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महामारी के बाद जोरदार वापसी की सीख:स्पेनिश फ्लू के बाद दुनियाभर के लोगों की जेब पर पड़ा था असर, जानें कैसे महिलाओं ने कम पैसे पर काम करके बचाई इकोनॉमी

10 दिन पहले
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कोरोना महामारी कई मामलों में 1918 से 1920 तक फैली स्पेनिश फ्लू महामारी से मेल खाती है। इससे दुनियाभर में 5 करोड़ लोगों ने जान गंवाई। भारत में इस महामारी से डेढ़ से दो करोड़ लोगों की मौत हुई। लेकिन सबसे ज्यादा असर हुआ दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर। स्पेनिश फ्लू ने अमेरिका जैसी मजबूत अर्थव्यवस्था को बीमार कर दिया। लेकिन महामारी से लड़ते-लड़ते लोगों ने ना सिर्फ आर्थिक रिकवरी की बल्कि सामाजिक तौर पर भी मजबूती हासिल की। आइए देखते हैं कैसे एक महामारी ने हमें ना सिर्फ कमजोर होने के बाद मजबूती के साथ खड़ा होना सिखाया बल्कि मेंटली स्ट्रॉन्ग भी किया।

स्पेनिश फ्लू से दुनियाभर के लोगों की जेब पर असर

इसमें सबसे खास बात ये है कि उस महामारी ने कोरोना की ही तरह दुनियाभर की अर्थव्यवस्‍थाओं की कमर तोड़ दी थी। अमेरिका जैसे मजबूत देश की इकोनॉमी को तगड़ा झटका लगा। यहां डिपार्टमेंटल स्टोर्स की सेल्स में 70% की कमी आई थी। केवल ग्रॉसरी की खरीदारी में 30% तक गिरावट आई थी। कुल मैन्युफैक्चरिंग में भी 18% की गिरावट आ गई थी।

इसी तरह ऑस्ट्रेलिया में रिटेलर शॉप्स पर होने वाली खरीदारी में 40% सेल्स घट गई। पूरी दुनिया में बेरोजगारी दर 3% के आगे चली गई थी। इस पर लिखी गई किताब 'पैंडेमिक 1918' की लेखिका कैथरीन आर्नोल्ड ने कहा था, 'पहले विश्व युद्ध और स्पेनिश फ्लू से एक आर्थिक त्रासदी पैदा हो गई थी।'

उनके अनुसार, कई देशों में घर चलाने की जिम्मेदारी उठाने वाला, खेती करने वाले, कारोबार करने वाले नौजवान जिंदा ही नहीं बचे थे। यहां तक कि महिलाओं से शादी करने के लिए लड़के नहीं बचे थे। आगे वंश बढ़ाने की चुनौती खड़ी हो गई थी। लाखों महिलाओं के पास कोई पार्टनर नहीं था।

लेकिन इस त्रासदी ने कई ऐसे रास्ते खोले जिससे महामारी के खत्म होने के बाद आर्थ‌िक विकास पहले से भी ज्यादा हो गया। इसमें ऑस्ट्रेलिया सबसे आगे रहा। 1977 में ऑस्ट्रेलियाई मीडिया हाउस बुटलिन में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के वक्त 1917 से 1920 के दौरान यहां की पर कैपिटा इनकम यानी GDP -6% पर पहुंच गई थी, लेकिन कुछ ऐसे कदम उठाए गए जिससे 1921 में GDP 10% से आगे निकल गई।

अमेरिकी इकनॉमिस्ट्स की एक टीम ने 1918 में लॉकडाउन के उपायों का अध्ययन किया था। उन्होंने पाया कि जिन शहरों ने सख्त उपाय किए थे वहां महामारी के बाद आर्थिक रिकवरी की रफ्तार कहीं तेज थी।

अमेरिका के दो शहरों की कहानी
यह दो शहरों की एक मशहूर कहानी है। सितंबर 1918 में अमरीकी शहर वॉर बॉन्ड्स को प्रमोट करने के लिए परेड आयोजित कर रहे थे। इन बॉन्ड्स की बिक्री से पहले से चल रहे युद्ध के लिए पैसा जुटाया जा रहा था। जब स्पेनिश फ्लू के मामले आना शुरू हुए तो इनमें से दो शहरों ने दो बिलकुल अलग तरह के उपाय अपनाए।

दिसंबर 1918 में अमेरिकी सेना की 39वीं रेजिमेंट फ्लू से बचने के लिए मास्क पहने हुए। फोटो सैनिकों के फ्रांस जाने के दौरान का।
दिसंबर 1918 में अमेरिकी सेना की 39वीं रेजिमेंट फ्लू से बचने के लिए मास्क पहने हुए। फोटो सैनिकों के फ्रांस जाने के दौरान का।

फिलाडेल्फिया ने जहां अपनी योजनाएं जारी रखीं, वहीं सेंट लुइस ने ये इवेंट कैंसिल करने का ऐलान कर दिया। एक महीने बाद फिलाडेल्फिया में इस बीमारी से 10,000 लोग मर चुके थे। दूसरी ओर, सेंट लुइस में मरने वालों का आंकड़ा 700 से भी कम था। बाद में सेंट लुइस में आर्थ‌िक गतिवि‌धियां शुरू हुईं और यह तेजी विकास की राह पर आगे बढ़ा, जबकि फिलाडेल्फिया को फिर से पटरी पर लौटने में काफी वक्त लगा।

