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सेलिब्रिटी भी पहन रहे पुराने कपड़े:3 साल में जितना पानी पीते हैं उतना एक जींस बनने में खर्च होता, कूड़े के ढेर में 57% वेस्ट कपड़े

एक महीने पहलेलेखक: ऋचा श्रीवास्तव

शादियों का सीजन चल रहा है। लोग हल्दी, मेहंदी से लेकर फेरों तक हर छोटे-बड़े फंक्शन के लिए अलग-अलग कपड़े खरीद रहे हैं। आपने भी जरूर किसी फंक्शन में जाने के लिए खरीदा होगा, लेकिन शादी के लिए खरीदे गए लहंगे, शेरवानी, हैवी वर्क वाले डिजाइनर कपड़े शायद ही आप दोबारा कभी पहनते होंगे। क्योंकि, आपको लगता होगा कि एक बार पहन लिया तो फिर दोबारा क्यों? लेकिन भइया अब बातें बदल चुकी हैं।

दरअसल, हाल ही में रिक्की केज (इंडियन म्यूजिक कंपोजर) ने अप्रैल 2022 में ग्रैमी अवार्ड्स में जो कपड़े पहने थे वही कपड़े उन्होंने मई 2022 में कांस फिल्म फेस्टिवल में भी पहने। इन्होंने एक पोस्ट शेयर कर लिखा, एक बार पहने जा चुके कपड़ों को दोबारा किसी इवेंट में पहनने में कोई शर्म की बात नहीं है। हैश टैग #ReWear4Earth लिखा। रिक्की ने इस हैश टैग के जरिए कपड़े रिपीट नहीं करने को लेकर सोशल प्रेशर की वजह से पर्यावरण को होने वाले नुकसान की तरफ इशारा किया।

ये नया ड्रेंड इसलिए देखने को मिल रहा है क्योंकि जानी मानी हस्तियां इसे प्रमोट कर रही हैं। जब आप इन कपड़ों को नहीं पहनते हैं और हटा देते हैं तो ये कूड़े का हिस्सा बन जाते हैं। इसे डीकम्पोज होने में सालों लगते हैं। इससे पर्यावरण को काफी नुकसान होता है। आंकड़ों के मुताबिक किसी भी कचरे के ढेर का 57% हिस्सा सिर्फ कपड़ों से भरा होता है।

अब सेलिब्रिटीज भी रिपीट करने लगे हैं कपड़े

सिर्फ रिक्की केज ही नहीं, 2012 में एक्ट्रेस जेनेलिया डिसूजा ने जिस लहंगे को अपने देवर की शादी में पहना था वही लहंगा उन्होंने 2015 में अपने भाई की शादी में भी पहना।

इस लिस्ट में दीपिका पादुकोण भी हैं। दीपिका ने डोलची एंड गब्बाना शिमर ड्रेस पहली बार 2012 में वोग ब्यूटी अवार्ड्स में पहनी थी। इसके बाद 2017 की वैनिटी फेयर ऑस्कर्स पार्टी में दीपिका यही ड्रेस पहनकर शामिल हुईं थीं। साल 2013 में आई फिल्म चेन्नई एक्सप्रेस और 2016 की फिल्म पद्मावत के प्रमोशनल इवेंट्स में दीपिका ने सेम वाइट अनारकली सूट पहना था।

कंगना रनौत दो अलग-अलग फिल्म प्रमोशन इवेंट्स में सेम कपड़ों में नजर आईं थीं।

वहीं, अनुष्का शर्मा दो बार एयरपोर्ट पर सेम कपड़ों में स्पॉट की गईं।

सोनम कपूर भी दो अलग-अलग इवेंट्स में इस ड्रेस में नजर आ चुकी हैं।

सारा अली खान ने 2012 में सैफ और करीना कपूर की शादी में जो अनारकाली सूट पहना था वही सूट दोबारा 2017 की दीवाली पार्टी में भी पहना।

जाह्नवी कपूर ने जो जीन्स और टॉप 2016 में अपनी US ट्रिप पर पहनी थी। अगले साल वही सेम जीन्स और टॉप में एड् शीरन के एक कॉन्सर्ट में गईं थीं।

कोई आम व्यक्ति किसी फंक्शन में दोबारा कपड़ों को रिपीट करना नहीं चाहता है, लेकिन सेलिब्रिटी अब ऐसा कर रहे हैं। दरअसल, जब भी सेलेब्रिटी किसी पब्लिक प्लेस में नजर आते हैं, उनके कपड़ों और लुक्स की चर्चा जरूर होती है। फिल्म प्रमोशन और अवॉर्ड फंक्शन में भी सेलेब्रिटी क्या पहन रहे हैं, इस पर भी लोगों की नजर रहती है।

ऐसे में ये सेलेब्स सोच समझकर फैशन और ट्रेंड के मुताबिक खुद को स्टाइल करते हैं। इस दौरान इनकी ये कोशिश रहती है की कोई भी कपड़ा रिपीट न हो, लेकिन बीते कुछ समय से देखा जा रहा है कि सेलेब्रिटी कपड़े रिपीट करने से नहीं झिझक रहे हैं।

स्टाइलिश दिखने की रेस है फास्ट फैशन
हर कोई चाहता है की उनके पास उनके फेवरेट सेलिब्रिटी जैसे स्टाइलिश कपड़े हों। सोशल मीडिया इंफ्लुएंर्स भी इसी रेस में हैं। इस रेस में आगे रहने के लिए जहां एक तरफ लोग सेलेब्रिटी वियर को रीक्रीएट करने की होड़ में हैं, वहीं कुछ लोग हर छोटे-बड़े फंक्शन के लिए ट्रेंड के हिसाब से नए कपड़े खरीद लेते हैं।

