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आज की पॉजिटिव खबर:दिल्ली के रहने वाले दो भाइयों ने नौकरी छोड़ 200 किसानों का नेटवर्क बनाया, अब सालाना 70 लाख पहुंचा टर्नओवर, 40 को रोजगार भी दिया

नई दिल्ली5 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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दिल्ली के रहने वाले दो भाई मृणाल डब्बास और लक्ष्य डब्बास किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मृणाल ने इंजीनियरिंग की है, जबकि लक्ष्य ने एनवायरनमेंट साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली है। पिछले पांच साल से दोनों भाई मिलकर एग्रो टूरिज्म बेस्ड ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रहे हैं। 200 से ज्यादा किसानों का उन्होंने नेटवर्क तैयार किया। दिल्ली के साथ-साथ देशभर में वे फल, सब्जियां, शहद, दाल, आटा जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर रहे हैं। इससे हर साल वे 70 लाख रुपए का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं।

30 साल के मृणाल दो साल तक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी कर चुके हैं। वे कहते हैं कि हमारे पास अच्छी खासी जमीन थी। पिता जी अपनी सर्विस के साथ खेती भी करते थे, लेकिन वो कमर्शियल फार्मिंग नहीं थी। वे खुद की जरूरतों के लिए खेती करते थे।

जॉब के बाद खाली वक्त में करते थे खेती

मृणाल का दावा है कि वे अपनी खेती में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे खुद ही ऑर्गेनिक तरीके से खाद तैयार करते हैं।
मृणाल का दावा है कि वे अपनी खेती में किसी तरह के केमिकल का इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे खुद ही ऑर्गेनिक तरीके से खाद तैयार करते हैं।

मृणाल कहते हैं कि 2014 में मुझे महसूस हुआ कि केमिकल वाले फ्रूट्स और सब्जियां खाने से लोगों में बीमारियां फैल रही हैं। जिनके पास खेत नहीं हैं उनकी तो अलग बात है, लेकिन जिनके पास खुद की जमीन है, वे भी मार्केट से केमिकल वाले प्रोडक्ट्स खरीद रहे हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं हैं। ऐसे में क्यों न खुद के खेत में ही फल और सब्जियां उगाई जाएं ताकि हमें प्योर प्रोडक्ट मिल सके। बस यही सोचकर हमने एक एकड़ जमीन से ऑर्गेनिक फार्मिंग की शुरुआत की।

वे बताते हैं कि जब खेत से सब्जियां निकलने लगीं तो अपने परिवार के साथ-साथ पड़ोस के लोगों से भी अच्छा रिस्पॉन्स मिला। सबने हमारे प्रोडक्ट्स की तारीफ की। इसके बाद अगले सीजन में हमने प्रोडक्ट्स बढ़ा दिए। हम अपने साथ-साथ पड़ोस के लोगों को भी फल और सब्जियां प्रोवाइड करने लगे। धीरे-धीरे लोगों में ये बात फैलती गई और हमारे कस्टमर्स बढ़ते गए। साथ में हम अपना दायरा भी बढ़ाते गए। दो साल बाद मैंने नौकरी छोड़ दी और अपने भाई के साथ प्रोफेशनल रूप में फार्मिंग करने लगा।

कैसे करते हैं मार्केटिंग?

मृणाल कहते हैं कि किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे अपना प्रोडक्ट कैसे और कहां बेचें। अगर किसान ऑर्गेनिक तरीके से खेती करता है तो मंडियों में उसे मन मुताबिक भाव नहीं मिलेंगे। ज्यादातर लोगों को सब्जी से मतलब होता है। वे ये नहीं देखते कि किसने ऑर्गेनिक तरीके से उगाई है और किसमें केमिकल मिले हुए हैं।

मृणाल कहते हैं कि हमारी मार्केटिंग का सबसे बड़ा सोर्स माउथ पब्लिसिटी और सोशल मीडिया है। इसके जरिये हम लोग दिल्ली के साथ देश के दूसरे हिस्सों में भी अपने प्रोडक्ट्स की सप्लाई करते हैं। लोग वॉट्सऐप ग्रुप या ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। इसके साथ ही हमने दिल्ली में दो जगहों पर अपनी रिटेल शॉप भी खोली है। जहां हमारे प्रोडक्ट बिकते हैं।

