लग्जरी लाइफ:कभी दिवालिया होने वाला था गूची पर आज सबसे महंगा, सबसे लग्जीरियस ब्रांड

6 दिन पहलेलेखक: आतिश कुमार
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दुनिया में बहुत कम ऐसे ब्रांड्स हैं, जिन्हें आप देखते ही पहचान जाएं... गूची ऐसे ही ब्रांड्स में से एक है। एलेसेंड्रो मिशेल के मैक्सिमलिस्ट डिजाइन से लेकर ब्रांड में टॉम फोर्ड के दौर में चले सेक्सी अभियानों तक, ऐसा समय कभी नहीं आया, जब गूची अपने फैशन सेन्स को लेकर ओवर द टॉप नहीं रहा। लेकिन, हमेशा से गूची ऐसा नहीं था। गूची के प्रोडक्ट्स के साथ-साथ अगर आपको इसके इतिहास को जानने में भी उत्सुकता है तो आप बिल्कुल सही जगह हैं। आज लग्जरी लाइफ में ब्रांड गूची की कहानी…

लंदन के फैशन से प्रभावित होकर गुचियो गूची ने शुरू किया ब्रांड
गुचियो गूची ने 1921 में इटली के फ्लोरेंस में इस मशहूर फैशन हाउस की स्थापना की। अपने ही नाम से लेबल शुरू करने से पहले गूची ने लंदन के सेवॉय होटल में कुली व लिफ्टमैन का काम किया। होटल में आने-जाने वाले रईस मेहमानों से प्रेरित होकर वह एक फैशन कंपनी फ्रांजी में काम करने के लिए घर लौट आए।

खुद का बिजनेस शुरू करने से पहले लेदर क्राफ्ट को उसी कंपनी में सीखा। अपना ब्रांड लॉन्च करने के बाद सबसे पहले गूची ने लेदर से बने सामान ही बेचे। गूची ब्रांड की शुरुआत भले ही इटली में हुई हो, लेकिन इसका स्टाइल काफी हद तक लंदन के फैशन से प्रभावित था।

सेलिब्रिटीज ने गूची को सेंसेशनल बना दिया
गूची की मृत्यु के बाद के वर्षों में भी गूची ब्रांड पहले की तरह चलता रहा। 1953 में ही एलिजाबेथ टेलर जैसी सेलिब्रिटी की बैम्बू से बने बैग और हॉर्सबिट लोफर के साथ फोटो वायरल हुई। इसके बाद 1961 में जब अमेरिका की फर्स्ट लेडी जैकलीन कैनेडी को गूची बैग ले जाते हुए देखा गया, तो फैशन हाउस ने इसका नाम बदलकर 'द जैकी' कर दिया।

गूची के डिजाइनों पर मोनाको की रानी ग्रेस केली का भी प्रभाव था। 1966 में जब उन्होंने बैम्बू से बने बैग को खरीदा तो रोडोल्फो गूची ने उन्हें विशेष रूप से उनके लिए बनाया गया एक फ्लोरल स्कार्फ गिफ्ट में दिया। स्कार्फ का फ्लोरल पैटर्न प्रसिद्ध कलाकार विटोरियो एकोर्नरो ने बनाया था और बाद में इसे 'फ्लोरा' प्रिंट नाम दिया गया।

गद्दी की लड़ाई में दीवालिया होने की कगार पर था गूची
गूची ने अपना पहला रेडी-टू-वियर फैशन शो 1981 में किया। इसका कलेक्शन फ्लोरा पैटर्न पर ही बेस्ड था। शो फ्लोरेंस में हुआ। 80 के दशक की शुरुआत से गूची के पोते भी कंपनी में काम करने लग गए थे। उस वक्त परिवार में इस बात को लेकर भी झगड़ा चल रहा था कि आखिर गूची की गद्दी किस की होगी।

आखिरकार रोडोल्फो के बेटे मौरिजियो ने अपने चचेरे भाई और अंकल एल्डो को कंपनी से बाहर कर गूची की गद्दी को अपने नाम कर लिया। इसके बाद 1989 में एक होल्डिंग कंपनी इन्वेस्टकॉर्प ने गूची के लगभग आधे हिस्से का टेकओवर कर लिया। कंपनी में काफी कुछ बदल गया था, परिवार की कलह और टेकओवर की वजह से गूची दिवालिया होने के कगार पर जाने लगा।

