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आज की पॉजिटिव खबर:तन्वी ने एक लाख रुपए से शहद का बिजनेस शुरू किया; पहले साल ही 5 लाख का मुनाफा, जानिए पूरी प्रोसेस

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

गुजरात के पाटन की रहने वाली तन्वीबेन पटेल नौकरी छोड़ शहद का बिजनेस कर रही हैं। पिछले साल ही उन्होंने अपने पति के साथ इसकी शुरुआत की थी। पहले ही साल उन्हें करीब 5 लाख रुपए का मुनाफा हुआ है। अब वे देशभर में ऑर्गेनिक शहद की मार्केटिंग कर रही हैं। इस साल उन्होंने बिजनेस का दायरा और ज्यादा बढ़ा दिया है। इससे 2022 के आखिर तक उन्हें 20 से 25 लाख रुपए के मुनाफे की उम्मीद है।

तन्वीबेन कहती हैं कि उनका परिवार पहले से ही खेती से जुड़ा था, लेकिन बिजनेस के लिहाज से खेती नहीं कर रहे थे। हम लोग पारंपरिक खेती करते थे, जिससे खाने-पीने की व्यवस्था हो जाती थी। ये काम भी उनके परिवार के लोग करते थे। तन्वी खुद इससे जुड़ी नहीं थीं।

तन्वी पहले टीचिंग करती थीं। अब वे शहद का बिजनेस कर रही हैं। उन्होंने अहमदाबाद में इसकी ट्रेनिंग ली है।
तन्वी पहले टीचिंग करती थीं। अब वे शहद का बिजनेस कर रही हैं। उन्होंने अहमदाबाद में इसकी ट्रेनिंग ली है।

शुरुआत ऑर्गेनिक फार्मिंग की हुई, बिजनेस शहद का हो गया
भास्कर से बात करते हुए तन्वी बताती हैं, 'मास्टर्स करने के बाद मेरी जॉब लग गई। मैं टीचिंग करने लगी। करीब 10 साल तक नौकरी की, उसके बाद परिवार की जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए नौकरी छोड़ दी। पति भी प्राइवेट जॉब में थे, अच्छी खासी लाइफ चल रही थी।'

तन्वी कहती हैं कि जब देश में ऑर्गेनिक फार्मिंग का क्रेज बढ़ा तो हमने भी तय किया कि थोड़ी सी जमीन पर ऑर्गेनिक फार्मिंग की जाए। इसके बाद साल 2017 में हमने पाटन में ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की। फसल अच्छी हुई, प्रोडक्शन भी बढ़िया हुआ, लेकिन बाद में दिक्कत होने लगी। दरअसल फसल के फूलों के ऊपर कीड़े लग रहे थे। चूंकि हम लोग पेस्टिसाइड का यूज नहीं करते थे, लिहाजा उन्हें कंट्रोल करना मुश्किल हो रहा था।

वे कहती हैं कि उसी दौरान किसी ने सुझाव दिया कि अगर मधुमक्खी पालन की जाए तो इन कीड़ों को फैलने से रोका जा सकता है। इसके बाद मैंने राजस्थान से 10 बॉक्स मंगाए और खेत के बीच रख दिए। इसका फायदा यह हुआ कि फसल पर कीड़े लगना बंद हो गए और पहले ही महीने शहद का प्रोडक्शन भी अच्छा खासा हो गया। तब हमारे दिमाग में ये बात आई कि शहद का बिजनेस भी किया जा सकता है।

तन्वी कहती हैं कि शहद का बिजनेस बहुत मुश्किल नहीं है। हर कोई इसे आसानी से कर सकता है, लेकिन पहले ट्रेनिंग जरूरी है।
तन्वी कहती हैं कि शहद का बिजनेस बहुत मुश्किल नहीं है। हर कोई इसे आसानी से कर सकता है, लेकिन पहले ट्रेनिंग जरूरी है।

5 दिन की ट्रेनिंग के बाद 100 बॉक्स के साथ शुरू किया बिजनेस
इसके बाद तन्वी ने अहमदाबाद में खादी एंड विलेज इंडस्ट्रीज कमीशन (KVIC) से 5 दिनों की ट्रेनिंग ली। फिर वहीं से 100 बॉक्स लिए और शहद का बिजनेस शुरू कर दिया। इसमें करीब 1 लाख रुपए की लागत आई। उन्होंने अपने बॉक्स के आस-पास सरसों और अजवाइन की खेती की है, ताकि बेहतर क्वालिटी का शहद तैयार हो। तन्वी ने Svadya नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया है। उन्होंने FSSAI का लाइसेंस भी ले लिया है। अब उनके पति भी जॉब छोड़कर बिजनेस में सपोर्ट कर रहे हैं।

