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बात बराबरी की:रेप पर चुटकुला केक पर सजी वो चेरी है, जिसे हर मर्द मुंह में रखकर चटखारे भरना चाहता है

नई दिल्लीएक महीने पहलेलेखक: मृदुलिका झा
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साल 1872 की बात है, जब चार्ल्स डार्विन ने चिंपाजियों को एक-दूसरे को हंसाते देखा। दूसरे वैज्ञानिकों ने भी ये हंसी-ठिठोली देखी और दावा किया कि मादा को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए नर चिंपाजी उन्हें गुदगुदाते हैं। यानी नर हंसाने वाले की भूमिका में, जबकि मादा उनके चुटकुलों पर हंसने वाली। चिंपाजियों पर हुई स्टडी हम इंसानों पर भी लागू हो गई, लेकिन थोड़ी घालमेल के साथ।

अब मर्दों के पास ह्यूमर है, जबकि औरत के पास दो ही काम हैं, या तो वे मर्दों के चुटकुलों पर लुढ़की मारकर हंसेंगी, या रो पड़ेंगी।

दो रोज पहले इंटरनेशनल जोक डे बीता। लंबी-चौड़ी बातों के बीच दावा हुआ कि मजेदार लतीफों से न सिर्फ दिन शानदार जाता है, बल्कि ऐसे आदमी को नौकरी में तरक्की भी जल्दी मिलती है।

प्रेजेंटेशन में बॉस ऐसे कर्मचारी को साथ रखते हैं। कुलीग उसके साथ चाय पर जाने को क्यू में खड़े रहते हैं। यहां तक कि दरवाजे पर खड़े गार्ड भी ऐसे लोगों को तगड़ा सलाम ठोंकते हैं, लेकिन ये सब तभी, जब चुटकुलेबाज आदमी मर्द हो। औरत होते ही सारी चीजें यू-टर्न ले लेती हैं।

यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की सोशल रिसर्च टीम ने इसे समझने के लिए दो हिस्सों में स्टडी की, जिसमें कुल 216 लोग शामिल थे। मजाक करने वाले लोगों को लेकर प्राइवेट और सरकारी दोनों ही ऑफिसों में एक ही ट्रेंड मिला। हर जगह मजाकिया औरत को काम से जी चुराने वाला और ‘एवलेबल’ माना गया।

रिसर्च में शामिल औरतों ने यह भी बताया कि मजाक करने के कारण मर्द कुलीग उनसे फ्लर्ट करने लगे। वे पक्का थे कि जोक्स सुनाना भी एक किस्म का सिग्नल था, जो शर्मीली जनानियां अपने अंदाज में दे रही थीं। अप्लाइड साइकोलॉजी में छपी रिसर्च ने इसे फर्क को ‘ह्यूमर गैप’ कहा।

कुल मिलाकर ह्यूमर की दुनिया वो फोटोग्राफ है, जिसकी सुहानी वादियां, सुरमई बादल और नीला पानी देखकर हम सीधे हवाई टिकट कटाकर वहां निकल पड़ते हैं, लेकिन पहुंचने के बाद अलग ही नजारा दिखता है। पहाड़ियों पर पहाड़ के अलावा बाकी सब कुछ है। नीला-गहरा पानी किसी पोखरी जितना छोटा है। और, शोर ऐसा कि कल्लू मियां की शादी में दावत खाने आए हों। हंसने-हंसाने की दुनिया भी कुछ ऐसा ही भरम बनकर रह गई।

स्टैंड-अप कॉमेडी करने वाले मर्दों के ज्यादातर लतीफे औरतों के शरीर के इर्द-गिर्द चक्कर काटते हैं। कोई पत्नी की हंसी उड़ाता है, कोई महिला बॉस की। वहीं रेप जोक्स केक पर सजी वो चेरी है, जिसे हर मर्द मुंह में रखना चाहता है।

