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  • Troubled By Urban Life, 58 year old Husband And Wife Settled 120 Km Away From Mumbai, Built A Homestay In 4 Years; Now Earning 50 Thousand Every Month

आज की पॉजिटिव खबर:शहरी जिंदगी से परेशान पति-पत्नी ने मुंबई से 120 किमी दूर होमस्टे बनाया; अब हर महीने 50 हजार कमाई

3 महीने पहलेलेखक: सुनीता सिंह

शहर से दूर जिंदगी में सुकून चाहने वाले भी अच्छी कमाई कर सकते हैं। इसकी मिसाल दी है मुंबई के एक बुजुर्ग दंपत्ति, विनोद और उनकी पत्नी बीना ने। कई सालों तक मल्टीनेशनल कंपनी में अच्छी पोस्ट पर काम करने के बावजूद, लाखों की नौकरी छोड़ विनोद अपनी पत्नी के साथ एक ऐसे गांव में जा कर बसे जहां न तो बिजली थी न ही पानी की सुविधा। पति-पत्नी ने मिलकर 4 साल में ‘बनयान ब्लिस’ नाम से एक ऐसा होमस्टे तैयार किया जहां आज ठहरने के लिए देश-विदेश से हजारों टूरिस्ट आते हैं। लोग नेचर में घर से दूर, घर का लुत्फ उठाते हैं।

प्रकृति के बीचों बीच पहाड़ पर बने इस होमस्टे में ठहरने के लिए अब तक 10 हजार से ज्यादा गेस्ट आ चुके हैं। बुजुर्ग दंपत्ति इस इको-फ्रेंडली होमस्टे से हर महीने करीब 50 हजार रुपए कमा रहे हैं। खुद की लाइफ बदलने के साथ गांव वालों को रोजगार के मौके भी दे रहे हैं।

आइये जानते है विनोद, बीना और उनके ‘बनयान ब्लिस’ होमस्टे के बारे में थोड़ा और करीब से…

बीमार हुए तो कुछ अलग करने का आइडिया दिया

2009 में विनोद और बीना नायर ने अनोखी पहल की जिसकी वजह से गांव के कई लोगों को रोजगार मिल रहा है।
2009 में विनोद और बीना नायर ने अनोखी पहल की जिसकी वजह से गांव के कई लोगों को रोजगार मिल रहा है।

68 साल के विनोद 2009 से पहले एक मल्टीनेशनल एडवरटाइजिंग कंपनी में प्रेसिडेंट थे। विनोद ने तकरीबन 35 साल तक तक कई एडवरटाइजिंग कंपनियों के लिए काम किया। इस दौरान उन्हें ट्रेवल भी करना पड़ता था। “मैं मुंबई में 18 घंटे काम में बिता देता था। ज्यादातर टाइम ट्रेवल और काम करने में बीत जाता था, खुद के लिए और फैमिली के साथ समय बिताने का मौका ही नहीं मिलता था। भागदौड़ और स्ट्रेस से भरी लाइफ तो थी ही, इसी बीच मुझे ‘स्लिप डिस्क’ की शिकायत हुई और तब मैंने अपनी लाइफ स्टाइल को बदलने की ठानी। मैं मुंबई से दूर किसी गांव जाकर बसना चाहता था।”

2009 में विनोद और बीना आधुनिक सुख सुविधा छोड़, मुंबई से 120 किलोमीटर दूर वसुंदे गांव जा बसे। एक ऐसा गांव जहां न तो बिजली थी और न ही पानी की सुविधा। यही नहीं वसुंदे पहुंचने के लिए बस या ट्रेन की भी सुविधा नहीं है। यहां तक की वसुंदे के लोगों को बाहरी दुनिया के बारे में ज्यादा पता भी नहीं होता था।

कई चुनौतियों के बावजूद विनोद और बीना ने 4 साल में ऐसा होमस्टे तैयार किया जो कई लोगों के लिए वीकेंड बिताने की पसंदीदा जगह बन गयी है। यहां लोग अपनी फैमिली के साथ छुट्टियां बिताने आते हैं, खास कर बच्चों और बुजुर्गों को यहां आना बहुत पसंद है ।

