• Hindi News
  • Db original
  • Were Digital Marketing Experts, Started A Beekeeping And Processing Startup When They Sat Vacant In Lockdown; Turnover Reached 20 Million In A Year

आज की पॉजिटिव खबर:डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट थे, लॉकडाउन में मधुमक्खी पालन और प्रोसेसिंग का स्टार्टअप शुरू किया; एक साल में 20 लाख पहुंचा टर्नओवर

हिसार, हरियाणा6 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
  • कॉपी लिंक
हरियाणा के रहने वाले नरेश जांग - Dainik Bhaskar
हरियाणा के रहने वाले नरेश जांग

आज की पॉजिटिव खबर में बात हरियाणा के हिसार जिले में रहने वाले नरेश जांग की। नरेश डिजिटल मार्केटिंग फील्ड से ताल्लुक रखते हैं। करीब 8 साल तक उन्होंने अलग-अलग कंपनियों में काम किया, लेकिन अब खुद का स्टार्टअप चला रहे हैं। एक साल पहले उन्होंने मधुमक्खी पालन और उसकी प्रोसेसिंग का काम शुरू किया था। अभी वे देशभर में अपने प्रोडक्ट की मार्केटिंग कर रहे हैं। महज एक साल में उन्होंने 20 लाख रुपए का बिजनेस किया है।

32 साल के नरेश की शुरुआती पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय में हुई। उनके पिता नेवी में थे तो अक्सर ट्रांसफर की वजह से नरेश को भी शहर बदलने पड़े। इसका एक फायदा ये हुआ कि उन्हें अलग-अलग जगहों की खासियत पता हो गई। 2012 में नरेश ने एमबीए किया तो लगे हाथ अच्छे पैकेज पर नौकरी भी मिल गई।

सोशल मीडिया पर अच्छा रिस्पॉन्स मिला तो शुरू किया स्टार्टअप

नरेश की नौकरी अच्छी चल रही थी। बिजनेस का कोई प्लान उनके मन में पहले से नहीं था। वे कहते हैं कि हेल्थ को लेकर मैं थोड़ा अवेयर रहता था और कुछ आयुर्वेदिक प्रोडक्ट का इस्तेमाल करता था। जिन्हें शहद के साथ खाना होता था। कई ब्रांड बदलने के बाद भी मन में एक सवाल रहता था कि मैं जो खा रहा हूं, उसमें कहीं मिलावट तो नहीं है।

नरेश और उनके रिलेटिव संदीप। संदीप पहले से मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं, लेकिन पिछले साल से उन्होंने एक प्रोफेशनल के रूप में काम करना शुरू किया।
नरेश और उनके रिलेटिव संदीप। संदीप पहले से मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं, लेकिन पिछले साल से उन्होंने एक प्रोफेशनल के रूप में काम करना शुरू किया।

पिछले साल जब कोरोना की वजह से लॉकडाउन लगा तो नरेश के मन में कुछ नया करने का ख्याल आया। उनके एक रिलेटिव मधुमक्खी पालन करते थे। नरेश ने सोचा कि उनके साथ मिलकर इस काम को शुरू किया जा सकता है, क्योंकि अभी लॉकडाउन की वजह से लोग ऑनलाइन शॉपिंग की तरफ मूव कर रहे हैं। इसके बाद उन्होंने कुछ पोस्टर डिजाइन किए और सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। इसका पॉजिटिव रिस्पॉन्स मिला। कई लोगों ने उनसे शहद खरीदने में दिलचस्पी दिखाई। इसके बाद उन्होंने डिब्बे में शहद पैक करके भेजना शुरू किया। यहीं से उनके बिजनेस की शुरुआत हुई।

खुद करते हैं मार्केटिंग और प्रोसेसिंग

नरेश और उनके रिलेटिव संदीप मिलकर एक प्रोफेशनल के रूप में काम करने लगे। उन्होंने सबसे पहले 'स्क्रॉलिंग बी' नाम से कम्पनी रजिस्टर की। पोस्टर डिजाइन किए, सोशल मीडिया पर पेज बनाए। प्रोसेसिंग का काम सीखा, कुछ इक्विपमेंट्स मंगाए और फिर शहद की मार्केटिंग शुरू की।

चूंकि नरेश डिजिटल मार्केटिंग फील्ड से हैं, इसलिए उन्हें अपने बिजनेस को प्रमोट करने में बहुत दिक्कत नहीं हुई। जल्द ही उनके कस्टमर्स बढ़ने लगे। अभी वे 6 अलग-अलग फ्लेवर में शहद तैयार कर रहे हैं। हर तीन-चार महीने में 7 क्विंटल शहद का प्रोडक्शन वे कर रहे हैं। हर महीने 200 से 250 के बीच ऑर्डर आ रहे हैं।

