भास्कर एक्सप्लेनर:क्या है क्यूरेटिव पिटीशन, जिससे सिद्धू ने की बचने की कोशिश, एक्सपर्ट बोले- 'गुरु जेल तो जाना ही पड़ेगा'

4 महीने पहले

रोड रेज के 34 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट की तरफ से 1 साल की सजा दिए जाने पर पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को झटका लगा है। सजा सुनाए जाने के बाद सिद्धू ने कोर्ट के सामने क्यूरेटिव पिटीशन दाखिल की, जिसकी तत्काल सुनवाई करने से CJI ने इनकार कर दिया। क्यूरेटिव पिटीशन तब दाखिल की जाती है, जब किसी दोषी की सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती है।

ऐसे में चलिए जानते हैं कि क्या होती है क्यूरेटिव पिटीशन? इससे कितनी राहत मिलने की संभावना? क्या सिद्धू क्यूरेटिव पिटीशन से जेल जाने से बच सकते हैं?

क्यूरेटिव पिटीशन से सिद्धू को राहत मिलने की कितनी संभावना
क्या क्यूरेटिव पिटीशन के जरिए सिद्धू को राहत मिल सकती है, यही सवाल दैनिक भास्कर ने सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता से किया। विराग ने कहा, ‘जब किसी व्यक्ति के पास सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के सभी कानूनी विकल्प खत्म हो जाते हैं तो संविधान के अनुच्छेद 72 के तब वह राष्ट्रपति के पास और अनुच्छेद 161 के तहत राज्यपाल के पास दया याचिका दायर सकता है।’

विराग ने कहा, ‘क्यूरेटिव याचिका और दया याचिका के निस्तारण में काफी समय लग सकता है, इसलिए सिद्धू को जेल जाना पड़ सकता है। तबीयत खराब होने पर वे अस्पताल में भर्ती होने की प्रार्थना कर सकते हैं।’

विराग ने कहा, ‘सामान्य तौर पर कि क्यूरेटिव पिटीशन पर तभी सुनवाई और राहत मिलती है, जब याचिकाकर्ता यह बता सके कि उसके मामले में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन हुआ है और फैसला देने से पहले उसके पक्ष को सही तरीके से सुना नहीं गया। हालांकि, सिद्धू के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने नए सिरे से रिव्यू पिटीशन में फैसला दिया है इसलिए क्यूरेटिव पिटीशन में बहुत ज्यादा राहत की उम्मीद नहीं लगती।’

2004 में सिद्धू बीजेपी के टिकट पर अमृतसर लोकसभा चुनाव जीता। 2006 में गैर इरादतन हत्या के मामले में सजा के बाद इस्तीफा दिया। इसके बाद 2007 में लोकसभा का उपचुनाव जीता।
2004 में सिद्धू बीजेपी के टिकट पर अमृतसर लोकसभा चुनाव जीता। 2006 में गैर इरादतन हत्या के मामले में सजा के बाद इस्तीफा दिया। इसके बाद 2007 में लोकसभा का उपचुनाव जीता।

क्या होती है क्यूरेटिव पिटीशन

क्यूरेटिव पिटीशन पर विराग ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पिटीशन की व्यवस्था को इसलिए लागू किया जिससे उनके किसी गलत फैसले की वजह से कोई व्यक्ति बहुत बड़े अन्याय का शिकार नहीं हो जाए।’

क्यूरेटिव पिटीशन (Curative Petition) का जन्म ही Cure शब्द से हुआ है। Cure का मतलब उपचार होता है। क्यूरेटिव पिटीशन का विचार 2002 में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा और अन्य मामले की सुनवाई के दौरान आया। इस दौरान जब ये पूछा गया कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद भी क्या किसी दोषी को राहत मिल सकती है। जवाब मिला कि नियम के मुताबिक, ऐसे मामलों में पीड़ित व्यक्ति रिव्यू पिटीशन डाल सकता है, लेकिन फिर सवाल उठा कि अगर रिव्यू पिटीशन भी खारिज हो जाए तो क्या विकल्प बचेगा?

