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अंकिता के पिता बोले- मैं दबाव में झुका नहीं:चौकी में हमारी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई, वहां आरोपी और उसके पिता बैठे थे

2 महीने पहलेलेखक: वैभव पलनीटकर

'आप गांव में किसी से भी पूछ लीजिए कि अंकिता कैसी लड़की थी। आगे बढ़ने के सपने देखती थी। लोग कह रहे हैं कि मैंने पैसे लेकर उसका अंतिम संस्कार होने दिया। ये सही नहीं है। मैं अंकिता की कसम खाकर कहता हूं।'

कई घंटे से लगातार रो रहीं अंकिता की दादी को संभालते हुए उसके पिता बीरेंद्र सिंह भंडारी ये बात कहते चले गए। घर में अब अंकिता की मां और 21 साल का भाई है। बीरेंद्र सिंह के मन में बेटी के जाने का दुख है और इस बात का गुस्सा कि उसके अंतिम संस्कार के लिए भी उन्हें लड़ना पड़ा। वे कहते हैं- मैं चाहता हूं कि तीनों आरोपियों को फास्ट ट्रैक कोर्ट से फांसी की सजा मिले।

ऋषिकेश के वनंतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट अंकिता भंडारी की डेड बॉडी 24 सितंबर को चिल्ला नहर में मिली थी। उसकी हत्या का आरोप रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य और दो मैनेजरों पर है। रविवार को साढ़े 8 घंटे चले प्रदर्शन के बाद अंकिता का अंतिम संस्कार किया गया। बीरेंद्र सिंह कहते हैं कि मैं बेटी के लापता होने की रिपोर्ट लिखाने चौकी गया था, वहां मेरी बात सुनी ही नहीं गई।

हम अंकिता के गांव डोभ श्रीकोट पहुंचे तो वहां कुछ रिश्तेदारों के अलावा कोई नहीं था। उनके पिता को देखा तो वे अपनी मां और अंकिता की दादी के पास मिले। यहीं हमने उनसे बात की। हमारा पहला सवाल अंकिता के अंतिम संस्कार पर ही था, क्योंकि इस पर कई तरह की बातें हो रही हैं।

सवाल: क्या अंकिता का अंतिम संस्कार प्रशासन के दबाव में किया गया?
जवाब:
नहीं, सब मेरी मर्जी से हुआ। मैं अंकिता का अंतिम संस्कार करना चाहता था। कई लोग और मीडिया ये कह रहा है कि मैंने प्रशासन के दबाव में लड़की की अंत्येष्टि की। ऐसा कुछ नहीं है। ये भी कहा जा रहा है कि मैंने इसके लिए पैसे लिए। मेरी बेटी दुनिया से चली गई, मैं उसकी कसम खाता हूं, मैंने कोई पैसे नहीं लिए।

सवाल: क्या आपने अंकिता की डेड बॉडी देखी थी?
जवाब: 5-6 दिन हो गए थे लड़की की डेड बॉडी को, उससे दुर्गंध आने लगी थी। उन्होंने कहा कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कभी भी आ सकती है, लेट होगी। इसके बाद अंतिम संस्कार कर दिया।

सवाल: आपने अंकिता का पता लगाने और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए क्या किया?
जवाब:
18 तारीख को अंकिता का फोन नहीं लगा। फिर एक लड़के ने फोन किया कि आपकी लड़की यहां नहीं है। 19 तारीख को दोबारा फोन आया कि अंकिता आज सुबह पता नहीं कहां चली गई, जबकि 18 तारीख से उसका पता नहीं था। उसका फोन भी स्विच ऑफ हो गया था।

मुझे लग रहा है, उसकी हत्या 19 तारीख को की गई थी। हम वहां पहुंचे तो पता चल गया था। रिसॉर्ट का मालिक पुलकित आर्य और मैनेजर सौरभ भास्कर उसी दिन फरार हो गए थे। पहले दोनों मुझे पटारी चौकी में मिले थे। पुलकित दबाव बनाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन मैं झुका नहीं। मेरी तो लड़की गायब थी।

सवाल: इस केस में कहां कमी रही, जब आप रिसॉर्ट गए तो क्या पता चला?
जवाब:
प्रशासन ने तो पूरा साथ दिया। पटवारी ने मेरी रिपोर्ट नहीं लिखी। मैं उसके पास गया था। विवेक कुमार नाम है उसका। उसे पता था कि ऐसी बात हो गई है। वह 20 तारीख को छुट्‌टी पर चला गया और दूसरे को चार्ज दिया, विनोद कुमार को।

मैं 20 तारीख को करीब 11 बजे उसके पास गया था। मुझसे पहले वहां रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर, पुलकित की पत्नी और पिताजी विनोद आर्य मौजूद थे। गेट लगा था और वे चौकी के अंदर बैठे थे। मुझसे कहा गया कि अभी रुको। मैं ढाई घंटे तक बाहर घूमता रहा। इसके बाद मुझे गुस्सा आया, तो मैं सीधे अंदर जाने लगा। तब उन्होंने मुझे बुलाया। पूछा कि क्या काम है।