वेस्टर्न कैरोलिना यूनिवर्सिटी की स्टडी में शामिल 3387 पुरुषों में से लगभग 90 प्रतिशत मर्दों ने माना कि वे रेप जोक्स को चटखारे लेकर सुनते-सुनाते हैं। ऐसे खुफिया लतीफों के बाद वे खुद को ज्यादा ताकतवर महसूस करते हैं। कईयों ने ये भी माना कि औरतें लज्जत देने की चीज हैं, चाहे वो घर पर दें, या फिर चुटकुलों में।

अमेरिकी स्टैंड-अप कॉमेडियन डेनियल तोश अपने रेप जोक्स के कारण ही देश के मशहूर कॉमेडियन्स में शुमार होने लगे। कुछ साल पहले जब कुछ फेमिनिस्ट औरतों ने इसका विरोध किया तो जवाब मिला- अभी इसी मंच पर पांच मर्द एक रोती हुई औरत का रेप करें तो क्या ये देखने में मजेदार नहीं लगेगा।

तोश का ये कहना था कि नीचे बैठी मर्द ऑडियंस सीटियां बजाने लगी और कहने लगी कि फेमिनिस्ट चुटकुलों को भी स्कूल का चैप्टर बना देना चाहती हैं। वे अपने भाषणों जितनी ही उबाऊ होती हैं। फिर क्या था! औरतों के रेप और उनकी कुंदजहनी को लेकर इतने चुटकुले गढ़े गए, जितने किस्म की आलू से सब्जियां न बनें।

सवालों-जवाब की वेबसाइट कोरा पर सवाल है- क्यों ज्यादातर औरतें ऐसे मजाक नहीं कर पातीं, जिन्हें सुनकर हंसी आए? क्या उनके बारे में ऐसा सोचना सेक्सिस्ट है? सवाल किसी बेचेहरा, बेनाम शख्स ने किया। खैर, इसकी तफसील में जाए बगैर जवाब पढ़ते हैं- कोई भी औरत मजाकिया नहीं होती। वे चुटकुला सुनाने की कोशिश भी करें तो बच्चे पैदा करने, गायनो से मुलाकात और डेट में मिले धोखे पर जाकर रिरियाने लगती हैं।

कई औरतें अपने मोटापे, या बदसूरती पर भी मजाक कर पातीं हैं, लेकिन सोसायटी, राजनीति या ऐसी चीजों को वे छू भी नहीं पातीं। अब ऐसी औरतें अगर खुद को कॉमेडियन कहने लगेंगी तो मर्द बेचारे कहां जाएंगे!

लब्बोलुआब ये कि औरतों को मजाक करना नहीं आता! उनका काम मर्दाना मुखारविंद से झरते चुटकुलों पर लोटपोट होना ही है।

चुटकुलेबाज मर्द औरतों को कितने-कितने पसंद आते हैं- इस पर दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने चालीसा लिख डाली। कंसास यूनिवर्सिटी की सेक्शुअल सलेक्शन एंड ह्यूमन इन कोर्टशिप नाम से छपी स्टडी में बताया गया कि औरत अगर किसी अनजान मर्द के चुटकुलों पर खुलकर हंसती है तो बहुत मुमकिन है कि वो उसे पसंद करने लगी हो।

यूनिवर्सिटी के 2 हजार 5 सौ से ज्यादा स्टूडेंट्स पर ये स्टडी हुई। इसमें ये भी दिखा कि अगर लड़की में ज्यादा ह्यूमर है तो लड़के उससे दूर भागते हैं। वे डरते हैं कि आगे चलकर ऐसी लड़की उन पर भारी पड़ जाएगी।

जो मर्द कद, वजन और उम्र में भी अपने से कमतर युवती तलाशते हैं, वे धारदार लड़की को भला कैसे अपना सकेंगे। तो हंसने-हंसाने वाली लड़कियां अकेली छूट जाती हैं, जब तक कि वे हार मानकर भद्दे मर्दाने चुटकुलों पर हंसना शुरू न कर दें।

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