की तरफ झुका नजर आ रहा है। मेरे विचार से नई दिल्ली किसी देश का सहयोगी नहीं बनना चाहता है और भारत की सरकार रूस और पश्चिमी देशों, दोनों से संबंध बनाए रखना चाहती है। रूस भारत को हथियार बेचता है और भारत-रूस के बीच ऊर्जा क्षेत्र में भी सहयोग है। इसलिए रूस के साथ संबंध भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं।

रूस को क्यों खटक रहा है पोलैंड

दूसरे विश्व युद्ध के बाद रूस के साये में रहा पोलैंड अब नाटो का सदस्य है और सामरिक रूप से अहम पश्चिमी देश है। यूक्रेन युद्ध के दौरान पोलैंड की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। यूक्रेन के लिए पश्चिमी देशों से मदद भी पोलैंड के रास्ते ही पहुंच रही है। रूस को लगता है कि अगर उसने पोलैंड को धौंसा लिया तो पश्चिमी यूरोप से यूक्रेन को मदद नहीं मिल सकेगी और इस तरह यूक्रेन को जल्दी हराया जा सकेगा।

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