आज की पॉजिटिव खबर:कश्मीर के प्रोडक्ट देश-विदेश तक पहुंचें इसलिए 2 दोस्तों ने शुरू की डिलीवरी कंपनी, 2 साल में 8 करोड़ का बिजनेस

नई दिल्ली6 महीने पहले

कश्मीर न सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, बल्कि वहां के कई प्रोडक्ट भी काफी लोकप्रिय हैं। चाहे कश्मीर के ड्रायफ्रूट्स हों, केसर हो, शॉल हों या अपरेल्स; देशभर में इन प्रोडक्ट्स की भरपूर डिमांड है, लेकिन एक दिक्कत भी है। वो दिक्कत है लॉजिस्टिक सपोर्ट की। जिसके चलते कश्मीर के प्रोडक्ट्स को बाहर भेजने में कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

इस कमी को देखते हुए कश्मीर के दो दोस्तों सामीउल्लाह शेख और आबिद राशिद ने 2019 के अंत में एक पहल की। दोनों ने मिलकर ऑनलाइन और ऑफलाइन लेवल पर कश्मीर के लोकल प्रोडक्ट्स की देशभर में डोर-टु-डोर डिलीवरी का काम शुरू किया। इससे सालाना 8 करोड़ रुपए का वे टर्नओवर जनरेट कर रहे हैं।

30 साल के आबिद और सामी (30) दोनों कश्मीर में पले बढ़े। दोनों ने ही MBA किया है। मार्केटिंग और बिजनेस सेक्टर में दोनों का अच्छा खासा अनुभव रहा है। आबिद लंबे वक्त तक टेक्नोलॉजी से भी जुड़े रहे हैं।

कश्मीरी प्रोडक्ट की डिमांड थी, लेकिन डिलीवरी में दिक्कत थी

30 साल के आबिद और सामी (30) दोनों कश्मीर में पले बढ़े हैं। दोनों ने ही MBA किया है।
30 साल के आबिद और सामी (30) दोनों कश्मीर में पले बढ़े हैं। दोनों ने ही MBA किया है।

भास्कर से बात करते हुए आबिद कहते हैं, 'MBA करने के बाद मैंने कुछ साल भारत में काम किया। इसके बाद UAE चला गया। जहां 2018 तक काम कियां। वहां मैं लीडिंग पोजिशन पर था।इसके बाद भारत वापस चला आया।'

वे कहते हैं, 'हमें अपने यहां के प्रोडक्ट काफी प्रिय हैं। हम कहीं भी रहते हैं तो घर से पसंद के प्रोडक्ट जरूर मंगाते थे, लेकिन कई बार लॉजिस्टिक सपोर्ट को लेकर दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। भारत में भी कश्मीर के बाहर रहने वाले लोग मुझसे यहां के प्रोडक्ट मंगाते थे, लेकिन कई बार उन तक वह सामान भेजने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।'

आबदि कहते हैं कि मुझे मार्केटिंग का अनुभव था और लॉजिस्टिक सपोर्ट की भी जानकारी थी। मुझे लगा कि अगर इस सेक्टर में कुछ काम किया जाए तो बिजनेस के साथ यहां के लोकल कारीगरों और दुकानदारों को भी काफी फायदा होगा। इनके प्रोडक्ट की मार्केटिंग और ब्रांडिंग बड़े लेवल पर हो जाएगी। इसके बाद मैंने अपने दोस्त सामी से इसको लेकर चर्चा की। उन्हें भी यह आइडिया पसंद आया और हम दोनों काम करने के लिए प्लानिंग करने लगे।

करीब एक साल तक रिसर्च पर फोकस किया

आबिद कहते हैं कि हमारी टीम हर एक ऑर्डर की एनालिसिस करती है। उसके बाद डिलीवरी वाले लड़के उसे तय लोकेशन तक पहुंचाते हैं।
आबिद कहते हैं कि हमारी टीम हर एक ऑर्डर की एनालिसिस करती है। उसके बाद डिलीवरी वाले लड़के उसे तय लोकेशन तक पहुंचाते हैं।

आबिद कहते हैं कि हमें मार्केटिंग का अनुभव जरूर था, लेकिन कुछ भी ग्राउंड पर नया करने से पहले रिसर्च जरूरी थी। लिहाजा मैंने और सामी ने पहले रिसर्च पर फोकस किया। कश्मीर और जम्मू के अलग-अलग वेंडर्स से बात की। उनके काम को समझा, उनके बिजनेस और रेवेन्यू को समझा। इसके बाद उनसे अपना प्लान शेयर किया कि हम आपको लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड करेंगे। वेंडर्स को भी हमारा प्लान और आइडिया पसंद आया और उन्होंने हमारे साथ जुड़कर काम करने में दिलचस्पी दिखाई।

फिर हमने कुछ बड़ी लॉजिस्टिक कंपनियों के काम करने के मॉडल को समझा। कश्मीर के लिहाज से लॉजिस्टिक को लेकर जो दिक्कतें थीं, उसकी लिस्ट तैयार की। फिर उसके हिसाब से अपना मार्केटिंग प्लान और बिजनेस मॉडल तैयार किया।

