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आज की पॉजिटिव खबर:जयपुर की तनुश्री ने 3 साल पहले मोमबत्ती बनाने का स्टार्टअप शुरू किया, अब 12 लाख रु. टर्नओवर, 250 महिलाओं को नौकरी भी दी

नई दिल्ली3 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

कैंडल यानी मोमबत्ती की डिमांड अमूमन हर इवेंट में होती है। चाहे बर्थडे पार्टी हो, क्रिसमस पार्टी हो, कोई सेलिब्रेशन हो या फिर कोई त्योहार, हर इवेंट में कैंडल जलाने का ट्रेंड है। हम रोशनी और घरों की खूबसूरती के लिए कैंडल जलाते हैं। अब तो मार्केट में डिमांड के मुताबिक कलर और साइज से लेकर हर तरह की खुशबू वाले कैंडल उपलब्ध हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि ये कैंडल जितनी अधिक खूबसूरती बिखेरते हैं, उससे कहीं ज्यादा हमारी सेहत के लिए नुकसानदायक भी हैं?

दरअसल, कैंडल से पैराफिन वैक्स निकलता है, जो टॉक्सिक नेचर का होता है। यह हमारी सेहत को बहुत हद तक प्रभावित करता है। इससे सांस लेने में दिक्कत, सिर दर्द, अस्थमा जैसी बीमारियां हो सकती हैं। कई बार तो यह ट्यूमर और कैंसर का भी कारण बनता है। इससे बचने का सबसे कारगर तरीका है, इको फ्रेंडली कैंडल का इस्तेमाल करना। जयपुर में रहने वाली तनुश्री जैन ने ऐसी ही पहल की है। वे करीब 3 साल से लोकल कारीगरों के साथ मिलकर नेचुरल वैक्स की मदद से ऑर्गेनिक कैंडल तैयार कर रही हैं। भारत के साथ-साथ विदेशों में भी उनके प्रोडक्ट की अच्छी डिमांड है। पिछले साल उनकी कंपनी का टर्नओवर 12 लाख रुपए रहा।

जॉब का ऑफर मिला, लेकिन नौकरी जॉइन नहीं की

25 साल की तनुश्री का शुरू से ही सोशल सेक्टर से लगाव रहा है। वे पढ़ाई के दौरान ही लोकल कारीगरों के साथ जुड़ गई थीं।
25 साल की तनुश्री का शुरू से ही सोशल सेक्टर से लगाव रहा है। वे पढ़ाई के दौरान ही लोकल कारीगरों के साथ जुड़ गई थीं।

तनुश्री मिडिल क्लास फैमिली से ताल्लुक रखती हैं। उनके पापा आर्मी में रहे जबकि मां टीचर हैं। साल 2017 में कम्प्यूटर साइंस से इंजीनियरिंग करने के बाद तनुश्री को कई अच्छी कंपनियों से जॉब का ऑफर मिला, लेकिन उन्होंने नौकरी नहीं की। वे कहती हैं कि मैंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई भले की है, लेकिन कभी इस सेक्टर में मेरी खास दिलचस्पी नहीं रही। मैं हमेशा से ग्राउंड लेवल पर, स्थानीय लोगों के साथ काम करना चाहती थी। मैंने पढ़ाई के दौरान ही स्थानीय कारीगरों के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया था।

तनुश्री बताती हैं कि हमारे एरिया में हर तरह के स्थानीय कलाकार और कारीगर रहते हैं। जब मैं उनसे मिलीं और उनके काम को समझा तो रियलाइज हुआ कि इन कारीगरों को मार्केटिंग को लेकर खासी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ये लोग बढ़िया से बढ़िया प्रोडक्ट बनाने के बाद सही तरह से उसकी मार्केटिंग नहीं कर पाते हैं। इसके बाद मैंने अपनी टेक्निकल स्किल का इस्तेमाल इनकी मार्केटिंग के लिए करना शुरू कर दिया। मैं अलग-अलग ई कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर स्थानीय कारीगरों के प्रोडक्ट की मार्केटिंग करने लगी। इससे मुझे भी मार्केटिंग की अच्छी-खासी समझ हो गई।

हेल्थ बिगड़ने लगी तो रिसर्च पर फोकस किया

तनुश्री स्थानीय महिलाओं को अपने स्टार्टअप के जरिए रोजगार दे रही हैं। वे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं।
तनुश्री स्थानीय महिलाओं को अपने स्टार्टअप के जरिए रोजगार दे रही हैं। वे ज्यादा से ज्यादा महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना चाहती हैं।

तनुश्री ने 2017 में इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंडियन स्कूल ऑफ डेवलपमेंट मैनेजमेंट (ISDM) से मास्टर्स किया। इस दौरान उन्हें एक साल तक दिल्ली में रहना पड़ा। वहां की हवा उनकी सेहत के लिए सही नहीं रही और जल्द ही उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने लगी। शुरुआत में तो उन्होंने कुछ खास ध्यान नहीं दिया, लेकिन बाद में उन्होंने इस पर रिसर्च करना शुरू किया। कुछ दिन बाद तनुश्री ने रियलाइज किया कि खराब स्वास्थ्य के पीछे केमिकल वाले कैंडल जलाना भी एक बड़ी वजह है। इसके बाद उन्होंने कैंडल बनाने की प्रोसेस को समझना शुरू किया।

1.5 लाख रुपए की लागत से शुरू किया स्टार्टअप

तनुश्री बताती हैं कि लगातार स्टडी और रिसर्च के बाद मुझे पता चला कि ज्यादातर लोग कैंडल बनाने में केमिकल का इस्तेमाल करते हैं। इससे पॉल्यूशन क्रिएट होता है। हम बंद कमरे में ऐसे कैंडल जलाते हैं तो उसका निगेटिव असर हमारी हेल्थ पर पड़ता है। इसकी जगह अगर कैंडल बनाने में नेचुरल वैक्स और एरोमेटिक हर्ब से बने ऑयल का इस्तेमाल किया जाए, तो सेहत को नुकसान नहीं होगा। इसके बाद 2018 के अंत में तनुश्री ने अपने आसपास के कारीगरों से बात की।

