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आज की पॉजिटिव खबर:महाराष्ट्र की डेंटिस्ट ने गरीब महिलाओं को सोलर कुकर से कुकीज बनाने की ट्रेनिंग दी, फिर स्टार्टअप से जोड़ा, 2 साल में 30 लाख पहुंचा टर्नओवर

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

महाराष्ट्र के जालना जिले में रहने वाली डॉक्टर मिनल काबरा डेंटिस्ट हैं। पिछले करीब 10 साल से वे प्रैक्टिस कर रही हैं। जालना में ही उनका अपना क्लिनिक भी है। इसके साथ-साथ पिछले दो साल से वे एक स्टार्टअप भी चला रही हैं। वे घर पर ही सोलर एनर्जी की मदद से कुकीज, चॉकलेट और हेल्दी स्नैक्स तैयार कर देशभर में मार्केटिंग करती हैं। उनके साथ 30 से ज्यादा गरीब महिलाएं जुड़कर अपनी जीविका चला रही हैं। इस साल डॉ. मिनल की कंपनी का टर्नओवर 30 लाख रुपए रहा है।

33 साल की मिनल ने 2009 में नागपुर से BDS की पढ़ाई की। इसके बाद अपने होमटाउन अमरावती में उन्होंने 2 साल तक प्रैक्टिस की। इसके बाद उनकी शादी हो गई और वे जालना शिफ्ट हो गईं। यहां उन्होंने अपनी क्लिनिक खोल ली और काम करना शुरू कर दिया। मिनल कहती हैं कि इलाज के लिए मेरे पास दूर-दूर से गरीब महिलाएं आती थीं। इनकी आर्थिक स्थिति दयनीय थी। कई महिलाओं के साथ उनके पति मार-पीट भी करते थे। वे अक्सर मुझसे कहती थीं कि मैम कुछ काम दिला दो। मुझे उनकी परेशानियां सुनकर तकलीफ होती थी, लेकिन मैं उनकी कुछ खास मदद नहीं कर पा रही थी।

33 साल की मिनल BDS हैं। क्लिनिक से वक्त बचने के बाद वे सोलर कुकर की मदद से कुकीज तैयार करती हैं।
33 साल की मिनल BDS हैं। क्लिनिक से वक्त बचने के बाद वे सोलर कुकर की मदद से कुकीज तैयार करती हैं।

मिनल बताती हैं कि हमारे यहां त्योहारों में रिश्तेदारों के घर मिठाइयां और कुकीज भेजने की परंपरा रही है। मैं खुद कुकीज तैयार कर अपने रिश्तेदारों को भेजती थी। हेल्थ कन्सर्न को देखते हुए मैं ये कुकीज सोलर कुकर की मदद से तैयार करती थी। जिसकी तारीफ मेरे रिश्तेदार भी करते थे। एक दिन यू हीं बात-बात में मेरे पति ने कहा कि इस काम को तुम प्रोफेशनल लेवल पर शुरू क्यों नहीं करती हो। मुझे भी लगा कि हां इस काम को आगे बढ़ाया जा सकता है।

स्थानीय महिलाओं के साथ मिलकर शुरू किया स्टार्टअप

साल 2019 के अंत में मिनल ने कुछ स्थानीय महिलाओं से बात की और उन्हें अपने साथ जोड़ा। उन्होंने पास के किसानों और लोकल वेंडर्स से रॉ मटेरियल खरीदे और घर पर ही सोलर कुकर की मदद से कुकीज तैयार करना शुरू किया। इसके बाद सोशल मीडिया के जरिए वे अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने लगीं। वे जालना और उसके आसपास के जिलों में ऑफलाइन मोड में भी दुकानों तक अपने प्रोडक्ट की सप्लाई करने लगीं। मिनल कहती हैं कि हमारा आइडिया यूनीक था, हम सोलर कुकर की मदद से कुकीज तैयार करते थे, इसलिए हेल्थ के लिहाज से भी ये नुकसानदायक नहीं था। जिसके चलते जल्द ही मार्केट में हमारी पहचान बन गई।

डिमांड बढ़ी तो महिलाओं को ट्रेनिंग देने लगीं

डॉ. मिनल ने अपने जिले की स्थानीय महिलाओं को ट्रेनिंग दी। ये महिलाएं अब खुद ही कुकीज तैयार करती हैं।
डॉ. मिनल ने अपने जिले की स्थानीय महिलाओं को ट्रेनिंग दी। ये महिलाएं अब खुद ही कुकीज तैयार करती हैं।

