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खुद्दार कहानी:IIM से पढ़ीं वन्या ने सैनिटरी पैड्स का स्टार्टअप शुरू किया; ताकि इसे खरीदने में शर्मिंदगी न हो, चार महिलाओं को नौकरी भी दी

रांची4 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
रांची की रहने वाली वन्या वत्सल और गुंजन गौरव दोनों नौकरी छोड़कर ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स तैयार करने का बिजनेस कर रहे हैं।
  • वन्या वत्सल नौकरी छोड़कर ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स का स्टार्टअप चला रही हैं

माहवारी या पीरियड्स एक नैचुरल प्रक्रिया है। यह कोई अभिशाप नहीं है। यदि महिलाओं को पीरियड्स न हो, तो वे कभी मां नहीं बन सकती हैं। ऐसे में, इसे लेकर शर्मिंदगी क्यों! जब शराब खुले में बिकती है, तो सैनिटरी पैड काले पाॅलिथीन में या अखबार में रैप कर क्यों खरीदी जाए? मैं इस सोच को बदलना चाहती थी। मुझे नहीं पता था कि आगे मेरा यह अभियान कहां तक जाएगा? लोग मेरे बारे में क्या कहेंगे? लेकिन, मुझे इतना पता था कि जो कर रही हूं वो सामाजिक बदलाव के लिए जरूरी है। ऐसा कहना है वन्या वत्सल का जो अच्छी खासी नौकरी छोड़कर ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स का स्टार्टअप चला रही हैं।

रांची की रहने वाली वन्या वत्सल 12वीं में स्कूल टॉपर रहीं। ग्रेजुएशन करने के बाद 2018 में उन्होंने IIM लखनऊ से MBA किया। एक मल्टीनेशनल कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट हो गया। 25 लाख रुपए सालाना पैकेज था। सबकुछ अच्छा चल रहा था। लेकिन, वन्या कुछ अपना शुरू करना चाहती थीं। कुछ ऐसा जिससे महिलाओं का भला हो, उन्हें रोजगार मिले। इसके बाद उन्होंने रांची के ही रहने वाले गुंजन गौरव से संपर्क किया। गुंजन और वन्या अच्छे दोस्त हैं, दोनों की स्कूलिंग साथ ही हुई है। इंजीनियरिंग करने के बाद गुंजन एक मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर रहे थे।

अपने साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ गुंजन और वन्या।
अपने साथ काम करने वाली महिलाओं के साथ गुंजन और वन्या।

वन्या ने गुंजन से एक स्टार्टअप शुरू करने की बात कही। गुंजन भी तैयार हो गए। दोनों ने कई सारे आइडियाज को लेकर बात की। काफी सोचने के बाद दोनों ने 2020 में नौकरी छोड़ दी और नवंबर में इलारिया नाम से ऑर्गेनिक सैनिटरी पैड्स बनाने का काम शुरू किया।

गुंजन कहते हैं कि मैंने नौकरी छोड़कर जब यह काम करना शुरू किया तो कई लोगों ने टोका। उनका कहना था कि ये महिलाओं का काम है। लेकिन, मुझे लगता था कि माहवारी आज भी एक टैबू टॉपिक है, जिस पर लोग खुलकर बात नहीं करना चाहते हैं। इसको लेकर पुरुष सामाज को भी सोच बदलनी होगी तो ही पूरे सामाज में एक अच्छा मैसेज जा सकेगा।

ऑर्गेनिक पैड्स लॉन्च किए ताकि महिलाओं को नुकसान नहीं हो

27 साल की वन्या कहती हैं,' सैनिटरी पैड्स तो कई कंपनियां बना रही हैं, जिनमें ज्यादातर विदेशी हैं। ये लोग इसमें प्लास्टिक का इस्तेमाल करते हैं। जो हेल्थ के लिए ठीक नहीं है। महिलाओं को पीरियड्स के दौरान तकलीफ न हो और वे पूरी तरह सुरक्षित रहें, इसलिए हमने ऑर्गेनिक तरीके से कपास से बने सैनिटरी पैड्स लॉन्च किए हैं। इसमें किसी केमिकल या प्लास्टिक का इस्तेमाल नहीं किया गया है। यह पूरी तरह इको फ्रेंडली और बायोडिग्रेडेबल है। इससे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है।

