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  • When I Got A Job In Lockdown, Started A Food Startup From Home, More Than A Hundred Customers Were Made In Three Months, Earning 60 Thousand Every Month.

खुद्दार कहानी:लॉकडाउन में नौकरी गई तो घर से ही फूड स्टार्टअप शुरू किया, तीन महीने में सौ से ज्यादा कस्टमर्स बने, अब हर महीने 60 हजार की कमाई

देहरादून3 महीने पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र
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देहरादून की रहने वाली मालती हलदार ने पिछले साल दिसंबर में एक फूड स्टार्टअप शुरू किया है। जहां वे खुद खाना तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। - Dainik Bhaskar
देहरादून की रहने वाली मालती हलदार ने पिछले साल दिसंबर में एक फूड स्टार्टअप शुरू किया है। जहां वे खुद खाना तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचाती हैं।

आज की खुद्दार कहानी में बात देहरादून की रहने वाली मालती हलदार की। करीब दो दशकों तक मालती ने अलग-अलग कंपनियों में जॉब किया। अच्छा खासा पैकेज था, लेकिन लॉकडाउन के दौरान उनकी जॉब चली गई। 5-6 महीने तक उन्होंने जॉब के लिए कोशिश की। कई जगह अप्लाई किया, लेकिन कहीं से पॉजिटिव रिस्पॉन्स नहीं मिला। इस बीच जो कुछ सेविंग्स थीं, वो भी खत्म हो गई। इसके बाद पिछले साल दिसंबर में मालती ने अपने घर से ही एक फूड स्टार्टअप की शुरुआत की। अभी वे दो दर्जन से ज्यादा डिशेज रोज तैयार करती हैं। और हर महीने 60 हजार रुपए की कमाई हो रही है।

मालती हलदार का परिवार 60 के दशक में पूर्वी पाकिस्तान (जो अब बंग्लादेश है) से भारत आया था। उनका परिवार खेती से जुड़ा रहा। पिता वेटरनरी में काम करते हैं। मालती की शुरुआती पढ़ाई उत्तराखंड के रुद्रपुर में हुई, इसके बाद गढ़वाल यूनिवर्सिटी से उन्होंने मास्टर्स किया। अभी पीएचडी कर रही हैं। इसके साथ ही मालती ‘यूएन वुमेन सिविल सोसायटी एडवाइजरी कमेटी’ की सदस्य भी हैं।

मालती हलदार खुद से ही अलग-अलग तरह की रेसिपीज तैयार करती हैं और फिर ग्राहकों के पास डिलीवर करवाती हैं।
मालती हलदार खुद से ही अलग-अलग तरह की रेसिपीज तैयार करती हैं और फिर ग्राहकों के पास डिलीवर करवाती हैं।

39 साल की मालती बताती हैं कि लॉकडाउन का पीरियड उनके लिए सबसे मुश्किल भरा रहा। महीनों तक कोशिश करने के बाद भी कहीं से बेहतर रिस्पॉन्स नहीं मिला रहा था, ऊपर से फाइनेंशियल प्रेशर भी बढ़ता जा रहा था। इसलिए अब कुछ न कुछ शुरू करना ही था।

घर से ही शुरू किया फूड स्टार्टअप

मालती कहती हैं, 'चूंकि मैं बंगाली फैमिली से आती हूं, इसलिए मुझे नॉनवेज रेसिपीज बनाने का शौक था। मैं अलग-अलग तरह की डिशेज बना लेती थी। इसलिए मैंने तय किया कि अब इसी सेक्टर में कुछ काम शुरू किया जाए।' पिछले साल दिसंबर में मालती ने Mal_Cui नाम से होम किचन बेस्ट स्टार्टअप की शुरुआत की। और खुद ही डिशेज तैयार करके लोगों तक पहुंचाने लगीं। वे कहती हैं कि देहरादून में पहाड़ी मछली का बंगाली टेस्ट उनकी USP है।

