करिअर फंडालियो टॉलस्टॉय देंगे सवालों के जवाब:कॉम्पिटिटिव एग्जाम देने वालों के होते हैं 3 सवाल...एक कहानी में समझिए जवाब

2 महीने पहले

कॉम्पिटिटिव एग्जाम की तैयारी कर रहे सभी स्टूडेंट्स के तीन सवाल होते ही हैं

1) एग्जाम की तैयारी शुरू करने का सबसे सही वक्त क्या है?

2) एग्जाम की तैयारी में किसकी मानें, किसकी नहीं?

3) एग्जाम क्लियर करने के लिए मेन्टल पावर कहां से लाएं?

लियो टॉलस्टॉय की कहानी 'तीन प्रश्न' से आज हम आपको इनके उत्तर देंगे।

करिअर फंडा में स्वागत!

लियो टॉल्स्टॉय एक बड़े रूसी लेखक थे। उनकी कहानी 'तीन प्रश्न' में छुपे हैं सफलता के रहस्य। ये मेरी पसंदीदा कहानी है।

राजा के तीन सवाल और साधु महाराज

एक बार एक राजा के दिमाग में तीन सवाल आए। पहला 'किसी काम को शुरू करने का सही वक्त क्या होता है?', दूसरा 'संसार में किस व्यक्ति की बात माननी चाहिए और किसकी नहीं?', और तीसरा 'दुनिया की वह चीज कौन सी है जिससे में जो चाहूं वह कर सकूं?' राजा ने तुरंत मुनादी करवा दी कि जो इन सवालों के सही जवाब देगा उसे इनाम दिया जाएगा। कई विद्वान लोग आकर राजा को इसका जवाब देने लगे, लेकिन राजा को किसी का जवाब संतोषजनक (सेटिस्फैक्टरी) नहीं लगा।

लिओ टॉलस्टॉय ने ये कहानी 1870 में तब लिखी थी जब वह खुद एक मॉरल क्राइसिस से गुजर रहे थे। बाद में 1885 में उनकी किताब ‘वाट मेन लिव बाय एंड अदर टेल्स’ में इस कहानी को शामिल किया गया।
लिओ टॉलस्टॉय ने ये कहानी 1870 में तब लिखी थी जब वह खुद एक मॉरल क्राइसिस से गुजर रहे थे। बाद में 1885 में उनकी किताब ‘वाट मेन लिव बाय एंड अदर टेल्स’ में इस कहानी को शामिल किया गया।

जवाबों की तलाश में साधु के आश्रम की ओर

1) पास के जंगल में एक प्रसिद्ध साधु रहा करते थे और केवल गरीब लोगों से मिला करते थे। तो राजा साधारण कपड़े पहन कर पैदल साधु की कुटिया पर पंहुचा। देखा कि साधु कुटिया के पास जमीन खोद रहा है। वो बहुत दुबला और कमजोर था और फावड़ा चलाते हुए हांफ रहा था।

2) राजा ने कहा, 'महाराज, मैं आपसे तीन बातें पूछने आया हूं', और अपने सवाल दोहरा दिए। साधु ने कोई उत्तर नहीं दिया और जमीन खोदता रहा। राजा ने कहा, 'महाराज लगता है आप थक गए हैं, लाइए फावड़ा मुझे दे दीजिए और आप थोड़ी देर आराम कर लीजिए।'

3) साधु ने राजा को धन्यवाद देते हुए फावड़ा उनके हाथ में दे दिया और खुद जमीन पर बैठ गए। राजा ने क्यारियां खोदने के बाद फिर अपने तीनों सवाल दोहराए। साधु ने कहा 'हां' और फावड़ा लेने को हाथ बढ़ाया, लेकिन राजा ने फावड़ा नहीं दिया और शाम तक खोदता रहा। परेशान और निराश राजा ने साधु से कहा कि महाराज मैं आप से सवाल पूछने आया था, आप जवाब नहीं दे सकते तो मैं वापस जाता हूं।

सही समय और सही इंसान

तभी साधु ने कहा, देखो-देखो कोई भागा आ रहा है!

