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आज की पॉजिटिव खबर:UP के रविंद्र ने 5 साल पहले आधा एकड़ से भी कम जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की, अब एक सीजन में 4 लाख कमा रहे मुनाफा

नई दिल्ली2 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले के रहने वाले रविंद्र पांडेय ने ग्रेजुएशन करने के बाद पांच साल तक सरकारी नौकरी की तैयारी की। कई एग्जाम्स दिए, लेकिन मन मुताबिक सफलता नहीं मिली। पिता खेती करते थे, आमदनी का और कोई जरिया नहीं था। इसलिए अब कुछ न कुछ करना था ताकि आमदनी हो सके। रविंद्र ने 2016 में आधे एकड़ से भी कम जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की।

पहले दो साल तक तो कुछ खास हाथ नहीं लगा, लेकिन अब वे इससे एक सीजन में 4 लाख रुपए की कमाई कर रहे हैं। साथ ही एक दर्जन से ज्यादा गांवों के किसानों को ट्रेनिंग देकर उनकी जिंदगी संवारने का काम कर रहे हैं।

31 साल के रविंद्र कहते हैं कि हमारे पास जो कुछ थोड़ा बहुत है, वो खेती ही है। पढ़ाई के दौरान पिताजी के साथ खेती किसानी का काम भी सीखा था, लेकिन मुझे सरकारी नौकरी की तलाश थी। मैंने कोशिश भी की लेकिन कुछ हाथ नहीं लगा।

अखबार के जरिए ड्रैगन फ्रूट के बारे में मिली जानकारी

रविंद्र ने अभी ड्रैगन फ्रूट के 440 प्लांट लगाए हैं। इन पौधों को लगाने के लिए सीमेंट के खंभों की जरूरत होती है, जैसा कि फोटो में दिख रहा है।
रविंद्र ने अभी ड्रैगन फ्रूट के 440 प्लांट लगाए हैं। इन पौधों को लगाने के लिए सीमेंट के खंभों की जरूरत होती है, जैसा कि फोटो में दिख रहा है।

एक दिन अखबार के जरिए रविंद्र के पिता जी को ड्रैगन फ्रूट की खेती के बारे में जानकारी मिली। उन्होंने रविंद्र से कहा कि पता करो कि ये क्या होता है? इसकी खेती कैसे होती है? और ये इतना महंगा क्यों बिकता है? रविंद्र कहते हैं कि मैंने पहली बार इसका नाम सुना था। इंटरनेट पर जब ड्रैगन फ्रूट के बारे में सर्च किया। तब मुझे पता चला कि ये तो कमर्शियल फ्रूट है और इसकी न्यूट्रिशनल वैल्यू बहुत है। इसीलिए इसकी डिमांड है। उसी अखबार में इस बात की भी जानकारी थी कि स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से इसके बीज खरीदे जा सकते हैं।

अगले दिन रविंद्र और उनके गांव के कुछ किसान कृषि विज्ञान केंद्र पहुंचे। वहां के अधिकारियों को भी इसके बारे में बहुत अधिक जानकारी नहीं थी। उन लोगों ने रविंद्र को सुझाव दिया कि नई फसल है। एक बार आप लोगों को कोशिश कर के देखनी चाहिए। बीज हम उपलब्ध करा देंगे और समय-समय पर इसके बारे में जो भी जानकारी होगी, वो आप लोगों से शेयर की जाएगी।

60 हजार की लागत से की खेती की शुरुआत
रविंद्र कहते हैं कि मुझे यह आइडिया पसंद आया। आखिर कुछ न कुछ तो करना ही था। इसलिए तय किया कि ड्रैगन फ्रूट की खेती करनी है। हानि-लाभ जो भी होगा देखा जाएगा। फरवरी 2016 में उन्होंने एक चौथाई एकड़ जमीन पर 440 प्लांट के साथ ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की। बीज की खरीदारी और प्लांटेशन में करीब 60 हजार रुपए का खर्च उन्हें लगा था।

रविंद्र बताते हैं शुरुआत के दो साल प्रोडक्शन बढ़िया नहीं हुआ। तीसरे साल से ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल के बाद अच्छा उत्पादन हुआ।
रविंद्र बताते हैं शुरुआत के दो साल प्रोडक्शन बढ़िया नहीं हुआ। तीसरे साल से ऑर्गेनिक खाद के इस्तेमाल के बाद अच्छा उत्पादन हुआ।

