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  • When Training Took A Peak, The Dream Of Becoming A Fighter Pilot Was Shattered, Remained In Depression For Several Months; Now After Doing MBA From IIM, He Is A Manager In A Multinational Company.

खुद्दार कहानी:ट्रेनिंग में चोट लगी तो फाइटर पायलट बनने का सपना टूट गया, कई महीने डिप्रेशन में रहे; अब IIM से MBA करने के बाद मल्टीनेशनल कंपनी में मैनेजर हैं

नई दिल्ली10 दिन पहलेलेखक: इंद्रभूषण मिश्र

उत्तर प्रदेश बिजनौर के रहने वाले एकलव्य पंडित ने बचपन से एक सपना देखा था। वह सपना था एयरफोर्स में पायलट बनकर फाइटर प्लेन उड़ाने का। उनके सपने को पंख लगे और उड़ान भी भरी, लेकिन मंजिल की दहलीज पर पहुंचकर भी वे मुकाम हासिल करने से चूक गए। दरअसल ट्रेनिंग के दौरान एकलव्य को चोट लगी, 4-5 महीने अस्पताल में रहे। उन्हें एयरफोर्स के लिए अनफिट करार दिया गया और मजबूरन उन्हें बोर्ड आउट होना पड़ा। उनके लिए यह सबसे बड़ा सेटबैक था।

एकलव्य तो वाकई एकलव्य ही थे, उन्हें थक हारकर बैठना स्वीकार नहीं था। उन्होंने एक बार फिर से उड़ान भरी। इस बार मैदान अलग था, चैलेंज भी अलग था, लेकिन जज्बा वही था। 2015 में पहले ही प्रयास में एकलव्य ने CAT क्रैक किया और IIM अहमदाबाद में अपनी जगह पक्की कर ली।

आज की खुद्दार कहानी में पढ़िए कैसे तमाम मुश्किलों से निकलकर एकलव्य ने अपना मुकाम हासिल किया...

उत्तर प्रदेश बिजनौर के रहने वाले एकलव्य पंडित ने दूसरे प्रयास में AFCAT क्रैक किया।
उत्तर प्रदेश बिजनौर के रहने वाले एकलव्य पंडित ने दूसरे प्रयास में AFCAT क्रैक किया।

एकलव्य के माता-पिता दोनों ही डिग्री कॉलेज में प्रोफेसर हैं। पिता चाहते थे कि एकलव्य इंजीनियरिंग की पढ़ाई करें और फिर सिविल सर्विसेज की तैयारी करें। अच्छी जगह पर सेटल्ड जॉब करें, लेकिन एकलव्य का इरादा कुछ और ही था। अपने शुरुआती दिनों से वे जब भी TV पर फाइटर प्लेन को उड़ते देखते तो यही सोचते थे कि एक दिन मैं भी इसे उड़ाऊंगा। वे किताबों में, अखबारों में, हर जगह एयरफोर्स के बारे में पढ़ते रहते थे। अगर कोई एयरफोर्स वाला उन्हें मिल जाए तो वे उसके साथ बैठकर घंटों बातें करते थे। उससे एयरफोर्स के बारे में एक-एक चीज पूछते रहते थे।

12वीं के बाद एकलव्य ने NDA का फॉर्म भरा, हालांकि वे एग्जाम नहीं दे सके। उसी दिन इंजीनियरिंग के लिए भी एंट्रेंस एग्जाम था तो उनके पिता ने NDA का एग्जाम नहीं देने दिया। क्योंकि पिता चाहते थे कि बेटा इंजीनियर बनने के बाद सरकारी ऑफिसर बने। एकलव्य ने तब पिता की बात तो मान ली। उन्होंने इंजीनियरिंग में दाखिला भी ले लिया, लेकिन अपने सपने का पीछा करना नहीं छोड़ा। इंजीनियरिंग के साथ ही वे एयरफोर्स की तैयारी भी कर रहे थे।

जब सारे फ्रेंड्स जॉब ढूंढ रहे थे, एकलव्य SSB की तैयार कर रहे थे

एयरफोर्स की ट्रेनिंग के अभी कुछ ही दिन बीते थे कि एकलव्य के पैर में चोट लग गई और उन्हें बोर्ड आउट होना पड़ा।
एयरफोर्स की ट्रेनिंग के अभी कुछ ही दिन बीते थे कि एकलव्य के पैर में चोट लग गई और उन्हें बोर्ड आउट होना पड़ा।

एकलव्य बताते हैं कि मैं कॉरपोरेट सेक्टर में काम नहीं करना चाहता था। मेरा एक ही सपना था, नीली वर्दी पहनकर मिग-21 उड़ाना। इसलिए इंजीनियरिंग के फाइनल ईयर में जब मेरे फ्रेंड्स कॉरपोरेट सेक्टर में जॉब ढूंढ रहे थे, तब मैं SSB की तैयारी कर रहा था। जब भी कॉलेज से वक्त मिलता था, SSB एग्जाम से जुड़े टॉपिक की पढ़ाई करने लगता था। पापा भले कुछ और चाहते थे, लेकिन मैंने कोई और ऑप्शन रखा ही नहीं था।

साल 2012 में एकलव्य ने एयरफोर्स कॉमन एडमिशन टेस्ट (AFCAT) का एग्जाम दिया। वे पास भी हुए, लेकिन फाइनल स्टेज में जगह नहीं बना सके। इससे उन्हें तकलीफ तो हुई, लेकिन कोशिश जारी रखी। अगले साल फिर एग्जाम दिया और इस बार उनकी मेहनत रंग लाई और उनका सिलेक्शन भी हो गया। इतना ही नहीं यहां एकलव्य को अपनी पसंद की ब्रांच भी मिल गई। इसके बाद ट्रेनिंग के लिए वे हैदराबाद चले गए।

