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बंगाल में चुनाव के बाद हिंसा में 17 मौतें:BJP ने 273 हिंसक घटनाओं की लिस्ट दी, TMC बोली- फर्जी वीडियो वायरल कर हिंसा को धार्मिक रंग दे रही भाजपा

कोलकाता5 महीने पहलेलेखक: प्रभाकर मणि तिवारी
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विधानसभा चुनाव के दौरान सुर्खियों में रहा बंगाल चुनाव के बाद भी बहस का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। वजह है- चुनाव के बाद राज्य के कई हिस्सों में शुरू हुई हिंसा और मौतें। इस राजनीतिक हिंसा में पुलिस अब तक 17 लोगों के मारे जाने की पुष्टि कर चुकी है। लेकिन, भाजपा का कहना है कि उसके इससे ज्यादा कार्यकर्ता मारे गए हैं और पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है।

चुनाव नतीजे आने के बाद 2 मई रविवार रात से ही सैकड़ों तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। इनमें कहीं दफ्तर जलते दिख रहे हैं तो कहीं दुकान या मकानों में लूटपाट होती दिख रही है। एक वीडियो में तो कुछ युवक दो महिलाओं के बाल पकड़ कर बड़ी बेरहमी से खींचते और उनको मारते नजर आ रहे हैं।

भाजपा नेताओं का दावा है कि इन सभी वीडियोज में तृणमूल के कार्यकर्ता भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमला कर रहे हैं। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा तक सोशल मीडिया अकाउंट पर ये तस्वीरें-वीडियो पोस्ट कर चुके हैं, लेकिन पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भाजपा नेताओं ने अभी तक यह जानकारी नहीं दी है कि यह घटनाएं कहां की हैं।

इस बीच, भाजपा ने बीते तीन दिनों के दौरान राज्य में हुई हिंसक घटनाओं की एक सूची तैयार की है। इस सूची में हत्या, हिंसा, आगजनी और लूटपाट की 273 घटनाओं का जिक्र है।

2 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद से बंगाल में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा जारी है।
2 मई को चुनाव नतीजे आने के बाद से बंगाल में टीएमसी और भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच हिंसा जारी है।

जहां भाजपा जीती, वहां ज्यादा हिंसा- ममता
बंगाल पुलिस कुछ भी कह रही हो, लेकिन राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंसा का संज्ञान लेते हुए राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। हिंसा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर आने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मौके पर अपनी टीम भेजने का फैसला किया है।

सीएम के तौर पर तीसरी बार कार्यभार संभालने के बाद प्रेस कांफ्रेंस में ममता ने कहा, 'राज्य में चुनाव बाद हिंसा की कुछ घटनाएं जरूर हुई हैं। लेकिन भाजपा इस आग में घी डालने का प्रयास कर रही है। हिंसा उन इलाकों में ज्यादा हो रही है, जहां भाजपा जीती है। इस हिंसा को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशें भी हो रही हैं। इसके लिए फर्जी वीडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। राजनीतिक दल ऐसा करने से बाज आएं, वरना कानून अपना काम करेगा।'

ये तस्वीर बंगाल भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष के सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई है। इसमें एक भाजपा कार्यकर्ता के घर में की गई तोड़फोड़ दिख रही है।
ये तस्वीर बंगाल भाजपा के प्रमुख दिलीप घोष के सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई है। इसमें एक भाजपा कार्यकर्ता के घर में की गई तोड़फोड़ दिख रही है।

जेपी नड्‌डा अस्पताल में घायलों से मिले
दूसरी ओर, बीजेपी अध्यक्ष जे.पी नड्डा ने इस हिंसा में मारे गए पार्टी के दो कार्यकर्ताओं के घर जाकर परिजनों से मुलाकात की है और बुधवार को इसके खिलाफ देशव्यापी धरने के तहत कोलकाता में धरना भी दिया। पार्टी का दावा है कि उसके नौ लोगों की हत्या हुई है और हजारों लोग आतंक के मारे घर छोड़ कर भाग गए हैं।

ग्रामीणों इलाकों में ज्यादा हो रही हिंसा
पुलिस ने चुनाव बाद हुई हिंसा में कम से कम 17 लोगों की मौत की पुष्टि तो की है। लेकिन, वे किसी राजनीतिक दल से संबंधित थे, इस बारे में कुछ नहीं बताया। दूसरी ओर, भाजपा ने इसमें अपने 9 और तृणमूल ने 7 लोगों के मारे जाने का दावा किया है। बाकी एक व्यक्ति इंडियन सेक्युलर फ्रंट का कार्यकर्ता बताया जा रहा है।
पुलिस का कहना है कि हिंसा की ज्यादातर सूचनाएं ग्रामीण इलाकों से आ रही हैं। भाजपा ने हिंसा और आगजनी की दो दर्जन से ज्यादा घटनाओं की सूची जारी की है। इसके बाद सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से हिंसा पर रिपोर्ट मांगी और राज्यपाल ने भी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था।

