यह फोटो खांभाणिया जामनगर हाईवे पर आराधना धाम के पास स्थित सिंहण बांध का है। बीते सप्ताह भारी बारिश की वजह से यह ओवरफ्लो हो गया है। यहां करीब 22 फीट से पानी गिर रहा है। इस नजारे का आनंद लेने के लिए यहां के आसपास के गांव के हजारों लोग रविवार को पिकनिक मनाने पहुंच गए।

गुजरात / सिंहण बांध के झरने को देखने हजारों लोग पहुंचे

यह फोटो खांभाणिया जामनगर हाईवे पर आराधना धाम के पास स्थित सिंहण बांध का है। बीते सप्ताह भारी बारिश की वजह से यह ओवरफ्लो हो गया है। यहां करीब 22 फीट से पानी गिर रहा है। इस नजारे का आनंद लेने के लिए यहां के आसपास के गांव के हजारों लोग रविवार को पिकनिक मनाने पहुंच गए।
यह फोटो वैशाली में गंगा नदी के तेरसिया घाट का है। यहां बालू खनन और परिवहन का अवैध रूप से किया जा रहा है। रोज 100 से ज्यादा छोटी और बड़ी नावों पर 500 से ज्यादा मजदूर लाल रेत को चढ़ाते और उतारते हैं।

बिहार / गंगा में रेत का अवैध कारोबार

यह फोटो वैशाली में गंगा नदी के तेरसिया घाट का है। यहां बालू खनन और परिवहन का अवैध रूप से किया जा रहा है। रोज 100 से ज्यादा छोटी और बड़ी नावों पर 500 से ज्यादा मजदूर लाल रेत को चढ़ाते और उतारते हैं।
जोधपुर के निकट रविवार को आयोजित खेजड़ली शाहीदी मेले में गहनों से लकदक होकर पहुंची महिलाएं।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

जोधपुर के निकट रविवार को आयोजित खेजड़ली शाहीदी मेले में गहनों से लकदक होकर पहुंची महिलाएं।
कई महिलाएं मेले में एक से डेढ़ किलोग्राम सोने के गहने पहन कर आती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

कई महिलाएं मेले में एक से डेढ़ किलोग्राम सोने के गहने पहन कर आती है।
पेड़ों को बचाने के लिए शहीद हुए 363 लोगों की याद में यह मेला आयोजित किया जाता है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

पेड़ों को बचाने के लिए शहीद हुए 363 लोगों की याद में यह मेला आयोजित किया जाता है।
विश्नोई समाज की महिलाओं में इस तरह भारी गहने पहन कर मेले में पहुंचने की परम्परा रही है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

विश्नोई समाज की महिलाओं में इस तरह भारी गहने पहन कर मेले में पहुंचने की परम्परा रही है।
इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाएं बेखौफ होकर घूमती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाएं बेखौफ होकर घूमती है।
मेले में कभी गहनों के लूट की घटना नहीं हुई।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

मेले में कभी गहनों के लूट की घटना नहीं हुई।
भारी भीड़ के बावजूद महिलाएं आराम से अपने गहने प्रदर्शित कर घूमती नजर आ जाती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

भारी भीड़ के बावजूद महिलाएं आराम से अपने गहने प्रदर्शित कर घूमती नजर आ जाती है।
मेला जोधपुर के निकट खेजड़ली गांव में आयोजित किया जाता है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

मेला जोधपुर के निकट खेजड़ली गांव में आयोजित किया जाता है।
ये खूबसूरत नजारा राजस्थान के गोरमघाट का है। यह जगह उदयपुर शहर से 150 किमी दूर है। गोरमघाट के पास रावली टॉडगढ़ अभयारण्य की प्राकृतिक छटा के बीच जब जोगमंड़ी वाटरफॉल के रेलवे ट्रेक से ट्रेन गुजरती है, तो नजारा गोवा के दूध सागर वाटरफॉल जैसा लगता है। गोरमघाट की पहली बार ड्रोन से ली गई तस्वीर।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

