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जमीन बेचकर शुरू की पहली कंपनी:आज Facebook से सालाना एक करोड़ की कमाई, ड्रॉप शिपिंग से अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में कस्टमर्स

2 महीने पहलेलेखक: नीरज झा

2011 का साल था। कॉलेज पासआउट होने के ठीक एक साल बाद टी-शर्ट प्रिंट करने की कंपनी ‘वेलेंटो’ स्टार्ट की। पैसे थे नहीं, तो एक जमीन बेचनी पड़ी और 2 लाख रुपए जुटाए। मिडिल क्लास फैमिली और क्या ही कर सकती है।

दो दोस्तों के साथ मिलकर 8 लाख इंवेस्ट किए, लेकिन कुछ साल बाद दोस्तों की फैमिली का रवैया बदल गया। वो अलग हो गए। कंपनी चलाने में दिक्कतें आने लगीं तो नागपुर से भोपाल शिफ्ट हो गया। यहां बड़े भाई पहले से रहते थे तो एक सहारा मिल गया।

लेकिन इन प्रोडक्ट्स को बेचने के लिए एक प्लेटफॉर्म की जरूरत थी। देखा कि अब मार्केट ऑनलाइन शॉपिंग पर शिफ्ट हो रहा है। जिसके बाद साल 2019 में ‘लेजी पैंथर’ नाम से ड्रॉप शिपिंग कंपनी की शुरुआत की।

अब टी-शर्ट के अलावा कई और प्रोडक्ट्स अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया जैसे टियर-1 कंट्रीज में चीन से ड्रॉप शिपिंग मेथड के जरिए बेच रहा हूं। आज इससे सालाना एक करोड़ से अधिक का टर्नओवर है। ये बिजनेस इंडिया में अभी भी बहुत कम लोग ही कर रहे हैं।

दरअसल, ड्रॉप शिपिंग बिजनेस में कोई भी व्यक्ति बिना किसी प्रोडक्ट्स को खरीदे, उसे स्टोर किए हुए, कस्टमर को बेचता है। यानी जब कोई कस्टमर कोई प्रोडक्ट ऑनलाइन ऑर्डर करता है, तो ड्रॉप शिपिंग कंपनी उस प्रोडक्ट का ऑर्डर उसके सप्लायर के पास भेजती है। फिर सप्लायर प्रोडक्ट को सीधे कस्टमर को डिलीवर करता है।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित ऑफिस में बैठे सीरियल एंटरप्रेन्योर के नाम से फेमस रितेश रंगारे अपने कंप्यूटर पर Facebook पेज के जरिए कुछ काम करते हुए ये बातें हमारे साथ शेयर कर रहे हैं।

रितेश बताते हैं, भारत समेत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सोशल प्लेटफॉर्म्स में से एक Facebook है। लोग FB घंटों चलाते हैं, समय बर्बाद करते हैं। लेकिन हमने Facebook को कमाई का जरिया बना लिया है।
रितेश बताते हैं, भारत समेत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले सोशल प्लेटफॉर्म्स में से एक Facebook है। लोग FB घंटों चलाते हैं, समय बर्बाद करते हैं। लेकिन हमने Facebook को कमाई का जरिया बना लिया है।

रितेश अपनी कुर्सी हमारी तरफ घुमाते हुए कहते हैं, लोगों को कोई भी बिजनेस करने से पहले यही लगता है कि इसके लिए मोटी रकम, बड़ा-सा ऑफिस, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट, प्रोडक्ट को रखने के लिए गोदाम, काम करने के लिए दर्जनों लोग की जरूरत होती है, लेकिन ड्रॉप शिपिंग में इसकी कोई जरूरत नहीं है।

बस इंटरनेट कनेक्शन, एक लैपटॉप, वेबसाइट, सोशल मीडिया की अच्छी समझ और किन देशों के किन कस्टमर्स को किस तरह के प्रोडक्ट की जरूरत है, इसे टारगेट करने का स्किल होना चाहिए।

रितेश रंगारे नागपुर के रहने वाले हैं। NIT कालीकट से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। वो अपने कॉलेज के दिनों का एक किस्सा बताते हैं, पार्ट-वन के बाद से ही बिजनेस में इंट्रेस्ट था। उस वक्त घर वाले जितने पैसे खर्च के लिए भेजते थे, उसका तीन गुना तो मैं खुद ही कमा लेता था।

मेरी उम्र 18 साल थी। कॉलेज को जब ये बातें पता चली तो उन्होंने मेरे खिलाफ एक्शन ले लिया। घर वालों को लिखित शिकायत भेजी। मुझे काम बंद करना पड़ा, लेकिन मन बिजनेस में ही लगा रहा।

रितेश एक साथ कई स्टार्टअप्स चला रहे हैं। वो MP में स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए 2016 से ‘स्टार्टअप स्पेस स्टेशन’ नाम से एक कंपनी भी चला रहे हैं। यह कंपनी छोटे-छोटे स्टार्टअप्स के लिए एंजेल इन्वेस्टर्स से फंडिंग दिलाने का काम करती है। अब तक उनकी कंपनी कुल 8 से 10 करोड़ की फंडिंग दिला चुकी है।

हर डील में उन्हें 5% से 10% का फिक्स कमीशन मिलता है। रितेश कहते हैं, फंडिंग दिलाने के लिए सबसे ज्यादा आइडिया के साथ-साथ प्रेजेंटेशन का कमाल होता है। यदि हम एक साथ कई बिजनेस को संभाल सकते हैं, तो करना चाहिए।

इससे यदि एक कंपनी में नुकसान होता है, तो हम दूसरी कंपनी से इसकी भरपाई करते हैं। नुकसान के वक्त घबराने की नहीं, एनालिसिस करने की जरूरत है। जहां फायदा होगा, वहां नुकसान की संभावना भी बनी रहती है।

अब रितेश ड्रॉप शिपिंग बिजनेस पर फोकस कर रहे हैं। वो बताते हैं, शुरुआत में पता नहीं था कि इस बिजनेस को कैसे करना है? कहां से ट्रेनिंग लेनी है? प्रोडक्ट को कैसे बेचना है?