मिट्टी, लकड़ी और गाय के गोबर से बना है होमस्टे

मिट्टी के बने इस होम स्टे में न ज्यादा ठंड होती है न ज्यादा गर्मी।
मिट्टी के बने इस होम स्टे में न ज्यादा ठंड होती है न ज्यादा गर्मी।

शहर में बनने वाली बिल्डिंग से बिलकुल अलग बनयान ब्लिस को ट्रेडिशनल स्टाइल में बनाया गया है। एक एकड़ में बनी बनयान ब्लिस को लकड़ी, मिट्टी और गाय के गोबर से तैयार किया गया है। यहां खिड़की और दरवाजे में इस्तेमाल की हुई लकड़ी लगाई गयी है। इस होमस्टे की खासियत ये है कि इसके रूम न तो सर्दी में ज्यादा ठंडे होते हैं न ही गर्मी में ज्यादा गरम।

यहां आने वाले गेस्ट को एयर कंडीशनर (AC), टेलीविजन या इंटरनेट जैसे कोई भी सुविधा नहीं मिलती है। जबकि पढ़ने के शौकीन लोगों के लिए किताबें रखीं गयी हैं। होमस्टे में 4 बड़े और 2 छोटे कॉटेज हैं, जहां रुकने और खाने की सभी सुविधा दी जाती हैं ।

यहां रुकने के कुछ नियम भी हैं , जैसे गेस्ट को अपना टॉवल और टॉयलेटरीज खुद ही लाना होता है। प्लास्टिक के बॉटल का इस्तेमाल नहीं किया जाता। गेस्ट को अपना बॉटल खुद ही लाना होता है जिसे वो अपनी जरूरत के अनुसार रिफिल कर सकते हैं।

गेस्ट के लिए होमस्टे में ही ऑर्गेनिक फल और सब्जियां उगाई जाती हैं। इसके अलावा यहां बारिश के पानी को भी स्टोर किया जाता है, जिसे पेड़-पौधों के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

स्ट्रेसफुल लाइफ की वजह से लोगों का एग्रो टूरिज्म की तरफ रुझान बढ़ रहा है

टीवी, इंटरनेट और शहर की भीड़भाड़ से दूर इस होम स्टे में लोग नेचरल एनवॉयरमेंट का लुत्फ उठाते हैं।
टीवी, इंटरनेट और शहर की भीड़भाड़ से दूर इस होम स्टे में लोग नेचरल एनवॉयरमेंट का लुत्फ उठाते हैं।

एग्रोटूरिज्म यानी ऐसी जगहों पर ट्रैवलिंग जहां घूमने के साथ गांव और एग्रीकल्चर का लुत्फ उठाया जा सके। बीते कुछ सालों में एग्रोटूरिज्म का क्रेज लोगों में बढ़ा है। होटल या रिजॉर्ट में रुकने के बजाय टूरिस्ट प्रकृति के करीब होमस्टे में ठहरना ज्यादा पसंद कर रहे हैं। लोग शहर की भीड़भाड़ जिंदगी से काफी बोर हो गए हैं और वो सुकून के पल बिताने ऐसी जगहों पर आना ज्यादा पसंद करते जो नेचर के करीब हो ।

विनोद बताते हैं, “ज्यादातर हमारे गेस्ट शहर की भीड़भाड़ भरी लाइफ के दूर यहां सुकून के पल बिताने आते हैं। हम यहां लोगों को खास कर बच्चों को गांव देखने के मौके देते हैं जो इस जनरेशन के बच्चों ने नहीं देखा है। यहां ना तो गाड़ियों का शोर है ना ही पॉल्यूशन इन्हीं कई खूबियों की वजह से काफी लोग यहां आते हैं। कोरोना से पहले बनयान ब्लिस में ज्यादातर लोग वीकेंड मनाने आते थे लेकिन अभी यहां पूरे हफ्ते भीड़ रहती है।