टॉम फोर्ड ने गूची को संभाला
असली बदलाव 1990 में हुआ, जब टॉम फोर्ड नाम के एक युवा डिजाइनर की एंट्री हुई। शुरुआत में टॉम ने गूची के रेडी टू वियर कलेक्शन को देखा, लेकिन 1994 में फैशन हाउस के क्रिएटिव डायरेक्टर बन गए। इस दौरान मौरिजियो गूची ने अपने बाकी शेयर भी इन्वेस्टकॉर्प को बेच दिए। कुछ महीने बाद 1995 में मौरिजियो की हत्या कर दी गई।

इसके बाद फोर्ड ने डिजाइन का जिम्मा ऐसा संभाला कि गूची को पुनर्जीवन मिल गया। फोर्ड को वो डिजाइनर माना जाता है, जिसने फैशन की दुनिया को हाईपरसेक्सुअल डिजाइन और कैम्पेन इमेजरी दी। फोर्ड का फॉल 1995 कलेक्शन और मिनीमलिस्ट 90 के दशक की बड़ी कमर्शियल सफलता थी।

गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में गूची
गूची की जीनियस जींस ने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी अपना नाम दर्ज कराया था। 90 के दशक में ये जींस 2 लाख 43 हजार में बिकी थी, उस वक्त यह दुनिया की सबसे महंगी जींस थी। कुछ सालों बाद ये रिकॉर्ड लिवाइस ने तोड़ा था। 2005 में लिवाइस की जींस एक जापानी ने 46 लाख में खरीदी थी।

महंगा होने के बावजूद भी गूची इतना लोकप्रिय कैसे?

  • ब्रांड इमेज

ब्रांड के मार्केटिंग विज्ञापनों के मुताबिक, गूची अपने प्रोडक्ट्स के दाम उतने ही रखता है, जितना कि उसके खरीदार दे सकें। गूची महंगा है तो इसके पीछे दो कारण हैं। पहला यह कि गूची अपने खरीदार के रूप में सबको टारगेट नहीं करता। गूची को पता है कि उसके प्रोडक्ट्स लिमिटेड लोग ही खरीदेंगे इसलिए वो दाम भी उन्हीं लोगों के हिसाब से रखता है। दूसरा कारण यह है कि गूची एक ऐसी रणनीति पर काम करता है, जो अपर क्लास, प्रेस्टीज और स्टेटस पर जोर देने पर मजबूर कर दे।

  • गूची मतलब एक्सक्लूसिव

यह तो सबको पता है कि हर कोई गूची नहीं खरीद सकता। लुई वितॉन के फाउंडर का मानना है, ‘कोई भी बढ़िया लग्जरी आइटम या कलेक्टेबल टुकड़ा केवल उतने ही मूल्य का है, जितना खरीदार उसकी कीमत चुकाने को तैयार है।’ यही बात गूची के महंगे प्रोडक्ट्स पर भी लागू होती है। जहां एक तरफ एक जींस की 4 लाख कीमत होने से दूसरे लोगों के मन में आशंका पैदा होता है तो वहीं गूची के लॉयल कस्टमर को बड़े प्राइस टैग से कुछ फर्क नहीं पड़ता। अगर प्रोडक्ट्स सस्ते होते तो एक्सक्लूसिवटी के खत्म होने के डर से गूची को लोग खरीदना छोड़ देते।

  • पीआर और विज्ञापन

एक लग्जरी फैशन हाउस की मार्केटिंग लागत काफी ज्यादा होती है। मगर रॉयटर्स के मुताबिक, गूची कभी भी अपने विज्ञापन खर्च का खुलासा नहीं करती। हालांकि, एक अन्य लग्जरी हाउस और गूची के मुख्य प्रतिद्वंद्वी ने पिछले साल मार्केटिंग में लगभग 6.5 बिलियन डॉलर खर्च किए हैं। जो सब साफ-साफ बता देता है कि आखिर क्यों गूची के जींस-बैग इतने महंगे हैं। इसके अलावा यह ब्रांड के मार्केटिंग का ही रिजल्ट है, जो इस ब्रांड को युवा पीढ़ी के लिए इतना आकर्षक बनाता है और साथ ही स्ट्रीटवियर फैशन स्टाइल को फेमस करने में मदद करता है।