डॉ. मिनल कहती हैं कि कुछ महीने बाद हमारे कस्टमर्स की संख्या अच्छी-खासी हो गई। महाराष्ट्र के बाहर से भी हमारे पास डिमांड आने लगी। अब घर पर सोलर कुकर की मदद से बड़े लेवल पर कुकीज तैयार करना संभव नहीं था। दूसरी तरफ मेरा मकसद इन महिलाओं को सिर्फ रोजगार देना नहीं था, बल्कि मैं उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाना चाहती थी। इसलिए मैंने तय किया कि स्थानीय महिलाओं को कुकर प्रोवाइड कराऊं और उन्हें इसकी ट्रेनिंग दूं। ताकि वे मुझ पर निर्भर रहने की बजाय खुद भी कुकीज अपने घर पर तैयार कर सकें। इसके बाद मैंने कुछ स्थानीय महिलाओं को सोलर कुकर खरीदकर दिए।

इस तरह हमारा काम धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगा। अलग-अलग शहरों में हमने अपना रिटेल नेटवर्क डेवलप करना शुरू कर दिया। महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, चेन्नई सहित कई राज्यों में हमने अपने प्रोडक्ट की सप्लाई शुरू की। फिलहाल देश के 17 शहरों में 70 से अधिक हमारे स्टोर्स हैं, जहां हम अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करते हैं। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भी एक्टिव हैं। हाल ही में हमने अपनी वेबसाइट और अमेजन-फ्लिपकार्ट के जरिए भी ऑनलाइन मार्केटिंग शुरू की है। इस पर लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है।

कई गरीब महिलाओं की जिंदगी संवार रही हैं

ये स्वपन्ना हैं, जो डॉ. मिनल की टीम के साथ जुड़ी हैं। कुकीज के काम से स्वपन्ना हर दिन 400-500 रुपए की कमाई कर लेती हैं।
ये स्वपन्ना हैं, जो डॉ. मिनल की टीम के साथ जुड़ी हैं। कुकीज के काम से स्वपन्ना हर दिन 400-500 रुपए की कमाई कर लेती हैं।

डॉ. मिनल के यहां काम करने वाली सभी महिलाएं गरीब परिवार से ताल्लुक रखती हैं। इससे पहले उनके पास आमदनी का कोई खास जरिया नहीं था। स्वपन्ना पिछले एक साल से डॉ. मिनल के साथ जुड़ी हैं। वे बताती हैं कि पहले हमें कई तरह की आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पति ड्राइवर हैं, इसलिए हम पूरी तरह उन पर ही निर्भर थे। कई बार वे हफ्ते-दो हफ्ते के लिए घर से दूर चले जाते थे, तब हमें पैसे की बहुत दिक्कत होती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। इस काम से जुड़ने के बाद हर दिन मैं 400 से 500 रुपए कमा लेती हूं। स्वपन्ना की तरह दूसरी महिलाएं भी डॉ. मिनल के साथ जुड़कर अच्छी कमाई कर रही हैं, वे खुद अपने परिवार का खर्च निकाल रही हैं।

डॉ. मिनल और उनकी टीम फिलहाल हर दिन 30 किलो से ज्यादा कुकीज तैयार कर रही है। अभी उनके पास 6 वैराइटी में कुकीज हैं। इसके साथ ही वे अलग-अलग फ्लेवर में हेल्दी चॉकलेट्स, स्नैक्स तैयार कर रही हैं। डॉ. मिनल कहती हैं कि हम अपने इस प्रोजेक्ट से पर्यावरण भी बचा रहे हैं। सोलर कुकर पर कुकीज तैयार करने से हम लोग प्रति किलो 500 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड को वातावरण में जाने से बचा रहे हैं। आने वाले दिनों में मिनल फ्रेंचाइजी मॉडल पर देश के अलग-अलग हिस्सों में अपना प्रोजेक्ट शुरू करने वाली हैं, ताकि ज्यादा से ज्यादा गरीब महिलाओं की जिंदगी संवारी जा सके।

डॉ. मिनल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मोड में मार्केटिंग कर रही हैं। देशभर में 70 से ज्यादा उनके स्टोर्स हैं।
डॉ. मिनल ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों ही मोड में मार्केटिंग कर रही हैं। देशभर में 70 से ज्यादा उनके स्टोर्स हैं।

कम लागत में मुनाफे का स्टार्टअप, जानिए कैसे?

कुकीज और स्नैक्स ज्यादातर लोगों की डेली लाइफ में शामिल हो चुका है। खास करके बच्चों में इसकी अधिक डिमांड होती है। पिछले कुछ सालों इस तरह के कई स्टार्टअप शुरू हुए हैं, जो होममेड कुकीज और स्नैक्स की मार्केटिंग से बढ़िया कमाई कर रहे हैं। खास बात यह है कि ऐसे स्टार्टअप के लिए बहुत अधिक फंड की जरूरत नहीं होती है। डॉ. मिनल ने भी कम बजट के साथ ही अपने काम की शुरुआत की थी। अगर आप भी इस तरह के स्टार्टअप की प्लानिंग कर रहे हैं तो हम 4 ग्राफिक के जरिए आपको बता रहे हैं कि कैसे आप आसानी से अपने काम की शुरुआत कर सकते हैं...

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