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भास्कर एक्सक्लूसिव:दिल्ली की ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी की अंतिम मीटिंग में दो पैनलिस्ट नहीं गए, इनमें से एक ने कहा था- रिपोर्ट पूर्वाग्रह से प्रेरित

नई दिल्ली4 महीने पहलेलेखक: संध्या द्विवेदी
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सुप्रीम कोर्ट की ऑक्सीजन ऑडिट पैनल की अंतरिम रिपोर्ट को लेकर दिल्ली सरकार और केंद्र फिर आमने-सामने हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली ने वास्तविक जरूरत से 4 गुना ज्यादा ऑक्सीजन की डिमांड की। दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने इस रिपोर्ट के वजूद को ही नकार दिया है।

भास्कर ने इस रिपोर्ट को लेकर दिल्ली की ऑक्सीजन ऑडिट कमेटी के मेंबर संजय सिंह से बात की तो पता चला कि दो मेंबर्स इस कमेटी की आखिरी बैठक में शामिल ही नहीं हुए थे। इनमें से एक दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी भूपेंद्र भल्ला ने तो मीटिंग में ही कह दिया था कि रिपोर्ट पूर्वाग्रह से प्रेरित है।

भास्कर से कमेटी के मेंबर पेट्रोलियम एंड ऑक्सीजन सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) के संजय कुमार सिंह ने कहा कि रिपोर्ट रियल टाइम ऑक्सीजन डिमांड पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में दर्ज हर फैक्ट का एनालिसिस बेहद बारीकी से किया गया है। पैनल ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। अब सुप्रीम कोर्ट इसे जांचने के बाद अपनी अंतिम मुहर लगाएगा।

प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी भल्ला और मैक्स हेल्थ केयर के डॉ. बुद्धिराजा आखिरी मीटिंग में नहीं गए

संजय सिंह ने कहा, 'वैसे शुरुआती सभी मीटिंग हमने एक साथ की। लेकिन, आखिरी मीटिंग में दो पैनलिस्ट, भूपेंद्र भल्ला और मैक्स हेल्थ केयर के डायरेक्टर डॉ. संदीप बुद्धिराजा 18 मई 2021 की मीटिंग में शामिल नहीं हुए थे। इस बात का जिक्र रिपोर्ट में भी है। भल्ला जी के कुछ ऑब्जेक्शन थे। उन्हें लग रहा था कि इस रिपोर्ट को बनाने में कुछ पूर्वाग्रह शामिल हैं। डॉ. संदीप बुद्धिराजा का कारण साफ नहीं है।'

भूपेंद्र भल्ला ने रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया और मकसद पर उठाए थे सवाल

संजय सिंह ने कहा, 'प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी भूपेंद्र भल्ला ने कहा था कि जिस तरह से इस रिपोर्ट को तैयार किया गया है, वह पूर्वाग्रह पर आधारित है। नेशनल कैपिटल टेरिटरी ऑफ दिल्ली (NCTD) ने दिल्ली हाईकोर्ट और देश की सुप्रीम कोर्ट के सामने राज्य में जरूरत से कम ऑक्सीजन सप्लाई की जो बात कही थी, वह बिल्कुल भी तार्किक नहीं थी। रिपोर्ट में ऑक्सीजन डिमांड की जरूरत के बारे में चर्चा न कर यह बताने की कोशिश की गई है कि दिल्ली सरकार की ऑक्सीजन की मांग जरूरत से कहीं ज्यादा थी।'

भल्ला ने यह भी कहा था कि 'ऑक्सीजन ऑडिट के लिए बनाया गया सब ग्रुप अपने मकसद से भटक गया है। इस रिपोर्ट का मकसद यह पता लगाना था कि आखिर मेडिकल ऑक्सीजन की सप्लाई में क्यों दिक्कतें आईं। ऑक्सीजन इस्तेमाल के फार्मूले की समीक्षा करना नेशनल टास्क फोर्स का काम था। लेकिन, यह सब ग्रुप अपना असल मकसद भूलकर उस फार्मूले को तय करने लगा।'

कौन-कौन लोग थे पैनल में शामिल

AIIMS के डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया इस पैनल के मुखिया थे। इनके अलावा 4 सदस्य थे। दिल्ली सरकार के प्रिंसिपल होम सेक्रेटरी भूपेंद्र भल्ला, मैक्स हेल्थ केयर डायरेक्टर डॉ. संदीप बुद्धिराजा, यूनियन जल शक्ति मिनिस्ट्री में ज्वाइंट सेक्रेटरी सुबोध यादव, पेट्रोलियम ऐंड ऑक्सीजन सप्लाई सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (पीईएसओ) के संजय सिंह।

अंतरिम रिपोर्ट में क्या है ?