गांव के लोगों को भी रोजगार मिल रहा है

होम स्टे से कुछ ही दूरी पर आप नेचरल एनवॉयरमेंट के बीच समय बिता सकते हैं।
होम स्टे से कुछ ही दूरी पर आप नेचरल एनवॉयरमेंट के बीच समय बिता सकते हैं।

विनोद और बीना की इस अनोखी पहल की वजह से गांव के लोगों को भी रोजगार के अवसर मिल रहे हैं। होमस्टे में काम करने के लिए कई महिलाएं हैं जो खाना बनाने से लेकर गेस्ट का ध्यान रखने का काम करती हैं। इससे वहां के लोग भी पैसे कमा रहे हैं। विनोद कहते हैं, “अगर हम किसी भी जगह बदलाव लाना चाहते हैं तो इसकी शुरुआत वहां के लोगों से करनी होती है। हम यहीं के लोगों को इलेक्ट्रीशियन, प्लम्बर, ड्राइविंग और खाना बनाने जैसे काम में स्किल्ड कर रहे हैं। ये लोग हमारी मदद भी करते हैं और इसके बदले पैसे भी कमाते हैं।”

दूसरे भी इस तरह के मॉडल पर काम कर सकते हैं

विनोद और बीना के काम से प्रभावित होकर कई युवा इस मॉडल पर काम करना चाहते हैं।
विनोद और बीना के काम से प्रभावित होकर कई युवा इस मॉडल पर काम करना चाहते हैं।

विनोद बताते हैं कि कुछ नया करने के लिए सबसे जरूरी आपकी नीयत है और फिर लगातार की जाने वाली कोशिश है। फिर एक दिन ऐसा आता है कि भले ही आप छोटे से गांव में बसे हो लेकिन आपको ढूंढते हुए काफी लोग आएंगे। विनोद कहते हैं, "इस तरह के मॉडल पर कोई भी काम कर सकता है। लोग पैसों के लिए शहर की तरफ भागते हैं, जबकि लोगों को ये पता ही नहीं की गांव में भी रहकर सकता है। साथ ही एक अच्छी लाइफ भी जी जा सकती है और मैं खुद इस बात का प्रमाण हूं। "

विनोद और बीना की जिंदगी से कई लोग प्रभावित हो कर ऐसे ही होमस्टे में रहना चाहते हैं। ऐसे ही कुछ लोगों के लिए विनोद 5 एकड़ में और भी होमस्टे बना रहे हैं, जो तकरीबन 4 साल में बनकर तैयार हो जाएगा। "नए प्रोजेक्ट में होमस्टे के अलावा, डेयरी का काम किया जाएगा और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए उन्हें कढ़ाई, बुनाई और योग सिखाया जाएगा "

विनोद का काम देख कर कई युवा इनसे जुड़ना चाहते हैं और शहर में रहने के बजाय गांव में रहना चाहते हैं।

होमस्टे का नाम बनयान ब्लिस क्यों पड़ा?

150 साल पुराना ये बनयान (बरगद) का पेड़ है, जिसे काटने के बजाय इसके बीचो बीच ही होम स्टे बनाया गया है।
150 साल पुराना ये बनयान (बरगद) का पेड़ है, जिसे काटने के बजाय इसके बीचो बीच ही होम स्टे बनाया गया है।

जिस प्रॉपर्टी में बनयान ब्लिस को बनाया गया है वहां डेढ़ सौ साल पुराना बनयान (बरगद) का पेड़ है। बनयान ब्लिस में 6 कॉटेज हैं और उनमे से 5 कॉटेज बनयान ट्री के बीच में बनाये गए हैं, जबकि एक कॉटेज बाहर बना है। बनयान ट्री के बीचोबीच बना होमस्टे जहां आने वाले लोगों को नेचर का आनंद मिलता है। इसलिए इस जगह का नाम बनयान ब्लिस रखा गया है।

ये मुंबई और पुणे दोनों से 120 किलोमीटर दूर महाराष्ट्र के अहमदनगर जिले के वसुंदे गांव में बनाया गया है। जहां जाने के लिए पर्सनल गाड़ी होनी चाहिए। 2 घंटे 45 मिनट का सफर तय कर आप यहां पहुंच सकते हैं।

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