टूलकिट मामले में सुनवाई कल:सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और ट्रायल से सदमे में हैं निकिता; किसी से बात नहीं कर रहीं, उनके दोस्त कहते हैं- जब तक इंसाफ नहीं मिलता तब तक लड़ेंगे

नई दिल्ली9 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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किसान आंदोलन के दौरान टूलकिट बनाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में 9 मार्च को अगली सुनवाई है।  इस मामले निकिता जैकब भी आरोपी हैं। - Dainik Bhaskar
किसान आंदोलन के दौरान टूलकिट बनाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में 9 मार्च को अगली सुनवाई है। इस मामले निकिता जैकब भी आरोपी हैं।
  • टूलकिट मामले में मुंबई की वकील निकिता जैकब को भी आरोपी बनाया गया है
  • फिलहाल निकिता बांबे हाईकोर्ट से मिली तीन हफ्ते की जमानत पर हैं

किसान आंदोलन के दौरान टूलकिट बनाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट में 9 मार्च को अगली सुनवाई है। दिशा रवि के साथ इस मामले की एक अन्य आरोपी निकिता जैकब भी हैं।15 जनवरी को दिल्ली पुलिस ने निकिता के खिलाफ गैर जमानती अरेस्ट वारंट जारी किया था। निकिता पर IPC की धारा 124 (A) के तहत राजद्रोह, 153 (A) के तहत समूहों के बीच नफरत फैलाने और धारा 120 (B) के तहत आपराधिक साजिश करने का केस दर्ज किया गया है। निकिता को बॉम्बे हाईकोर्ट की तरफ से 3 हफ्तों की अंतरिम जमानत मिली है।

सूत्रों के मुताबिक एक्टिविस्ट और वकील निकिता इस मामले को लेकर फिलहाल बहुत परेशान हैं। लेकिन, उनके वकील अदालत में कानूनी लड़ाई के लिए जोरदार तैयारी कर रहे हैं। निकिता फिलहाल किसी से बातचीत नहीं करना चाहतीं। मीडिया से संपर्क करने से वे हिचक रही हैं। उनके दोस्तों से बात करने पर एक ही जवाब मिल रहा है कि निकिता की वकील ने किसी से बात करने से मना किया है। उनकी दोस्त कहती हैं, ‘दरअसल, वे सोशल मीडिया पर हुई ट्रोलिंग और ट्रायल से सदमे में हैं।’

निकिता के दोस्तों ने भास्कर के साथ खास बातचीत में बताया कि 'सच की लडा़ई जीतने के लिए ठोस तैयारी करनी पड़ती है, निकिता भी इन दिनों वही कर रही हैं। हम सब उनके लिए लड़ रहे हैं। और तब तक लड़ेंगे जब तक निकिता को इंसाफ नहीं मिलता।’

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल यूनिट निकिता जैकब के मुंबई स्थित घर पर किसान आंदोलन के दौरान 'टूलकिट' बनाने को लेकर अब तक दो बार छापा मार चुकी है। पुलिस का कहना है कि टूलकिट भारत की छवि खराब करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश का हिस्सा थी। और इसे बनाने में निकिता की अहम भूमिका थी। पुलिस का आरोप यह भी है कि दिल्ली के लाल किले में हुई हिंसा में इस टूलकिट का अहम रोल था।

हालांकि, निकिता इन सभी आरोपों को खारिज कर चुकीं हैं। उनका कहना है कि ‘टूलकिट में ऐसी कोई सूचना नहीं है, जिसमें हिंसा को बढ़ावा देने वाली बात हो। टूलकिट का मकसद सिर्फ लोगों को किसानों की हालात के बारे में जागरूक करना था। इससे यह बताना था कि लोकतंत्र में किसान आंदोलन पूरी तरह से कानूनी है।’

पिछले साल एक पब्लिकेशन हाउस 'जगरनॉट' ने लॉकडाउन के समय लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए एक प्रोग्राम चलाया था। इसमें निकिता शामिल हुई थीं।
पिछले साल एक पब्लिकेशन हाउस 'जगरनॉट' ने लॉकडाउन के समय लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए एक प्रोग्राम चलाया था। इसमें निकिता शामिल हुई थीं।

कानून की पढ़ाई से लेकर समाजसेवा तक
केरल के तिरुवनंतपुरम में जन्मीं 29 वर्षीय निकिता पुणे के ILS लॉ कॉलेज से पढ़ी हैं। निकिता ने ह्यूमन राइट्स ऐंड इंटरनेशनल लॉ और कॉर्पोरेट लॉ में डिप्लोमा किया है। निकिता अपने घर में वकील बनने वाली पहली सदस्य हैं। 2013 में उन्होंने खुद को महाराष्ट्र और गोवा की बार काउंसिल में इनरोल कराया था। हिंदी, अंग्रेजी, मलयालम के अलावा उन्हें फ्रेंच भाषा की भी जानकारी है। कॉलेज के वक्त से ही निकिता समाजिक कार्यों से जुड़ी हैं।

साल 2008-2010 तक निकिता एक गैर सरकारी संगठन 'मेक अ डिफरेंस' से जुड़ीं रहीं। यह एनजीओ 2010 में उस वक्त चर्चा में आया जब मिशेल ओबामा ने भारत यात्रा के दौरान इसे अपने विजिट कार्यक्रम में शामिल किया था। यह एनजीओ अनाथ और शेल्टर होम में रह रहे बच्चों की शिक्षा के लिए काम करता है। 2015 में निकिता ने बॉम्बे हाईकोर्ट में रजिस्ट्रेशन कराया। निकिता ने कई लॉ फर्म्स में काम किया। बॉम्बे हाईकोर्ट के मशहूर वकील गिरीश गोडबोले के साथ निकिता ने अगस्त 2017 से नवंबर 2020 तक काम किया।

पिछले साल 'काबुलीवाला' पढ़ती नजर आईं थीं निकिता
पिछले साल एक पब्लिकेशन हाउस 'जगरनॉट' ने लॉकडाउन के समय लोगों को पढ़ने के लिए प्रेरित करने के लिए एक प्रोग्राम चलाया था। इसका नाम रीडएथॉन (Readathon) था। इसमें निकिता रविंद्रनाथ टैगोर की प्रसिद्ध कहानी काबुलीवाला पढ़ती नजर आईं थी।

प्रदूषण के मुद्दे पर मुखर
निकिता ने औद्योगिक कचरे के प्रबंधन के मुद्दे को लेकर अभियान भी चलाया है। दक्षिण मुंबई से उत्तर मुंबई को जोड़ने वाले कोस्टल रोड प्रोजेक्ट के खिलाफ भी निकिता ने आंदोलन में हिस्सा लिया। मुंबई का फेफड़ा कही जाने वाली आरे कॉलोनी में जब मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 2700 पेड़ काटने की अनुमति दी गई थी तो निकिता ने इसके खिलाफ होने वाले पर्यावरण कार्यकर्ताओं के आंदोलन में हिस्सा लिया था।

निकिता ने पर्यावरण के मुद्दे पर कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज (COP26) की अंतरराष्ट्रीय समिट को लेकर लोगों की राय बनाने और जागरूक करने का अभियान भी चलाया। इस अभियान का मकसद था कि पर्यावरण से जुड़े किन मुद्दों को तरजीह देनी चाहिए और हमें अपनी सरकार से क्या उम्मीद करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर जमकर ट्रोल हुईं निकिता
टूलकिट मामले के बाद निकिता को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया गया। गालियों के साथ उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई। उनके निजी जीवन पर निशाना साधते हुए जमकर कीचड़ उछाला गया।