करिअर फंडानेपोलियन बोनापार्ट के जीवन से 4 सबक:आप सब कुछ नहीं कर सकते…मदद लीजिए

3 महीने पहले

‘असंभव एक ऐसा शब्द है जो मूर्खों की डिक्शनरी में ही मिलता है।’

- नेपोलियन बोनापार्ट

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ऐतिहासिक किरदार बढ़िया टीचर
सबसे अच्छे टीचर शायद कुछ ऐतिहासिक महिला और पुरुष ही होते हैं। आज मैं आपको ऐसे ही एक ऐतिहासिक पुरुष, जिसे दुनिया के सबसे बड़े मिलिट्री कमांडर्स में से एक माना जाता है, के जीवन से कुछ सबक बताऊंगा। वे हैं फ्रेंच हीरो नेपोलियन बोनापार्ट।

आपने इनके बारे में सुना तो होगा, है न?

नेपोलियन कैसे ऊपर उठे
1)
फ्रेंच रेवोल्यूशन (फ्रांसीसी क्रांति) के दौरान एक प्रमुख व्यक्ति बनने से पहले, नेपोलियन की शुरुआत मामूली थी। वे कोर्सिका के साधारण परिवार में पैदा हुए। आर्टिलरी में लेफ्टिनेंट के रूप में फ्रांसीसी सेना में शामिल हुए। 24 साल के कैप्टन बोनापार्ट ने ब्रिटिश और स्पेनिश सेना के खिलाफ टौलॉन की लड़ाई लड़ी और जीत में प्रमुख भूमिका निभाई। उन्हें 24 साल की उम्र में ब्रिगेडियर जनरल बनाया गया।

2) पेरिस में नई फ्रांसीसी क्रांतिकारी सरकार के खिलाफ विद्रोह छिड़ गया। ब्रिगेडियर बोनापार्ट को विद्रोहों को रोकने के लिए कहा गया था। वह कभी भी विद्रोहियों पर गोली चलाने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन युवा सेनापति को अराजकता से और भी नफरत थी। सिर्फ 26 साल की उम्र में वे फ्रांस की आंतरिक सेना के जनरल बन गए।

3) वे 1804 में 35 वर्ष की आयु में ‘एम्परर ऑफ द फ्रेंच’ (Emperor of the French) बने। इसका मतलब वो फ्रांस देश के राजा नहीं, फ्रांसीसी लोगों के राजा थे।

1812 में जैक्स-लुई डेविड द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग में सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट अपनी लाइब्रेरी में खड़े नजर आ रहे हैं।
1812 में जैक्स-लुई डेविड द्वारा बनाई गई इस पेंटिंग में सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट अपनी लाइब्रेरी में खड़े नजर आ रहे हैं।

नेपोलियन से 4 बड़े सबक

हमारे सामान्य जीवन के लिए भी नेपोलियन प्रेणास्पद हैं। आइए सीखें कैसे

1) सबक 1: स्वीकार करें आप सब कुछ अपने आप नहीं कर सकते

A. एक आम गलत धारणा है कि एक नेता को अकेले सब कुछ करने में सक्षम होना चाहिए, अर्थात महामानव। नेपोलियन कहते हैं ‘आप को मदद की आवश्यकता है, तो मांगो’।

B. नेपोलियन अपनी बंदूक को अपने कंधे पर ठीक से नहीं रख पाता था, और जब उसे कसकर लोड करने के लिए कहा, तो गोली चलाने के बाद उसका हाथ हमेशा काला रहता था। नेपोलियन खुद एक महान निशानेबाज नहीं थे, लेकिन वह एक शानदार घुड़सवार, सेनापति और रणनीतिकार थे।

C. नेपोलियन हमेशा दूसरों से सहायता प्राप्त करने के बाद उन्हें धन्यवाद देते थे, चाहे शब्दों के माध्यम से हो, या अपने सैनिकों को सोने और चांदी के साथ भुगतान करके।

लेसन: कृतज्ञता कभी बेकार नहीं जाती।

2) सबक 2: कार्रवाई करने वाले बनें सिर्फ सोचने वाले नहीं

A. नेता होने का यह अर्थ नहीं है की आप किसी भी काम में अपने हाथ गंदे नहीं करेंगे। जब वे एक प्रसिद्ध सेनापति थे, तब भी उन्हें अपने घोड़े से नीचे उतरने और खाइयों में जाने का कोई मलाल नहीं था।