कभी सोचा नहीं था कि मंजिल इस तरह हाथ से निकल जाएगी
ट्रेनिंग के शुरुआती दिनों में सब कुछ अच्छा रहा। वे मन लगाकर ट्रेनिंग कर रहे थे, लेकिन एक दिन किस्मत ने करवट ली और वे हादसे का शिकार हो गए। दरअसल कैंप में गन के साथ प्रैक्टिस करते वक्त उनका बैलेंस बिगड़ गया और वे जमीन पर गिर गए। उनके पैर में गंभीर चोट लग गई। जांच के बाद पता चला कि उनका पटेला डिसलोकेट हो गया है।

साल 2012 में एकलव्य ने पहले ही प्रयास में CAT क्वालिफाई किया और IIM अहमदाबाद से MBA की डिग्री हासिल की।
साल 2012 में एकलव्य ने पहले ही प्रयास में CAT क्वालिफाई किया और IIM अहमदाबाद से MBA की डिग्री हासिल की।

एकलव्य कहते हैं कि चोट लगने के बाद करीब 4-5 महीने मैं अस्पताल में रहा। मुझे उम्मीद थी कि जल्द ठीक होकर वापस ट्रेनिंग जॉइन करूंगा, लेकिन जब मेडिकल टेस्ट हुआ तो मुझे अनफिट घोषित कर दिया गया। इसके बाद बोर्ड आउट की प्रोसेस शुरू हो गई। मैंने सपने में भी यह नहीं सोचा था कि जिस सपने को पूरा करने के लिए जी जान लगा दी, उसकी चौखट तक पहुंचने के बाद एंट्री बंद हो जाएगी।

इसके बाद एकलव्य को वापस उनके यूनिट भेज दिया गया। वहां उनके साथी ट्रेनिंग कर रहे थे और वे अकेले में बैठकर रोते रहते थे। इसके सिवा उनके पास तब कोई ऑप्शन भी नहीं था। उन्होंने अधिकारियों से रिक्वेस्ट की थी कि मुझे कहीं जॉब दी जाए। अगर मैं पायलट के लिए फिट नहीं हूं, तो मुझे किसी और ब्रांच में शामिल कर लिया जाए। एक बार सिलेक्ट करने के बाद मुझे खाली हाथ घर नहीं भेजा जाए, लेकिन कहीं कोई सुनवाई नहीं हुई। कुछ दिनों बाद उन्हें ऑफिशियली बोर्ड आउट कर दिया गया और वे बिजनौर लौट आए।

कुछ ख्वाब टूटने से जिंदगी तो खत्म नहीं होती

IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद एकलव्य की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई।
IIM अहमदाबाद से MBA करने के बाद एकलव्य की एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब लग गई।

एकलव्य कहते हैं कि मेरे लिए वह सबसे मुश्किल दौर था। कई दिनों तक डिप्रेशन में रहा। किसी से बात नहीं करता था, घर के लोगों से भी दूर रहने की कोशिश करता था। समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं। ऊपर से कुछ लोग ताने भी मारते थे। लोगों को लगता था कि इसकी ही कोई गलती रही होगी, जिससे इसे बाहर कर दिया गया। इतना कुछ सुनने के बाद खुद को संभालना काफी मुश्किल टास्क था, लेकिन एक ही चीज को पकड़कर आखिर कब तक रोता। कुछ ख्वाब टूटने से जिंदगी तो खत्म नहीं होती न। इसलिए जो हुआ उसे लाइफ का एक पार्ट मानकर आगे बढ़ गया।

एकलव्य बताते हैं, 'कुछ दिनों तक मैंने डिप्रेशन से उबरने के लिए मेडिटेशन शुरू किया। इससे काफी फायदा हुआ। मेरा कॉन्फिडेंस लेवल बढ़ा। इसी बीच मैं अहमदाबाद में एक रिलेटिव के यहां गया। वहां मैंने पहली बार IIM अहमदाबाद देखा। उस वक्त मेरे माइंड में ये बात क्लिक कर गई कि अब मुझे यहीं एडमिशन लेना है। घर लौटने के बाद कैट की तैयारी शुरू कर दी। कुछ दिनों के लिए नोएडा चला गया और वहां कैट के लिए कोचिंग करने लगा। इस दौरान खुद के खर्च निकालने के लिए मैं ट्यूशन भी पढ़ाता था।

2015 में एकलव्य ने कैट का एग्जाम दिया और पहले ही अटेंप्ट में उनका सिलेक्शन हो गया। इसके बाद 2018 में उन्होंने MBA कंप्लीट किया। उसी वक्त उनका एक कॉरपोरेट कंपनी में सिलेक्शन हो गया। अभी एकलव्य दिल्ली में एक मल्टीनेशनल कंपनी में जॉब कर रहे हैं।

अपनी पत्नी के साथ एकलव्य। अभी एकलव्य दिल्ली में जॉब करते हैं। उनके माता-पिता दोनों ही एक डिग्री कॉलेज में पढाते हैं।
अपनी पत्नी के साथ एकलव्य। अभी एकलव्य दिल्ली में जॉब करते हैं। उनके माता-पिता दोनों ही एक डिग्री कॉलेज में पढाते हैं।
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