पैनलिस्ट ने 14 मई को चौथी मीटिंग की। इस मीटिंग में निकाले गए निष्कर्ष के मुताबिक वास्तविक ऑक्सीजन खपत और दावा किए गए खपत में भारी अंतर पाया गया। यह अंतर तकरीबन 4 गुना था। यानी दिल्ली सरकार ने मांग को बार-बार रिवाइज करने के बाद आखिर में 1140 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की जो मांग की थी, वह वास्तविक जरूरत (289 मीट्रिक टन) से चार गुना ज्यादा थी। दिल्ली के अस्पतालों और रिफिलर्स कंपनी के पास लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन पर्याप्त मात्रा में थी।

  • 10 मई को दिल्ली में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक्स अपनी कुल क्षमता के 71% तक भरे हुए थे। दिल्ली सरकार ने जो 700 मीट्रिक टन ऑक्सीजन की अतिरिक्त मांग की थी, उसे इन टैंकर्स में भरना मुमकिन नहीं था।
  • दिल्ली में ऑक्सीजन की औसतन खपत 284 से 372 मीट्रिक टन के बीच ही थी।
  • 700 मीट्रिक टन लिक्विड ऑक्सीजन रखने के लिए दिल्ली के पास इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं था।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि दिक्कत ऑक्सीजन की उपलब्धता में नहीं बल्कि ऑक्सीजन के निस्तारण यानी टैंकरों में भरने और उन्हें अस्पताल तक पहुंचाने में आई।
  • दिल्ली के पास आवश्यकता से ज्यादा ऑक्सीजन थी, जिसका इस्तेमाल दूसरे राज्यों में किया जा सकता था।
  • 13 मई को ज्यादातर लिक्विड ऑक्सीजन टैंक अपनी क्षमता के 75 फीसदी स्तर तक भरे हुए थे। कुछ टैंक तो पूरी तरह भरे हुए थे। 11 बजे दिल्ली ने पानीपत के एयर लिक्विड प्लांट से 11 मीट्रिक टन ऑक्सीजन उठाई। दिल्ली सरकार के सभी टैंकर भरे हुए थे, लिहाजा सरकार ने अपने सप्लायर्स से ऑक्सीजन की आपूर्ति को होल्ड करने के लिए कहा।
  • रिपोर्ट में कहा गया है कि एलएनजेपी अस्पताल में कई घंटे तक ऑक्सीजन के टैंकर खड़े रहे। इसकी वजह दिल्ली में स्टोरेज कैपेसिटी से ज्यादा ऑक्सीजन का पहुंचना था। बाकायदा इसकी शिकायत आपूर्तिकर्ता कंपनी ने की। ऐसे ही कई और मामले भी सामने आए। टैंकर्स को रोककर रखा गया।
  • रिपोर्ट के मुताबिक अस्पतालों में ऑक्सीजन मापने की यूनिट KLऔर ML के फर्क को लेकर कन्फ्यूजन था। इसलिए भी ऑक्सीजन की वास्तविक जरूरत को लेकर कन्फ्यूजन हुआ

ऑक्सीजन इस्तेमाल के फार्मूले पर भी उठे सवाल

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दिल्ली सरकार ने भारत सरकार के ऑक्सीजन इस्तेमाल के फार्मूले को दरकिनार किया। इस फार्मूले के मुताबिक केवल 50 फीसदी नॉन ICU बेड के मरीजों के लिए ऑक्सीजन के इस्तेमाल का अनुमान किया गया है, जबकि दिल्ली सरकार ने ऑक्सीजन डिमांड के लिए सभी नॉन ICU बेड्स में ऑक्सीजन इस्तेमाल का फार्मूला अपनाया।

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