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ग्राउंड रिपोर्टप्यार, रेप फिर जिंदा जला दिया:2 साल से भतीजा गायब, नौकरी भी नहीं मिली; 4 आरोपी जमानत पर बाहर

18 दिन पहलेलेखक: रवि श्रीवास्तव

UP के उन्नाव की ये कहानी प्यार से शुरू हुई और रेप तक पहुंची। आरोपी गिरफ्तार हुए, जमानत पर बाहर आए और फिर 5 दिसंबर 2019 की एक सुबह लड़की को सरेआम जिंदा जलाकर मार दिया। इसके बाद कथित प्रेमी समेत 5 लोग फिर गिरफ्तार हुए, 3 साल गुजरे और इनमें से 4 अब जमानत पर बाहर हैं।

जला दी गई लड़की के घर के बाहर बीते 3 साल से पुलिस तैनात है। उसकी छोटी बहन पढ़ाई-लिखाई और अपने सपने छोड़कर ये केस लड़ रही है।

उधर, आरोपियों की तरफ से भी केस लड़ने की जिम्मेदारी उनकी बहन-बेटियों ने ही संभाली है। उन्होंने भी पिता-भाइयों को बचाने के लिए सपने कुर्बान कर दिए। ये मामला ऐसे केस में तब्दील हो गया है, जिसमें एक बेटी की हत्या के बाद न्याय दिलाने के लिए लड़ी जा रही जंग में बेटियां ही आमने-सामने हैं। मरने से पहले आखिरी शब्द…

’मैं 4 दिसंबर की सुबह रायबरेली जाने के लिए बैसवारा बिहार रेलवे स्टेशन जा रही थी। तभी शिवम त्रिवेदी, शुभम त्रिवेदी और कुछ लोगों ने मुझे घेर लिया। मेरे सिर पर डंडे से कई बार मारा, गले पर चाकू से हमला किया। वो लोग कैन में कुछ भरकर लाए थे, वह मुझ पर डाल दिया और आग लगा दी। मैं जान बचाने के लिए भागने लगी….’ ये बयान लड़की ने मरने से पहले पुलिस को दिया था।

पीड़िता को एयरलिफ्ट कर UP से दिल्ली भेजा गया। UP के CM योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पीड़िता के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। 6 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया।
पीड़िता को एयरलिफ्ट कर UP से दिल्ली भेजा गया। UP के CM योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि पीड़िता के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठाएगी। 6 दिसंबर को उसने दम तोड़ दिया।

आगे की कहानी मैं आपको सुनाता हूं। लड़की 1 किलोमीटर तक जलती हुई हालत में ही भागी थी। वहां मौजूद एक चश्मदीद गवाह रवींद्र प्रकाश ने पुलिस को बताया था कि उसे अपनी आंखों पर भरोसा नहीं हुआ, जब उसने एक जलती हुई लड़की को ऐसे सड़क पर भागते देखा था। ऐसी ही हालत में पीड़िता ने 100 नंबर डायल किया और पुलिस को बुलाया।

पुलिस पहुंची और 90% जल चुकी लड़की को जिला अस्पताल पहुंचाया। इसके बाद उसे कानपुर के हैलट हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया। वहां भी लड़की ही हालत देखकर डॉक्टरों ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद उसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल लाया गया। इलाज हुआ, लेकिन वो बच नहीं सकी। गांव के ही 5 लोग गिरफ्तार हुए, इनमें वो भी शामिल थे, जिन पर लड़की के रेप का आरोप था।

सरकारी वादे, संघर्ष और पहरे में पीड़ित परिवार
उस सुबह को 3 साल बीतने वाले हैं। सरकार ने मुआवजे के साथ-साथ मकान और परिवार के एक सदस्य को नौकरी का वादा किया था। इनमें सिर्फ मकान का वादा पूरा हुआ। कुछ आरोपी भी अब जमानत पर बाहर आ चुके हैं। रेप पीड़िता का छह साल का भतीजा अक्टूबर 2020 से घर से गायब है। पुलिस से मदद मांगी, लेकिन नहीं मिली। डर है कि कहीं उसे आरोपी परिवार ने किडनैप तो नहीं किया हुआ है।

पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए हथियारों से लैस दो पुलिसवाले हमेशा घर के बाहर रहते हैं।
पीड़ित परिवार की सुरक्षा के लिए हथियारों से लैस दो पुलिसवाले हमेशा घर के बाहर रहते हैं।