रितेश आगे कहते हैं, ट्रेनिंग के बाद अपना वेंचर 2019 में स्टार्ट किया। Shopify जैसी ई-कॉमर्स साइट पर अपनी वेबसाइट बनाकर लिस्टिंग की और Facebook Ads के जरिए मार्केटिंग करना शुरू किया। इंटरनेशनल लेन-देन के लिए Paypal (पेपल) पर अकाउंट क्रिएट किया।

फिर आप ड्रॉप शिपिंग के जरिए प्रोडक्ट्स बेचना कैसे शुरू किया? रितेश इस प्रोसेस को समझाने के लिए अपना कंप्यूटर फिर से ऑन करते हैं।

कहते हैं, शुरुआत में सिर्फ टी-शर्ट ही बेचता था, लेकिन जब धीरे-धीरे ग्रोथ होने लगी और यूजर्स के बीच पहुंच बनने लगी, तो प्रॉब्लम सॉल्विंग प्रोडक्ट्स के बारे में पता चला। ड्रॉप शिपिंग में इन प्रोडक्ट्स की डिमांड सबसे ज्यादा है। फिर क्या था, चीन से टियर-1 देशों के टॉप-6 कंट्रीज में इसे बेचना शुरू कर दिया।

प्रॉब्लम सॉल्विंग प्रोडक्ट्स में गार्डेनिंग टूल्स, फिशिंग टूल्स, बॉक्सिंग ग्लव्स, बेबी बाउल जैसे प्रोडक्ट आते हैं, जिसे लोग तुरंत मंगवाना चाहते हैं।

चीन से प्रोडक्ट खरीदने के पीछे की वजह के बारे रितेश रंगारे बताते हैं। कहते हैं, चीन में ये प्रोडक्ट्स काफी सस्ते हैं, अच्छे सप्लायर्स मिल जाते हैं। सर्विस अच्छी है और वहां इसका बिजनेस कई सालों से बूम कर रहा है। दुनिया का कोई भी कोना हो, हर किसी को अब घर बैठे प्रोडक्ट चाहिए।

प्रोडक्ट के हिसाब से ग्लोबल कंपनी अलीबाबा और अलीएक्सप्रेस पर सप्लायर्स को सर्च कर उनसे WeChat के जरिए संपर्क किया। किस सप्लायर पर ट्रस्ट किया जाए, इसके लिए उनके रेटिंग प्वाइंट्स और रिव्यू देखे।

इसमें सौदेबाजी भी करनी पड़ती है। MRP खुद से फिक्स करना होता है। यही कमाई का सबसे बड़ा मेथर्ड है।

यानी यदि कोई प्रोडक्ट मार्केट में 100 रुपए में बिक रहा है। उसे हम चाह रहे हैं कि कस्टमर को 80 रुपए में मिल जाए, तो इसके लिए सप्लायर को 50 रुपए में बेचने के लिए राजी कर सकते हैं। इससे हमारी बचत 30 रुपए की होती है।

हमें पहले से Paypal अकाउंट में बैलेंस भी रखना होता है, ताकि सप्लायर्स को ऑर्डर के मुताबिक पैसा ट्रांसफर किए जा सके। इसके लिए शुरुआत में 2 से 5 लाख रुपए की जरूरत होती है।

ड्रॉप शिपिंग में कस्टमर तक पहुंचने का सबसे बड़ा रोल Facebook का ही होता है। इसमें प्रोडक्ट से रिलेटेड Video Advertisement बनाकर Facebook के जरिए प्रमोट करना होता है। Facebook Ads Manager में वो सारे ऑप्शन मौजूद हैं।

यदि स्टूडेंट्स को प्रोडक्ट बेचना है, इन्हें टारगेट करना है, तो इनसे जुड़े प्रोडक्ट्स के Ads सिर्फ उन्हीं को दिखेंगे। इसके बदले Facebook को करीब 2 से 3 हजार रुपए प्रति महीने देने होते हैं। यह डिमांड और सर्विस के मुताबिक बदलता रहता है।

Amazon, Flipkart जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से इतर ड्रॉप शिपिंग बिजनेस अलग तरीके से काम करता है। ये सभी ब्रांड से कनेक्टेड होते हैं। हालांकि, इस पर भी कोई कंपनी खुद को लिस्ट यानी रजिस्टर करवा सकती है।

रितेश आखिर में ड्रॉप शिपिंग बिजनेस मॉडल के कुछ नुकसान भी बताते हैं। कहते हैं, कोरोना काल में मेरे भी 5 लाख रुपए फंस गए थे। दरअसल, जब इन ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को लगता है कि आप कुछ गड़बड़ी कर रहे हैं, तो वो अकाउंट्स को ब्लॉक कर देते हैं। हालांकि, यदि आपने कोई गड़बड़ी नहीं की है, तो कस्टमर केयर इन मामलों को सुलझा देता है।

जो भी इस बिजनेस को शुरू करना चाहते है, उन्हें इसके पूरे मॉडल को पहले समझ लेना चाहिए। क्योंकि, ये अलग-अलग भाषाओं वाले देशों पर आधारित बिजनेस है। इसमें लैंग्वेज की भी दिक्कतें आती है।