मेगा एम्पायर:कहानी उस 13 लाख करोड़ वाले समूह की, जिसके मालिक 26/11 हमले में बाल-बाल बचे थे

6 दिन पहलेलेखक: आतिश कुमार
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एक ऐसा समूह, जिसके कारोबार को देखने बैठें तो शाहरुख खान की फिल्म रईस का डॉयलाग ‘कोई धंधा छोटा नहीं होता और धंधे से बड़ा कोई धर्म नहीं होता’ दिमाग में घूमने लगता है। घर के राशन से लेकर कोयले की खदान तक, रेलवे, हवाई अड्डे से लेकर बंदरगाह तक ऐसे दर्जनों कारोबार हैं, जहां अडाणी समूह का बड़ा दखल है। गौतम अडाणी के इस समूह की कामयाबी का राज क्या है? क्या है समूह के उतार-चढ़ाव और व्यापार का सफरनामा? आज मेगा एम्पायर में हम जानेंगे इसी अडाणी समूह के बारे में…

सपनों की खातिर पढ़ाई छोड़ मुंबई पहुंचा एक नौजवान
साल था 1978, कॉलेज में पढ़ने वाला एक नौजवान सपनों की खातिर कॉलेज की पढ़ाई बीच में छोड़ अहमदाबाद से मुंबई पहुंचता है। 80 के दशक में जहां लोग मुंबई सिर्फ हीरो बनने के लिए आ रहे थे तो वहीं दूसरी ओर यह लड़का यानी गौतम अडाणी हीरे की दुनिया में किस्मत आजमाने निकला था। जैसे हर मुंबई पहुंचने वाला हीरो बनने में सफल नहीं हो पाता ठीक वैसा ही अडाणी के साथ हुआ। अडाणी ने करीब 3 साल तक मुंबई में काम किया मगर उस हीरे से उनकी किस्मत नहीं चमकी।

आपदा को अवसर में बदला और पड़ी अडाणी ग्रुप की नींव
उनकी किस्मत तब चमकनी शुरू हुई, जब 1981 में बड़े भाई ने उन्हें अहमदाबाद बुलाया। भाई ने सामानों को लपेटने वाली प्लास्टिक की एक कंपनी खरीदी थी मगर वो चल नहीं पा रही थी। उस कंपनी को जो कच्चा माल चाहिए था, वो पर्याप्त नहीं होता था। इस आपदा को एक अवसर में बदलते हुए अडाणी ने कांडला पोर्ट पर प्लास्टिक ग्रैनुएल्स का आयात शुरू किया और 1988 में ‘अडाणी एंटरप्राइज लिमिटेड’ की नींव रखी।

यहां से आधिकारिक रूप से शुरू हुआ अडाणी समूह का सफर जिसने धातु, कृषि उत्पाद और कपड़ा जैसे उत्पादों की कमोडिटी ट्रेडिंग शुरू की। कुछ ही सालों में ये कंपनी और अडाणी, इस बिजनेस का बड़ा नाम बन गए। अडाणी एंटरप्राइज की वेबसाइट की मानें तो साल 1994 में बीएसई और एनएसई में कंपनी का शेयर सूचीबद्ध हुआ था। उस समय इसके एक शेयर की कीमत 150 रुपए थी, लेकिन ये सिर्फ एक शुरुआत थी। आज अडाणी एंटरप्राइज के शेयर की कीमत 2147.45 रुपए है।

ऑस्ट्रेलिया-इंडोनेशिया जैसे देशों तक फैला है अडाणी समूह का कारोबार
फॉर्च्यून इंडिया मैगजीन के मुताबिक साल 2010 में अडाणी ने ऑस्ट्रेलिया की लिंक एनर्जी से 12,147 करोड़ में कोयला खदान खरीदी थी। गेली बेस्ट क्वीन आइलैंड में मौजूद इस खदान में 7.8 बिलियन टन के खनिज भंडार हैं, जो हर साल 60 मिलियन टन कोयला पैदा कर सकती है।

इंडोनेशिया में तेल, गैस और कोयला जैसे प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में हैं, लेकिन आधारभूत सुविधाओं के अभाव में इन संसाधनों का पर्याप्त लाभ उठाना संभव नहीं था। 2010 में ही अडाणी ग्रुप ने इंडोनेशिया के दक्षिणी सुमात्रा से कोयले की ढुलाई के लिए डेढ़ अरब डॉलर के पूंजी निवेश की घोषणा की थी। इसके लिए दक्षिणी सुमात्रा में बनने वाली रेल परियोजना के लिए वहां की सरकार के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।

20 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाले समूह में शामिल हुआ था अडाणी ग्रुप
अडाणी समूह अप्रैल 2022 में 20 लाख करोड़ के मार्केट कैप वाले समूह में शामिल हुआ था। टाटा और अंबानी के बाद यह मुकाम हासिल करने वाला भारत का तीसरा समूह है। अडाणी ग्रुप की सात कंपनियां शेयर बाजार में लिस्टेड हैं। अडाणी की पांच कंपनियों का मार्केट कैप एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है, वहीं दो कंपनियों अडाणी पावर और अडाणी विलमर का मार्केट कैप 98,000 करोड़ और 82,000 करोड़ रुपए है। हालांकि मौजूदा समय में समूह के मार्केट कैप में काफी गिरावट आ गई है।

अडाणी के पास दुनिया का सबसे बड़ा सोलर प्लांट
अडाणी ग्रीन एनर्जी ने 21 सितंबर 2016 को देश को विश्व का सबसे बड़ा सोलर प्लांट दिया था। 648 मेगावाट क्षमता का यह सोलर प्लांट तमिलनाडु में है। अडाणी समूह की इस इकाई पर 4,550 करोड़ रुपए का निवेश हुआ।

जब 26/11 के आतंकवादी हमले में बाल-बाल बचे अडाणी
समूह के मालिक अडाणी मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकवादी हमले में भी बाल-बाल बचे थे। 26 नवंबर को अडाणी ताज होटल के रेस्तरां में दुबई पोर्ट्स के सीईओ के साथ डिनर कर रहे थे। वे रेस्तरां के किचन और बाथरूम में रातभर छिपे रहे। सुबह 8.45 पर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला गया। इससे पहले 1998 में अडाणी और शांतिलाल पटेल को अहमदाबाद में फिरौती के लिए बंदूक की नोंक पर अगवा कर लिया गया था। बाद में उन्हें छोड़ दिया गया था।

अंबुजा और ACC का टेकओवर
अडाणी समूह ने हाल ही में होल्सिम ग्रुप के भारतीय कारोबार के अधिग्रहण की बोली जीती है। यह डील करीब 81,360 करोड़ रुपए में हुई। होल्सिम ग्रुप के पास अंबुजा सीमेंट की 63.1 फीसदी और एसीसी में 54.53 फीसदी हिस्सेदारी है और अब ये अडाणी समूह की होगी। अडाणी ग्रुप की तरफ से ये अबतक का सबसे बड़ा अधिग्रहण है। स्विटजरलैंड की इस कंपनी ने 17 साल पहले भारत में एंट्री की थी।

बाकी समूह का कुल कर्ज FY17 के 1 लाख करोड़ रु. से बढ़कर FY22 में 2.24 लाख करोड़ रु. हो गया है। रिपोर्ट्स के अनुसार होल्सिम डील के बाद इस कर्ज के 3 लाख करोड़ रुपए होने का अनुमान है।