ये खूबसूरत नजारा राजस्थान के गोरमघाट का है। यह जगह उदयपुर शहर से 150 किमी दूर है। गोरमघाट के पास रावली टॉडगढ़ अभयारण्य की प्राकृतिक छटा के बीच जब जोगमंड़ी वाटरफॉल के रेलवे ट्रेक से ट्रेन गुजरती है, तो नजारा गोवा के दूध सागर वाटरफॉल जैसा लगता है। गोरमघाट की पहली बार ड्रोन से ली गई तस्वीर।
गोरमघाट का वाटरफॉल।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

गोरमघाट का वाटरफॉल।
यह फोटो गोवा के दूध सागर वाटरफॉल की है।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

यह फोटो गोवा के दूध सागर वाटरफॉल की है।
यह फोटो जयपुर के नवल डागा के घर का है। पूरा घर पेड़-पौधे और बैलों से ढका है। घर में जिन जगहों पर हरियाली नहीं है, वहां पर पर्यावरण बचाने का संदेश है। पिछले डेढ़ दशक से नवल डागा इस तरह से रह रहे हैं। उनका दावा है कि गर्मियों में जहां बाहर का तापमान 45 डिग्री रहता है, तब इस हरियाली की वजह से उनके घर के अंदर का तापमान 36 डिग्री रहता है। इसके अलावा लोगों में जागरूकता आए इसके लिए घर के अंदर और बाहर पेड़, पानी और पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं। छत पर 250 से 300 गमले लगा रखे है। इन्हीं गमलों में सब्जियां उगाकर खाते हैं।

जयपुर / घर में हर जगह हरियाली; सीढ़ियां, पार्किंग से भी पर्यावरण बचाने का संदेश

यह फोटो जयपुर के नवल डागा के घर का है। पूरा घर पेड़-पौधे और बैलों से ढका है। घर में जिन जगहों पर हरियाली नहीं है, वहां पर पर्यावरण बचाने का संदेश है। पिछले डेढ़ दशक से नवल डागा इस तरह से रह रहे हैं। उनका दावा है कि गर्मियों में जहां बाहर का तापमान 45 डिग्री रहता है, तब इस हरियाली की वजह से उनके घर के अंदर का तापमान 36 डिग्री रहता है। इसके अलावा लोगों में जागरूकता आए इसके लिए घर के अंदर और बाहर पेड़, पानी और पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं। छत पर 250 से 300 गमले लगा रखे है। इन्हीं गमलों में सब्जियां उगाकर खाते हैं।

जयपुर / घर में हर जगह हरियाली; सीढ़ियां, पार्किंग से भी पर्यावरण बचाने का संदेश

यह फोटो स्वर्ण मंदिर का है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन प्रकाश पर्व शनिवार को अमृतसर में श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के संपादन स्थान गुरुद्वारा रामसर साहिब से अलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में गुरबाणी का जाप करते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में आज ही के दिन दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था।

अमृतसर / श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व

यह फोटो स्वर्ण मंदिर का है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन प्रकाश पर्व शनिवार को अमृतसर में श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के संपादन स्थान गुरुद्वारा रामसर साहिब से अलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में गुरबाणी का जाप करते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में आज ही के दिन दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था।
यह बिड़ला गणपति की प्रतिमा है। पुणे से 30 किमी दूर लोनावला की तरफ सह्याद्री के जंगलों में सोमाटणे फाटा इलाके में 2009 में इसकी स्थापना की गई थी। इसका परिसर 16 एकड़ में फैला है। तांबे से बनी यह प्रतिमा 72 फीट ऊंची है और वजन 1000 टन है। हर चार साल में तांबे का लेप लगाया जाता है। पहली बार इस मंदिर की फोटो ड्रोन से ली गई।

पुणे / तांबे से बनी 72 फीट ऊंची बिड़ला गणपति की प्रतिमा, वजन 1000 टन

यह बिड़ला गणपति की प्रतिमा है। पुणे से 30 किमी दूर लोनावला की तरफ सह्याद्री के जंगलों में सोमाटणे फाटा इलाके में 2009 में इसकी स्थापना की गई थी। इसका परिसर 16 एकड़ में फैला है। तांबे से बनी यह प्रतिमा 72 फीट ऊंची है और वजन 1000 टन है। हर चार साल में तांबे का लेप लगाया जाता है। पहली बार इस मंदिर की फोटो ड्रोन से ली गई।

