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  • Three People Died In The Family, Yet Poonam, Who Has Been Working In The Hospital, Has Spent 15 Lakhs For Distributing Nilesh Oxygen Cylinders.

आज की पॉजिटिव खबर:कोरोना से 3 परिजनों की जान गई, फिर भी पूनम अस्पताल में ड्यूटी करती रहीं; नीलेश 15 लाख खर्च कर बांट रहे ऑक्सीजन

नई दिल्ली4 महीने पहले

कोरोना की दूसरी लहर अब देश में खत्म होने को है। संक्रमण के केस भले घट रहे हों, लेकिन मौतों की रफ्तार से लोगों में दहशत अभी बरकरार है। इस माहौल में कुछ लोग अपनी जान की परवाह किए बगैर दूसरों की जिंदगी बचाने में जुटे हैं। आज की पॉजिटिव खबर में हम ऐसी ही तीन कहानियों का जिक्र कर रहे हैं...

पहली कहानी छत्तीसगढ़ से : कोरोना ने मेरा सब कुछ छीन लिया, मैं नहीं चाहती कि ये दुख दूसरों को सहना पड़े

छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले की रहने वाली पूनम पटेल अकलतरा में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स का काम करती हैं। 9 मई को उनकी भाभी और ननद की कोरोना संक्रमण से जान चली गई। फिर भी उन्होंने काम करना जारी रखा। वे अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात रहीं और मरीजों की सेवा करती रहीं, लेकिन मुश्किलों का कहर थमने वाला नहीं था। एक हफ्ते बाद 17 मई को कोरोना ने उनके ससुर को भी निगल लिया। पूनम के लिए यह सबसे बड़ा सेटबैक था। एक तरफ पूनम के सामने घर की जिम्मेदारी थी, दूसरी तरफ अस्पताल में मरीजों की जान बचाने की ड्यूटी। पूनम ने अपने पहाड़ जैसे दुख और आंसुओं को समेटा और बिना छुट्टी लिए ड्यूटी करती रहीं।

जांजगीर जिले की रहने वालीं पूनम पटेल के परिवार में 9 दिन के भीतर तीन लोगों की जान गई। दो साल के बच्चे को घर में छोड़कर वे ड्यूटी के लिए जाती हैं।
जांजगीर जिले की रहने वालीं पूनम पटेल के परिवार में 9 दिन के भीतर तीन लोगों की जान गई। दो साल के बच्चे को घर में छोड़कर वे ड्यूटी के लिए जाती हैं।

पूनम बताती हैं, 'मेरी भाभी और ननद का इलाज बिलासपुर के एक अस्पताल में चल रहा था। जबकि ससुर जांजगीर के ही एक कोविड अस्पताल में भर्ती थे। 9 मई को जब एक के बाद एक ननद और भाभी की मौत की खबर मुझे मिली, तब मैं अस्पताल में ड्यूटी पर थी। फोन पर बात करते हुए मेरी आख से आंसू निकल रहे थे। मन करता था कि सब कुछ छोड़कर घर चली जाऊं, लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया।'

'जो लोग चले गए, उन्हें तो हम वापस नहीं ला सकते हैं, लेकिन जो लोग अस्पताल में बीमार हैं, उन्हें बचाने की कोशिश तो हम कर ही सकते हैं। आखिर ये लोग भी तो हमारे परिवार जैसे ही हैं। यहीं सोचकर मैंने छुट्टी नहीं ली और लगातार काम करती रही। बाद में घर वालों से मिली और उनकी भी हिम्मत बढ़ाई।'

पूनम का दो साल का बेटा है। वे उसे घर पर छोड़कर कोविड ड्यूटी कर रही हैं। वे OPD, डिलीवरी और कोविड वैक्सीनेशन को लेकर काम करती हैं। मरीजों की मदद करती हैं। खास करके बुजुर्गों को वक्त पर दवाइयों और बाकी जरूरत की चीजें पहुंचाने की वे भरपूर कोशिश करती हैं। पूनम कहती हैं, 'मेरे ऊपर कोरोना ने कहर बरपाया है। मेरा बहुत कुछ छीन लिया है, लेकिन मुझ पर अपने अस्पताल के मरीजों की भी जिम्मेदारी है। मैं नहीं चाहती कि इनके परिवार को भी ये दुख सहना पड़े। इसलिए मैं अपना फर्ज निभा रही हूं।'

जांजगीर जिले की रहने वाली पूनम पटेल अकलतरा में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स का काम करती हैं।
जांजगीर जिले की रहने वाली पूनम पटेल अकलतरा में एक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में नर्स का काम करती हैं।

PHC नरियरा के प्रभारी डॉ. सेनानी देवांगन ने दैनिक भास्कर को बताया कि हम पूनम पटेल का जज्बा देखकर हैरान थे। उन्होंने बिना छुट्‌टी लिए अपना काम किया। बाद में उन्होंने परिवार के लोगों से मुलाकात की।

