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हाथरस रेप केस की लड़ाई लड़ने वाली सीमा कुशवाह बोलीं:योगी सरकार जान-बूझकर खुशी दुबे की जमानत नहीं होने दे रही, उसे बेवजह जेल में रखा

4 महीने पहलेलेखक: पूनम कौशल

निर्भया रेप केस और हाथरस रेप केस मामलों की अदालत में लड़ाई लड़ने वाली चर्चित वकील और महिला अधिकार कार्यकर्ता सीमा कुशवाहा UP चुनावों से ठीक पहले बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गई हैं। सीमा कुशवाहा का कहना है कि वो UP में महिलाओं पर हो रहे जुल्म के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ती रहेंगी।

भास्कर से बातचीत में उन्होंने कहा कि वो बिकरू कांड में जेल में बंद पुलिस एनकाउंटर में मारे गए अमर दुबे की पत्नी खुशी दुबे के लिए भी अदालत में लड़ाई लड़ेंगी। भास्कर संवाददाता पूनम कौशल ने सीमा कुशवाहा से बात की। पढ़िए प्रमुख अंश

1. आप एक अधिवक्ता हैं। UP के कौन से ऐसे मामले हैं जो आपको परेशान करते हैं और जिन पर आप काम करना चाहेंगी?

अभी मैं खुशी दुबे के बारे में जानकर परेशान हूं। खुशी दुबे नाबालिग बेटी थी। इस सरकार ने अपनी ईगो की वजह से उस बच्ची को जेल में रखा है। उसकी बिकरू कांड में कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन फिर भी अपने अहंकार के लिए सरकार ने उस बेटी को जेल में रखा है। सरकार की तरफ से अदालत में बताया गया है कि खुशी ने कहा है कि अगर मैं जेल से बाहर आई तो खूंखार बन जाऊंगी। क्या कहीं कोई ऐसे कहता है? ये सरकार खुशी दुबे की जमानत नहीं होने दे रही है।

ये योगी आदित्यनाथ की सरकार का चरित्र है। योगी आदित्यनाथ एक मुख्यमंत्री हैं, लेकिन उन्होंने हाथरस के पीड़ित परिवार से निजी दुश्मनी ले ली है। अभी तक उन्होंने उस DM को नहीं हटाया है जिसने हाथरस की बेटी को जलवाया। वो हाथरस पीड़ित परिवार से खुन्नस रखते हैं। जो वादे परिवार से किए गए थे वो अभी तक उनकी सरकार ने पूरे नहीं किए हैं। हाथरस की बेटी के लिए मैं लड़ रही हूं, खुशी दुबे के लिए मैं लड़ूंगी।

2. तो क्या ये माना जाए कि आप बिकरू कांड में जेल में बंद खुशी दुबे को न्याय दिलाने के लिए अदालत में लड़ाई लड़ेंगी?

मैं जानती हूं कि खुशी दुबे पर जुल्म हुआ है। वो नाबालिग थी, लेकिन फिर भी उसे टॉर्चर किया गया। पुलिस को पता था कि वो नाबालिग है, लेकिन उसे सुधार गृह भेजने के बजाय जेल में रखा। पुलिस ने उसे अपराधियों के साथ रखा। अभी तक खुशी पर जुल्म करने वालों को निलंबित तक नहीं किया गया है। मैं खुशी के लिए न्याय की लड़ाई लड़ूंगी। राजनीति में रहते हुए भी मैं अपनी वकालत जारी रखूंगी। ऐसे पीड़ित परिवारों के लिए लड़ती रहूंगी।

3. उत्तर प्रदेश सरकार का दावा है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध कम हुए हैं। क्या आप मानती हैं कि UP में अब महिलाएं अधिक सुरक्षित हैं?

यदि अब महिलाएं सुरक्षित हैं तो फिर गैंगरेप और हत्याएं क्यों हो रही हैं। इसी सरकार के शासनकाल में हाथरस की बेटी को गैंगरेप के बाद रात के अंधेरे में सिस्टम ने जला दिया। कानपुर में एक 19 साल की बेटी को बलात्कार के बाद दसवीं मंजिल से फेंक दिया गया। वो किस प्रदेश की बेटी थी। मिर्जापुर में 9 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप हुआ। कुशीनगर में नौ साल की बेटी का गैंगरेप हुआ। ललितपुर में 15 की बच्ची को रेप के बाद केरोसीन डालकर जला दिया गया।

ये बेटियां कौन हैं। ये किसकी बेटियां हैं। बुलंदशहर में तीन साल की बच्ची का रेप हुआ। मेरे पास इन मामलों की फाइलें पड़ी हैं। ये वो मामले हैं जो मीडिया में नहीं आए। जिन पर चर्चा नहीं हुईं। ये किसी तरह हम तक पहुंचते हैं और हम इन्हें अदालतों में लेकर जाते हैं। UP में बच्चियों को स्कूल छोड़ना पड़ रहा है। योगी आदित्यनाथ बताएं कि UP अगर गुंडाराज और अपराध कम हो गया है तो फिर ये घटनाएं क्यों हो रही हैं। गोरखपुर में कारोबारी को पुलिस ने ही मार दिया। अब पुलिस ही गुंडा हो गई है।

4. आप एक सफल एडवोकेट हैं, फिर राजनीति में क्यों आ रही हैं?