लखनऊ से करीब 70 किमी और बिहार थाने से तकरीबन 8 किमी दूर हिंदूनगर में जला कर मार दी गई लड़की का घर है। मैं गांव में दाखिल होता हूं, तो बाएं हाथ पर एक मंदिर नजर आता है। यहां से लगभग 50 कदम पर बाएं हाथ पर ही पीड़िता का घर है। सामने बंदूकों से लैस दो पुलिसवाले बैठे हैं। छप्पर के नीचे रेप पीड़िता के बुजुर्ग पिता अपने पोते के साथ छेनी-हथौड़े से लोहे को सीधा करने में लगे हुए हैं।

परिवार का बड़ा बेटा जो पहले बाहर कहीं रहकर मजदूरी कर रहा था, गांव आ गया है। केस की पैरवी रेप पीड़िता की छोटी बहन कर रही है। घर में एक छोटा सा आंगन है और तुलसी का पौधा लगा हुआ है। पीछे की तरफ पक्का मकान है। बाकी तीन तरफ छप्पर पड़ा हुआ है।

एक तरफ रेप पीड़िता की भाभी सिलबट्‌टे पर चटनी पीस रही है। मुझे अंदर जाता देख परिवार की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस वाला अंदर आकर बैठ जाता है। रेप पीड़िता की छोटी बहन भी आती है और कहानी सुनाना शुरू करती है-

‘पिता खेतों में और भाई परदेस में मजदूरी करते थे। कुछ मदद हम भी करें, इसके लिए दोनों बहनों ने ज्यादा वक्त पढ़ाई में लगाया। मैं और मेरी बहन पुलिस में नौकरी करना चाहते थे। फिजिकल की तैयारी भी कर रहे थे। 2017 से ये सब शुरू हुआ।

शिवम त्रिवेदी का हमारे घर आना-जाना था। दीदी के साथ उसका अफेयर हो गया। उसके परिवार को ये बात पता चली, तो उन्होंने हमें धमकाया। शिवम ने मेरी बहन से बातचीत बंद नहीं की। दिसंबर 2017 में शिवम दीदी को शादी का वादा कर रायबरेली ले गया। वहां उसने दीदी के साथ रेप किया।

परिवारों का दबाव बढ़ा तो दोनों गांव लौट आए। इसके बाद शिवम ने दीदी के साथ बातचीत बंद कर दी। धमकाने लगा कि अगर मेरा पीछा नहीं छोड़ा, तो तुम्हारा अश्लील वीडियो वायरल कर दूंगा। पिताजी ने बहन को बुआ के घर रायबरेली भेज दिया।

शिवम ने पीछा नहीं छोड़ा और रायबरेली में दीदी को फोन कर एक मंदिर पर मिलने बुलाया। यहां शिवम और गांव के प्रधान के लड़के शुभम ने दीदी से गैंगरेप किया। हमने 2018 में रेप का मुकदमा रायबरेली के लालगंज थाने में दर्ज कराया था। जिस दिन उन्हें जिंदा जलाया, उस दिन भी इसी मुकदमे की पैरवी के लिए वे रायबरेली जा रही थीं।’

ये कहते हुए पीड़िता की बहन का चेहरा पत्थरनुमा बना रहता है। शायद इतनी बार और इतने लोगों को वो ये कहानी बता चुकी है कि अब अपनी बहन पर हुए जुल्म के लिए उसका गुस्सा और भावनाएं भी जवाब देने लगी हैं।

कुछ बर्बाद होती जिंदगियां और खोया बच्चा, जिन्हें कोई नहीं ढूंढ रहा
पीड़िता की बहन मुझे ये सब बताते हुए, शायद कुछ देर दिसंबर 2019 की उस सुबह में पहुंच जाती है, जब उसने पहली बार अपनी बड़ी बहन की जली हुई बॉडी देखी होगी। उसकी चुप्पी टूटती है, वो फिर बोलने लगती है- ‘जब से मेरी बहन का मर्डर हुआ है, तभी से मेरी जिंदगी बदल गई है। केस की पैरवी के लिए कभी उन्नाव तो कभी रायबरेली जाना पड़ता है। हर महीने पांच से आठ बार कोर्ट में तारीख पड़ती है।'

'आते-जाते कभी-कभी लगता है कि कोई पीछा करता है। पुलिस वाले यह बात नहीं मानते। पुलिस भी अब मेरे भतीजे को नहीं ढूंढ रही है। मैंने ग्रेजुएशन किया है। मेरा सपना था कि पुलिस फोर्स जॉइन करूं। अब यह कभी पूरा नहीं हो पाएगा। सरकार ने कहा था कि आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्दी सजा मिल जाएगी। तीन साल हो गए और अभी मेरी गवाही ही चल रही है।