सुप्रीम कोर्ट को भारत के संविधान के अनुच्छेद-142 के तहत ‘न्याय करने का अधिकार’ है। इसी अधिकार का इस्तेमाल करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पुनर्विचार याचिका के बाद भी एक और याचिका दाखिल करने का अधिकार दे रखा है, इसे ही क्यूरेटिव पिटीशन कहते हैं। यानी अगर किसी व्यक्ति का रिव्यू पिटीशन सुप्रीम कोर्ट से खारिज हो जाए तो उसके पास क्यूरेटिव पिटीशन दायर करने का विकल्प होगा।

2009 में सिद्धू अमृतरसर सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने। 2014 में बीजेपी ने टिकट काटकर अरुण जेटली को दे दिया। 2016 में राज्यसभा भेजा गया लेकिन सिद्धू ने मेंबरशिप छोड़ दी।
2009 में सिद्धू अमृतरसर सीट से चुनाव जीत कर सांसद बने। 2014 में बीजेपी ने टिकट काटकर अरुण जेटली को दे दिया। 2016 में राज्यसभा भेजा गया लेकिन सिद्धू ने मेंबरशिप छोड़ दी।

क्यूरेटिव पिटीशन कैसे दाखिल कर सकते हैं?

विराग ने कहा, 'क्यूरेटिव पिटीशन के साथ सीनियर एडवोकेट के सर्टिफिकेट और एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड का सर्टिफिकेट भी देना होता है। पुनर्विचार याचिका, यानी रिव्यू पिटीशन में पारित निर्णय या आदेश की तारीख से उचित समय के भीतर क्यूरेटिव पिटीशन दायर होना चाहिए।'

विराग ने कहा, 'क्यूरेटिव पिटीशन को सुप्रीम कोर्ट के तीन सबसे सीनियर जजों और उन जजों की बेंच को सर्कुलेट किया जाएगा, जिन्होंने मूल मुकदमे में फैसला दिया था। क्यूरेटिव पिटीशन में वकीलों द्वारा बहस नहीं होती, लेकिन याचिकाकर्ता अपने पक्ष को लिखित तौर पर पेश कर सकता है।'

क्या है सिद्धू का रोड रेज केस?

1988 में पंजाब के पटियाला में गाड़ी पार्किंग को लेकर 65 वर्षीय गुरनाम सिंह से सिद्धू का विवाद हो गया था। इस विवाद में सिद्धू ने गुरनाम सिंह पर घूंसे बरसाए थे, जिससे बाद गुरनाम की मौत हो गई थी। मृतक गुरनाम सिंह के परिजनों ने 2010 में एक चैनल के शो में एक सीडी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी, जिसमें सिद्धू ने गुरनाम को मारने की बात स्वीकार की थी।

2017 में सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद अमृतसर ईस्ट से विधायक बने। 2021 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इस साल पंजाब विधानसभा चुनाव में हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।
2017 में सिद्धू कांग्रेस में शामिल हो गए। इसके बाद अमृतसर ईस्ट से विधायक बने। 2021 में पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष बने। इस साल पंजाब विधानसभा चुनाव में हार के बाद अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया।

रोड रेज केस में सिद्धू के साथ कब-क्या हुआ?

रोड रेज से जुड़े मामले में सितंबर 1999 में पंजाब की निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया था, लेकिन दिसंबर 2006 में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने IPC के सेक्शन 304-II के तहत सिद्धू और एक अन्य को गैर-इरादतन हत्या का दोषी करार देते हुए 3-3 साल कैद की सजा सुनाई।

इस सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई। 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को गैर-इरादतन हत्या के आरोपों से बरी करते हुए IPC के सेक्शन 323 के तहत पीड़ित को चोट पहुंचाने का दोषी करार देते हुए एक हजार रुपए का जुर्माना लगाया था।

इस फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरनाम सिंह के परिजनों ने रिव्यू पिटीशन दाखिल की थी। अब इसी रिव्यू पिटीशन की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई है।

खबरें और भी हैं...