1) राजा ने देखा कि एक दाढ़ी वाला इंसान जंगल की और से दौड़ा आ रहा है। उसने अपने पेट को हाथ से दबा रखा था और हाथों के बीच से खून बह रहा था। राजा के पास पहुंचकर वह बेहोश हो कर गिर गया।

2) राजा और साधु ने कुर्ता उठा कर देखा तो उसके पेट में बड़ा भारी घाव था। राजा ने घाव को पानी से धोकर अपना रुमाल उस पर बांध दिया, खून निकलना बंद हो गया। थोड़ी देर बाद उस इंसान को होश आया, पानी मांगा, राजा ने जल्दी से पानी लाकर उसे पिलाया।

3) फिर शाम हो गई, राजा और साधु ने मिलकर उस आदमी को कुटिया में चारपाई पर लिटा दिया, घायल आदमी को नींद आ गई, राजा भी थक जाने के कारण तुरंत सो गया।

राजा मरने से बच गया

सुबह होने पर वह आदमी उठा तो बोला 'राजन, आप मुझे माफ कर दीजिए।'

राजा बोला 'माफी कैसी, में तो तुम्हें जानता भी नहीं।'

आदमी बोला 'आप मुझे नहीं जानते पर मैं आपको जानता हूं… आपने मेरे भाई की संपत्ति ले ली थी, इसलिए मैंने आपसे बदला लेने की कसम खाई थी। मैं जानता था कि आप साधु से मिलकर शाम को घर को लौटेंगे, इसीलिए जंगल में छिप रहा था, आपको गोली मारने के लिए। पर आपके सिपाहियों ने मुझे वहां पहचान लिया और गोली मारी, तो मैं भागकर यहां आया। अगर आप मेरे घाव बंद ना करते तो मैं मर जाता, मैं आपको मारना चाहता था, लेकिन आपने मेरी जान बचाई, मैं इसके लिए आपका आभारी रहूंगा'।

राजा खुश था कि चलो एक दुश्मन सस्ते में ही कम हो गया। उससे विदा लेकर राजा ने साधु से कहा महाराज, आपने मेरे सवालों का कोई जवाब नहीं दिया, अच्छा प्रणाम, मैं चलता हूं।

तीनों जवाब दिए जा चुके हैं, राजन

तब साधु ने कहा आपके सवालों के जवाब तो दिए जा चुके हैं।

अगर तुम कल मुझ पर तरस खाकर मिट्टी ना खोदते और जल्दी लौट जाते तो ये आदमी रास्ते में तुम पर हमला करता और तुम पछताते कि मैं साधु के पास क्यों न ठहर गया। इसका मतलब ये कि ठीक समय वह था जब तुम जमीन खोद रहे थे और उचित मनुष्य 'मैं' था। उसके बाद जब यह आदमी आया तो 'उचित समय' वह था 'जब तुम उसके घावों को बंद कर रहे थे' और 'वो', 'उचित मनुष्य' था। दूसरे की मदद से तुमने खुद की मदद कर ली।

कॉम्पिटिटिव एग्जाम के लिए

1) एग्जाम की तैयारी शुरू करने का सबसे सही वक्त क्या है?: आज, अभी, इसी वक्त

2) एग्जाम की तैयारी में किसी मानें, किसकी नहीं?: अपने रिसोर्सेज के अनुसार निकटतम टीचर, संसाधन, और गाइड की

3) एग्जाम क्लियर करने के लिए मेन्टल पावर कहां से लाएं?: दूसरों के हित की सोच कर (यहां ‘दूसरों’ से मतलब है अपना पूरा परिवार)

आज का करिअर फंडा यह है बहुत आगे की सोचना, बहुत दूर से मदद मांगना, और सिर्फ खुद की सोचना सफलता नहीं दिला सकता।

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