• Hindi News
  • Db original
  • Umesh Of Pune Used To Sell Vegetables On Handcart, Started Home Delivery If There Was No Income; Now 2.5 Crore Turnover Annually

आज की पॉजिटिव खबर:पुणे के उमेश ठेले पर सब्जियां बेचते थे, आमदनी नहीं हुई तो होम डिलीवरी शुरू की; अब 2.5 करोड़ टर्नओवर

नई दिल्ली9 महीने पहले

महाराष्ट्र के पुणे के रहने वाले उमेश देवकर मैकेनिकल इंजीनियर हैं। सेल्स मार्केटिंग से लेकर चारा बेचने तक का उन्होंने काम किया। इसके बाद वे फार्मिंग सेक्टर में आ गए। पिछले 4 साल से वे फार्म टु होम नाम से खुद का स्टार्टअप चला रहे हैं। वे फल, सब्जियां और डेयरी प्रोडक्ट सीधे अपने फार्म हाउस से कस्टमर्स के घर पहुंचाते हैं। हर दिन उनके पास 250 से ज्यादा ऑर्डर्स आते हैं। सालाना 2.5 करोड़ रुपए उनका टर्नओवर है। इसके साथ ही सैकड़ों लोगों को उन्होंने रोजगार से भी जोड़ा है।

45 साल के उमेश एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। साल 1999 में इंजीनियरिंग करने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि अच्छी नौकरी मिलेगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। कई जगह कोशिश करने के बाद भी उन्हें इंजीनियरिंग फील्ड में नौकरी नहीं मिली। इसके बाद बड़ी मशक्कत से उन्हें एक कंपनी में सेल्समैन की जॉब मिली। यहां दिनभर काम करने के बाद उन्हें 3500 रुपए महीने की सैलरी मिलती थी। इससे घर परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था।

नौकरी के दौरान मिला स्टार्टअप का आइडिया

45 साल के उमेश किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। नौकरी के साथ-साथ वे खेती से भी जुड़े थे।
45 साल के उमेश किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। नौकरी के साथ-साथ वे खेती से भी जुड़े थे।

इसके बाद उमेश ने नौकरी बदल ली। वे ट्रांसपोर्ट के फील्ड में काम करने लगे। यहां भी सैलरी कुछ खास नहीं थी, लेकिन उनके लिए इस फील्ड में काम करना टर्निंग पॉइंट रहा। उमेश को यह बात समझ में आ गई कि एक जगह से दूसरी जगह चीजों को कैसे ले जाते हैं और उनकी कीमत कैसे बढ़ जाती है।

उमेश कहते हैं कि नौकरी करने के दौरान मैंने देखा कि कैसे बिचौलिए किसानों के प्रोडक्ट की कीमतें अपने मनमर्जी से बढ़ा देते हैं। जो किसान फसल उगाता है, वह खुद उसकी कीमत नहीं तय कर पाता है। ऊपर से खेत से मंडियों तक प्रोडक्ट पहुंचाने में उसे अच्छी खासी कीमत चुकानी पड़ती है। इसी वजह से खेती में किसान को मुनाफा नहीं होता है। उमेश को लगा कि इसे बदलने की जरूरत है।

चूंकि उमेश किसान परिवार से ताल्लुक रखते थे, इसलिए नौकरी के साथ वे थोड़ी बहुत खेती भी करते थे। साल 2017 में महाराष्ट्र सरकार ने एक बदलाव किया था। इसके विरोध में आढ़तियों ने हड़ताल कर दी थी और शहर के लोगों को फल और सब्जियां नहीं मिल पा रही थीं। उमेश ने इस मौके का फायदा उठाया और भांडुप में एक सोसाइटी के बाहर अपना ठेला लगा दिया और सब्जियां बेचने लगे। देखते ही देखते कुछ ही घण्टों में उनकी पूरी सब्जियां बिक गईं और उन्हें अच्छा खासा मुनाफा मिला। इसके बाद खेती को ही उन्होंने करियर बना लिया।

ठेला लगाकर अलग-अलग जगहों पर बेचने लगे सब्जी

होम डिलीवरी के साथ ही उमेश महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर सब्जियों की दुकान भी लगाते हैं।
होम डिलीवरी के साथ ही उमेश महाराष्ट्र में कुछ जगहों पर सब्जियों की दुकान भी लगाते हैं।

उमेश कहते हैं कि उस दिन के बाद से मुझे मार्केटिंग को लेकर एक बात तो समझ आ गई कि अगर हम सही जगह पर अपना प्रोडक्ट ले जाएंगे तो भरपूर कीमत भी मिलेगी और ग्राहक भी मिलेंगे। इसके बाद मैं रेगुलर महाराष्ट्र के अलग-अलग शहरों में जाकर सब्जियां बेचने लगा।

वे कहते हैं कि मैं रोज खेत से रात में ताजी सब्जियां तोड़ता था और सुबह उसे अच्छी तरह से साफ करके शहर की तरफ निकल जाता था। मैं रोज अलग-अलग जगहों पर अपना ठेला लगाता था। जैसे-जैसे वक्त बीता लोगों को मेरे बारे में जानकारी मिलती गई और ग्राहक बढ़ते गए। उसके बाद तो किसी भी कॉलोनी के सामने खड़ा हो जाता था तो चंद ही घण्टों में पूरी सब्जी बिक जाती थी।

