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  • There Are Beds For Patients In The Rooms Of The Madrasa, A Team Of 50 Members Deployed For Treatment, Breakfast food, Medicines Are All Free

हैदराबाद में मस्जिद बन गई अस्पताल:मदरसे के कमरों में मरीजों के लिए बेड लगे, इलाज के लिए 50 लोगों की टीम तैनात, नाश्ता-खाना, दवाएं सब फ्री

हैदराबाद10 दिन पहलेलेखक: अक्षय बाजपेयी
  • कोरोना काल में धार्मिक स्थलों ने अपने दरवाजे मदद के लिए खोल दिए, आज चौथी रिपोर्ट हैदराबाद से

कोरोना काल में पीड़ितों की मदद के लिए तमाम धार्मिक स्थलों ने अपने दरवाजे खोले। हम आपके लिए ऐसे ही स्थलों की कहानी ला रहे हैं। इसी कड़ी में आज चौथी और आखिरी स्टोरी हैदराबाद स्थित मस्जिद मोहम्मदिया की। जिसने कोरोना मरीजों के इलाज के लिए मस्जिद और मदरसा में जगह दी।

मस्जिद और मदरसे में लगे बेड
अप्रैल-मई में कोरोना के केस इतने बढ़ गए थे कि अस्पताल फुल हो गए थे। पेशेंट व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन सिलेंडर लेकर बैठे थे। हैदराबाद में भी कमोबेश यही हालात बन चुके थे। सरकारी अस्पतालों में जगह नहीं थी। इसी बीच हेल्पिंग हैंड फाउंडेशन और रोटरी क्लब ऑफ हैदराबाद डेक्कन कोई ऐसी जगह तलाश रहे थे, जहां कोविड सेंटर शुरू किया जा सके।

यहां ओपीडी के साथ ही रेस्टरूम भी बनाया गया है। एनजीओ मेंबर 24 घंटे मौजूद होते हैं।
यहां ओपीडी के साथ ही रेस्टरूम भी बनाया गया है। एनजीओ मेंबर 24 घंटे मौजूद होते हैं।

जगह ऐसी चाहिए थी, जो बड़ी हो और जहां पार्किंग की सुविधा भी हो। फाउंडेशन ने राजेंद्रनगर स्थित मस्जिद मोहम्मदिया से संपर्क किया तो मस्जिद प्रबंधन ने कोविड मरीजों के इलाज के लिए मुफ्त में मस्जिद और मदरसा उपयोग के लिए दे दिया।

मदरसा के 23 कमरों में लगे बेड
इसके बाद मस्जिद और मदरसा को कोविड अस्पताल में बदल दिया गया। मदरसे के 23 कमरों में से हर में कहीं दो, कहीं तीन बेड लगाए गए। फॉर्मेसी, डॉक्टर्स, रेस्ट एरिया, कैजुअल्टी वार्ड तैयार किए गए। फिजियोथेरेपिस्ट और डाइटीशियन को भी अपॉइंट किया गया।

मरीजों के आराम के सभी इंतजाम हैं। किसी तरह का शुल्क भी नहीं लिया जा रहा।
मरीजों के आराम के सभी इंतजाम हैं। किसी तरह का शुल्क भी नहीं लिया जा रहा।

सभी परमिशन मिलने के बाद 24 मई से 40 बेड के साथ सेंटर शुरू कर दिया गया। फाउंडेशन के मैनेजर मोहम्मद फरीद उल्लाह ने बताया कि पहले दिन आठ मरीज एडमिट हुए थे। अगले दिन से सभी बेड फुल रहे। यहां हर बेड के साथ ऑक्सीजन की सुविधा भी दी जा रही है। ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर भी दे रहे हैं। इलाज, दवाई और जांच का पूरा खर्च फाउंडेशन ही उठा रहा है। हालांकि यदि कोई संपन्न मरीज है तो वो जांच का शुल्क दे सकता है।

जब तक मदरसा खुलेगा नहीं, सेंटर चलता रहेगा
मोहम्मद फरीद उल्लाह के मुताबिक जिन मरीजों का ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल 85 से 90 के बीच होता है, उन्हें हम यहां रखते हैं, लेकिन यदि किसी का 85 से भी कम हो गया है तो फिर हम संबंधित पेशेंट को हायर सेंटर में रेफर करते हैं, क्योंकि इतनी ऑक्सीजन की सुविधा यहां नहीं है कि कम सेचुरेशन वाले को भी लगातार दी जा सके। फाउंडेशन अपने खर्चे से पेशेंट को सरकारी या निजी अस्पताल में बेड भी अरेंज करवाता है और एंबुलेंस से फ्री में वहां तक छोड़ता है।

यदि किसी मरीज की हालत गंभीर होती है तो एनजीओ सदस्य बड़े अस्पताल में उसके लिए बेड अरेंज करते हैं और वहां शिफ्ट करके आते हैं।
यदि किसी मरीज की हालत गंभीर होती है तो एनजीओ सदस्य बड़े अस्पताल में उसके लिए बेड अरेंज करते हैं और वहां शिफ्ट करके आते हैं।

मस्जिद में इतनी जगह है कि 120 बेड लग सकते हैं, लेकिन अभी स्थितियां नियंत्रण में हैं, इसलिए बेड बढ़ाए नहीं जा रहे। जब तक स्कूलों के खुलने के आदेश जारी नहीं हो जाते, तब तक यह सेंटर चलता रहेगा। मस्जिद में कोविड सेंटर का सेटअप खड़ा करने में 75 लाख रुपए खर्च हुए हैं, जिसमें 6 महीने की ऑपरेशन कॉस्ट भी शामिल है। यह सारा खर्चा हेल्पिंग हैंड्स रोटरी ट्रस्ट, रोटरी क्लब ऑफ हैदराबाद और एजुकेशन एंड इकोनॉमिक डेवलपमेंट (SEED) द्वारा उठाया गया है।