एडवोकेट होते हुए मैंने कानून का पालन करवाने और अन्याय का सामना कर रहे लोगों को अदालत के जरिए न्याय दिलवाने की कोशिश की, लेकिन सब कुछ अदालत के जरिए नहीं किया जा सकता। मैं मानती हूं कि राजनीति का हिस्सा बनकर हम अधिक काम कर सकते हैं। जहां नीति बन रही है उसका हिस्सा बनकर हम और बेहतर काम कर सकते हैं। मुझे लगता है कि मैं राजनीति में आकर अधिक काम कर सकती हूं और इसलिए ही मैं राजनीति में आ रही हूं।

5. क्या आप चुनाव लड़ने जा रही हैं?

राजनीति का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना नहीं होता है। किसी राजनीतिक दल से जुड़ना उसकी विचारधारा से जुड़ना भी होता है। मैं नहीं मानती कि सिर्फ विधायक या सांसद बन कर ही एक प्रभावशाली राजनेता बना जा सकता है। अभी मेरा चुनाव लड़ने का इरादा नहीं है, ना ही मैंने चुनाव लड़ने के इरादे से पार्टी जॉइन की है, लेकिन यदि मेरी पार्टी का नेतृत्व चाहेगा कि मैं चुनाव लड़ूं, तो मैं जरूर लड़ूंगी।

6. किसी खास सीट पर आपकी नजर है?

मेरे दिमाग में अभी कोई सीट नहीं है। निर्भया केस के बाद से मैंने ये महसूस किया है कि हर जगह, हर वर्ग के लोग जाति-धर्म से उठकर मुझे प्यार और सम्मान देते हैं। मेरी नजर किसी एक सीट पर नहीं है। पार्टी जहां मुझे भेजेगी, मैं वहां जाकर चुनाव लड़ूंगी।

7. बसपा का दामन थामते हुए क्या आपके मन में अपने भविष्य को लेकर कोई आशंका है?

मैं एक किसान की बेटी हूं। मेरा गांव अभी भी गूगल पर नहीं है। मैं एक छोटे से गांव से निकलकर ईमानदारी से अपना काम करती रही। फिर निर्भया और हाथरस के मामलों ने मुझे पहचान दी। अब मेरे भीतर करियर या राजनीति को लेकर कुछ हासिल करने की महत्त्वाकांक्षा नहीं है। यदि मुझे कुछ हासिल नहीं भी होता है तो उसकी मुझे परवाह नहीं है। मैं एक काबिल एडवोकेट हूं और हमेशा महिलाओं के मुद्दे उठाती रहूंगी। मैं अपने काम से बहुत संतुष्ट हूं, लेकिन मैं और कुछ बेहतर कर सकूं और नीति निर्माण के स्तर पर कुछ बेहतर कर सकूं इसलिए राजनीति में आ रही हूं।

8. बसपा अभी पहले जितनी मजबूत नहीं दिखाई दे रही है फिर भी आप बसपा में आईं?

जहां तक बसपा का सवाल है 2007 में भी मीडिया ने एग्जिट पोल में कहा था कि बसपा सत्ता में नहीं आ सकती, लेकिन बसपा पूर्ण बहुमत से सत्ता में आई। अगर 2017 चुनावों की बात करें तो बसपा ने समाजवादी पार्टी से अधिक वोट हासिल किए। बसपा का अपना एक काडर है जो पार्टी के साथ है। हालांकि बसपा की मीडिया में कोई हाइप नहीं है, लेकिन जो मीडिया में नहीं दिख रहा है, उस पर जमीनी स्तर पर काम हो रहा है। सपा और BJP एक दूसरे पर छींटाकशी कर रहे हैं। नेता इधर-उधर हो रहे हैं। और सुर्खियां बटोर रहे हैं। बसपा में ऐसा नहीं हो रहा है। वहां सब शांतिपूर्ण तरीके से काम कर रहे हैं। मैं भी शांति से काम करना चाहती हूं।

9. आज की राजनीति में धर्म और जाति हावी हैं, क्या भी इस फेर में नहीं फंस जाएंगी? आपके आदर्श पीछे नहीं छूट जाएंगे?

मैं कभी भी जाति और धर्म की राजनीति नहीं करूंगी। मेरे लिए समाज के मुद्दे अहम हैं। मेरे लिए महिलाओं के सम्मान की लड़ाई अहम हैं। जैसे जैसे जागरुकता आएगी, धर्म और जाति के मुद्दे पीछे छूट जाएंगे। मानव सम्मान का मुद्दा अहम होगा। आप देखिए कि मीडिया से राम मंदिर का मुद्दा गायब है, क्योंकि भगवान राम को भी पता चल गया है कि उनके नाम का दुरुपयोग किया जा रहा है। ये मुद्दा मीडिया से इसलिए गायब है, क्योंकि BJP भी समझ रही है कि धर्म के नाम पर जनता बेवकूफ नहीं बनेगी।