उमेश बताते हैं कि 2018 में उनके पास लोगों की सब्जियों को लेकर डिमांड आने लगी। कोई उनसे पता पूछने लगा तो कोई उनका फोन नंबर। तब उन्हें रियलाइज हुआ कि कस्टमर्स की सुविधा के लिए उन्हें कुछ करना चाहिए। इसके बाद उन्होंने वॉट्सऐप और फेसबुक पर ग्रुप क्रिएट कर दिया। धीरे-धीरे उस पर लोग जुड़ते गए और उनकी डिमांड के मुताबिक उमेश सब्जियों की सप्लाई करते गए।

फोन पर ऑर्डर आने लगे तो फार्म टु होम का आइडिया सूझा

अपने इस काम के जरिए उमेश ने कई लोगों को रोजगार मुहैया कराया है। स्थानीय किसानों को भी इससे लाभ मिल रहा है।
अपने इस काम के जरिए उमेश ने कई लोगों को रोजगार मुहैया कराया है। स्थानीय किसानों को भी इससे लाभ मिल रहा है।

उमेश कहते हैं कि जब कस्टमर्स फोन पर सब्जियों की डिमांड करने लगे तो उन्हें लगा कि अब ठेले लगाने का काम छोड़कर होम डिलीवरी पर फोकस करना चाहिए। यहीं से उनके स्टार्टअप की शुरुआत हुई और खुद की कंपनी रजिस्टर की। इसके बाद कुछ लोगों को उन्होंने मदद के लिए काम पर रखा और घर-घर सब्जियां पहुंचाने लगे।

इस तरह धीरे-धीरे ग्राहक बढ़ते गए। सब्जियों के साथ ही फ्रूट्स और डेयरी प्रोडक्ट की भी डिमांड लोग करने लगे। उनके पास इतनी डिमांड आ गई कि स्टॉक खत्म हो गया। उनके खेत में जितना प्रोडक्शन होता था उससे ज्यादा ऑर्डर्स मिलने लगे।

तब उमेश ने अपने साथ दूसरे किसानों को जोड़ना शुरू किया। वे दूसरे किसानों से फल और सब्जियां खरीदकर कस्टमर्स तक पहुंचाने लगे। फल और सब्जियों के साथ ही वे डेयरी प्रोडक्ट भी सप्लाई करने लगे। इससे उनके बिजनेस को काफी ग्रोथ मिली।

कोविड में मौके का उठाया फायदा

उमेश बताते हैं कि हम फल और सब्जियों की होम डिलीवरी महाराष्ट्र में करते हैं, जबकि बाकी प्रोडक्ट देशभर में ऑनलाइन माध्यम से बेचते हैं।
उमेश बताते हैं कि हम फल और सब्जियों की होम डिलीवरी महाराष्ट्र में करते हैं, जबकि बाकी प्रोडक्ट देशभर में ऑनलाइन माध्यम से बेचते हैं।

उमेश कहते हैं कि कोविड से जानमाल की बहुत क्षति हुई, लेकिन इससे बिजनेस को एक नया ट्रेंड भी मिला। वो ट्रेंड रहा ऑनलाइन मार्केटिंग का। मैं पहले से सोशल मीडिया और वॉट्सऐप से ऑर्डर लेता था, लेकिन कोविड में इतनी डिमांड बढ़ गई कि मुझे खुद की वेबसाइट लॉन्च करनी पड़ी। साल 2020 में ekrushak.com नाम से उन्होंने खुद की वेबसाइट शुरू कर दी। इससे उनके बिजनेस का दायरा और अधिक बढ़ गया। उन्होंने प्रोडक्ट की संख्या भी बढ़ा दी और महाराष्ट्र के बाहर से भी ऑर्डर्स मिलने लगे।

फिलहाल उमेश की टीम में 30 लोग काम करते हैं। जो खेती किसानी से लेकर मार्केटिंग में उनकी मदद करते हैं। साथ ही उन्होंने 100 से ज्यादा किसानों को अपने साथ जोड़ा है जो उन्हें प्रोडक्ट सप्लाई करते हैं। इससे इन किसानों की भी अच्छी कमाई हो रही है।

इस तरह के स्टार्टअप में आपकी दिलचस्पी है तो यह स्टोरी आपके काम की है

दिल्ली के रहने वाले दो भाई मृणाल डब्बास और लक्ष्य डब्बास किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मृणाल ने इंजीनियरिंग की है, जबकि लक्ष्य ने एनवायरनमेंट साइंस में मास्टर्स की डिग्री ली है। पिछले पांच साल से दोनों भाई मिलकर एग्रो टूरिज्म बेस्ड ऑर्गेनिक फार्मिंग कर रहे हैं। 200 से ज्यादा किसानों का उन्होंने नेटवर्क तैयार किया। दिल्ली के साथ-साथ देशभर में वे फल, सब्जियां, शहद, दाल, आटा जैसे प्रोडक्ट्स की सप्लाई कर रहे हैं। इससे हर साल वे 70 लाख रुपए का टर्नओवर हासिल कर रहे हैं। (पढ़िए पूरी खबर)

खबरें और भी हैं...