करिअर फंडा4 टिप्स बच्चों की झूठ बोलने की आदत छुड़वा देंगी:बच्चों को इसके दुष्परिणाम बताएं, हलकी-फुलकी सजा सुनाएं

16 दिन पहले

‘झूठ आसान है, सच इतना मुश्किल’

- जॉर्ज एलियट

करिअर फंडा में स्वागत!

मेरे बच्चे झूठ बड़ा बोलते हैं!

वैसे तो मशहूर इंग्लिश कवियत्री और उपन्यासकार जॉर्ज एलियट का यह कथन झूठ बोलने के एक बड़े कारण को उजागर करता है, लेकिन फिर हम सभी अपनी लाइफ के किसी न किसी दौर में बच्चों के झूठ बोलने की आदत से परेशान हुए हैं। क्या आप भी अपने बच्चे या किशोर की झूठ बोलने की आदत से टेंशन में हैं?

तो आज मैं आप को इस विषय पर कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देने जा रहा हूं जो आप इस तरह की परिस्थिति को निपटने में मदद करेगी।

मम्मी पापा का प्रयास

लगभग सभी माता-पिता अपने बच्चों को सच्चा और ईमानदार होना सिखाने की कोशिश करते हैं। जब कोई बच्चा झूठ बोलता है तो माता-पिता को यह अपनी पेरेंटिंग की क्षमताओं पर प्रश्न चिन्ह की तरह लग सकता है, लेकिन इतना अधिक भी घबराने की बात नहीं है।

झूठों के भी प्रकार होते हैं: (1) हमारी डेली लाइफ में छोटे-मोटे झूठ हम सभी बोलते हैं, वास्तव में यह हमारे सामाजिक जीवन के ताने-बाने का हिस्सा है, जबकि कुछ झूठ इनोसेंट होते हैं और महत्वपूर्ण पारस्परिक कार्यों को पूरा करते हैं, पर (2) कुछ झूठ रिश्तों को नुकसान पहुंचाते हैं और विश्वास को नष्ट करते हैं, और (3) कुछ अन्य झूठ अजीब स्थितियों को सुलझाने या किसी के ईगो को सैटिस्फाई करने या किसी में उम्मीद बनाए रखने के लिए बोले जाते हैं।

इसी प्रकार छोटे बच्चों में झूठ बोला जाना या मनगढंत कहानी बनाना नार्मल है, घबराएं नहीं, हां किशोर होने पर जिन चीजों के लिए झूठ बोला गया है वह गतिविधि चिंता का विषय हो सकती है, तो उस पर ध्यान केंद्रित करें, की किशोर या टीनएजर ने क्या छिपाने के लिए झूठ बोला है और फिर उसका उचित सॉल्यूशन निकाले।

बच्चों और किशोरों के झूठ बोलने के तीन मूल कारण

1) डर: कई बार बच्चों और किशोरों के झूठ बोलने का कारण डर हो सकता है।

A) यह डर ज्यादातर मां-पिता से डांट या मार खाने का या मनचाहा काम ना कर पाने का हो सकता है।

B) उदाहरण के लिए बच्चों के हाथ से महंगी क्रॉकरी टूट जाने पर वे डांट पड़ने के डर से पहला झूठ बोल सकते हैं फिर उसे छिपाने के लिए मजबूरन दूसरा झूठ और झूठ पर झूठ बोलने पड़ते हैं।

C) या फिर बच्चे की इच्छा खेलने की हो और आप उसे कुछ काम बता दे तो इस स्थिति में बच्चे काम टालने के लिए झूठ बोल सकते हैं।

2) माता-पिता को खुश करने के लिए: चाइल्ड साइकोलॉजिस्ट्स के अनुसार एक बच्चे का अपने माता-पिता से अनोखा रिश्ता होता है, और बच्चा हमेशा माता-पिता से अपने बॉन्ड के कारण उन्हें खुश देखना चाहता हैं।

A) बच्चे माता-पिता द्वारा अपने से लगाई गई उम्मीदों को लेकर अवेयर भी होते हैं, जैसे ज्यादा मार्क्स लाना, प्ले में अच्छा परफॉर्म करना, इनाम जीतना, चीजों को बढ़ा-चढ़ा कर बताना।

B) लेकिन जब कभी इस तरह की सिचुएशन वास्तव में नहीं बन पाती तो बच्चे माता-पिता को खुश करने के लिए झूठ बोल देते हैं।