दूसरी कहानी गुजरात से: फूड सर्विस की दुकान बंदकर अपने स्टाफ को लोगों की मदद की ड्यूटी पर लगा दिया

कोरोना की दूसरी लहर ने पहले के मुकाबले ज्यादा कहर बरपाया। इस बार ज्यादातर लोगों की मौत के पीछे ऑक्सीजन की कमी भी एक बड़ी वजह रही। एक रिपोर्ट के मुताबिक 40% मरीजों में ऑक्सीजन लेवल गिरने की शिकायतें अभी भी मिल रही हैं। मुसीबत यह है कि इधर-उधर दौड़ भाग के बाद भी कई लोगों को ऑक्सीजन के सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे लोगों की मदद के लिए राजकोट के रहने वाले नीलेश पटेल ने एक पहल की है। वे लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन के सिलेंडर बांट रहे हैं।

नीलेश ने 150 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे हैं। जिसे वे जरूरतमंदों को मुफ्त में देते हैं। इस्तेमाल के बाद वे इसकी रिफिलिंग कराते हैं।
नीलेश ने 150 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे हैं। जिसे वे जरूरतमंदों को मुफ्त में देते हैं। इस्तेमाल के बाद वे इसकी रिफिलिंग कराते हैं।

नीलेश राजकोट में एक फूड कंपनी चलाते हैं। कोरोना के चलते उनके परिवार के तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इस साल जब दूसरी लहर से लोगों की जान जाने लगी तो नीलेश ने अपनी कंपनी बंद कर दी और लोगों को मुफ्त में ऑक्सीजन सिलेंडर बांटने का काम शुरू किया। वे और उनके टीम मेंबर्स जरूरतमंद लोगों को घर पर ऑक्सीजन पहुंचा रहे हैं। साथ ही जब सिलेंडर खाली हो जाता है तो वे उसे रिफिल करवाकर लोगों तक पहुंचाते हैं। अब तक नीलेश अपनी सेविंग्स से 15 लाख रुपए इस काम पर खर्च कर चुके हैं। बड़ी बात ये भी है कि उन्होंने अपने स्टाफ को भी इस काम के लिए लगा दिया और उन्हें टाइम पर सैलरी भी दे रहे हैं।

नीलेश ने 150 से ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर खरीदे हैं। जिसे वे जरूरतमंदों को मुफ्त में देते हैं। इस्तेमाल के बाद वे उनकी रिफिलिंग कराते हैं और फिर लोगों तक पहुंचाते हैं। करीब एक महीने से वे यही काम कर रहे हैं।

तीसरी कहानी : कोरोना के बावजूद हमारे स्टाफ काम करते रहे ताकि जो लोग घरों से दूर हैं, वे भूखे न रहें

कोरोना के चलते ज्यादातर होटल और रेस्टोरेंट बंद हैं। ऐसे में अपने घर से दूर रहने वाले वर्किंग प्रोफेशनल्स को खाने को लेकर कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के चलते उन्हें भोजन के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। इसको लेकर इंडियन कॉफी हाउस (ICH) ने एक पहल की है। ICH ने पिछले साल जब कोरोना आया तो अपने होटल खुले रखे थे और दूसरी लहर में भी इसने मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अपने सभी सेंटर्स पर फूड सर्विस चालू रखे हैं।

NTPC में सीनियर मैनेजर आशुतोष नायक कहते हैं कि पूरे कोरोना काल में हमने बिना किसी रुकावट के लगातार पावर की सप्लाई की है। मध्यप्रदेश, छतीसगढ़ और साउथ में हमारे जितने थर्मल प्लांट्स हैं, वे पहले के मुकाबले ज्यादा पावर जेनरेट कर रहे हैं। इसमें बड़ी भूमिका बैक एंड से ICH स्टाफ की है। वे कोरोना के कहर के बावजूद हमें लगातर फूड की सप्लाई कर रहे हैं। अगर कोविड में वे काम नहीं करते तो देश की पावर सप्लाई प्रभावित हो गई होती।

ICH के मैनेजर के. वासुदेवन शाह बताते हैं कि कोविड की दूसरी लहर में हमारे 10 से ज्यादा स्टाफ संक्रमित हो गए थे। लॉकडाउन के चलते भोजन के रॉ मटेरियल जुटाने में भी परेशानी हो रही थी। ऊपर से डर का माहौल। इसके बाद भी हमने अपनी सर्विस बंद नहीं की, क्योंकि अभी भी देश के एक बड़े वर्ग को खाने की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

वासुदेवन कहते हैं कि हमारे स्टाफ पहले के मुकाबले ज्यादा मजबूती से काम कर रहे हैं। हम लोग पूरी तरह से कोविड प्रोटोकॉल को फॉलो करते हैं। हमारे सभी स्टाफ मेंबर हमेशा मास्क में रहते हैं। हर जगह साफ-सफाई और सैनिटाइजर की व्यवस्था है, ताकि कहीं भी संक्रमण की गुंजाइश न रहे।

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