1918 के दौरान कई अमरीकी शहरों में किए गए उपायों के एक विश्लेषण से पता चलता है कि जिन शहरों ने लोगों के इकट्ठे होने, थिएटर खोलने, स्कूलों और चर्चों के खुलने पर रोक लगा दी थी वहां मौतों का आंकड़ा काफी कम था। ऐसी ज्यादातर जगहों पर महामारी के तेजी से उद्योग धंधे आगे बढ़े, कम पैसे में बेहतर काम करने वाले तैयार हो गए थे। मैन्युफैक्चरिंग की लागत कम हो गई थी और प्रोडक्ट्स कीमतें बढ़ गई थीं। इससे जमकर फायदा हुआ।

बड़ी तादाद में काम पर उतरी महिलाएं, कम पैसे में किया अधिक काम
स्पेनिश फ्लू से पहले महिलाओं के काम पर जाने की परंपरा आज की तरह नहीं थी। यह स्पेनिश फ्लू ही था जिसके बाद महिलाओं को नौकरी पर जाने को लेकर पूरी सोच बदल गई। टेक्सस ए एंड एम यूनिवर्सिटी की रिसर्चर क्रिस्टीन ब्लैकबर्न ने कहा था, 'फ्लू और पहले विश्व युद्ध के चलते श्रमिकों का संकट पैदा हो गया था। इसके चलते महिलाओं के लिए काम करने के रास्ते खुल गए।'

1918 की फोटो। टेलीफोन ऑपरेटर मास्क पहनकर बैठी हुई।
1918 की फोटो। टेलीफोन ऑपरेटर मास्क पहनकर बैठी हुई।

इसके बाद अमेरिका में 1920 तक देश के सभी कर्मचारियों में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 21 फीसदी पर पहुंच गई थी। उसी साल अमेरिकी कांग्रेस ने संविधान में 19वां संशोधन किया और इसके जरिए अमेरिकी महिलाओं को वोट डालने का अधिकार मिल गया। ब्लैकबर्न के मुताबिक इस बात के प्रमाण हैं कि 1918 के फ्लू ने कई देशों में महिलाओं के अधिकारों पर असर डाला। इससे सामजिक लाभ से कई गुना ज्यादा आर्थ‌िक लाभ हुआ। क्योंकि महिलाओं ने कम पैसे में ज्यादा काम किया।

अमेरिका में सरकारी आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं के काम पर उतरने से मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में इतनी तेजी से उछाल आया कि 1915 में जो तनख्वाह 21 सेंट प्रति घंटा थी उसे 1920 में बढ़ाकर 56 सेंट कर दिया गया।

ऑस्ट्रेलियाई स्टेट की NSW सरकार ने सबसे तेज आर्थ‌िक विकास कर कायम की मिसाल
तीन फेज में दुनिया को अपनी चपेट में लेने वाली महामारी स्पेनिश फ्लू पहले ही चरण में मेलबर्न और सिडनी पहुंच गई थी। फिर यह दुनिया के दूसरे देशों के मुकाबले यहां अधिक नुकसान नहीं पहुंचा पाई, क्योंकि ऑस्ट्रेलियाई स्टेट्स में महामारी की सुगबुगाहट पर ही मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग अनिवार्य कर दी। स्टेट बॉर्डर्स एकदम से सील कर दिए गए। नेशनल म्यूजियम को मरीजों को रखने के लिए क्वॉरेंटीन सेंटर में तब्दील कर दिया गया।

ऑस्ट्रेलियाई स्टेट न्यू साउथ वेल्‍स, यानी NSW, में 18-40 साल के लोगों की सबसे ज्यादा मौतें हुई थीं। तब वहां की सरकार ने स्कूल से लेकर रेस्टोरेंट और सिनेमाघर तक बंद कर दिए।

लेकिन NSW इंडस्ट्रियल गैजेट के अनुसार छह महीने के भीतर स्टेट में कई अलग तरह की चीजें होने लगीं। जहां 40% तक रिटेलर्स शॉप पर बिक्री कम हुई थी, वहीं से इतना ज्यादा प्रोडक्‍शन शुरू हो गया कि यूरोपीय देशों समेत कई जगहों पर यहां के सामान एक्सपोर्ट होने लगे। डिलिवरी सामान पहुंचाने का नया तरीका ईजाद हो गया।

सोर्स: द सन 6 फरवरी 1919, पेज 5
सोर्स: द सन 6 फरवरी 1919, पेज 5

तब NSW की सरकार ने अपने देश में कैश फ्लो के बजाए खाना के बदले कंबल, घर के किराए के बदले खाना या ऐसी कई वस्तु-विनिमय को बढ़ावा दिया। साथ ही बड़े-बड़े रेस्टोरेंट्स ने अपने रूम प्रोडक्‍शन के लिए खोल दिए। NSW स्टेट अर्काइव्स एंड रिकॉर्ड बताता है कि उस साल की GDP में इसी कारण काफी उछाल देखने को मिला। इसमें सबसे बड़ी भूमिका प्राइवेट डिमांड और इनवेंटरीज ने निभाई।

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