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4 राज्यों से UPSC क्रैक करने वालों की कहानियां:पिता खैनी बेचते थे, निरंजन ने ट्यूशन पढ़ाकर तैयारी की; अनिल के पिता ने घर-घर कपड़े बेचकर बेटे को IAS बनाया

नई दिल्ली4 महीने पहले

फर्श है तो अर्श भी है, मुश्किलें हैं तो संघर्ष भी है। बचपन से सपना था UPSC क्रैक करने का, IAS ऑफिसर बनने का। घर की माली हालत और मुश्किल हालात इसकी गवाही नहीं दे रहे थे, लेकिन इससे डर कर अपने सपनों की बलि देना भी स्वीकार नहीं था। कई बार उतार-चढ़ाव आए, लेकिन कभी अपने हौसले को टूटने नहीं दिया, खुद पर और अपनी काबिलियत पर भरोसा कायम रखा, और आखिरकार सपना साकार हुआ।

शुक्रवार को UPSC 2020 के जब नतीजे घोषित हुए तो सुर्खियां बटोरने वाले टॉपर्स के बीच कुछ ऐसे किरदार निकलकर सामने आए, जिन्होंने तमाम चुनौतियों और मुश्किलों से लड़ते हुए अपने सपने को पूरा किया, मुकाम हासिल किया। तो चलिए आज 4 राज्यों से ऐसे ही 5 किरदारों की कहानियां पढ़ते हैं...

पहली कहानी : पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए ट्यूशन पढ़ाते थे, पैसे बचाने के लिए कई किमी पैदल चलते थे

बिहार के नवादा जिले के पकरीबरामा बाजार में रहने वाले निरंजन कुमार के घर जश्न का माहौल है। शहर में भी उन्हीं के चर्चे हैं। वजह है निरंजन का UPSC 2020 में सिलेक्शन। उन्हें इस परीक्षा में 535वीं रैंक मिली है। हालांकि उनकी यह कामयाबी इतनी आसानी से नहीं मिली है। इसके पीछे उनका लंबा संघर्ष है, जुनून है, जीवटता है। सिर्फ निरंजन का नहीं, उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में परिवार का भी उतना ही योगदान रहा है।

निरंजन कुमार के पिता खैनी बेचते थे। गांव में ही उनकी छोटी सी दुकान थी। इसके बल पर चार भाई-बहनों की पढ़ाई लिखाई का इंतजाम करना काफी मुश्किल था, लेकिन पिता ने हिम्मत नहीं हारी। आर्थिक तंगी और अभावों के बीच वे अपने बच्चों की पढ़ाई के लिए दिन रात मेहनत करते रहे। निरंजन भी शुरू से ही होनहार रहे। उनका सिलेक्शन नवोदय विद्यालय के लिए हो गया। इससे उन्हें और परिवार को कुछ हद तक सपोर्ट मिला। यहां से 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद निरंजन IIT की तैयारी के लिए पटना चले गए। जैसे-तैसे उनके पिता ने कोचिंग का तो इंतजाम कर दिया, लेकिन बाकी खर्चों के लिए उनके सामने दिक्कत आने लगी।

बिहार के नवादा जिले के पकरीबरामा बाजार में रहने वाले निरंजन कुमार को दूसरी बार में कामयाबी मिली है।
बिहार के नवादा जिले के पकरीबरामा बाजार में रहने वाले निरंजन कुमार को दूसरी बार में कामयाबी मिली है।

इसके बाद निरंजन ने पटना में बच्चों को ट्यूशन देना शुरू कर दिया। इससे उन्हें थोड़ी-बहुत आमदनी होने लगी और उनका खुद का खर्च निकलने लगा। पैसों की बचत के लिए निरंजन कोचिंग जाने के लिए भी गाड़ी में नहीं बैठते थे, वे कई किलोमीटर तक पैदल चलकर ही कोचिंग जाते थे। उन्हें इस संघर्ष का मुकाम भी मिला और पहले ही प्रयास में IIT में सिलेक्शन हो गया। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद कोल इंडिया में निरंजन की जॉब लग गई। कुछ वक्त बाद उनकी शादी भी हो गई। लाइफ सेट हो गई, लेकिन UPSC करने का उनका सपना अब भी अधूरा रह गया था।