C) इस प्रकार के झूठ अक्सर बच्चे की अपनी परफॉरमेंस को लेकर होते हैं, जैसे स्कूल के मार्क्स, किसी एक्टिविटी में पार्टिसिपेशन, होमवर्क को कम्पलीट करने इत्यादि से लेकर हो सकते हैं।

3) बिना कारण के ऐसे ही झूठ बोलना: बच्चों और किशोरों की दुनिया बड़ों की दुनिया से अलग होती है, उनका मेच्योरिटी लेवल अलग होता है।

A) इसलिए कई बार वे ऐसे ही झूठ बोल देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता हैं की तो इससे क्या ही फर्क पड़ जाएगा, बस वो इस बात की केयर ही नहीं करते की क्या बोलना है और जो मन में आया बोल देते हैं।

B) वे अक्सर यह नहीं समझते कि झूठ कितना हानिकारक हो सकता है।

झूठ बोलने की आदत को ठीक करने के चार उपाय

1) जल्दी से हलकी-फुलकी सजा सुना देना: यह बच्चों में झूठ बोलने की आदत को कम करने का एक कारगर उपाय है। एक उदाहरण से समझते हैं।

A) मान लीजिए आप को अपने बच्चे के कमरे से महंगे फूलदान के गिरने की आवाज आती है, और जब आप कमरे में जाते हैं तो अपने बच्चे को हाथ क्रिकेट बैट लिए पाते हैं। अब आप यदि बच्चे से चिल्ला कर ऐसे प्रश्न करेंगे “किसने किया? कैसे हुआ?” तो क्योंकि बच्चे को यह पता नहीं है सजा कितनी गंभीर मिलेगी तो वह झूठ बोल कर बचने की कोशिश करेगा।

B) इसके बजाय यदि आप कहेंगे की शाबाश रोहन तोड़ दिया, अब तुम्हारी अगली तीन बार की चॉकलेट या आइसक्रीम कैंसल, तो बच्चे को अपनी सजा पता है जो ज्यादा गंभीर भी नहीं है तो वह यह सच-सच बताने की कोशिश करेगा की कैसे हुआ।

2) खुद उदाहरण पेश करना: हम खुद भी जाने-अनजाने बच्चों के सामने छोटी-बड़ी बातों पर झूठ बोलते हैं, बच्चे इसी से सीखते हैं। तो बच्चे के सामने अपने स्वयं के व्यवहार पर भी नजर रखने से इस आदत को बच्चों में पड़ने से रोका जा सकता है। माता पिता अपने आप को बार-बार याद दिलाएं कि उनकी सभी आदतें - अच्छी और बुरी दोनों - बच्चों पर पूरा असर डालती हैं।

3) बात करना: बच्चे को झूठ बोलने के परिणामस्वरूप होने वाली समस्याओं के बारे में बताएं लेकिन इसके लिए शर्मनाक शब्दों और स्वरों का उपयोग न करें।

A) अपने बच्चे के साथ उसके डर के बारे में बात करें। उन्हें बताएं कि कैसे सच बोलना समस्याओं को हल करने और एक सफल जीवन की कुंजी है।

B) बताएं कि कैसे झूठ समस्याओं से बचने का लुभावना भ्रम दे सकता है, उदाहरण के लिए होमवर्क पूरा नहीं करने पर बोलै गया झूठ अल्टीमेटली उनके मार्क्स पर असर डाल सकता है।

4) कारण पूछना: यदि आपका बच्चा किसी बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहा है, तो आप पूछ सकते हैं, ‘जो आप मुझे बता रहे थे, उसमें वास्तव में मेरी रुचि थी, लेकिन फिर ऐसा लगा कि आपने इसमें ऐसी चीजें जोड़ना शुरू कर दिया, जो सच नहीं थीं। क्या आप मुझे बता सकते हैं कि आपने ऐसा करने का फैसला क्यों किया?’

और एक अच्छी बात मॉडर्न रिसर्च से सामने आई है कि अच्छी याददाश्त वाले बच्चे अच्छे झूठ बोलते हैं। कहते भी हैं की 'झूठे की याददाश्त बड़ी तेज होती है’! तो यदि आपका बच्चा झूठ बोल रहा है तो संभव है वह अच्छी याददाश्त का मालिक है, अब आपको उसकी इस प्रतिभा को सही और मोड़ने की जरूरत है।

तो आज का करिअर फंडा यह है कि जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते जाते हैं उनके झूठ बोलने पर नजर रखना, और उसे खतरनाक मोड़ ले लेने से बचाना हर पेरेंट का फर्ज है।

कर के दिखाएंगे!

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