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आज की पॉजिटिव खबर:नालंदा के गोपाल क्रिकेटर बनना चाहते थे, आर्थिक दिक्कतों से ट्रेनर बने; आज 3 जिम के मालिक हैं, ईशान किशन सहित कई प्लेयर्स को कर चुके हैं ट्रेंड

पटना3 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
बिहार के नालंद जिले के रहने वाले गोपाल कुमार भारतीय टीम के क्रिकेटर ईशान किशन के साथ। वे पिछले चार-पांच सालों से ईशान को फिटनेस ट्रेनिंग दे रहे हैं।

आज की पॉजिटिव खबर में बात बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले गोपाल कुमार की। गोपाल एक स्पोर्ट्स पर्सन होने के साथ-साथ सर्टिफाइड ट्रेनर हैं। वे झारखंड और बिहार क्रिकेट टीम के ट्रेनर रह चुके हैं। ईशान किशन, प्रज्ञान ओझा सहित कई खिलाड़ियों के फिटनेस गुरु गोपाल ही हैं। अभी वे खुद का फिटनेस सेंटर चला रहे हैं। पटना, बिहारशरीफ और हजारीबाग में उनके सेंटर्स हैं। 30 से ज्यादा लोग उनकी टीम में काम करते हैं। अभी उनकी कंपनी का वैल्यूएशन 1 करोड़ रुपए है।

पिता चाहते थे बेटा क्रिकेटर बने

33 साल के गोपाल का अब तक का सफर बेहद चैलेंजिंग और स्ट्रगल भरा रहा है। वे एक बेहद साधारण परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता किसान हैं और क्रिकेट के जबरदस्त फैन। वे चाहते थे कि उनका बेटा क्रिकेटर बने। इसलिए गोपाल बचपन से ही क्रिकेट खेलने लगे। पहले बेगूसराय और फिर पटना में उन्होंने क्रिकेट की ट्रेनिंग ली। इसके बाद 2002 में वे क्रिकेट खेलने के लिए कोलकाता चले गए।

बिहार की रणजी क्रिकेट टीम के साथ गोपाल कुमार ( पीछे बाएं से चौथे)। वे बिहार क्रिकेट टीम के लिए बतौर ट्रेनर काम कर चुके हैं।
बिहार की रणजी क्रिकेट टीम के साथ गोपाल कुमार ( पीछे बाएं से चौथे)। वे बिहार क्रिकेट टीम के लिए बतौर ट्रेनर काम कर चुके हैं।

ट्यूशन पढ़ाकर निकालते थे खुद का खर्च

गोपाल बंगाल में अलग-अलग क्लबों के साथ क्रिकेट खेलते थे। इससे थोड़े बहुत पैसे उन्हें मिल जाते थे, लेकिन इन पैसों से कोलकाता में रहना और खुद का खर्च चलना मुश्किल हो रहा था। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत अच्छी नहीं थी कि घर से फाइनेंशियल सपोर्ट मिल सके। ऐसे में गोपाल को एक आइडिया सूझा। वे बताते हैं कि कोलकाता में हिंदीभाषी टीचर्स की डिमांड अच्छी-खासी थी। यूपी-बिहार के रहने वाले लोग ऐसे टीचर्स ढूंढ़ रहे थे जो हिंदी में पढ़ा सकें। गोपाल छोटे-छोटे बच्चों को ट्यूशन पढ़ाने लगे। इससे जो कुछ पैसे मिलते थे, उससे वे अपना खर्च निकालने लगे।

फास्ट बॉलर बनना चाहते थे गोपाल

गोपाल फास्ट बॉलर बनना चाहते थे। इसके लिए वे पुरजोर मेहनत भी करते थे। तमाम आर्थिक कठिनाइयों के बाद भी उन्होंने क्रिकेट खेलना जारी रखा। 2002 से 2008 तक वे बंगाल में रहे। वहां कई बड़े क्लबों के लिए उन्होंने क्रिकेट खेला और बेहतर परफॉर्म भी किया। इसके बाद वे पटना आ गए। तब बिहार टीम को रणजी का दर्जा प्राप्त नहीं था और क्रिकेट के लिहाज से यहां बहुत स्कोप भी नहीं था। इसलिए गोपाल झारखंड चले गए।

ग्राउंड पर खिलाड़ियों को फिटनेस ट्रेनिंग कराते हुए गोपाल। गोपाल पिछले 8 साल से प्रोफेशनल ट्रेनर के रूप में काम कर रहे हैं।
ग्राउंड पर खिलाड़ियों को फिटनेस ट्रेनिंग कराते हुए गोपाल। गोपाल पिछले 8 साल से प्रोफेशनल ट्रेनर के रूप में काम कर रहे हैं।