इसके बाद निरंजन नौकरी के साथ UPSC की तैयारी में जुट गए। साल 2017 में उन्हें पहली बार कामयाबी मिली और IRS के लिए चयन हुआ। हालांकि इससे वे संतुष्ट नहीं हुए और कोशिश जारी रखी। आखिरकार इस बार उनकी मेहनत रंग लाई है।

दूसरी कहानी : IIT से इंजीनियरिंग की, IAS बनना था इसलिए कैंपस प्लेसमेंट में बैठे ही नहीं

बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले अनिल बोसाक के पिता फेरी लगाकर कपड़े बेचा करते थे। घर की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। जैसे तैसे दिन रात एक करके वे परिवार का गुजारा कर रहे थे। तब अनिल गांव के ही एक सरकारी स्कूल में पढ़ रहे थे। इसी बीच एक दिन UPSC का रिजल्ट आया, उनके क्लास के ही एक दोस्त के भाई का उसमें सिलेक्शन हुआ था। उस वक्त अनिल ने IAS और UPSC का नाम भी नहीं सुना था, लेकिन जब उनके शहर में जश्न मनाना शुरू हुआ तब जाकर उन्हें इसके बारे में पता चला।

अनिल को पढ़ाने वाले एक टीचर ने उन्हें UPSC के बारे में बताया और उन्हें भी वैसी कामयाबी हासिल करने के लिए मोटिवेट किया। इसके बाद अनिल के मन में UPSC बस गया, वे IAS बनने का सपना संजोने लगे, लेकिन डगर मुश्किल थी। चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर रहे अनिल के परिवार की आर्थिक हालत ऐसी नहीं थी कि उन्हें अच्छे स्कूल में दाखिला मिल पाए या कोचिंग की सुविधा उपलब्ध हो सके। लिहाजा जो कुछ करना था, खुद उन्हें अपनी काबिलियत और अपने दम पर ही करना था।

बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले अनिल बोसाक को दूसरी बार में 45वीं रैंक हासिल हुई है। इससे पहले उन्हें 616वां स्थान मिला था।
बिहार के किशनगंज जिले के रहने वाले अनिल बोसाक को दूसरी बार में 45वीं रैंक हासिल हुई है। इससे पहले उन्हें 616वां स्थान मिला था।

10वीं की परीक्षा पास करने के बाद अनिल IIT में दाखिला के लिए जी तोड़ मेहनत करने लगे। उनकी मेहनत रंग लाई और कामयाबी मिल गई। साल 2014 में उन्होंने IIT दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग में दाखिला लिया। साल 2016 से उन्होंने UPSC की तैयारी करनी शुरू कर दी। 2018 में इंजीनियरिंग करने के बाद उनके पास जॉब का ऑफर था, हालांकि वे कैंपस प्लेसमैंट में नहीं बैठे। घर की माली हालत उन्हें बार-बार विवश जरूर कर रही थी, लेकिन वे अपने सपने से पीछे नहीं हटे और पूरा फोकस UPSC पर रखा।

पहली बार में अनिल को कामयाबी नहीं मिली। दूसरी बार में उनकी मेहनत रंग लाई और कामयाबी मिल गई। UPSC में उन्हें 616वीं रैंक मिली। घर परिवार और गांव में जश्न मना, लेकिन अनिल अपनी इस कामयाबी से संतुष्ट नहीं हुए। उनके मन में सिर्फ एक ही सपना था IAS बनने का। आर्थिक तंगी के चलते उन्होंने नौकरी जॉइन कर ली। बतौर इनकम टैक्स कमिश्नर वे काम करने लगे, लेकिन उनका सपना उन्हें चैन की सांस नहीं लेने दे रहा था। लिहाजा अनिल ने छुट्टी ले ली और UPSC की तैयारी में फिर से लग गए। इस बार आखिरकार उन्हें मुकाम मिल गया। 45वीं रैंक के साथ IAS बनने का उनका सपना साकार हो गया।

