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आज की पॉजिटिव खबर:दो दोस्तों ने नौकरी छोड़ दार्जिलिंग की चाय की मार्केटिंग शुरू की; दो महीने में 500 कस्टमर्स बने, 10 लाख रुपए से ज्यादा का बिजनेस

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

दार्जिलिंग की चाय बेहद खास होती है। इसका रंग, खुशबू और टेस्ट सबकुछ लाजवाब होता है। यही वजह है कि भारत के साथ-साथ विदेशों में भी इसकी खूब डिमांड है। कई ब्रांड्स दार्जिलिंग की चाय के नाम से अपनी मार्केटिंग करते हैं। ज्यादातर लोग कहीं मॉल या शॉप पर चाय खरीदने जाते हैं तो दार्जिलिंग का लेबल देखना नहीं भूलते हैं।

जरा सोचिए अगर दार्जिलिंग के चाय बागानों से निकली फ्रेश चाय एक सब्सक्रिप्शन पर सालभर आपके घर पहुंचे तो कैसा रहेगा? है न यूनीक मॉडल... कोलकाता के दो युवाओं ने हाल ही में एक स्टार्टअप की शुरुआत की है। जिसके जरिए वे सब्सक्रिप्शन मॉडल पर देशभर में दार्जिलिंग की फ्रेश चाय पहुंचा रहे हैं। दो महीने से भी कम वक्त में 500 से ज्यादा लोगों ने उनका सब्सक्रिप्शन लिया है। अब तक 10 लाख रुपए से ज्यादा का बिजनेस वे कर चुके हैं।

23 साल के स्पर्श अग्रवाल और 24 साल के ईशान दोनों बचपन के दोस्त हैं। स्पर्श ने सोनीपत हरियाणा से पढ़ाई की है जबकि ईशान ने इटली से इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में बैचलर्स किया है। पढ़ाई पूरी करने के बाद स्पर्श दिल्ली के एक थिंक टैंक के लिए काम कर रहे थे। जबकि ईशान मुंबई में इन्वेस्टमेंट बैंकर के रूप में काम कर रहे थे।

कैसे आया आइडिया?

स्पर्श ने सोनीपत हरियाणा से पढ़ाई की है जबकि ईशान ने इटली से इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में बैचलर्स किया है।
स्पर्श ने सोनीपत हरियाणा से पढ़ाई की है जबकि ईशान ने इटली से इंटरनेशनल इकोनॉमिक्स में बैचलर्स किया है।

स्पर्श कहते हैं कि बिजनेस का न तो मेरा पहले से इरादा था और न ही इसमें कोई दिलचस्पी थी। मुझे बिजनेसमैन बनाने में लॉकडाउन का काफी हद तक रोल रहा है। दरअसल मेरा परिवार दार्जिलिंग के चाय बागान से जुड़ा हुआ है। सालों से यह हमारा फैमिली बिजनेस रहा है।

लेकिन, पिछले कुछ सालों से चाय बागानों की हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। कारोबार घटता जा रहा है। लॉकडाउन ने तो हमारी कमर ही तोड़ दी। सबकुछ ठप सा हो गया। परिवार के लोग इसे बेचने तक की बात करने लगे।

स्पर्श बताते हैं कि मुझे इससे काफी तकलीफ पहुंची। मैं नहीं चाहता था कि हमारा बागान बिक जाए। मैंने पापा को समझाया और ऐसा नहीं करने के लिए कहा। तो उन्होंने थोड़े सख्त लहजे में कहा कि ज्ञान मत दो, अगर तुम इसे बचाने के लिए कुछ कर सकते हो तो करो, नहीं तो हम जो कर रहे हैं, करने दो।

इसके बाद स्पर्श ने यह बात अपने दोस्तों को बताई। उनके दोस्तों ने भी बागान न बेचने की सलाह दी। हालांकि उन्होंने कोई तरकीब नहीं सुझाई। फिर स्पर्श ने ईशान से बात की। वे साथ काम करने के लिए राजी हो गए।

चाय बागानों में गए, चाय का बिजनेस और मार्केट को समझना शुरू किया

एक हजार एकड़ में स्पर्श का चाय बागान है, जहां 300 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं।
एक हजार एकड़ में स्पर्श का चाय बागान है, जहां 300 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं।

कोरोना के चलते स्पर्श वर्क फ्रॉम होम जॉब कर रहे थे। इसलिए वे हर संडे को कोलकाता से दार्जिलिंग जाने लगे। वहां बागानों की देखभाल करने लगे, काम करने वालों से उनका काम समझने लगे। धीरे-धीरे उन्होंने अपना सेटअप जमाना शुरू कर दिया। वे कोलकाता की बजाय दार्जिलिंग में ही रहने लगे। करीब 6 महीने तक लगातार रिसर्च करने के बाद उन्होंने बिजनेस प्लान पर काम करना शुरू किया।

इसके बाद दोनों राज बनर्जी से मिले। राज बनर्जी दार्जिलिंग टी बिजनेस में जाने माने लोगों में से एक हैं। उनकी मेंटरशिप में दोनों ने तय किया कि वे मार्केट में एक्सपोर्ट करने की बजाय सीधे कस्टमर्स तक पहुचेंगे। जिससे लोगों को सही प्रोडक्ट मिले और उन्हें उसकी कीमत।