नरेश बताते हैं कि हमारे पास अभी 170 बॉक्स मधुमक्खियां हैं। हर बॉक्स से एक बार में 15 किलो शहद निकलता है, जिसकी क्वालिटी टेस्ट और प्रोसेसिंग के बाद हम उसे पैक करके बेचते हैं। इसके साथ हमने उन किसानों से भी टाइअप किया है जो मधुमक्खी पालन करते हैं। हम उनसे शहद लेकर उससे अपना प्रोडक्ट तैयार करते हैं और फिर मार्केट में भेजते हैं।

ये शहद तैयार करने वाले बॉक्स हैं। इनमें मधुमक्खियां डाली गई हैं। एक महीने में एक पेटी से चार किलो तक शहद निकलता है।
ये शहद तैयार करने वाले बॉक्स हैं। इनमें मधुमक्खियां डाली गई हैं। एक महीने में एक पेटी से चार किलो तक शहद निकलता है।

किस तरह बनता है शहद?

शहद तैयार करने के लिए फूलों की उपलब्धता जरूरी है। जहां मधुमक्खियों के बॉक्स रखे हों, वहां तीन किलोमीटर के रेंज में फूल उपलब्ध होने चाहिए। मधुमक्खियां सबसे पहले फूलों का रस पीती हैं। इसके बाद वे वैक्स की बनी पेटी में अपने मुंह से उल्टी करती है। इसे चुगली भी कहते हैं। इसके बाद दूसरी मधुमक्खी उसे ग्रहण करती हैं और वो भी वहीं प्रक्रिया दोहराती है। इसी तरह एक मक्खी से दूसरी, तीसरी और फिर बाकी मधुमक्खियां भी इस प्रक्रिया में भाग लेती हैं। आगे चलकर इससे शहद बनता है। शुरुआत में इसमें पानी की मात्रा अधिक होती है, लेकिन रात में मधुमक्खियां अपने पंख की मदद से शहद से पानी अलग कर देती हैं।

शहद बनने की यह प्रक्रिया लगातार 7-8 दिनों तक चलती है। इस तरह के शहद को कच्चा शहद कहा जाता है। इसके बाद शहद को पकाने के लिए रखा जाता है। करीब 12 से 15 दिनों में शहद पक कर तैयार हो जाता है, जिसे पेटी से निकाल लिया जाता है। इस शहद का सीधे उपयोग किया जा सकता है।

नरेश अभी 6 वैरायटी में शहद तैयार कर रहे हैं। हर महीने 200 से 250 तक ऑर्डर उनके पास आ रहे हैं।
नरेश अभी 6 वैरायटी में शहद तैयार कर रहे हैं। हर महीने 200 से 250 तक ऑर्डर उनके पास आ रहे हैं।

किन चीजों की जरूरत होती है?

  • इसके लिए खुली जगह की जरूरत होती है, जहां मधुमक्खियों के पालन के लिए पेटियां रखी जा सकें।
  • लकड़ी के बने बक्से और मुंह की सेफ्टी के लिए जाली।
  • मधुमक्खियों की उन्नत किस्म।
  • हाथों के लिए दस्ताने और धुंआदानी।
  • अगर आप 200 से 300 पेटियों में मधुमक्खियां पालते हैं तो आपको 4 से 5 हजार स्क्वायर फीट जमीन चाहिए। मधुमक्खी की कई प्रजातियां होती हैं। इनमें से इटालियन मधुमक्खी सबसे अच्छी मानी जाती है। यह शांत स्वभाव की होती है और छत्ता छोड़कर कम भागती है।

10 बॉक्स के साथ कर सकते हैं शुरुआत

शहद का बिजनेस 10 बॉक्स के साथ शुरू किया जा सकता है। इसके लिए करीब 30 हजार रु. खर्च होंगे। बाद में इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है। एक महीने में एक पेटी से चार किलो तक शहद मिल सकता है, जिसे बाजार में 200 से 300 रुपए प्रति किलो की दर से बेचा जा सकता है। इसके साथ ही अगर हम उसकी प्रोसेसिंग करने लगे तो 500 रुपए किलो के हिसाब से भी आसानी से बेचा जा सकता है।

कहां से ले सकते हैं ट्रेनिंग?

देश में इस समय मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग के लिए कई संस्थान हैं, जहां मामूली फीस जमाकर ट्रेनिंग ली जा सकती है। नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र से भी इसके विषय में जानकारी ली जा सकती है। इसके साथ ही जो लोग मधुमक्खी पालन का काम कर रहे हैं, उनसे भी इसकी ट्रेनिंग ली जा सकती है। केंद्र सरकार आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत इस तरह के स्टार्टअप शुरू करने वालों को लागत का 40% तक सपोर्ट करती है।

खबरें और भी हैं...