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आज की पॉजिटिव खबर:दिल्ली का यह युवा मुफ्त में लोगों को दिला रहा है ऑक्सीजन, अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की कर चुका मदद

नई दिल्ली3 दिन पहलेलेखक: पूनम कौशल
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देश की राजधानी दिल्ली ऑक्सीजन के लिए तड़प रही है। बड़े अस्पताल हों, छोटे क्लीनिक हों या फिर घरों में ही इलाज करा रहे लोग, सबके सामने चुनौती बराबर है। पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन किसी के लिए उपलब्ध नहीं है। इसी संकट के समय में कुछ लोग व्यक्तिगत स्तर पर लोगों की मदद करने की कोशिश कर रहे हैं। दिल्ली के जामिया नगर इलाके में रहने वाले शारिक हुसैन भी ऐसे लोगों में शामिल हैं।

एक पतली गली में उनका छोटा सा फ्लैट इस समय 'ऑक्सीजन सप्लाई केंद्र' सा बन गया है जिसमें आसपास और दूर दराज से लोग आ रहे हैं, लेकिन शारिक चाहकर भी सभी की मदद नहीं कर पा रहे हैं। उनका फोन हर समय बजता रहता है। जितना हो सकता है वो कॉल उठा लेते हैं, बाकी कॉल को अनसुना छोड़ने के अलावा कोई विकल्प उनके पास नहीं हैं। शारिक दो दिनों से खुद ही परेशान हैं। हिमाचल प्रदेश से ऑक्सीजन लेने गई उनकी गाड़ी को रास्ते में रोक लिया गया है।

जिन लोगों को ऑक्सीजन देने का वादा उन्होंने किया था उनके कॉल लगातार आ रहे हैं और वो कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं। उनके रूम में आठ-दस छोटे बड़े सिलेंडर रखे हैं जो खाली हो चुके हैं। शारिक कहते हैं, 'इस समय दिल्ली में कहीं ऑक्सीजन नहीं हैं। मेरे पास कई बड़े अस्पतालों से ऑक्सीजन के लिए फोन आए हैं। मैं बहुत बेबस महसूस कर रहा हूं। मेरी गाड़ी ऑक्सीजन लेकर रात तक पहुंचेगी। उसके बाद ही मैं कुछ मदद कर पाऊंगा।'

शारिक के इस काम में उनके दोस्त भी मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही कई वॉलंटियर्स भी उनसे जुड़े हैं।
शारिक के इस काम में उनके दोस्त भी मदद कर रहे हैं। इसके साथ ही कई वॉलंटियर्स भी उनसे जुड़े हैं।

जब मैं उनसे बात कर रही थी एक स्थानीय पत्रकार अपने एक रिश्तेदार के लिए ऑक्सीजन लेने उनके पास आए। शारिक ने उनसे भी यही वादा किया कि जब गाड़ी आएगी वो ऑक्सीजन उपलब्ध करा सकेंगे। दिल्ली में ऑक्सीजन संकट शुरू होने के बाद शारिक हुसैन ने व्यक्तिगत स्तर पर लोगों को प्राणवायु उपलब्ध कराने के प्रयास शुरू किए थे। अब उनके साथ एक दर्जन से अधिक लोगों की टीम है।

वो ऑक्सीजन के बदले किसी से कोई पैसा नहीं लेते हैं। शारिक कहते हैं, 'जो थोड़े बहुत पैसे मेरे पास थे, उनसे मैंने सिलेंडर खरीदे और लोगों को ऑक्सीजन देनी शुरू की। अब कई लोग मेरे साथ आ गए हैं। मेरे कारोबारी दोस्त भी मदद कर रहे हैं। वॉलंटियर्स भी हैं।' शारिक दावा करते हैं कि वो अब तक एक हजार से अधिक लोगों की मदद कर चुके हैं। उनके वॉट्सऐप पर दिल्ली, देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से लगातार मैसेज आते रहते हैं। सभी मैसेज वो नहीं देखते हैं, लेकिन जिन मैसेज को देख लेते हैं उनकी मदद करने की कोशिश करते हैं।

शारिक पहले उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद और हरियाणा से ऑक्सीजन मंगा रहे थे, लेकिन अब यहां से सप्लाई असंभव सी हो गई है। शारिक कहते हैं, 'पहले हमारा जंबो सिलेंडर 500 रुपए की दर से भर रहा था। फिर हमसे 1200 मांगे गए, फिर 1700 और दो हजार। हमने हर रेट स्वीकार किया, लेकिन बाद में हमें मना ही कर दिया गया। हमसे कहा गया कि यूपी में दिल्ली का सिलेंडर नहीं भरा जाएगा।'