2017 के जुलाई तक पौधे तैयार हो गए। फ्रूट भी निकलने लगे, लेकिन जिस उम्मीद के साथ रविंद्र ने खेती की थी उसके मुताबिक प्रोडक्शन नहीं हुआ। बड़ी मुश्किल से थोड़े बहुत फ्रूट निकले। उसमें से भी मार्केट तक बहुत कम ही पहुंच सके। जिससे निराश होकर गांव के दूसरे किसानों ने अपने खेत से ड्रैगन फ्रूट को निकाल दिया।

इंटरनेट पर जानकारी जुटानी शुरू की, एक्सपर्ट से बात की
रविंद्र कहते हैं कि हमने तो सुना था कि ड्रैगन फ्रूट की खेती में कमाई अच्छी होती है, लेकिन हमारा तो प्रोडक्शन ही सही नहीं हो रहा। आखिर वजह क्या है? इसको लेकर उन्होंने इंटरनेट पर जानकारियां जुटानी शुरू की। ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे किसानों से उन्होंने वर्चुअली कॉन्टैक्ट किया। उनसे अपनी परेशानी शेयर की।

इसके बाद उन्हें पता चला कि वे अपनी फसलों में केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का इस्तेमाल कर रहे हैं, उसी वजह से प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है। उन किसानों ने रविंद्र को सुझाव दिया कि वे केमिकल फर्टिलाइजर की जगह ऑर्गेनिक खाद का प्रयोग करें। गोबर और वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल करें।

उसके बाद रविंद्र ने केमिकल फर्टिलाइजर की जगह ऑर्गेनिक खाद और जीवामृत का इस्तेमाल करना शुरू किया। थोड़े ही दिनों बाद इसका असर भी दिखने लगा। अगले साल प्रोडक्शन अच्छा हुआ। साथ में कमाई में भी इजाफा हुआ। 2019 में ड्रैगन फ्रूट बेचकर उन्होंने एक लाख रुपए की कमाई की थी।

नर्सरी के जरिए भी कर रहे कमाई

रविंद्र ने खुद से ग्राफ्टिंग तकनीक से ये नर्सरी तैयार की है। वे दूसरे किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराते हैं।
रविंद्र ने खुद से ग्राफ्टिंग तकनीक से ये नर्सरी तैयार की है। वे दूसरे किसानों को ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए बीज उपलब्ध कराते हैं।

अब रविंद्र ड्रैगन फ्रूट की खेती के साथ-साथ इसकी नर्सरी से भी कमाई कर रहे हैं। दो साल पहले उन्होंने खुद से ही ग्राफ्टिंग कर नर्सरी तैयार की थी। उनके पास अब दूर-दूर से किसान बीज खरीदने के लिए आते हैं। वे एक बीज की कीमत 50 रुपए लेते हैं, जो मार्केट या बड़े शहरों के मुकाबले काफी कम है।

मार्केटिंग के लिए वे सोशल मीडिया की मदद ले रहे हैं। उन्होंने ड्रैगन फ्रूट नाम से पेज और वॉट्सऐप ग्रुप बनाया है। जिसके जरिए लोग उनसे ड्रैगन फ्रूट खरीदते हैं। साथ ही कई व्यापारी खुद उनकी खेत पर आकर ड्रैगन फ्रूट ले जाते हैं। बाकी जो फ्रूट बचता है, वो लोकल मार्केट में बिक जाता है। इसके अलावा दूर के किसानों या कस्टमर्स के लिए पार्सल के जरिए बीज और फ्रूट भेजते हैं। रविंद्र अब खेती का दायरा बढ़ाना चाहते हैं। वे कहते हैं कि हम जल्द ही डेढ़ एकड़ जमीन पर ड्रैगन फ्रूट की खेती करेंगे। साथ ही प्रोसेसिंग यूनिट लगाने का भी प्लान कर रहे हैं।

हर साल 8 से 10 लाख कमा सकते हैं मुनाफा
रविंद्र कहते हैं कि जो किसान कमर्शिल खेती करना चाहता है। उसके लिए ड्रैगन फ्रूट बेहतर विकल्प है। छोटे लेवल पर 100 से 200 प्लांट के साथ इसकी खेती की शुरुआत की जा सकती है। इसमें ज्यादा खर्च नहीं आएगा। जब आपकी फसल तैयार हो जाए, फ्रूट निकलने लगे और मार्केट में डिमांड हो तो आप इसका दायरा बढ़ा सकते हैं। सबसे चैलेंजिंग काम मार्केट में जगह बनाना ही होता है। जिसका मार्केटिंग नेटवर्क अच्छा है, बड़े शहरों और सुपर मार्केट तक पहुंच है, उसके लिए तो बल्ले-बल्ले है। वह इससे बंपर कमाई कर सकता है।