तीसरी कहानी : कभी स्कूल के बाहर भजिया और चाय बेचते थे अल्ताफ, अब बने IPS ऑफिसर

महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती तालुका के रहने वाले अल्ताफ मोहम्मद शेख को इस बार UPSC की परीक्षा में 545वां स्थान मिला है। अब वे IPS बनेंगे। फिलहाल वे बतौर इंटेलिजेंस ऑफिसर उस्मानाबाद में पोस्टेड हैं। अल्ताफ का बचपन संघर्ष में बीता है। उनके घर की आर्थिक स्थिति काफी चिंताजनक थी, यहां तक कि खुद का खर्च निकालने के लिए उन्हें कम उम्र से ही काम करना पड़ा। वे अपने स्कूल के बाहर भजिया और चाय बेचते थे। इससे जो कुछ आमदनी हासिल होती थी, उससे उनके परिवार का खर्च चलता था। साथ ही थोड़ा बहुत जो वक्त मिलता था, उसमें अल्ताफ अपनी पढ़ाई भी करते थे।

महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती तालुका के रहने वाले अल्ताफ मोहम्मद शेख को इस बार UPSC की परीक्षा में 545वां स्थान मिला है।
महाराष्ट्र के पुणे जिले के बारामती तालुका के रहने वाले अल्ताफ मोहम्मद शेख को इस बार UPSC की परीक्षा में 545वां स्थान मिला है।

अल्ताफ बचपन से ही पढ़ाई में टैलेंटेड थे। तमाम मुश्किलों और चुनौतियों के बाद भी उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी। इसी बीच नवोदय विद्यालय में उनका सिलेक्शन हो गया। इससे उन्हें थोड़ी रियायत मिल गई। अब पढ़ाई के लिए उन्हें भजिया बेचने से छुटकारा मिल गया। यहीं पर उनके मन में UPSC का ख्वाब जगा। वे इंडियन पुलिस सर्विसेज का सपना संजोने लगे। यहां से पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने फूड टेक्नोलॉजी में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। इसके बाद वे UPSC की तैयारी में जुट गए। मुश्किल डगर थी, लेकिन उन्होंने कोशिश जारी रखी। साल 2015 में UPSC की परीक्षा में उन्हें कामयाबी मिली, लेकिन मन मुताबिक रैंक नहीं मिली। चूंकि परिवार की आर्थिक स्थिति नाजुक थी, लिहाजा उन्हें नौकरी जॉइन करनी पड़ी।

लेकिन, इन सब के बीच उन्होंने अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ा। वे लगातार तैयारी करते रहे। आखिरकार इस साल उन्हें कामयाबी मिल गई। इस बार उन्हें 545वीं रैंक मिली है और IPS बनने का उनका सपना साकार हो गया है। वे बारामती तालुका के पहले IPS अधिकारी बने हैं।

चौथी कहानी : इंटरव्यू से पहले कोरोना पॉजिटिव हो गए, फिर भी पहले ही प्रयास में बने IAS

राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले गौरव बुडानिया ने पहले ही प्रयास में UPSC मेंस की लिखित परीक्षा तो पास कर ली, लेकिन उसके बाद वे कोविड का शिकार हो गए। उनका पूरा परिवार कोरोना पॉजिटिव हो गया। करीब दो महीने तक उन्हें अस्पताल में रहना पड़ा। इस दौरान न तो वे कुछ पढ़ाई कर पाए और न ही इंटरव्यू के लिए तैयारी कर पाए। ऊपर से उनके ताऊ जी की कोरोना से मौत भी हो गई। यानी एक मुसीबत के ऊपर दूसरी मुसीबत, लेकिन इन सब के बीच गौरव ने हौसला कायम रखा, खुद पर भरोसा बनाए रखा।

राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले गौरव बुडानिया ने पहले ही प्रयास में UPSC में परचम लहराया है। उन्होंने 13वीं रैंक हासिल की है।
राजस्थान के चूरू जिले के रहने वाले गौरव बुडानिया ने पहले ही प्रयास में UPSC में परचम लहराया है। उन्होंने 13वीं रैंक हासिल की है।