B. उन्होंने उन लोगों के काम में भाग लिया जिनका उन्होंने नेतृत्व किया। उस समय के राजा डेस्क या सिंहासन पर बैठते थे और अपनी प्रजा या सेवक को आदेश देते थे। नेपोलियन का कहना था की जरूरत पड़ने पर निर्णायक कार्रवाई करें।

C. नेपोलियन को शाही परिवार की ओर से नेशनल कन्वेंशन पर होने वाले हमले से रक्षा का जिम्मा सौंपा गया था। हमलावर भीड़ की संख्या ज्यादा थी। नेपोलियन जानते थे कि एक बार जब आप भीड़ पर तेज वार करेंगे तो वो बिखर जाएगी, और उन्होंने समय रहते ऐसा ही किया। एक बार जब आप भीड़ को एक इंच आगे आने देंगे तो वो कोशिश करेंगे कि एक मील आगे आजाएं। अतः समय पर निर्णायक कार्रवाई करने से न डरें।

लेसन: लीडरशिप डरपोकों के लिए नहीं है।

3) सबक 3: कभी भी पढ़ना/लिखना/सीखना बंद न करें

A. एक लीडर को कभी भी ऐसा नहीं सोचना चाहिए वह सब कुछ जानता है। नेपोलियन ने ज्ञान प्राप्त करके भी खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करना बंद नहीं किया। वे अपने अधिकारियों से कहते थे ‘प्रश्न पूछने में शर्म न करें और सुनने का तरीका समझें”।

B. बिजनेस मैनेजर्स को उद्योग के दायरे से बाहर भी बहुत सी चीजों के बारे में पता होना चाहिए। इसके लिए सभी तरह की किताबें पढ़ने वाले पाठक बने।

लेसन: ज्ञान अनंत है, उसे लगातार ग्रहण करें।

4) सबक 4: जब तक आप ने हिम्मत नहीं खोई, कुछ नहीं खोया

A. जून 1812 में वे रूस में बुरी तरह पराजित हुए। रूसी सेना से नहीं रूसी सर्दी से!

B. उन्होंने 6,00,000 सैनिकों के साथ रूस पर हमला किया और सिर्फ 95,000 सैनिकों के साथ लौटे। नेपोलियन ने 1814 में फ्रांस के सम्राट के पद से इस्तीफा दे दिया। वे ब्रिटेन, ऑस्ट्रिया और रूस के गठबंधन से हार गए थे।

C. उन्हें एल्बा भेज दिया गया और एल्बा का सम्राट बनाया गया। वहां उन्होंने सुशासन के लिए प्रशासन का गठन किया। लुई 18 को फ्रांस का सम्राट बनाया गया था लेकिन वह एक कमजोर राजा था। वह फ्रांस पर ठीक से शासन नहीं कर सका। नेपोलियन इन सभी घटनाओं को एल्बा से देख रहा था। उन्होंने एल्बा से पेरिस तक एक ऐतिहासिक मार्च किया।

D. जीत की कोई संभावना के बिना वह दक्षिणी फ्रांस पहुंचे। लेकिन अधिकांश फ्रांसीसी सेना नेपोलियन के प्रति वफादार रही। इसलिए उसकी सेना दिन-ब-दिन बड़ी होती गई। नेपोलियन से डरकर, फ्रांसीसी राजा ने नेपोलियन के बड़े दुश्मनों में से एक, जनरल नेवी को उसे रोकने के लिए भेजने का फैसला किया। दोनों एक जगह मिलते हैं। नेपोलियन जानता था कि वह युद्ध नहीं जीत सकता इसलिए उसने इतिहास से हटकर कुछ किया: जैसे उसके पास खोने या हासिल करने के लिए कुछ नहीं है। वह निहत्थे चलकर जनरल नेवी के कैंप के सामने पहुंच गया।

E. नेपोलियन ने दहाड़ते हुए उसने कहा: आओ, अपने बादशाह को मार डालो अगर तुम चाहो या मेरे पीछे-पीछे पेरिस आओ। इस तरह की वीरता से अत्यधिक आश्चर्यचकित जनरल नेवई चौंक गया और अपनी सेना को उसे पकड़ने का आदेश दिया, लेकिन सभी उसके कार्य, रवैये और विशालता से मंत्रमुग्ध हो गए, और नेपोलियन हमारे सम्राट नारे लगाने लगे और नेपोलियन की तरफ हो गए।

नेपोलियन ने अब पेरिस शहर में प्रवेश किया। वे 1815 में दूसरी बार फ्रांस के सम्राट बने।

1815 में, वॉटरलू की लड़ाई में वह प्रशिया और ब्रिटिश सेना से हार गए।

लेसन: अपने कर्मों में अपना भाग्य छुपा है।

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