करिअर फंडाजैन धर्म से लें प्रोफेशनल लाइफ के 3 सबक:अच्छा पाने के लिए अच्छाई करें...दूसरों को समझने की कोशिश है जरूरी

2 महीने पहले

दूसरों के साथ वैसा ही करें जैसा आप खुद अपने लिए चाहते हैं।

- भगवान महावीर

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जैन धर्म के मुख्य दिशा-निर्देश होते हैं (1) सही विश्वास, (2) सही ज्ञान, और (3) सही व्यवहार। और प्रमुख जीवन सन्देश हैं ‘अहिंसा’, ‘अनेकांतवाद’ और ‘अपरिग्रह’। भगवान महावीर से प्रेरित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कहते थे कि हिंसक विचार मात्र भी हिंसा ही होते हैं। और गांधी जी ने ही क्रांतिकारी लेकिन अहिंसक तरीके से अंग्रेजों को घुटनों पर ला दिया था।

तीन सत्य

जैसे हर धर्म हमें अनेकों प्यारी बातें सिखाता है, वैसे ही हम जैन धर्म से कुछ खूबसूरत बातें जान सकते हैं, सीख सकते हैं। पहले देखते हैं 3 सत्य-

1) समतावादी (इगैलिटेअरिअन्‌): जैन धर्म एक समतावादी धर्म है, इसमें मूल रूप से कोई जाति व्यवस्था नहीं है। यह अभ्यास पर आधारित है, यहां तक कि एक गैर-जैन भी इसका अभ्यास कर सकता है और जो कोई भी इसका अभ्यास करता है उसे जैन यानी जिन के अनुयायी कहा जाता है। (जिन यानि 'स्वयं पर विजेता')

2) लॉजिकल: इसमें अंधविश्वास पर नहीं तर्क (लॉजिक) पर जोर दिया गया है। जैन ग्रंथों में कारणों और स्पष्टीकरणों की बातों को समझाया गया है। जैन धर्म के तीन रत्नों में से दो यही कहते हैं – (1) सम्यक दर्शन (राइट व्यू - यानी पुरानी धारणाओं और अंधविश्वासों से बचकर अपने दिमाग से चीजों को समझना और आंखों से देखकर यकीन करना) और (2) सम्यक ज्ञान (ठीक ज्ञान - अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान हासिल करने का प्रयास)।

3) विश्व शांति: Forgive and Forget के जरिए: जब हम कहते हैं कि मैं तुम्हें माफ करता हूं या तुमसे माफी चाहता हूं, तो फिर हमें यह नहीं कहना चाहिए कि दूसरा व्यक्ति गलत है या हम दोषी हैं। यह दोनों के लिए है कि जो हुआ उसे भूलकर नए सिरे से शुरुआत करें। जैन धर्म यही सिखाता है।

पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ के लिए जैन धर्म से 3 लेसन

1) अहिंसा का सिद्धांत: जैन धर्म के इस मौलिक सिद्धांत के महत्व को आज दुनिया में फैली अनेकों प्रकार की हिंसा के सन्दर्भ में देखा जा सकता है। जैन धर्म मानता है कि सभी हिंसक गतिविधियों को छोड़ देना चाहिए और अहिंसा के प्रति इस तरह की प्रतिबद्धता के बिना सभी धार्मिक व्यवहार बेकार हैं। यह हमें दूसरों की जान बचाना सिखाता है, चाहे वे आकार में कितने भी छोटे क्यों न हों। ये गहरी बात है क्योंकि यदि इसे सच्चे मन से पालन करें, तो डेली लाइफ में हमारा बर्ताव बहुत सौम्य और फ्रेंडली हो जाएगा। कॉम्पिटिटिव रेस में रहते हुए भी अपने अंदर के मानव को हम भूलेंगे नहीं। सबक: कंपनी के अंदर सबके साथ फेयर डील करना हमारा स्वभाव बन जाएगा, क्योंकि किसी के भी साथ आक्रामकता गलत ही लगेगी।

2) सम्यक आचरण: जैन धर्म के तीन रत्नों में से दो हमने देखे (सम्यक दर्शन और सम्यक ज्ञान) और अब आते हैं तीसरे पर सम्यक चरित्र (आचरण)। अहिंसा के अतिरिक्त इसमें बड़ी बात है अपने आप को मोह-माया से अलग करने का प्रयास करना। अपने आप को किसी भी लगाव और अशुद्ध विचार से मुक्त करना। सबक: अच्छा हासिल करने के लिए अच्छाई का रास्ता अपनाओ, बुराई का नहीं।

3) अनेकांतवाद: कोई भी एक व्यक्ति संपूर्ण सत्य पर पकड़ नहीं बना सकता, क्योंकि सत्य मुश्किल है, और अनेकों चेहरे लिए है। परम सत्य को एक वाक्य में नहीं समझा सकते। यदि हम इस बात को मान लें, तो साफ है कि हर व्यक्ति के लिए सत्य की परिभाषा अलग हो सकती है। सच को देखने, समझने का नजरिया हर किसी का अलग हो सकता है। सबक: लोगों के व्यवहार को समझने में हमें आसानी होगी, और हमारी अपनी हिंसा कम होती जाएगी।

इसके अलावा जैन धर्म के छह दैनिक अनुष्ठान: (1) अनुशासित रहना, (2) क्रमबद्ध पर्याय - सब कुछ पूर्वनिर्धारित और बदले नहीं जा सकने के कारण शांत रहना, (3) ध्यान - स्वयं को समय देने, (4) स्वाध्याय - जिज्ञासु पाठक बनने और (5) आत्मसंयम - सांसारिक इच्छाओं पर नियंत्रण की सीख देते हैं।

आज का संडे मोटिवेशनल करिअर फंडा यह है कि प्रैक्टिकल भौतिक लाइफ के तमाम टेंशन के बीच भी अपना संतुलन बनाए रखने के लिए जैन धर्म की सीख हमें आशा देती है।

कर के दिखाएंगे!

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