भास्कर से बात करते हए गौरव कहते हैं कि कोविड की दूसरी लहर में परिवार के साथ मैं भी कोरोना का शिकार हो गया। हालांकि मैं जल्द रिकवर कर गया, लेकिन अपने ताऊ जी के साथ मुझे करीब दो महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। इसी दौरान उनकी डेथ भी हो गई। मुझे इंटरव्यू के लिए सिर्फ 15 दिन का ही वक्त मिला, लेकिन इसका मैंने भरपूर इस्तेमाल किया। शुक्रवार को जब UPSC के नतीजे घोषित हुए तो उन्हें खुशी का ठिकाना नहीं रहा। तमाम उतार चढ़ाव और अगर मगर के बीच गौरव पहले ही प्रयास में कामयाब हो गए। उन्हें देशभर में 13वीं रैंक मिली है।

गौरव बताते हैं कि IIT BHU से इंजीनियरिंग करने के बाद हिन्दुस्तान जिंक में प्लेसमेंट हो गया। इसके बाद मैं ट्रेनिंग के लिए चला गया, लेकिन मेरे ताऊ जी नहीं चाहते थे कि मैं नौकरी करूं। उनका मानना था कि मेरा इंजीनियरिंग करना तभी सफल होगा जब यह गांव के लोगों के काम आएगा। गांव के लोगों को ऐसे लोगों की जरूरत है, जो ग्राउंड की रियलिटी समझते हैं। इसलिए मैंने ट्रेनिंग के बाद नौकरी जॉइन नहीं की और UPSC की तैयारी में लग गया। इसी बीच साल 2018 में राजस्थान सिविल सर्विसेज की परीक्षा में भी मुझे कामयाबी मिल गई। इस परीक्षा में मुझे राज्य भर में 12वीं रैंक मिली। और अब मुझे UPSC में कामयाबी मिली है।

पांचवीं कहानी : इलेक्ट्रिशियन की बेटी ने UPSC में लहराया परचम

ग्वालियर की रहने वाली उर्वशी ने 532वीं रैंक हासिल की है। वे पिछले तीन सालों से UPSC की तैयारी कर रही थीं।
ग्वालियर की रहने वाली उर्वशी ने 532वीं रैंक हासिल की है। वे पिछले तीन सालों से UPSC की तैयारी कर रही थीं।

मध्य प्रदेश के ग्वालियर की रहने वाली एक इलेक्ट्रिशियन की बेटी ने UPSC की परीक्षा में परचम लहराया है। यहां की उर्वशी ने 532वीं रैंक हासिल की है। परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के बाद भी उर्वशी के पिता चाहते थे कि उनकी बेटी UPSC क्वालिफाई करे और अपना सपना पूरा करे। इसके लिए उन्होंने अपनी हर छोटी बड़ी जरूरतों की कुर्बानी दी। अब जाकर उन्हें मुकाम हासिल हुआ है, बेटी ने UPSC में परचम लहरा दिया है।

उर्वशी की पढ़ाई-लिखाई ग्वालियर में ही हुई है। उन्होंने ग्वालियर के KRG कॉलेज से ही ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई की है। इसके बाद अपने सपनों की उड़ान भरने के लिए वे दिल्ली चली गईं। दिल्ली में रहकर पिछले तीन साल से वे UPSC की तैयारी कर रही थीं। इस दौरान कई बार उनके पिता और परिवार के सामने आर्थिक तंगी सामने आई, लेकिन बेटी का हौसला नहीं टूटने दिया।

वे कहते हैं कि मेरी बेटी ने आज जो मुकाम हासिल किया है, उसकी उम्मीद मुझे पहले से थी। इतना पता था कि तैयारी अच्छी की है और दिन रात पढ़ाई करने की आदत और लग्न एक दिन कुछ बड़ा करके दिखाएगी। यही हुआ। उसने जो वादा किया था वह करके दिखाया। UPSC पर फोकस कर रही उर्वशी ने मोबाइल से दूरी बना ली थी। यहां तक कि TV भी नहीं देखती। घर में हमेशा पढ़ाई करती रहती थी। रोजाना करीब 12 से 15 घंटे पढ़ाई करती थी।

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