मैंने बताया कि मैं अंकिता भंडारी का पिता हूं, मुझे कम्प्लेंट लिखवानी है। इस पर पटवारी विवेक कुमार ने कहा कि आपकी कम्प्लेंट नहीं लिखनी। ये पहले आए हैं, इसलिए मैं पहले इनकी रिपोर्ट लिखूंगा। इसके बाद हमारी बहस हुई। मैंने कहा- ठीक है। तीन आरोपी हैं, मुझे इन पर शक है। मैं इनके खिलाफ एप्लिकेशन दे रहा हूं। आप मुझे रसीद दीजिए। पटवारी ने कहा है कि मैं आपको रसीद कैसे दूं।

तब पुलकित आर्य बोला कि आप रिसॉर्ट में जाइए। आपको CCTV कैमरे से सब पता चल जाएगा। हम करीब 5 बजे होटल पहुंचे। पटवारी भी साथ था। मैंने पुलकित आर्य से कहा कि आप CCTV कैमरे ऑन करो, तो कहने लगा कि तीन महीने से काम चल रहा है, सब अस्त-व्यस्त है। मैंने देखा कि जगह-जगह से तार कटी थी।

मामला तब उठा, जब मैंने पटवारी और आरोपियों पर शक करना शुरू किया, क्योंकि पटवारी मुझे घुमा रहा था। हमने होटल के स्टाफ को बुलाया। उन्होंने हमें सारी बात बताई। इसके ऑडियो-वीडियो भी बना रखे थे। मैंने पटवारी के कान पर फोन लगा दिया। कहा- सुन इसे, ये तीनों बंदे हैं। इन्होंने ही सब किया है। इसके बाद चारों के चेहरे उतर गए।

पटवारी बोला कि मैं कोटा रिपोर्ट भेजूंगा। फिर पौड़ी रिपोर्ट आएगी। तब मैंने पौड़ी फोन किया। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष थे पहले सोहन सिंह रावत। उन्होंने 9-साढ़े 9 बजे फोन किया पटवारी को। पूछा कि आपने इनकी कम्प्लेंट क्यों नहीं लिखी।

इसके बाद मैंने ऋतु खंडूरी (विधानसभा अध्यक्ष) को फोन किया। उन्होंने तुरंत DM से बात की। फिर SP को फोन किया। इसके बाद प्रशासन एक्टिव हुआ और केस ट्रांसफर हो गया। प्रशासन ने पटवारी पर एक्शन लेते हुए मंगलवार को उसे सस्पेंड कर दिया।

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1. दोस्त की चैट से खुलासा... अंकिता पर था एक्स्ट्रा सर्विस का दबाव

भास्कर को अंकिता की कुछ चैट मिली हैं। इनमें अंकिता ने अपने दोस्त को बताया था कि उस पर रिसॉर्ट में आने वाले VIP गेस्ट को स्पा सर्विस देने का दबाव बनाया जा रहा था। उसके साथ जबरदस्ती की गई और प्रॉस्टिट्यूट बनने के लिए 10 हजार रुपए का लालच दिया गया। अंकिता से कहा गया कि तुम्हें गेस्ट हैंडल करने हैं, अगर नहीं करोगी तो तुम्हें हटा देंगे।
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2. पहली सैलरी की जगह अंकिता को मौत मिली, अब घर में सिर्फ यादें

19 साल की अंकिता उत्तराखंड के डोभ श्रीकोट गांव में रहती थी। उसका परिवार, दोस्त, रिश्ते सब इसी गांव में हैं। वह परिवार की मदद करना चाहती थीं, इसलिए 12वीं के बाद होटल मैनेजमेंट का कोर्स किया और काम के लिए ऋषिकेश आ गई। पहली सैलरी मिलने से पहले ही अंकिता की जिंदगी खत्म हो गई। पीछे रह गईं कुछ किताबें, कॉपियां और दीवार पर टंगी तस्वीरें।
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3. साढ़े 8 घंटे प्रदर्शन के बाद अलकनंदा के घाट पर अंकिता का अंतिम संस्कार

उत्तराखंड के श्रीनगर में साढ़े 8 घंटे चले प्रदर्शन के बाद रविवार को अंकिता भंडारी का अंतिम संस्कार कर दिया गया। पहले परिवार ने डीटेल्ड पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया था। अधिकारियों ने पिता को भरोसा दिया कि पुलिस इस केस की अच्छे से तफ्तीश करेगी और फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए आरोपियों को सजा दिलाई जाएगी। इसके बाद परिवार अंत्येष्टि के लिए राजी हो गया।
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