नौकरी छोड़ दोनों बिजनेस में उतर गए
स्पर्श कहते हैं कि काफी सोचने-समझने के बाद हमने तय किया कि हम सब्सक्रिप्शन मॉडल पर काम करेंगे। यानी कस्टमर्स को एक बार एक अमाउंट पे करना होगा और उन्हें सालभर फ्रेश चाय मिलेगी। इससे उन्हें हर मौसम के हिसाब से अलग-अलग फ्लेवर की चाय पीने को मिल सकेगी।

फिलहाल स्पर्श दो तरह की चाय की मार्केटिंग कर रहे हैं। एक ग्रीन टी और दूसरा ब्लैक टी।
फिलहाल स्पर्श दो तरह की चाय की मार्केटिंग कर रहे हैं। एक ग्रीन टी और दूसरा ब्लैक टी।

इसके बाद दोनों ने अपनी नौकरी छोड़ दी। और इसी साल जून के अंत में Dorje Teas के नाम से अपना स्टार्टअप शुरू किया। चूंकि उनका पहले से चाय बागान था तो उन्हें कोई खास बजट की जरूरत नहीं पड़ी। एक वेबसाइट डेवलप की, सोशल मीडिया पर अकाउंट्स बनाए और मार्केटिंग शुरू कर दी। धीरे-धीरे लोगों को उनके बारे में जानकारी होने लगी। लोग उनसे ऑर्डर के लिए कॉन्टैक्ट करने लगे।

क्या है बिजनेस मॉडल? कैसे करते हैं काम?
स्पर्श कहते हैं कि हम लोग सालभर का सब्सक्रिप्शन प्लान चला रहे हैं। 2 हजार रुपए भुगतान करके कोई भी यह प्लान खरीद सकता है। एक बार सब्सक्रिप्शन लेने के बाद हम चार बार उसके घर चाय भेजते हैं। एक बार में हम 250 ग्राम चाय भेजते हैं। इससे 100 कप चाय बनाई जा सकती है। इतना ही नहीं अगर कोई इंस्टॉलमेंट में भी भुगतान करना चाहे तो उसकी भी व्यवस्था है। वह चार इंस्टॉलमेंट में 2 हजार रुपए का भुगतान कर सकता है। फिलहाल स्पर्श दो तरह की चाय की मार्केटिंग कर रहे हैं। एक ग्रीन टी और दूसरा ब्लैक टी।

वे कहते हैं कि दार्जिलिंग की चाय की खासियत है कि यह मौसम के हिसाब से कलर और टेस्ट बदलती रहती है। सब्सक्रिप्शन मॉडल का फायदा यह होगा कि कस्टमर्स को हर सीजन की फ्रेश चाय मिल जाएगी। अब तक 500 से ज्यादा लोग सब्सक्रिप्शन ले चुके हैं। कई लोग थोक में भी उनसे चाय खरीदते हैं।

अपनी टीम के साथ स्पर्श और ईशान। फिलहाल उनके साथ 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं।
अपनी टीम के साथ स्पर्श और ईशान। फिलहाल उनके साथ 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं।

मार्केटिंग के लिए स्पर्श और उनकी टीम सोशल मीडिया पर फोकस कर रही है। वे अपनी वेबसाइट के जरिए देशभर में मार्केटिंग कर रहे हैं। ज्यादा से ज्यादा कस्टमर्स को टारगेट करने के लिए उन्होंने अखबारों में विज्ञापन भी दिए हैं। एक हजार एकड़ में स्पर्श का चाय बागान है। जहां 300 से ज्यादा मजदूर काम करते हैं। जबकि स्पर्श की टीम में 10 लोग काम करते हैं।

अगर आप भी चाय का स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो ये दो स्टोरी आपके काम की हैं

  1. मध्यप्रदेश के रीवा के रहने वाले अनुभव दुबे UPSC की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता चाहते थे कि बेटा IAS बने। अनुभव को चाय बहुत पसंद थी। उन्होंने सोचा कि क्यों न अपनी पसंद को ही बिजनेस में तब्दील किया जाए। बस क्या था अपने दोस्त आनंद नायक से बात की और इंदौर में चाय का एक कैफे खोल दिया। देखते ही देखते उनके बिजनेस ने रफ्तार पकड़ ली और एक के बाद एक नए आउटलेट्स खुलते गए। आज उनके पास 165 से ज्यादा आउटलेट्स हैं और सालाना 100 करोड़ रुपए टर्नओवर है। (पढ़िए पूरी खबर)
  2. महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के रहने वाले रेवन शिंदे 12वीं तक पढ़े हैं। घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। एक साल पहले तक वे सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते थे। आज वे चाय की होम डिलीवरी का बिजनेस करते हैं। हर दिन एक हजार से ज्यादा उनके पास ऑर्डर आते हैं। इससे हर महीने 2 लाख रुपए से ज्यादा उनकी कमाई हो रही है। (पढ़िए पूरी खबर)
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