पुणे / तांबे से बनी 72 फीट ऊंची बिड़ला गणपति की प्रतिमा, वजन 1000 टन

यह फोटो उत्तरी छोटानागपुर की बहुप्रतीक्षित कोनार परियोजना के तहत बनी नहर का है, जो ज्यादा पानी छोड़े जाने का दबाब सह नहीं पाई और इसके बांध टूट गए। 100 फीट हिस्सा टूटने के कारण कुसमरजा पंचायत के छह गांवों के 100 एकड़ खेत में लगी धान और मक्के की 50 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई है। कई इलाकों में पानी भर गया। कोनार नहर परियोजना का निर्माण पिछले 41 साल में 2176.25 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था। एक दिन पहले ही इसका उद्घाटन हुआ था।

झारखंड / 41 साल में 2000 करोड़ रुपए की लागत से बनी नहर टूटी

यह फोटो उत्तरी छोटानागपुर की बहुप्रतीक्षित कोनार परियोजना के तहत बनी नहर का है, जो ज्यादा पानी छोड़े जाने का दबाब सह नहीं पाई और इसके बांध टूट गए। 100 फीट हिस्सा टूटने के कारण कुसमरजा पंचायत के छह गांवों के 100 एकड़ खेत में लगी धान और मक्के की 50 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई है। कई इलाकों में पानी भर गया। कोनार नहर परियोजना का निर्माण पिछले 41 साल में 2176.25 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था। एक दिन पहले ही इसका उद्घाटन हुआ था।

झारखंड / 41 साल में 2000 करोड़ रुपए की लागत से बनी नहर टूटी

यह फोटो महाराष्ट्र के अहमदनगर के अकोले इलाके का है। बारिश के पानी से प्रवरा नदी पर बना भंडारदरा डैम भर गया है। हाल ही में इसका पानी छोड़ा गया तो रंधा वाटरफॉल गिरने लगा। इससे हरियाली के बीच का इलाका और ज्यादा खूबसूरत दिखने लगा। करीब 200 फीट की ऊंचाई गिरने वाला झरना जहां गिरता है, वहां पानी नेकलेस का रूप ले लेता है।

रंधा वाटरफॉल / पानी जहां गिरता है, वहां नेकलेस का रूप ले लेता है

यह फोटो महाराष्ट्र के अहमदनगर के अकोले इलाके का है। बारिश के पानी से प्रवरा नदी पर बना भंडारदरा डैम भर गया है। हाल ही में इसका पानी छोड़ा गया तो रंधा वाटरफॉल गिरने लगा। इससे हरियाली के बीच का इलाका और ज्यादा खूबसूरत दिखने लगा। करीब 200 फीट की ऊंचाई गिरने वाला झरना जहां गिरता है, वहां पानी नेकलेस का रूप ले लेता है।

रंधा वाटरफॉल / पानी जहां गिरता है, वहां नेकलेस का रूप ले लेता है

रंधा वाटरफॉल / पानी जहां गिरता है, वहां नेकलेस का रूप ले लेता है

यह फोटो गुजरात के सोमनाथ जिले के गिर वन्य क्षेत्र के ऊना इलाके का है। पिछले दिनों एक शेर ऊना के पास तुलसीश्याम रोड पर अचानक आ गया और सड़क के किनारे गड्ढे से अपनी प्यास बुझाने लगा। इसे देख सड़क के दोनों तरफ से आ रहे वाहन वहीं खड़े हो गए।

गुजरात / जरा ठहरो! जंगल का राजा प्यास बुझा रहा है

यह फोटो गुजरात के सोमनाथ जिले के गिर वन्य क्षेत्र के ऊना इलाके का है। पिछले दिनों एक शेर ऊना के पास तुलसीश्याम रोड पर अचानक आ गया और सड़क के किनारे गड्ढे से अपनी प्यास बुझाने लगा। इसे देख सड़क के दोनों तरफ से आ रहे वाहन वहीं खड़े हो गए।