3 वेंडर्स के साथ काम करना शुरू किया, आज 800 से ज्यादा जुड़े

आबिद कहते हैं कि हमने साल 2018 के अंत में अपना स्टार्टअप शुरू किया। इसके लिए शुरुआत में हमने 3 कश्मीरी वेंडर्स के साथ टाइअप किया। वे कश्मीरी शॉल और ड्रेसेज की मार्केटिंग करते थे। उनके प्रोडक्ट को कश्मीर के साथ ही दूसरे राज्यों में भेजने का जिम्मा हमने उठाया। इसके लिए हमने सबसे पहले उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जोड़ा, उनके सोशल मीडिया अकाउंट क्रिएट किए और प्रमोशन पर जोर दिया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों तक प्रोडक्ट के बारे में जानकारी पहुंच सके।

आबिद बताते हैं कि हमारी टीम भारत के हर शहर में डिलीवरी करती है। कई बार तो हम लोग 50 टन से भी ज्यादा वजन का लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड कराते हैं।
आबिद बताते हैं कि हमारी टीम भारत के हर शहर में डिलीवरी करती है। कई बार तो हम लोग 50 टन से भी ज्यादा वजन का लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड कराते हैं।

इसका फायदा यह हुआ कि जल्द ही उन्हें ऑर्डर मिलने लगे और फिर आबिद की टीम उसकी डिलीवरी करने लगी। इस तरह धीरे-धीरे उनका काम रफ्तार पकड़ता गया। एक के बाद एक नए बिजनेस और वेंडर्स उनके साथ जुड़ते गए। 5-6 महीने के भीतर ही अच्छा खासा नेटवर्क उन्होंने तैयार कर लिया था। उसके बाद कोविड की वजह से कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ा। हालांकि, उस महामारी के बीच उन्हें अवसर भी खूब मिला।

वे बताते हैं कि कोरोना के समय यहां के लोकल वेंडर्स और बिजनेस वालों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लॉकडाउन की वजह से न तो कश्मीर में उनका प्रोडक्ट बिक रहा था न ही वे दूसरे राज्यों में भेज पा रहे थे। हमने इसे मौके में बदला और उनके प्रोडक्ट को लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड कराने लगे। इसका फायदा यह हुआ कि ज्यादातर वेंडर्स हमसे लॉजिस्टिक सपोर्ट करने के लिए कॉन्टैक्ट करने लगे। अभी आबिद के साथ 800 से ज्यादा छोटे-बड़े बिजनेस जुड़े हैं।

कैसे करते हैं काम, क्या है मार्केटिंग मॉडल?

आबिद की टीम में फिलहाल 60 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इनमें मैनेजमेंट से लेकर डिलीवरी लेवल तक के लोग शामिल हैं।
आबिद की टीम में फिलहाल 60 से ज्यादा लोग काम करते हैं। इनमें मैनेजमेंट से लेकर डिलीवरी लेवल तक के लोग शामिल हैं।

वे कहते हैं कि जैसे ही कोई कस्टमर किसी ब्रांड की साइट पर या सोशल मीडिया के जरिए कोई प्रोडक्ट ऑर्डर करता है, तो उसकी डिलीवरी डिटेल्स हमारे पास आ जाती है। उसके बाद हमारी टीम उस बिजनेस या वेंडर्स के यहां से वह सामान पिकअप करती है और वहां से उसे डिलीवरी लोकेशन तक पहुंचाती है। कस्टमर्स चाहे तो ऑनलाइन पेमेंट कर सकता है या वह कैश ऑन डिलीवरी, यानी COD मोड से भी प्रोडक्ट खरीद सकता है। इसके बाद हम अपना हिस्सा काट करके उस ब्रांड या बिजनेस तक पैसे पहुंचा देते हैं।

वे बताते हैं कि हम लोग देशभर में हम अभी लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रोवाइड कर रहे हैं। कुछ प्रोडक्ट तो हमने UAE भी भेजे हैं। हमारे साथ 60 ज्यादा लोगों की टीम है। हर दिन करीब 2 हजार प्रोडक्ट की डिलीवरी हमारी टीम करती है। इतना ही नहीं, घाटी में कई बार हमें हिंसा के खौफ का भी सामना करना पड़ता है। कई बार इंटरनेट बंद हो जाता है, तो कई बार स्पीड की समस्या आती है, लेकिन इसके बाद भी हम लगातार काम कर रहे हैं।

वे कहते हैं कि हमारी टीम के डिलीवरी ब्वॉय के पास गाड़ी, बैग और ट्रांसपोर्टेशन के लिए सभी जरूरी चीजें उपलब्ध हैं।
वे कहते हैं कि हमारी टीम के डिलीवरी ब्वॉय के पास गाड़ी, बैग और ट्रांसपोर्टेशन के लिए सभी जरूरी चीजें उपलब्ध हैं।

आबिद बताते हैं कि हम वेबसाइट के साथ ही ऐप के जरिए अपना काम करते हैं। हम लोग ब्रांड टु बिजनेस और ब्रांड टु कस्टमर्स लेवल पर काम करते हैं। इसके लिए ब्रांड्स या वेंडर्स को सबसे पहले हमारी वेबसाइट या ऐप पर जाकर अपना अकाउंट क्रिएट करना होता है। उसके बाद हमारी टीम अकाउंट वेरीफाइ करती है। फिर वह रजिस्टर्ड होने के बाद लॉगिन कर सकता है। इससे उसका ब्रांड हमारी वेबसाइट या ऐप से लिंक हो जाता है। कस्टमर्स के लिए भी सेम प्रोसेस है।