शारिक कहते हैं, 'यदि पचास जंबो सिलेंडर भरने की व्यवस्था भी कहीं हो जाए तो वो पूरे ओखला और जामिया नगर इलाके का संकट दूर कर सकते हैं।'
शारिक कहते हैं, 'यदि पचास जंबो सिलेंडर भरने की व्यवस्था भी कहीं हो जाए तो वो पूरे ओखला और जामिया नगर इलाके का संकट दूर कर सकते हैं।'

शारिक आजकल हिमाचल प्रदेश से ऑक्सीजन मंगा रहे हैं, लेकिन अब उन्हें लगता है कि सप्लाई का ये रूट भी बंद हो जाएगा। वो कहते हैं, 'अब हिमाचल सरकार भी कह रही है कि बाहरी राज्यों को ऑक्सीजन सिर्फ़ गृह मंत्रालय के कहने पर दी जाएगी।' दिल्ली में ऑक्सीजन का संकट ऐसा है कि कहीं भी आसानी से ऑक्सीजन उपलब्ध नहीं हैं। गंगाराम अस्पताल, बत्रा अस्पताल और रेनबो अस्पताल जैसे बड़े संस्थानों को भी एसओएस जारी करना पड़ा है। कई अस्पतालों में मरीजों ने तड़प-तड़प कर दम तोड़ा है।

ऐसे में शारिक जो भी थोड़ा-बहुत इंतजाम अपने व्यक्तिगत स्तर पर कर पाते हैं वो नाकाफी ही होता है। उनके फोन की घंटी हमेशा बजती रहती है। फोन उठाते ही एक ही सवाल होता है- शारिक भाई ऑक्सीजन है। शारिक गाड़ी के पहुंचने पर ऑक्सीजन उपलब्ध होने का भरोसा देते हैं, लेकिन वो स्वयं स्वीकार करते हैं कि किसी के लिए भी इस समय दिल्ली का मांग को पूरा करना संभव नहीं है। इसकी बड़ी वजह बताते हुए शारिक कहते हैं कि इस समय बाजार में ऑक्सीजन से जुड़ी हर चीज़ की कालाबाजारी हो रही है।

शारिक आजकल हिमाचल प्रदेश से ऑक्सीजन मंगा रहे हैं। लेकिन अब उन्हें लगता है कि सप्लाई का ये रूट भी बंद हो जाएगा।
शारिक आजकल हिमाचल प्रदेश से ऑक्सीजन मंगा रहे हैं। लेकिन अब उन्हें लगता है कि सप्लाई का ये रूट भी बंद हो जाएगा।

वो कहते हैं, 'ब्लैक मार्केट में सबकुछ उपलब्ध है। मजबूरी में मैंने खुद एक-एक सिलेंडर बीस-बीस हजार रुपए का खरीदा है। दरअसल किसी की जान से बढ़कर कोई कीमत नहीं हो सकती है, ऐसे में लोग मुंह मांगा दाम देने को मजबूर हैं। यही वजह है कि जिन लोगों के पास सामान उपलब्ध भी है वो भी अधिक पैसा कमाने के लालच में उसे दबाए बैठे हैं।' शारिक कहते हैं, 'यदि पचास जंबो सिलेंडर भरने की व्यवस्था भी कहीं हो जाए तो वो पूरे ओखला और जामिया नगर इलाके का संकट दूर कर सकते हैं।'

आज तो उनकी गाड़ी हिमाचल से किसी तरह दिल्ली पहुंच रही है, लेकिन उन्हें चिंता ये है कि वो अब आगे ऑक्सीजन भरवाकर मंगवा सकेंगे या नहीं। वो कहते हैं, 'पता नहीं क्या बात है, कोई भी दिल्ली को ऑक्सीजन देना नहीं चाह रहा है। कम से कम इस देश में ऑक्सीजन का परिवहन तो निर्बाध होना ही चाहिए।' वो कब तक लोगों की मदद करेंगे? इस सवाल पर वो कहते हैं, 'जब तक मुझमें हिम्मत है और मेरे पास पैसा है मैं लोगों की मदद करता रहूंगा। किसी को ऑक्सीजन के लिए तड़पते हुए देखकर मैं खामोश भी तो नहीं बैठ सकता?'

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