आरोपी तो जमानत पर छूट कर आ गए। मेरे मां-बाप को मारने की धमकी मिलती रहती है। तीन साल में घर में तीन बड़े हादसे हो गए। मेरी बहन को मार दिया। भतीजा अब जिंदा भी है, इसकी कोई उम्मीद नहीं। मेरा छोटा भाई इन्हीं तकलीफों में बीमार हो गया। उसकी भी मौत हो गई। मैं सबको खो रही हूं। अब बस गुनहगारों को सजा दिलाना ही मेरी जिंदगी का मकसद है।’

पुलिस तो भूल गई, हम कितना ढूंढें; कब तक ढूंढें
पीड़िता की बहन चुप होती है तो पीछे से भाभी के सिसकने की आवाज आने लगती है। ये वो मां है जिसका 6 साल का बच्चा गुम हो गया है। उसे अब कोई नहीं ढूंढ रहा। नीली साड़ी में बैठी मां सिसकते हुए बोलती हैं- ‘अब तो मैं अपने बेटे को जिंदा देखने की उम्मीद ही खो चुकी हूं।

2 अक्टूबर 2020 को दोपहर में खाना खाकर वह बाहर खेलने गया था। शाम के 4 या 5 बज रहे थे। खेलते-खेलते घर से कुछ दूर एक दुकान पर गया था। उसके बाद से किसी ने उसे नहीं देखा। दो साल हो गए। पुलिस ने ढूंढना बंद कर दिया है, बस हम ही ढूंढते रहते हैं। कहां तक ढूंढे। अब पता नहीं कहां होगा।’ ये कहते हुए वो फिर से रोने लगती हैं, फिर उठ कर घर में चली जाती हैं।

पीड़िता की भाभी अपने लापता हुए बेटे की तस्वीर देखती रहती हैं। कहती हैं बेटा गायब हुए 2 साल हो गए। अब तो उसके मिलने की आस भी टूट गई है।
पीड़िता की भाभी अपने लापता हुए बेटे की तस्वीर देखती रहती हैं। कहती हैं बेटा गायब हुए 2 साल हो गए। अब तो उसके मिलने की आस भी टूट गई है।

पास ही पीड़िता के पिता बैठे हैं। शायद बाहर लोहा सीधा करने का काम खत्म हो गया है। या फिर बहू को रोता देख अंदर आ गए हैं। नाराजगी से कहते हैं- ’सरकार ने कहा था जल्दी सजा मिल जाएगी, लेकिन वो तो छूटकर बाहर आ गए हैं। मेरे पोते को किडनैप किया गया है। ये सब खत्म हो तो बिटिया की शादी कर दूं। वो चली गई तो ये मुकदमा कौन लड़ेगा।’

पास ही बैठी पीड़िता की मां कहती हैं- ’सरकार ने वादे किए थे, लेकिन अब तक बिटिया को नौकरी नहीं मिली। हमारा पोता भी हमसे दूर हो गया। कम से कम पुलिस उसे ही ढूंढ दे।’ उनकी आंखों में भी आंसू नजर आने लगते हैं। सब चुप हो जाते हैं जैसे कहानियां यहीं तक थीं, अब और दुख नहीं बचा कहने के लिए। मुझसे निकलते हुए कहते हैं- आप बात आगे तक पहुंचाइए। मैं दिलासा देता हुआ बाहर निकल आता हूं।

दूसरी दुनिया और दूसरे दुख-दर्द
रेप पीड़िता के घर से निकलकर मैं आरोपियों के घरों का रुख करता हूं। पीड़िता के घर से करीब दो सौ मीटर दूर दाहिने हाथ पर गली में जाकर एक लाइन से अगल-बगल आरोपियों के मकान हैं। मैं सबसे पहले पीड़िता को जलाकर मारने के आरोपी हरिशंकर त्रिवेदी से मिलता हूं। बातचीत में पता चलता है कि वे इस गांव के प्रधान भी रह चुके हैं। जब ये केस हुआ तो उनकी पत्नी गांव की प्रधान थी।

हरिशंकर बताते हैं कि जो परिवार हम पर आरोप लगा रहा है, हमने उनकी काफी मदद की है। 5 दिसंबर 2019 की सुबह मैं घर पर सोया हुआ था। तभी पुलिस घर में घुसी और मेरे बेटे शुभम को ले गई। हम थाने पहुंचे तो कुछ बताया नहीं गया।

दोपहर में हमें बताया गया कि आप लोगों पर लड़की को जलाकर मारने का आरोप है। इसके बाद हमें, हमारे बेटे को, पड़ोसी उमेश बाजपेई और रेप केस में पहले से आरोपी शिवम समेत उसके पिता रामकिशोर को जेल भेज दिया गया। अभी कुछ दिन पहले शिवम को छोड़कर 29 महीने बाद हमें बेल मिली है।

