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एक्सप्लेनर: कूटनीतिक रिश्तों के 70 साल:भारत-चीन में इस साल 70 इवेंट होने थे, पर गलवान के चलते मुश्किल में; सरकार चीन पर जल्द कुछ आर्थिक प्रतिबंध भी लगा सकती है

2 महीने पहलेलेखक: गौरव पांडेय
  • भारत-चीन के बीच कूटनीति रिश्तों की बुनियाद 1 अप्रैल 1950 को रखी गई थी, इस साल इसके 70 साल पूरे हो रहे
  • सरकारी टेंडर, स्ट्रैटेजिक और टेक्नोलॉजी सेक्टर से चीन को बाहर किया जा सकता है, लेकिल बेसिक ट्रेड जारी रहेगा
  • आर्थिक क्षेत्र में चीन हमसे पांच गुना आगे है, सैन्य क्षेत्र में वह हमसे चार गुना है, इसलिए सरकार युद्ध लड़ना नहीं चाहती

भारत-चीन के रिश्ते हवाओं की तरह हैं, जो बहती तो हैं, पर दिखाई नहीं देतीं और कभी भी अपना रुख बदल लेती हैं। अभी 1 अप्रैल 2020 को भारत और चीन ने कूटनीतिक रिश्तों की 70वीं सालगिरह मनाई थी। 75 दिन ही हुए थे कि चीन ने इस रिश्ते को धोखा दे दिया। सीमा पर हमारे 20 जवान लड़ते हुए शहीद हो गए। 

इससे पहले दोनों देशों ने 70वीं सालगिरह का पूरे सालभर जश्न मनाने का वादा किया था। दोनों देशों में 70 इवेंट्स होने थे। इनमें पीपल-टू-पीपल, पॉलिटिकल, कल्चरल इवेंट्स शामिल थे। मकसद, दोनों देशों के बीच के ऐतिहासिक रिश्तों को बताना था। लेकिन, अब सूत्रों के मुताबिक इन इवेंट्स का हो पाना मुश्किल ही नहीं असंभव है। क्योंकि चीन ने इस ऐतिहासिक मौके पर भारत के साथ गद्दारी की है।

विदेश मामलों के जानकार हर्ष वी पंत कहते हैं कि दोनों देशों ने इस खास मौके पर जश्न मनाने की काफी तैयारियां की थीं। अल्टरनेटिव एक इवेंट इंडिया में तो दूसरा चीन में होने की प्लानिंग थी। लेकिन, पहले कोरोना और अब गलवान हो गया। ऐसे में इनका हो पाना बहुत ही मुश्किल है। मौजूदा वातावरण इन इवेंट्स के लायक नहीं हैं।

पूर्व डिप्लोमेट, रक्षा मामलों के जानकार और पाकिस्तान समेत कई देशों में राजदूत रह चुके जी. पार्थसारथी कहते हैं कि भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव अद्भुत माहौल में पैदा हुआ है। तब जब दुनिया में कोरोनावायरस है, अमेरिका-चीन के बीच खींचतान चल रही है। लेकिन दोनों देश अब और ज्यादा तनाव अफोर्ड नहीं कर सकते हैं। 

आइए एक्सपर्ट्स से समझतें हैं भारत-चीन के 70 साल के रिश्ते की पूरी कहानी...

  • जी. पार्थसारथी, 10 प्वाइंट्स में भारत-चीन के बीच मौजूदा हालात और आगे की संभावनाओं के बारे में बता रहे हैं-

1. इस वक्त चीन भी नहीं चाहता है कि सीमा का मसला हाथ से निकल जाए और तनाव बढ़े। हालांकि, भारत सरकार इस विवाद के बाद चीन पर कुछ आर्थिक प्रतिबंध तो जरूर लगाएगी और यह कोई बुरी बात भी नहीं है।

2. हां, यह जरूर है कि चीन ने गलवान वैली में सेना की नई टुकड़ियों को तैनात किया है। डेवलपमेंट भी बड़े पैमान पर किया है। उसकी वजह दौलत बेग ओल्डी है, जो अक्साई चीन सीमा के पास ही है। 

3. दरअसल, दौलत बेग ओल्डी में भारत ने सड़क और सैन्य बेस बना लिया है। पिछले कुछ साल में भारत ने चीन से सटे सीमाई इलाकों में अच्छी सड़कें भी बना ली हैं। यह बात चीन को पसंद नहीं है। 