भारत में Zara, H&M, GAP, Forever21 और Uniqlo ऐसे ब्रांड्स हैं जो सेलेब्रिटी वियर को जल्द-से -जल्द कम दामों में बाजार में ले आते हैं। इन बेहतरीन कपड़ों को जल्द-से-जल्द लोगों को मुहैया कराने को ‘फास्ट’ फैशन कहते हैं।

अलमारी भरी पड़ी है पर पहनने को कुछ नहीं है
आई हैव नथिंग टु वियर, यानी मेरे पास पहनने के लिए कुछ नहीं है जैसे नखरे फास्ट फैशन की ही उपज है। दरअसल, ब्रांडस अपने फायदे को बरकरार रखने के लिए बार-बार कोई नया ट्रेंड मार्केट में ले आते हैं। कपड़े रिपीट न करने के सोशल प्रेशर और पुराने ट्रेंड के कपड़ों के कम पहने जाने के कारण जरूरत से ज्यादा कपड़े इकट्ठे होते जाते हैं और कुछ समय बाद हटा दिए जाते हैं।

ऐसे में सवाल उठता है कि एक बार पहन जा चुके कपड़ों को दोबारा पहनने में शर्म क्यों आती है ? क्या पहने कपड़ों पर इतना खर्च करना और फिर इन्हें यूं ही कूड़े में जाने देना सही है ?

यहां हम बता रहे हैं कि कैसे टेक्सटाइल इंडस्ट्री हमारे प्राकृतिक संसाधनों को बेपरवाही से खत्म करती जा रही है? आपको ये जानकर हैरानी होगी की 3 साल में एक इंसान जितना पानी पीता है उतना पानी सिर्फ एक जींस बनाने में खर्च हो जाता है।

फास्ट फैशन से पर्यावरण को हो रहा नुकसान

  • पूरी दुनिया में शिपिंग और इंटरनेशनल एयर ट्रेवल से हवा जितनी प्रदूषित होती है उससे कहीं ज्यादा वायु प्रदुषण केवल टेक्सटाइल इंडस्ट्री से निकलने वाली कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), और मीथेन जैसी ग्रीन्हाउस गैस से होता है।
  • हर साल 5.30 करोड़ टन कपड़े के धागे का प्रोडक्शन होता है जिसमें से 70% सीधा कचरे में जाता है।
  • UN एनवायरनमेंट प्रोग्राम के मुताबिक, एक इंसान 3 साल में 3781 लीटर पानी पीता है। आंकड़ों के मुताबिक, इतना ही पानी सिर्फ एक जींस बनाने में खर्च हो जाता है।
  • पॉलिएस्टर और ऐक्रेलिक जैसे सिन्थेटिक फाइबर्स प्लास्टिक पॉलीमर्स से बनते हैं। इन्हें डीकोम्पोज होने में 200 साल तक लग सकते हैं।
  • सिन्थेटिक कपड़ों में सिर्फ ऐक्रेलिक को रीसाइकल किया जा सकता है, लेकिन ये प्रोसेस आसान नहीं होती है जिसके कारण रीसाइक्लिंग कम हो पाती है।
  • सैटिन जैसे सिन्थेटिक कपड़े वाटर रीपेलिंग होते हैं। जिसका मतलब है की इन कपड़ों की सतह पर पानी टिक नहीं पाता। इस वजह से इन कपड़ों को धोने के लिए भी ज्यादा पानी की जरूरत होती है।
  • कपड़ों को रंगने के लिए डाइइंग की जाती है। इसमें एक साल में करीब 20,000 टन पानी का इस्तेमाल होता है। डाइइंग के बाद केमिकल युक्त ये पानी सीधे नदी-नालों में जाकर प्रदूषण फैलता है।
  • एक कपड़ा बेकार होने से पहले सिर्फ 7 बार पहना जाता है, जिसके बाद वो इस्तेमाल से बाहर हो जाता है। एक रिसर्च के मुताबिक, कचरों के ढेर का 57% हिस्सा सिर्फ कपड़ों से भरा होता है।

बदलते दौर के साथ स्लो होता फैशन
अब स्लो फैशन का दौर चल पड़ा है। फैशन अब स्लो एंड सस्टेनेबल होता जा रहा है। फास्ट फैशन से पर्यावरण को जो नुकसान हो रहा है वो इतना डरावना है कि लोग अब स्लो फैशन की ओर बढ़ रहे हैं।

पर्यावरण के लिए फायदेमंद है सस्टेनेबल फैशन
लोग अब सस्टेनेबल फैशन की तरफ बढ़ रहे हैं। मार्केट में दर्जनों सस्टेनेबल ब्रांड्स आ चुके हैं। Renge, Maati By Neha Kabra और InSom जैसे ब्रांड्स हैं जो कपड़ों के प्रोडक्शन के लिए ऑर्गेनिक मैटीरियल का उपयोग कर रहे हैं। वहीं OriginStudio जैसे कुछ स्टार्ट-अप्स भी हैं जो कॉटन और सिल्क जैसे ऑर्गेनिक मैटीरियल से न सिर्फ कपड़े बल्कि शर्ट और ब्लाउज के बटन, लहंगे के लटकन तक बना रहे हैं।

कपड़ों को रंगने के लिए भी अब आर्गेनिक डाई का इस्तेमाल हो रहा है। सिर्फ कपड़े ही नहीं बल्कि बैग्स, शूज, मेकअप और ज्वेलरी भी आर्गेनिक होती जा रही है। Mio Borsa पहली इंडियन ब्रांड है जिसने वीगन लेदर बनाया है। इनका इको फ्रेंडली लेदर पू प्लांट और पाइन एप्पल स्टेम से बनाया जाता है।