बेटी मारी गई, अब दोनों तरफ से बेटियां ही लड़ रहीं केस
मैं आरोपी हरिशंकर से बात कर रहा था, तो उसकी बड़ी बेटी ऋचा त्रिवेदी और उमेश बाजपेई की बहन प्रीति भी वहां आ गईं। यहां मुझे पता चला कि जब घर के सारे मर्द जेल चले गए, तो घर चलाने और केस लड़ने की जिम्मेदारी इन्हीं बेटियों ने संभाली।

मर्डर केस में आरोपी उमेश बाजपेई की बहन प्रीति और हरिशंकर की बड़ी बेटी ऋचा अपने भाई और पिता के लिए पैरवी कर रही है।
मर्डर केस में आरोपी उमेश बाजपेई की बहन प्रीति और हरिशंकर की बड़ी बेटी ऋचा अपने भाई और पिता के लिए पैरवी कर रही है।

हरिशंकर त्रिवेदी की उम्र करीब 52 साल है। घर में पत्नी, तीन बेटियां और एक बेटा शुभम है। शुभम रेप केस और जिंदा जलाकर मारने के मामलों में आरोपी है। हरिशंकर खुद जलाकर मारने वाले केस में आरोपी हैं। ऋचा बात शुरू करते ही रोने लगती हैं। फिर आंसू पोंछते हुए बोलती हैं-

‘पापा और भैया के जेल जाने के बाद मैं ही घर में सबसे बड़ी थी। खुद को संभालना था, मां को देखना था, बहनों को पढ़ाना था। वकीलों ने हमारा केस लेने से मना कर दिया। मैं तब विधायक रहे, हृदय नारायण दीक्षित के पास गई। उनसे CBI जांच की मांग की, लेकिन हमारी बात कोई नहीं सुन रहा था। सब कहते थे, तुम्हारा भाई बलात्कारी है। तुम्हारे पिता अपराधी हैं। मैं पढ़ लिखकर टीचिंग लाइन में जाना चाहती थी।

मैंने बेसिक ट्रेनिंग सर्टिफिकेट (BTC) कर रखा है। TET की परीक्षा देनी थी, लेकिन नहीं दे पाई। पहले कभी मैं अकेले गांव से बाहर नहीं गई, लेकिन पिता और भाई के लिए अकेले गांव से लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली तक गई। धरना तक देना पड़ा। कभी सोचा नहीं था कि इतना सब कुछ झेलना पड़ेगा। अब भाई और पिता छूट कर आ गए हैं तो मैं पढ़ाई पर ध्यान दे पाऊंगी।’ ये बताते हुए ऋचा लगातार आंसू पोंछती रहती है।

पास ही प्रीति भी मौजूद है। ऋचा के बाद वो बताती है कि भाई उमेश बाजपेई को भी रेप पीड़िता को जलाकर मारने के आरोप में जेल भेजा गया था। परिवार के सभी मर्दों के जेल जाने के बाद से उसने भी ऋचा के साथ अपने केस की पैरवी की।

वो बताती है- हम सुबह घर से निकलते थे और रात को कभी 10, कभी 11 बजे तक लौटते। भाई के जेल जाने से घर में रुपए-पैसों की भी दिक्कत हुई। घर में कमाने वाले वही थे, लोगों के सामने हाथ फैलाने पड़े।

शिवम को नहीं मिली है बेल, घरवालों का बातचीत से इनकार
इन दोनों मामलों में मुख्य आरोपी शिवम त्रिवेदी को फिलहाल बेल नहीं मिली है। हरिशंकर के घर से लगभग 10 कदम दूर उसका घर है। मेरी मुलाकात शिवम की मां से होती है। वे कहती हैं कि हम इस बारे में किसी से भी कोई बात नहीं करना चाहते। मैं कोशिश करता हूं, लेकिन फिर वो सख्ती से इनकार कर देती हैं।

दोनों पक्षों की कहानी सुनकर मैं पुलिस से इस बारे में जानना चाहता हूं। सवाल था कि दोनों केस अपनी जगह हैं, लेकिन पीड़िता के भतीजे को पुलिस क्यों नहीं ढूंढ रही। मैं SP सिद्धार्थ शंकर मीणा से सवाल करता हूं तो वे ऑन कैमरा कुछ भी बोलने से मना कर देते हैं।

इन दोनों केस के अदालत में होने की बात कहते हैं। बच्चे के बारे में कहते हैं कि उन्हें मालूम है कि हिंदूनगर से एक बच्चा गायब है। केस दर्ज किया गया है और उसे ढूंढने के लिए पुलिस टीमें कोशिश कर रही हैं।

गैंगरेप से जुड़े दो मामले हाल में काफी चर्चा में रहे हैं, एक में पुलिस ने केस बंद कर दिया और दूसरे में आरोपी सुप्रीम कोर्ट से बरी हो गए।

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