तनुश्री मार्केटिंग के लिए कोरोना से पहले अलग-अलग जगहों पर स्टॉल भी लगाती थीं। हालांकि अब वे ऑनलाइन मार्केटिंग पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।
तनुश्री मार्केटिंग के लिए कोरोना से पहले अलग-अलग जगहों पर स्टॉल भी लगाती थीं। हालांकि अब वे ऑनलाइन मार्केटिंग पर ज्यादा फोकस कर रही हैं।

10 महिलाएं उनके साथ काम करने के लिए राजी हो गईं। इसके बाद उन्होंने इन महिलाओं को मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी। फिर उन्होंने कैंडल बनाने के लिए रॉ मटेरियल्स इकट्ठा किए और घर से ही काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने अपने स्टार्टअप का नाम Nushaura रखा। शुरुआत में सेटअप जमाने और काम शुरू करने में तनुश्री के करीब 1.5 लाख रुपए खर्च हुए।

तनुश्री कहती हैं कि हमारे प्रोडक्ट की क्वालिटी मार्केट में मिलने वाले कैंडल से अलग है। यही वजह है कि शुरुआत में ही हमें लोगों से अच्छा रिस्पॉन्स मिलने लगा। धीरे-धीरे हमारे कस्टमर्स भी बढ़ते गए और हमारे साथ काम करने वाली महिलाएं भी। फिलहाल हमारे पास 60 ग्राम से लेकर 1 किलोग्राम तक के 20 से ज्यादा वैराइटी के कैंडल्स हैं। जिनकी प्राइस 99 रुपए से लेकर 1999 रुपए तक है।

कैसे बनाती हैं कैंडल्स, क्या है बिजनेस मॉडल?

तनुश्री के साथ फिलहाल राजस्थान और मध्य प्रदेश से 250 महिलाएं जुड़ी हैं। ये अपने-अपने घरों में काम करती हैं और प्रोडक्ट तैयार हो जाने के बाद तनुश्री को हैंडओवर कर देती हैं। प्रोडक्ट बिकने के बाद जितनी कमाई होती है, वह सभी कारीगरों में बराबर-बराबर बांट दी जाती है। कैंडल बनाने की प्रोसेस को लेकर तनुश्री बताती हैं कि मोटे तौर पर इसके लिए तीन चीजों- नेचुरल वैक्स, इसेंशियल ऑयल और कॉटन की बत्ती की जरूरत होती है।

स्थानीय महिलाओं को तनुश्री ने मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी है। ये महिलाएं घर से ही मोमबत्ती तैयार करके तनुश्री को हैंडओवर कर देती हैं।
स्थानीय महिलाओं को तनुश्री ने मोमबत्ती बनाने की ट्रेनिंग दी है। ये महिलाएं घर से ही मोमबत्ती तैयार करके तनुश्री को हैंडओवर कर देती हैं।

कैंडल तैयार करने के लिए सबसे पहले वैक्स को किसी बर्तन में रखकर गैस पर या चूल्हे पर गर्म किया जाता है। इसके बाद उसमें इसेंशियल ऑयल मिलाया जाता है। उसके बाद दोनों के मिक्सर को कैंडल बनाने वाले डमी कंटेनर में भरा जाता है। उसमें बत्ती पहले से लगी हुई होती है। कुछ वक्त बाद वैक्स जम जाता है और कैंडल तैयार हो जाता है। उसके बाद डमी को उससे अलग कर लिया जाता है। जिस साइज का हमें कैंडल चाहिए, वैसे डमी या सांचे का हम इस्तेमाल करते हैं। इसी तरह अलग-अलग तरह के कैंडल के लिए अलग-अलग तरह के इसेंशियल ऑयल और कलर का इस्तेमाल किया जाता है।

नेचुरल वैक्स के लिए तनुश्री ने बरेली और गुजरात में मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों से टाइअप किया है। वे लोग उन्हें नेचुरल वैक्स प्रोवाइड कराते हैं। जबकि इसेंशियल ऑयल वह ऑर्गेनिक फार्म हाउस और प्रोड्यूसर से कलेक्ट करती हैं।

कैसे करती हैं मार्केटिंग, क्या रही स्ट्रैटजी?

तनुश्री बताती हैं कि हम लोग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों ही लेवल पर मार्केटिंग कर रहे हैं। इसके तहत ब्रांड टू कस्टमर यानी B2C और ब्रांड टू बिजनेस यानी B2B मार्केटिंग कर रहे हैं। कई बड़ी कंपनियों से हमारा टाइअप है। इसके साथ ही हम लोग सोशल मीडिया के जरिए देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। हाल ही में हमने अमेजन और इंडिया मार्ट से भी अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग करनी शुरू की है। इससे काफी अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है। अब तो हमनें इंडिया के बाहर भी कनाडा, अमेरिका सहित कई देशों में अपना प्रोडक्ट भेजना शुरू कर दिया है।

मार्केटिंग स्ट्रैटजी को लेकर तनुश्री कहती हैं कि हम सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स और सेलिब्रिटीज को कैंडल गिफ्ट करते हैं। इसके बदले वे लोग अपने अकाउंट से हमारे प्रोडक्ट की फोटो या वीडियो पोस्ट करते हैं। इससे मार्केटिंग में काफी फायदा मिलता है और कम वक्त में अधिक लोगों तक हमारा प्रोडक्ट पहुंच जाता है।

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