सोशल मीडिया की मदद से मार्केट डेवलप किया

मालती अभी दो दर्जन से ज्यादा रेसिपीज बनाती हैं। इसमें चिकन बिरयानी भी शामिल है।
मालती अभी दो दर्जन से ज्यादा रेसिपीज बनाती हैं। इसमें चिकन बिरयानी भी शामिल है।

मालती पहले से ही सोशल मीडिया पर एक्टिव रही हैं। इसलिए जब उन्होंने अपना काम शुरू किया तो इसकी जानकारी उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर की। फिर उन्होंने अपने स्टार्टअप के नाम से पेज बनाया और प्रमोशन करना शुरू किया। इस दौरान अपने परिचितों को भी फोन कर अपने बिजनेस के बारे में इन्फॉर्म किया। इस तरह कारवां बढ़ता गया। एक से दो, दो से 10 ऐसे करके संख्या बढ़ती गई। अभी हर दिन करीब 40 ऑर्डर उनके पास आते हैं। 100 से ज्यादा उनके पास रेगुलर कस्टमर्स हैं।

पांच लोगों को रोजगार भी दिया

मालती अभी देहरादून में ही अपने प्रोडक्ट की सप्लाई कर रही हैं। उन्होंने अपने साथ 5 लोगों को काम पर रखा है। इनमें 4 महिलाएं और 1 पुरुष शामिल हैं। ये लोग मालती के साथ मार्केटिंग करने और फूड डिलीवरी में मदद करते हैं।

दादी से सीखा अलग-अलग तरह की डिशेज बनाना

ये रेनबो ट्राउट मछली है, इसका वजह 2 किलो के करीब होता है। इसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है।
ये रेनबो ट्राउट मछली है, इसका वजह 2 किलो के करीब होता है। इसमें फैट और कोलेस्ट्रॉल कम मात्रा में होता है।

मालती बताती हैं कि बंगाली फैमिली से ताल्लुक रखने के चलते हम लोग हमेशा से खाने को लेकर शौकीन रहे हैं। खास करके नॉनवेज फूड आइटम्स। मेरी दादी हर तरह की रेसिपीज बनाना जानती थीं। मैं छोटी थी तब से ही उनसे ये सभी रेसिपीज बनाना सीखती थी। अभी भी मुझे तरह-तरह के डिशेज बनाना पसंद है। अपना सारा डिश मैं ही तैयार करती हूं।

मालती अभी करीब 20 तरह के फिश आइटम, चिकन बिरयानी, नारियल के लड्डू, मलाई कोफ्ता सहित दो दर्जन से ज्यादा डिशेज बनाती हैं। खास बात यह है कि इन्हें बनाने में वो कोई हानिकारक केमिकल यूज नहीं करती हैं। हर चीज वे नैचुरली तैयार करती हैं।

आगे फूड चेन बनाने का इरादा है

मालती की ज्यादातर रेसिपीज नॉनवेज है। 20 के करीब तो वे अलग-अलग तरह के फिश आइटम्स बेचती हैं।
मालती की ज्यादातर रेसिपीज नॉनवेज है। 20 के करीब तो वे अलग-अलग तरह के फिश आइटम्स बेचती हैं।

मालती आगे एक फूड चेन शुरू करना चाहती हैं ताकि देहरादून के बाहर भी लोगों को बढ़िया खाना मिल सके। इसमें वे उन महिलाओं को जोड़ेंगी जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं या विधवा हैं। वे कहती हैं कि अमूमन खाना पकाने में महिलाओं की दिलचस्पी रहती है और वो बेहतर खाना भी पकाती हैं। तो क्यों न उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जाए, ताकि उन्हें किसी सहारे की जरूरत नहीं पड़े। मालती ने देहरादून में एक जगह बुक कर ली है। आने वाले दिनों में वे रेस्टोरेंट भी शुरू करेंगी। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके हाथ की बनाई रेसिपीज का लुत्फ ले सकें।

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