वे कहती हैं कि पहले साल हमने बड़े लेवल पर मार्केटिंग नहीं की, लेकिन जितना प्रोडक्शन हुआ सब बिक गया। अब हम अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया के जरिए मार्केटिंग कर रहे हैं। साथ ही गुजरात में लोकल दुकानों पर भी हमारे प्रोडक्ट बिकते हैं। इस साल लागत निकालकर हमें करीब 5 लाख रुपए का मुनाफा हुआ है। अब हम अपना दायरा बढ़ा रहे हैं और जल्द ही एक हजार बॉक्स लगाने जा रहे हैं।

तन्वी युवाओं को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग भी देती हैं। उन्होंने कई महिलाओं को इस काम से जोड़ा है।
तन्वी युवाओं को मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग भी देती हैं। उन्होंने कई महिलाओं को इस काम से जोड़ा है।

अगर आप भी तन्वी की तरह शहद का बिजनेस करना चाहते हैं तो हम आपको विस्तार से एक-एक चीज के बारे में बता रहे हैं...

शहद कैसे बनता है?
शहद बनने की प्रोसेस कई स्टेज में होती है। रानी मधुमक्खियां सबसे पहले फूलों से नेक्टर यानी रस इकट्ठा करती हैं। एक मधुमक्खी कम से कम 150 प्लांट से नेक्टर कलेक्ट करती है। इसके बाद उसे अपने स्टमक में स्टोर करती है। इसे हनी स्टमक कहते हैं। जब स्टमक भर जाता है तो मधुमक्खी उसे बॉक्स में आकर उगल देती है। अब इस नेक्टर को दूसरी मधुमक्खी यानी वर्कर बी अपने स्टमक में स्टोर करती है और उसे कई मॉलिक्यूल्स में ब्रेक करती है।

इसके बाद उसे बॉक्स में बने छाते के ऊपर चारों तरफ फैला देती है। बाकी मधुमक्खियां भी इसी प्रोसेस को दोहराती हैं। शुरुआत में इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, लेकिन रात में मधुमक्खियां अपने पंखों की मदद से शहद से पानी अलग कर देती हैं। इसके बाद छाते से शहद निकाला जा सकता है।

शहद निकालते वक्त सुरक्षा का भी खास ध्यान रखना होता है। मार्केट में जाली वाले कैप मिलते हैं। उसका इस्तेमाल करना चाहिए।
शहद निकालते वक्त सुरक्षा का भी खास ध्यान रखना होता है। मार्केट में जाली वाले कैप मिलते हैं। उसका इस्तेमाल करना चाहिए।

कितने दिन में तैयार होता है शहद?
एक बॉक्स में शहद बनने में 15 दिन का वक्त लगता है। शहद तैयार हो गया है या नहीं, इसकी पहचान के लिए छाते की मॉनिटरिंग करनी जरूरी है। जब छाते पर वैक्स लग जाए और मधुमक्खियां उसे पूरी तरह सील कर दें तो समझ लीजिए कि छाते तैयार हो गए हैं। इसके बाद आप उसमें कट लगाकर शहद निकाल सकते हैं। एक बॉक्स से 3-4 किलो शहद निकलता है।

कलेक्शन और पैकिंग में क्या सावधानी जरूरी?
शहद निकालते समय मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए फेस पर जाली का इस्तेमाल करना चाहिए। मार्केट में इस तरह की जाली मिलती है। साथ ही कपड़े से पूरा शरीर ढंका होना चाहिए। हाथों में दस्ताने होने चाहिए। शहद निकालने के बाद आप बिना प्रोसेसिंग के भी इसे सीधे पैक कर सकते हैं, क्योंकि यह रॉ हनी होता है और जल्दी खराब नहीं होता है। अगर आप इसमें क्वालिटी एड करना चाहते हैं या कोई फ्लेवर मिलाना चाहते हैं तो फिर प्रोसेसिंग की जरूरत होगी।

लोकेशन और मौसम का कितना महत्व?
शहद के बिजनेस के लिए लोकेशन और मौसम बहुत मायने रखता है। एक मधुमक्खी तीन से चार किलोमीटर तक जाती है। आप जहां भी बॉक्स लगाएंगे, वहां इतने दायरे में प्रॉपर हरियाली होनी चाहिए। कम से कम 5 किलोमीटर के रेंज में फूल वाले प्लांट्स भरपूर मात्रा में होने चाहिए। जिस तरह के प्लांट्स होंगे, उसी फ्लेवर का शहद बनेगा और क्वालिटी भी उसके हिसाब से ही होगी।