4. जहां तक बात सीमा विवाद पर भारत सरकार के बयान की है, तो कूटनीति में बहुत स्वाभाविक है कि सरकारें फूंक-फूंक कर कदम उठाती हैं। इसलिए बयान आने में देरी हुई।

5. हकीकत यह है कि आज चीन के साथ कोई भी देश संघर्ष नहीं चाहता है। आर्थिक क्षेत्र में चीन हमसे पांच गुना आगे है। सैन्य क्षेत्र में वह हमसे चार गुना आगे है। यदि उनसे लड़ना है, तो हमें मजबूरी में ही लड़ना होगा।

6. हमारी सेना को यह पता नहीं चल पाया कि चीन उस इलाके में कितनी सेना तैनात कर चुका है। चीन ने पूरे पहाड़ों पर कब्जा कर लिया है। उसने ऐसा खुद को शक्तिशाली बनाने के बाद ही किया है।

7. चीनी सैनिकों के मारे जाने की बात है तो सरकार यह औपचारिक तौर पर कभी नहीं बता सकती है कि हमारी सेना ने चीन के कितने सैनिकों को मारा है।

8. जब नेपाल में जाकर आप मधेशियों (भारतीय मूल के लोग) का साथ देंगे, तो नेपाली आपके खिलाफ निकलेंगे ही। अभी चीन उनके साथ है, इसलिए नेपाल को हमारे खिलाफ बोलने की हिम्मत हो रही है। 

9. जब प्रधानमंत्री शक्तिशाली होते हैं, तो विदेश मंत्री की भूमिका सीमित ही हो जाती है, चाहे वह पूर्व पीएम इंदिरा गांधी का दौर हो, या फिर मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समय।  

10. भारत-चीन बातचीत के जरिए मसला सुलझा लेंगे। अभी युद्ध का वक्त नहीं है, सरकार के पास लड़ने के लिए पैसा नहीं है। कोरोना और आर्थिक मंदी के दौर में अमेरिका भी कुछ करने में हिचकिचा रहा है। इस वक्त चीन भी युद्ध लड़ नहीं सकता है।

  • भारत-चीन के कूटनीतिक रिश्तों की क्या है क्रोनोलॉजी
  • आगे रिश्ते बिगड़ेंगे या सुधरेंगे?

भारत सरकार चीन पर ब्लैंकेट बैन नहीं लगाएगी, सेक्टोरियल इंगेजमेंट कम कर सकती है

हर्ष वी पंत कहते हैं कि भारत सरकार चीन पर ब्लैंकेट बैन नहीं लगाएगी, सिर्फ सेक्टोरियल इंगेजमेंट कम कर सकती है। इसके तहत सरकारी टेंडर से चीन को बाहर किया जा सकता है, स्ट्रैटेजिक और टेक्नोलॉजी सेक्टर से बाहर किया जा सकता है। लेकिन बेसिक ट्रेड तो चलता ही रहेगा, उसे शार्ट-टर्म में नहीं खत्म किया जा सकता है। सोशल मीडिया पर कुछ लोग बकवास कर रहे हैं, लेकिन हकीकत तो यह है कि इन्हें बंद करने से भारत को ही नुकसान होगा।

  • कूटनीतिक कदम किस दिशा में हैं?

रक्षा मंत्री रूस को बैलेंस करने गए हैं, ताकि वह न्यूट्रल रहे

पंत कहते हैं कि चीनी निवेशकों को अब भारत में निवेश करने में मुश्किल आ सकती है। वे रिस्क भी नहीं लेना चाहेंगे, क्योंकि हो सकता है कि आने वाले वक्त में दोनों देशों के बीच टेंशन बढ़ जाए। भारत-चीन-रूस के विदेश मंत्रियों की वर्चुअल मीटिंग में द्विपक्षीय संबंधों पर कोई चर्चा नहीं हुई। सिर्फ ग्लोबल इश्यू पर बात हुई। वहीं, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह रूस को बैलेंस करने माॅस्को गए हैं। ताकि यदि चीन से लड़ाई की स्थिति बने भी तो रूस न्यूट्रल रहे। डिफेंस सप्लाई भी बनाए रखे।

  • मौजूदा वक्त में किस क्षेत्र में भारत-चीन के रिश्ते कैसे हैं 
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