गुजरात / जरा ठहरो! जंगल का राजा प्यास बुझा रहा है

यह फोटो नवसारी जिले के बिलीमोरा के पास धोलाई बंदरगाह की है। यहां नावों को तिरंगे के रंग में रंगा गया है, क्योंकि स्वतंत्रता दिवस और मछुआरों का परंपरागत त्योहार नारियल पूर्णिमा एक ही दिन 15 अगस्त को है। नारियल पूर्णिमा को मछुआरे हर साल समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं। इस बार तिरंगे के रंग में 250 फिशिंग बोट में करीब ढाई हजार मछुआरे रवाना होंगे। सभी नावें 10 से 15 नावों की टुकड़ी में निकलेंगी। इन पर तिरंगा भी लगा होगा। सभी 15 दिन समुद्र में रहेंगे, जब लौटेंगे तो इनके पास एक फेरे में 4 से 5 लाख कीमत की मछलियां होंगी।

गुजरात / समुद्र में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी

यह फोटो नवसारी जिले के बिलीमोरा के पास धोलाई बंदरगाह की है। यहां नावों को तिरंगे के रंग में रंगा गया है, क्योंकि स्वतंत्रता दिवस और मछुआरों का परंपरागत त्योहार नारियल पूर्णिमा एक ही दिन 15 अगस्त को है। नारियल पूर्णिमा को मछुआरे हर साल समुद्र में मछली पकड़ने जाते हैं। इस बार तिरंगे के रंग में 250 फिशिंग बोट में करीब ढाई हजार मछुआरे रवाना होंगे। सभी नावें 10 से 15 नावों की टुकड़ी में निकलेंगी। इन पर तिरंगा भी लगा होगा। सभी 15 दिन समुद्र में रहेंगे, जब लौटेंगे तो इनके पास एक फेरे में 4 से 5 लाख कीमत की मछलियां होंगी।
यह फोटो भोपाल से करीब 70 किमी दूर होशंगाबाद के पास बांद्राभान में नर्मदा और तवा नदी के संगम का है। जब दोनों बारिश के बाद उफान पर होती हैं तो यहां इनका संगम होता है। इस विहंगम दृश्य को 400 मीटर की ऊंचाई से कैमरे में कैद किया गया। नर्मदा बायीं तरफ से और दायीं तरफ से तवा नदी बह रही है।

मप्र / बारिश के बाद नर्मदा-तवा नदी का संगम

यह फोटो भोपाल से करीब 70 किमी दूर होशंगाबाद के पास बांद्राभान में नर्मदा और तवा नदी के संगम का है। जब दोनों बारिश के बाद उफान पर होती हैं तो यहां इनका संगम होता है। इस विहंगम दृश्य को 400 मीटर की ऊंचाई से कैमरे में कैद किया गया। नर्मदा बायीं तरफ से और दायीं तरफ से तवा नदी बह रही है।
यह फोटो शिमला के कैथू इलाके का है। बारिश के बीच शिमला में बुधवार शाम चारों तरफ धुंध छाई थी। उस वक्त घरों की रोशनी और इस धुंध से नया नजारा देखने को मिला। कुछ वक्त के लिए ऐसा लगा कि यह कुदरती स्पॉट लाइट है।

शिमला / कुदरत की स्पॉट लाइट से रात में चमकी पहाड़ी

यह फोटो शिमला के कैथू इलाके का है। बारिश के बीच शिमला में बुधवार शाम चारों तरफ धुंध छाई थी। उस वक्त घरों की रोशनी और इस धुंध से नया नजारा देखने को मिला। कुछ वक्त के लिए ऐसा लगा कि यह कुदरती स्पॉट लाइट है।
शेखपुरा (बिहार). यहां हरोहर नदी में बाढ़ आने से किनारे बसे दर्जनों गांव के लोगों की मुश्किलें हर साल बढ़ जाती हैं। गांव में पानी घुसने के बाद लोग गांव छोड़कर ऊंचे स्थानों की तलाश में जुट जाते हैं। प्रशासन हर साल बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करता है। बाढ़ के समय बचाव करने और लोगों की मदद करने के लिए गोताखोरों की टीम भी तैयार की जाती है। उत्तर बिहार में लगातार हो रही बारिश के बाद गंगा नदी का पानी हरोहर नदी में लगातार दबाव बनाए हुए है।