अगर प्लांट पूरी तरह ऑर्गेनिक तरीके से उगाए जाएं तो शहद ऑर्गेनिक होगा, लेकिन अगर उन पर केमिकल या पेस्टिसाइड का छिड़काव हुआ हो तो शहद की क्वालिटी अच्छी नहीं होगी। यानी आपको जैसा शहद चाहिए, उसी तरह की प्लांटिंग भी होनी चाहिए। पहाड़ों और जंगलों में बॉक्स लगाना फायदेमंद होता है, क्योंकि वहां अलग-अलग वैराइटी के नेचुरल प्लांट होते हैं। जिनमें इम्यून पॉवर काफी ज्यादा होता है।

जहां तक मौसम की बात है, अक्टूबर से अप्रैल महीने के बीच ही इसका कल्टीवेशन किया जा सकता है। गर्मियों और बरसात के मौसम में बॉक्स लगाने से बचना चाहिए।

तन्वी ने 100 बेड के साथ मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। अब वे इसकी संख्या एक हजार करने की योजना बना रही हैं।
तन्वी ने 100 बेड के साथ मधुमक्खी पालन की शुरुआत की थी। अब वे इसकी संख्या एक हजार करने की योजना बना रही हैं।

कहां से ले सकते हैं बी बॉक्स?
देश के कई शहरों में बी बॉक्स मिलते हैं। जिनमें छाते के साथ ही मधुमक्खियां भी होती हैं। एक बॉक्स में करीब 10 छाते होते हैं। इसकी कीमत 3-4 हजार रुपए होती है। बॉक्स खरीदते वक्त मधुमक्खी की वैराइटी का ध्यान रखना होता है। इटालियन मधुमक्खी कॉमन है। ज्यादातर लोग इसी वैराइटी का इस्तेमाल करते हैं। एक बॉक्स को 4-5 फीट की दूरी पर रखा जाता है। KVIC और नेशनल बी बोर्ड के जरिए भी आप बी बॉक्स और बाकी जरूरत की चीजें खरीद सकते हैं। उसके लिए भी लोन मिल जाता है और बॉक्स की लागत भी कम आती है।

कहां से ले सकते हैं लोन या सपोर्ट?
केंद्र सरकार मधुमक्खी पालन को बढ़ावा दे रही है। अगर आप 8वीं तक पढ़े हैं तो प्रधानमंत्री रोजगार योजना के अंतर्गत KVIC की तरफ से 25 लाख रुपए का लोन मिल सकता है। अगर आप पढ़े-लिखे नहीं हैं तो 10 लाख रुपए का लोन मिल जाएगा। इस पर सरकार 35% तक सब्सिडी देती है। इतना ही नहीं नेशनल बी बोर्ड कई तरह की सुविधाएं देता है। वह फाइनेंशियल सपोर्ट के साथ ही मार्केटिंग में भी सपोर्ट करता है।

शहद के बिजनेस में लागत और मुनाफे का गणित?
कम वक्त और कम लागत में अगर अच्छी कमाई करनी हो तो शहद का बिजनेस बेहतर विकल्प है। अगर आपका बजट कम है तो आप 10 बॉक्स के साथ शुरुआत कर सकते हैं। अगर आपकी खुद की जमीन है तो अच्छी बात है, नहीं है तो किराये पर लेकर भी बॉक्स लगा सकते हैं। बॉक्स रखने के लिए ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती है। 10 बॉक्स की कीमत 30 से 40 हजार रुपए होती है। इसमें पहले से सारा सेटअप लगा होता है। कुल मिलाकर 50 हजार रुपए से कम लागत में आप शुरुआत कर सकते हैं।

एक सीजन में एक बॉक्स से 10 से 12 बार शहद निकाला जा सकता है। एक बॉक्स में करीब 3-4 किलो शहद होता है। यानी एक सीजन में एक बॉक्स से कम से कम 40 किलो शहद निकलता है। अगर आपके पास 10 बॉक्स है तो 400 किलो शहद आप निकाल सकते हैं। अगर मार्केटिंग नेटवर्क अच्छा हो और लोकेशन बढ़िया हो तो एक किलो शहद 250 से 300 रुपए प्रति किलो के दाम में आसानी से बिक जाता है। यानी, एक सीजन में 10 बॉक्स से 1,20,000 रुपए का बिजनेस हो सकता है। अगर लागत निकाल ली जाए तो 70 हजार रुपए तक कमा सकते हैं।