हालांकि अब छोटे शहरों में इसकी डिमांड तेजी से बढ़ रही है। एक फ्रूट की कीमत 100 से 300 रुपए तक होती है। और एक एकड़ जमीन पर इसकी खेती से सालाना 10 टन फ्रूट का उत्पादन हो सकता है। जिससे प्रति टन 8-10 लाख रुपए की कमाई की जा सकती है। सबसे अच्छी बात है कि एक बार प्लांटिंग के बाद इसमें फिर ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ता है। हर साल बस मेंटेनेंस की जरूरत होती है। एक प्लांट की लाइफ 25 साल तक होती है।

कैसे करें ड्रैगन फ्रूट की खेती?
ड्रैगन फ्रूट उगाने के लिए बीज अच्छे किस्म का होना चाहिए। ग्राफ्टेड प्लांट हो तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उसे तैयार होने में समय कम लगता है। रविंद्र के मुताबिक बरसात को छोड़कर पूरे साल इसके बीज लगाए जा सकते हैं। मार्च से जुलाई के बीच प्लांटिंग करना ज्यादा बेहतर होता है। प्लांटिंग के बाद नियमित रूप से कल्टीवेशन और ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। इसके लिए सीमेंट के खंभे की भी जरूरत होती है। एक खंभे के साथ तीन प्लांट लगाए जा सकते हैं। जैसे-जैसे प्लांट बढ़ता है उसे रस्सी से बांधते जाते हैं।

करीब एक सवा साल बाद प्लांट तैयार हो जाता है। दूसरे साल से फ्रूट निकलने लगते हैं। हालांकि तीसरे साल से ही अच्छी मात्रा में फल का प्रोडक्शन होता है। इसके लिए टेम्परेचर 10 डिग्री से कम और 40 डिग्री के बीच हो तो प्रोडक्शन बढ़िया होता है। हालांकि इसकी खेती के लिए किसी विशेष किस्म की जमीन की जरूरत नहीं होती है। बस हमें इस बात का ध्यान रखना होता है कि पानी या जलजमाव वाली जगह नहीं हो। महीने में एक बार सिंचाई की जरूरत होती है।

हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है।
हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है।

बेहतर प्रोडक्शन के लिए हमें ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करना चाहिए। खाद को प्लांट की जड़ के पास अच्छी तरह से मिट्टी में मिला देनी चाहिए। इसके साथ ही जीवामृत का भी रेगुलर छिड़काव करना चाहिए। इसके लिए ड्रिप इरिगेशन ज्यादा बेहतर तरीका होता है।

कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग?
ड्रैगन फ्रूट की खेती की ट्रेनिंग स्थानीय कृषि विज्ञान केंद्र से ली जा सकती है। इसके साथ ही इंडियन काउंसिल फॉर एग्रीकल्चर रिसर्च (ICAR) जो देश में कई शहरों में स्थित है, वहां से भी ली जा सकती है। इसके साथ ही ड्रैगन फ्रूट की खेती करने वाले किसानों से भी इसके बारे में जानकारी ली जा सकती है। खुद रविंद्र भी किसानों को ट्रेनिंग देते हैं। इसके अलावा इंटरनेट की मदद से भी जानकारी जुटाई जा सकती है। इसकी खेती को लेकर कई लोगों ने वीडियो तैयार किया है। कई संस्थान सेमिनार और वर्कशॉप भी आयोजित करवाते रहते हैं।

ड्रैगन फ्रूट की डिमांड क्यों है?
इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए, कोलेस्ट्रॉल लेवल घटाने के लिए, हीमोग्लोबिन बढ़ाने के लिए, हृदय रोग के लिए, स्वस्थ बालों के लिए, स्वस्थ चेहरे के लिए, वेट लॉस और कैंसर जैसी बीमारियों को ठीक करने में इसका उपयोग होता है। इन दिनों बड़ी-बड़ी कंपनियां ड्रैगन फ्रूट खरीदकर उससे प्रोसेसिंग के बाद सॉस, जूस, आइसक्रीम सहित कई प्रोडक्ट तैयार कर रही हैं।

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