खर्च चलना मुश्किल हो रहा था, इसलिए ट्रेनर बनने का आया आइडिया

गोपाल बताते हैं कि वे एक बेहतर क्रिकेटर बनने के लिए दिनभर ग्राउंड पर पसीना बहाते थे। उन्होंने झारखंड में डिस्ट्रिक्ट लेवल पर कई टूर्नामेंट खेले, लेकिन स्टेट टीम में जगह नहीं बना सके। इस बीच फैमिली प्रेशर बढ़ता जा रहा था। घर वाले चाहते थे कि वे कोई जॉब करें, ताकि कुछ आमदनी हो। गोपाल को क्रिकेट से बहुत ज्यादा इनकम नहीं हो रही थी। वे खुद का खर्च भी बमुश्किल ही निकाल पाते थे। फैमिली बैकग्राउंड भी ऐसा नहीं था कि बिना जॉब के वे सर्वाइव कर सकें। कहीं न कहीं से इनकम की व्यवस्था तो करनी ही थी।

इसी बीच गोपाल के एक दोस्त ने उन्हें ट्रेनर बनने की सलाह दी। उनके दोस्त ने बताया कि खेल के साथ-साथ वे ट्रेनर के रूप में भी अपना करियर बना सकते हैं। इसमें भी बढ़िया स्कोप है। चूंकि गोपाल फास्ट बॉलर थे और उनकी फिटनेस बहुत अच्छी थी इसलिए उन्हें ये आइडिया पसंद आया। इसके बाद गोपाल ने एक प्रोफेशनल ट्रेनर बनने की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी। 2012 में उन्होंने BCCI से O लेवल का ट्रेनिंग कोर्स किया। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया के एक इंस्टीट्यूट से भी उन्होंने ट्रेनर का कोर्स किया।

साल 2014 में गोपाल ने पटना में अपने फिटनेस सेंटर की शुरुआत की थी। आज उनके पास तीन सेंटर्स हैं। जहां 30 से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है।
साल 2014 में गोपाल ने पटना में अपने फिटनेस सेंटर की शुरुआत की थी। आज उनके पास तीन सेंटर्स हैं। जहां 30 से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है।

2012 में बतौर ट्रेनर जॉब लग गई

2011 के अंत में पटना में गोल्ड जिम खुला। थोड़े दिनों बाद गोपाल भी उससे जुड़ गए। उन्होंने बतौर प्रोफेशनल ट्रेनर काम करना शुरू कर दिया। करीब 2 साल तक उन्होंने गोल्ड जिम में काम किया। इस बीच वे अलग-अलग क्रिकेट टीमों से जुड़े रहे। उन्होंने झारखंड क्रिकेट टीम के लिए बतौर ट्रेनर काम किया। फिर झारखंड विमेंस टीम से जुड़ गए।

6 साल में 3 जिम, 2 हजार से ज्यादा कस्टमर्स

2014 में गोपाल ने एक छोटे से स्टूडियो से पटना में खुद का प्रोफिटनेस नाम से जिम शुरू किया। चूंकि वे स्पोर्ट्स से जुड़े थे इसलिए कस्टमर्स की दिक्कत नहीं हुई। जल्द ही एक के बाद एक स्पोर्ट्स पर्सन जुड़ते गए। इसके बाद उन्होंने अपना दायरा बढ़ाना शुरू किया। पटना के बाद बिहारशरीफ और हजारीबाग में अपने सेंटर्स खोले। अभी तीनों सेंटर्स मिलाकर उनके पास 2 हजार के करीब कस्टमर्स हैं। उन्होंने तीन महीने से लेकर एक साल तक का फिटनेस प्लान रखा है।

टीम इंडिया के क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा के साथ गोपाल कुमार। वे प्रज्ञान ओझा को फिटनेस ट्रेनिंग दे चुके हैं।
टीम इंडिया के क्रिकेटर प्रज्ञान ओझा के साथ गोपाल कुमार। वे प्रज्ञान ओझा को फिटनेस ट्रेनिंग दे चुके हैं।

इसके साथ ही गोपाल व्यक्तिगत रूप से भी जरूरत के मुताबिक लोगों को ट्रेनिंग देते हैं। अगर किसी को बहुत जल्द वेट गेन करना है या वेट लॉस करना है तो उसको उस हिसाब से वे ट्रेनिंग देते हैं। कई बड़े क्रिकेट प्लेयर भी गोपाल से इंडिविजुअल ट्रेनिंग लेते हैं। ईशान किशन, प्रज्ञान ओझा, आकाशदीप, शुशांत मिश्रा सहित कई खिलाड़ियों के ट्रेनर के रूप में वे काम कर चुके हैं।

गोपाल कहते हैं, 'भले ही मैं क्रिकेटर नहीं बन सका, लेकिन मेरी स्पोर्ट्स स्पिरिट हमेशा जिंदा रहेगी और मैं कभी क्रिकेट से खुद को अलग नहीं कर सकता।'

वे खुद को फिट रखने के लिए हर दिन घंटों पसीना बहाते हैं। गोपाल के भाई कुणाल किशोर भी उनकी मदद करते हैं और जिम का कामकाज संभालते हैं।

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