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भास्कर ओरिजिनल:भारत-चीन में लोग सबसे ज्यादा सोते हैं, अमेरिका में ढाई घंटे टीवी देखते हैं, जानें अलग-अलग देशों में कैसे बिताते हैं दिन

8 दिन पहलेलेखक: अविनाश द्विवेदी
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चीन में हर व्यक्ति रोज 9 घंटे से भी ज्यादा सोता है। अमेरिका में हर व्यक्ति रोज करीब ढाई घंटे टीवी देखता है। भारत में लोग अपना ख्याल रखने में रोज सवा घंटे खर्च करते हैं। ब्रिटेन में लोगों के पास दिन में पांच घंटे से भी ज्यादा खाली समय होता है। यह जानकारी ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट यानी OECD ने जुटाई हैं।

इसमें काम, सोने, खाने-पीने के घंटे और खाली समय के आंकड़े हैं। इसके लिए 15 से 64 साल के महिलाओं-पुरुषों की एक दिन की दिनचर्या को रिकॉर्ड किया गया है।

जहां मौज-मस्ती के लिए समय नहीं, वहां लोग ज्यादा नाखुश
अवर वर्ल्ड इन डेटा के मुताबिक, लोगों को सबसे ज्यादा मजा खाली समय में किए जाने वाले काम में आता है, जैसे- बाहर खाना, बिस्तर में पड़े रहना, कोई खेल देखने जाना, कंप्यूटर में गेम खेलना या फिल्म देखना। वहीं, होमवर्क करने और नौकरी ढूंढ़ने जैसे काम में लोगों को सबसे कम मजा आता है।

वेबसाइट के मुताबिक जिन देशों में लोग ज्यादा काम करते हैं और जिनमें लोगों के पास मौज-मस्ती के लिए खाली समय नहीं है, वहां लोगों के नाखुश और असंतुष्ट होने की ज्यादा शिकायतें आती हैं।

ब्रिटेन में लोगों के पास सबसे ज्यादा खाली समय
भारत के मुकाबले चीन में टीवी देखने का समय दोगुना है। अमेरिका में यह समय ढाई गुना है। डॉ. निधि कहती हैं, 'चीन के इंटरनेट की दुनिया सीमित है, इसलिए ऐसा है।' ब्रिटेन में लोगों के पास रोज करीब 5 घंटे से भी ज्यादा खाली समय होता है। अमेरिका में यह आंकड़ा 5 घंटे से थोड़ा ही कम है।

भारत में लोग 4:13 घंटे फ्री रहते हैं, तो चीन में 4 घंटे से भी कम। साइकोलॉजिस्ट हिमानी कुलकर्णी खाली समय के महत्व पर जोर देती हैं। वे कहती हैं कि खाली समय इंसान की मानसिक शक्तियों के लिए बहुत जरूरी है और हमारे काम करने की क्षमता को बढ़ाता है। खाली समय न मिलने से इंसान की क्रिएटिविटी में कमी आती है।

महिलाओं को नौकरी देने में बराबरी नहीं
दुनियाभर के कामकाजी महिलाओं के काम और आराम के आंकड़ों में भी अंतर है। भारत में रोजगार में लगी महिलाएं जहां 20% हैं। वहीं, ब्रिटेन में 72% से ज्यादा, चीन में 60% से ज्यादा और अमेरिका में 50% से ज्यादा महिलाएं नौकरी करती हैं।

महिलाओं के मामले में गैर-बराबरी नौकरियों तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह आराम के घंटों में और साफ दिखती है। अवर वर्ल्ड इन डेटा के मुताबिक, इसकी वजह घरेलू काम है, जिसके लिए महिलाओं को पैसे नहीं मिलते। साथ ही इससे महिलाओं को आराम का समय नहीं मिल पाता। साइकोलॉजिस्ट हिमानी कहती हैं कि भारत में महिलाओं के पास खाली समय और सोने का समय पुरुषों के मुकाबले काफी कम होता है।

24 घंटे का 90% सोने, खाने और आराम में गुजारते हैं लोग
OECD की रिपोर्ट कहती है कि दुनिया भर के इंसान दिन के 24 घंटे का 90% समय सोने, खाने और आराम करने में गुजार देता है। स्टडी के मुताबिक, दुनियाभर में चीन के लोग सबसे ज्यादा सोते हैं। दूसरे नंबर पर भारतीय हैं। ये चीन वालों से 15 मिनट कम सोते हैं। इसमें चावल अहम भूमिका निभाता है।

बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) में चीन का इतिहास पढ़ाने वाले प्रो. केशव मिश्रा कहते हैं, ‘चीन में लोगों का अभिवादन ही 'ची पाओ ला' कहकर किया जाता है। इसका मतलब है- चावल खाया क्या? भारत में भी इसे खूब पसंद किया जाता है। दरअसल चावल का ताल्लुक भारी खाने से है। भारी खाना खाने वालों को ज्यादा नींद आने की बात मेडिकल साइंस भी मानता है।'

चीन के लोगों की खाने की आदतें ऐसी हैं कि ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ के पति प्रिंस फिलिप ने इस पर टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था, ‘चार पैर वाली कुर्सी और उड़ने वाला प्लेन छोड़ दें तो चीन के लोग सब खा सकते हैं।’

खाना पकाने पर सबसे ज्यादा समय खर्च करते हैं भारत-चीन
अमेरिका के मुकाबले भारत और चीन में खाने-पीने पर ज्यादा समय खर्च किया जाता है। ऐसा खाना-पकाने की लंबी प्रक्रिया के चलते है। न्यूट्रिशन एक्सपर्ट डॉ. निधि इस बारे में कहती हैं, 'चीन में फैमिली कल्चर है। घर के कामकाज में सब शामिल होते हैं। खाना बनाने पर विचार-विमर्श होता है। स्वादिष्ट खाने पर बहुत जोर होता है।'

लाइफस्टाइल एक्सपर्ट रंजीत वासु का कहना है कि खाना बनाने वाली रखने का ट्रेंड अब भारत के टीयर 2-3‌ सिटी तक पहुंच गया है। इसलिए अब खाना पकाने का औसत समय 84 मिनट तक हो गया है। खाने में विविधता होने के कारण हमारे यहां खाना पकाने में ज्यादा समय लगता है।

भारतीयों से 45 मिनट ज्यादा काम करते हैं चीन के लोग
चीन का हर इंसान भारतीयों से औसतन 45 मिनट ज्यादा काम करता है। प्रो. केशव मिश्रा बताते हैं, 'चीन में सुबह साढे़ सात बजे से ही कामकाज शुरू हो जाता है। वहां दोपहर में पूरे एक घंटे की छुट्टी मिलती है। इसमें खाना खाकर तत्काल सोने का कल्चर भी है। चीन की 1978 की आर्थिक क्रांति के बाद से चीन में लोगों का जीवन भी बदला है। चीन में लोगों के दुनिया में सबसे ज्यादा काम करने और सबसे ज्यादा सोने की यही वजहें हैं। इसमें वहां की आर्थिक स्थिति, संस्कृति और पर्यावरण तीनों का ही योगदान है।'

भारतीयों से कम काम, लेकिन कमाई कई गुना ज्यादा
भारत के लोगों से 45 मिनट ज्यादा काम करके चीन के लोग हमसे चार गुना कमाते हैं। हालांकि, भारतीयों से कम काम करने के बावजूद ब्रिटेन और अमेरिका में लोग करीब 20 से 25 गुना ज्यादा कमाते हैं।

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