पैड्स का कवर ऐसा जिसे आप लोगों को गिफ्ट भी कर सकते हैं

सैनिटरी पैड्स की पैकेजिंग आकर्षक है। यह एक गिफ्ट की तरह लगता है।
सैनिटरी पैड्स की पैकेजिंग आकर्षक है। यह एक गिफ्ट की तरह लगता है।

वन्या कहती हैं कि हम पैड्स खरीदने के बाद घर में टेबल पर या सामने नहीं रख सकते हैं। इसे कपड़ों में छुपाकर रखना पड़ता है। इसलिए हमने तय किया कि क्यों न इसकी पैकेजिंग ऐसी की जाए जिसे हम टेबल पर रख सकें, जिसका लुक भी अच्छा हो। इसके लिए हमने पैड्स के कवर को क्रिएटिव बनाने पर जोर दिया। पैकेट को कवर करने के लिए प्लास्टिक की जगह कागज के लिफाफे और आकर्षक पेपर बोर्ड का हम इस्तेमाल करते हैं। हमने पैकेजिंग को इस तरीके से रखा है कि आप इसे ड्राइंग रूम में भी रखें, तो यह एक गिफ्ट की तरह लगेगा और आपके मन में कोई संकोच नहीं होगा।

जैसे- जैसे लोग अवेयर होंगे, हमारे प्रोडक्ट की डिमांड बढ़ेगी

वन्या और गुंजन बताते हैं कि हमारा स्टार्टअप अभी नया है। कम ही लोगों को इसके बारे में पता है। हम अपनी पसंद के पैड्स को दिल्ली से तैयार करवाकर रांची मंगाते हैं। यहां उसे आकर्षक कवर से पैक किया जाता है और फिर ग्राहकों के पास भेजा जाता है। जिसकी वजह से मार्केट में मिलने वाले पैड्स से हमारे पैड्स की कीमत थोड़ी बढ़ जाती है। ये भी एक वजह है कि कई लोग उनके प्रोडक्ट अभी नहीं खरीद रहे। लेकिन, उन्हें उम्मीद है कि जैसे-जैसे लोग अवेयर होंगे, वे ऑर्गेनिक पैड्स की तरफ जरूर रुख करेंगे। अभी उनके पास दो तरह के पैड्स हैं – अर्थ और फेदर। एक पैक में 10 पैड होते हैं और इसकी कीमत 110 और दूसरे पैक की 330 रुपए है। इसके साथ ही, वे अपने ग्राहकों को बायोडिग्रेडेबल डिस्पोजल बैग भी देते हैं।

गुंजन और वन्या ने अपनी कंपनी में चार महिलाओं को रोजगार दिया है जो पैड्स की पैकेजिंग का काम करती हैं। ये चारों महिलाएं ट्राइबल हैं।
गुंजन और वन्या ने अपनी कंपनी में चार महिलाओं को रोजगार दिया है जो पैड्स की पैकेजिंग का काम करती हैं। ये चारों महिलाएं ट्राइबल हैं।

दो महीने में 60 हजार रुपए की कमाई

वन्या बताती हैं कि हमने इलारिया नाम से एक वेबसाइट बनाई है जिसके माध्यम से लोग पैड्स ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी हमारा पेज है। लोग वहां से भी ऑर्डर कर सकते हैं। जल्द ही हम लोग इसे अमेजन और फ्लिपकार्ट पर भी उपलब्ध कराने की योजना बना रहे हैं। आज हमारे पास दिल्ली, मुम्बई, चेन्नई जैसे कई बड़े शहरों से हर महीने 50 से अधिक ऑर्डर आ रहे हैं। दो महीने में 60 हजार रुपए से ज्यादा की कमाई हुई है। गुंजन बताते हैं कि हम अपने प्रोडक्ट को गांवों में भी ले जाना चाहते हैं। आगे हम गांवों में प्रोडक्शन यूनिट खोलना चाहते हैं ताकि कम कीमत पर गांव की महिलाओं को सुरक्षित पैड्स मिल सके।