मृणाल के खेत में लगी सब्जियां। उनकी टीम अभी 50 से ज्यादा तरह की सब्जियां और फल उगा रही है। वे हर सीजन के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करते हैं।
मृणाल के खेत में लगी सब्जियां। उनकी टीम अभी 50 से ज्यादा तरह की सब्जियां और फल उगा रही है। वे हर सीजन के मुताबिक प्रोडक्ट तैयार करते हैं।

क्या है उनका बिजनेस मॉडल

मृणाल और उनके भाई लक्ष्य अभी 28 एकड़ जमीन पर खेती कर रहे हैं। वे 50 से ज्यादा तरह की सब्जियां और फल उगाते हैं। इसके साथ ही वे एक दर्जन से ज्यादा प्रोडक्ट्स प्रोसेसिंग करके तैयार करते हैं। इन सभी प्रोडक्ट्स को वे ऑनलाइन और ऑफलाइन बेचते हैं।

इसके साथ ही उन्होंने किसानों का एक नेटवर्क भी तैयार किया है। इसमें देश के अलग अलग हिस्सों से 200 से ज्यादा किसान अभी जुड़े हैं। मृणाल इन किसानों को कमर्शियल फार्मिंग के लिए ट्रेंड कर चुके हैं। ये सभी किसान अपने खेतों में खेती करते हैं, प्रोडक्ट तैयार करते हैं। और इनकी मार्केटिंग का काम मृणाल की टीम करती है। इससे इन किसानों को भी फायदा होता है और मृणाल को भी।

मृणाल कहते हैं कि हम कोई भी प्रोडक्ट वेस्ट नहीं करते हैं, जो प्रोडक्ट मार्केट में नहीं भेज पाते उसे प्रोसेसिंग करके दूसरा प्रोडक्ट तैयार करते हैं और कस्टमर्स को देते हैं। इसके साथ ही हमलोग कोई भी पेस्टीसाइड या केमिकल यूज नहीं करते हैं। हमारा फोकस क्वांटिटी पे नहीं, क्वालिटी पर होता है। उन्होंने करीब 40 लोगों को रोजगार भी दिया है, जो प्रोडक्ट की पैकेजिंग, डिलीवरी और खेती के काम में उनकी मदद करते हैं।

ट्रेनिंग सेंटर और एग्रोबेस्ड टूरिज्म

अपने खेत के पास ही उन्होंने तंबू लगाकर कैंप बना रखा है। ट्रेनिंग के लिए आने वाले किसानों के लिए यहां रुकने की व्यवस्था होती है।
अपने खेत के पास ही उन्होंने तंबू लगाकर कैंप बना रखा है। ट्रेनिंग के लिए आने वाले किसानों के लिए यहां रुकने की व्यवस्था होती है।

मृणाल खेती के साथ ही किसानों और यूथ्स को ट्रेनिंग देने का भी काम करते हैं। उन्होंने अपने फॉर्म हाउस पर ट्रेनिंग सेंटर खोल रखा है। जहां किसानों के साथ ही कॉलेज के स्टूडेंट्स ट्रेनिंग के लिए आते हैं। वहां उनके खाने पीने और रहने की भी व्यवस्था होती है। 10 से 15 दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम होता है। इसके लिए मृणाल कोई फीस नहीं लेते। हां रहने और भोजन का भुगतान लोगों को करना पड़ता है। इसके लिए उन्होंने कुछ स्कूलों से टाइअप भी किया है। अभी कोरोनाकाल में वे ऑनलाइन भी ट्रेनिंग देते हैं।

इसके साथ उन्होंने एग्रोटूरिज्म की भी शुरुआत की है। यानी अगर कोई खेतों की हरियाली की सैर करना चाहता है। प्रैक्टिकल खेती सीखना चाहता है और अपने परिवार के साथ ऑर्गेनिक और ताजे फूड्स खाना चाहता हैं तो उनके लिए भी मृणाल ने व्यवस्था की है। ताकि ऑर्गेनिक फूड्स को लेकर लोगों में इंटरेस्ट बढ़े। दिल्ली और नोएडा के आस-पास के काफी संख्या में लोग उनके यहां आते हैं।

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