हिंसा में घायल कार्यकर्ताओं से मुलाकात के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा अस्पताल पहुंचे। हिंसा के विरोध में उन्होंने कोलकाता में धरना भी दिया।
हिंसा में घायल कार्यकर्ताओं से मुलाकात के लिए भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्‌डा अस्पताल पहुंचे। हिंसा के विरोध में उन्होंने कोलकाता में धरना भी दिया।

हिंसा को लेकर भाजपा नेता सुप्रीम कोर्ट पहुंचे
राज्य में जारी हिंसा को लेकर भाजपा नेता और वरिष्ठ वकील गौरव भाटिया ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर इन मामलों की जांच सीबीआई से कराने की मांग की है। बीजेपी ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है उसमें नंदीग्राम में पार्टी दफ्तर में हुई तोड़फोड़ को दिखाया गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस सीट पर भाजपा के शुभेंदु अधिकारी से चुनाव हार गई थीं।

गैंग रेप का दावा झूठा निकला
रविवार की हिंसा के बाद सोमवार को बीजेपी की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि तृणमूल के लोगों ने पार्टी की दो महिला चुनाव एजेंटों के साथ सामूहिक बलात्कार और मारपीट की है। भाजपा नेता सौमित्र खान ने राजीव राय नामक यूजर के हैंडल से किए गए ट्वीट को री-ट्वीट किया है। ठीक यही ट्वीट भाजपा की महिला नेता अग्निमित्र पॉल ने भी किया है। लेकिन खान के रीट्वीट में जहां इसे एक भाजपा कार्यकर्ता की मां बताया गया है, वहीं अग्निमित्र ने इसे नानूर में हुए गैंगरेप का मामला बताया।

बंगाल पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर हिंसा को लेकर वायरल किए जा रहे ज्यादातर वीडियोज फर्जी हैं। बीरभूम में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ रेप की खबर को भी पुलिस ने गलत बताया है।
बंगाल पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर हिंसा को लेकर वायरल किए जा रहे ज्यादातर वीडियोज फर्जी हैं। बीरभूम में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ रेप की खबर को भी पुलिस ने गलत बताया है।

मंगलवार शाम को उनमें से एक महिला ने तृणमूल के जिला अध्यक्ष अणुब्रत मंडल के दफ्तर में बैठकर पत्रकारों से कहा, 'मेरे साथ ऐसी कोई घटना ही नहीं हुई है। सोशल मीडिया पर इस बारे में फर्जी खबरें पोस्ट की जा रही हैं। मुझे नहीं पता किसने यह झूठी खबर फैलाई है।'

बीरभूम के पुलिस अधीक्षक नागेन्द्र नाथ त्रिपाठी कहते हैं, 'सोशल मीडिया पर पोस्ट की जाने वाली यह खबर झूठी और निराधार है। एक राजनीतिक पार्टी के कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर भाजपा की दो महिला एजेंटों के साथ सामूहिक बलात्कार का जो दावा किया है, वह पूरी तरह फर्जी है। ऐसी पोस्ट करने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।'

भाजपा ने आरोप लगाया था कि बीरभूम में उसकी दो महिला बूथ एजेंट्स के साथ रेप किया गया। लेकिन, बाद में इनमें से एक महिला ने तृणमूल दफ्तर में हुई प्रेस वार्ता में इससे इनकार कर दिया।
भाजपा ने आरोप लगाया था कि बीरभूम में उसकी दो महिला बूथ एजेंट्स के साथ रेप किया गया। लेकिन, बाद में इनमें से एक महिला ने तृणमूल दफ्तर में हुई प्रेस वार्ता में इससे इनकार कर दिया।

धार्मिक रंग देने से बिगड़ सकता है माहौल
राजनीतिक पर्यवेक्षक प्रतिम विश्वास कहते हैं कि 'पश्चिम बंगाल में राजनीतिक और चुनावी हिंसा का इतिहास और परंपरा बहुत पुरानी रही है। लेकिन, यह पहला मौका है जब इसे धार्मिक रंग देने का प्रयास किया जा रहा है। यह प्रवृत्ति खतरनाक है।'

तृणमूल के एक स्थानीय नेता कहते हैं कि पहले चुनावों के दौरान ध्रुवीकरण की कोशिशें हुईं और उसमें कामयाबी नहीं मिलने के बाद अब इस हिंसा को भी धार्मिक चश्मे से देखने के कोशिशें हो रही हैं। हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप का समय नहीं है। राज्य में कोरोना के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, राजनीतिक दलों को साथ मिलकर उनसे निपटना चाहिए।'

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