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उत्तराखंड त्रासदी:टूटे ग्लेशियर के मलबे से ऋषिगंगा का बहाव रुका; जमे पानी ने झील की शक्ल ली, यह टूटी तो बाढ़ जैसे हालात होंगे

नई दिल्लीएक वर्ष पहले
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उत्तराखंड के चमोली में ग्लेशियर फटने के बाद मलबा जमा होने के कारण ऋषिगंगा नदी की अपस्ट्रीम ( ऊपरी धारा) में बहाव रुक गया है। बहाव थमने के चलते नदी के पानी ने झील की शक्ल ले ली है। लगातार पानी के बढ़ते दबाव के कारण अगर झील टूटी तो पहाड़ों से पानी काफी रफ्तार से नीचे आएगा, जो निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर सकता है। अगर ऐसा हुआ तो राहत कार्य भी प्रभावित होगा। त्रासदी के बाद आई सैटेलाइट इमेज और ग्राउंड जीरो से आ रही एक्सपर्ट की रिपोर्ट्स में ऐसी आशंका जताई गई है। आइए, इस पूरी भौगोलिक प्रक्रिया को समझते हैं...

ग्लेशियर जिस जगह पर टूटा है, वह हिमालय का काफी ऊपरी हिस्सा है। उसे रौंटी पीक के नाम से जाना जाता है। रौंटी पीक से ग्लेशियर टूटने के बाद वह सीधे ऋषिगंगा नदी में नहीं गिरा। बल्कि, ग्लेशियर भारी मलबे के साथ, जिस धारा में बहा उसे रौंटी स्ट्रीम कहते हैं। रौंटी स्ट्रीम थोड़ा नीचे आकर दूसरी तरफ से आ रही ऋषिगंगा में मिल जाती है। रौंटी​ स्ट्रीम से आए तेज बहाव और मलबे के कारण ऋषिगंगा में भी बाढ़ आ गई। यह बाढ़ इतनी भयानक थी कि ऋषिगंगा पर बने दो पावर प्रोजेक्ट तबाह हो गए।

जलस्तर कम होने के बाद तस्वीरों में साफ नजर आ रहा है कि ग्लेशियर टूटने के बाद रौंटी स्ट्रीम और ऋषिगंगा के संगम पर भारी मलबा और गाद जमा है। जिससे वहां, एक अस्थायी बांध जैसा बन गया है और ऋषिगंगा का बहाव लगभग ठप हो गया है। नीचे पहाड़ पर जो पानी आता दिख रहा है, वह रौंटी स्ट्रीम से आ रहा है।

उत्तराखंड पुलिस ने बताया है कि SDRF की टीम तपोवन के पास रैणी गांव के ऊपर की ओर बनी झील तक पहुंच गई है। यह झील लगभग 350 मीटर लंबी लग रही है।
उत्तराखंड पुलिस ने बताया है कि SDRF की टीम तपोवन के पास रैणी गांव के ऊपर की ओर बनी झील तक पहुंच गई है। यह झील लगभग 350 मीटर लंबी लग रही है।

वाडिया इंस्टिट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून के निदेशक कलाचंद सैन इस बारे में कहते हैं, 'मौके पर पहुंची टीम और एरियल फोटोग्राफ से लग रहा है कि ऋषिगंगा और रौंटी स्ट्रीम के मिलने की जगह पर एक झील जैसी संरचना बन गई है। वहां जमा पानी का रंग नीला नजर आ रहा है, जिसका मतलब है कि पानी कई दिनों से जमा हो रहा है।'

अगर यह झील पानी के बढ़ते दबाव के कारण टूटी तो क्या फिर सैलाब जैसे हालात बन सकते हैं? कलाचंद सैन इस बारे में दो संभावनाएं जताते हैं।

  1. चूंकि, जमा पानी का रंग नीला दिखाई दे रहा है। इसलिए हो सकता है कि यह पानी काफी पुराना हो और ऋषिगंगा की ऊपरी धारा में इस तरह की पहले से कोई झील हो। अगर ऐसा है तो यह बहुत चिंता की बात नहीं है।
  2. मौके पर पहुंचे साइंटिस्ट्स की रिपोर्ट के मुताबिक, मलबा और गाद जमा होने के कारण ऋषिगंगा का फ्लो रुका हुआ है। इसका मतलब है कि नदी का पानी कहीं न कहीं इकट्‌ठा हो रहा है। ऐसे में यह जानना सबसे जरूरी है कि ऋषिगंगा के पास जो झील दिख रही है, वह कितनी बड़ी है और उसमें कितना पानी जमा है। अगर झील बड़ी हुई तो उसके टूटने से पहाड़ के निचले हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति बन सकती है। अगर झील बड़ी हुई तो वहां से पानी को कंट्रोल्ड तरीके से निकालने के उपाय करने होंगे।

गुरुवार को ऋषिगंगा का जलस्तर बढ़ जाने के कारण तपोवन में चल रहा राहत कार्य रोकना पड़ा था। चमोली के स्थानीय प्रशासन का कहना है कि ऋषिगंगा नदी के बहाव रुकने की उन्हें जानकारी है, ITBP को भी इस बारे में सूचित किया गया है। ऋषिगंगा के बहाव रुकने और वहां पर झील बनने की रिपोर्ट्स के बाद वहां पर NDRF की एक टीम भेजने की भी योजना बनाई जा रही है।

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