बिहार / बाढ़ में नाव पर जिंदगी

शेखपुरा (बिहार). यहां हरोहर नदी में बाढ़ आने से किनारे बसे दर्जनों गांव के लोगों की मुश्किलें हर साल बढ़ जाती हैं। गांव में पानी घुसने के बाद लोग गांव छोड़कर ऊंचे स्थानों की तलाश में जुट जाते हैं। प्रशासन हर साल बाढ़ जैसी आपदा से निपटने के लिए लोगों को जागरूक करता है। बाढ़ के समय बचाव करने और लोगों की मदद करने के लिए गोताखोरों की टीम भी तैयार की जाती है। उत्तर बिहार में लगातार हो रही बारिश के बाद गंगा नदी का पानी हरोहर नदी में लगातार दबाव बनाए हुए है।
नवादा जिले के चितरकोली पंचायत की मुखिया सुनीता देवी के चचेरे ससुर रामस्वरूप यादव की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मुखिया के पति राजकुमार यादव ने बताया कि दिन में तबीयत खराब हुई तो बाढ़ थी। कुछ देर इंतजार किया फिर धनार्जय नदी में तीन फीट पानी की धारा के बीच से होकर इलाज के लिए ले जाया गया। जहां रात में ही इलाज में देरी हो जाने के कारण दम तोड़ दिया। यह पहला मामला नहीं है। दर्जनों ऐसी कहानी हैं, जिसे लोग झेलने को विवश हैं।

बिहार / बाढ़ में नाव पर जिंदगी

नवादा जिले के चितरकोली पंचायत की मुखिया सुनीता देवी के चचेरे ससुर रामस्वरूप यादव की शनिवार को इलाज के दौरान मौत हो गई। मुखिया के पति राजकुमार यादव ने बताया कि दिन में तबीयत खराब हुई तो बाढ़ थी। कुछ देर इंतजार किया फिर धनार्जय नदी में तीन फीट पानी की धारा के बीच से होकर इलाज के लिए ले जाया गया। जहां रात में ही इलाज में देरी हो जाने के कारण दम तोड़ दिया। यह पहला मामला नहीं है। दर्जनों ऐसी कहानी हैं, जिसे लोग झेलने को विवश हैं।
फोटो 47 किलोमीटर लंबाई में बन रहे जयपुर के द्रव्यवती रिवर फ्रंट की है। शहर में मानसून की पहली तेज बारिश के बाद द्रव्यवती नदी पूरे वेग से बही। इससे रिवर फ्रंट के सभी हिस्से भर गए। नदी किनारे बर्ड पार्क, लैंडस्केप पार्क और बॉटनीकल गार्डन विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 1676 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

जयपुर / बारिश के बाद द्रव्यवती रिवर फ्रंट

फोटो 47 किलोमीटर लंबाई में बन रहे जयपुर के द्रव्यवती रिवर फ्रंट की है। शहर में मानसून की पहली तेज बारिश के बाद द्रव्यवती नदी पूरे वेग से बही। इससे रिवर फ्रंट के सभी हिस्से भर गए। नदी किनारे बर्ड पार्क, लैंडस्केप पार्क और बॉटनीकल गार्डन विकसित किया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट पर 1676 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
यह फोटो राजस्थान के अजमेर के आना सागर झील और नाग पहाड़ (अरावली पर्वत) की है। 27 से 28 जुलाई को बारिश होने से यहां मौसम खुशगवार हो गया। दो दिन में झील का जलस्तर 13 फीट 4 इंच तक पहुंच गया। पृथ्वीराज चौहान के पिता अरुणोराज या आणाजी चौहान ने बारहवीं शताब्दी के मध्य (1135-1150 ईस्वी) इस झील का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर इसे आणा सागर झील बुलाया गया, लेकिन आज इसे आना सागर कहा जाता है।

अजमेर / नाग पहाड़ पर बादलों की ओढ़नी

यह फोटो राजस्थान के अजमेर के आना सागर झील और नाग पहाड़ (अरावली पर्वत) की है। 27 से 28 जुलाई को बारिश होने से यहां मौसम खुशगवार हो गया। दो दिन में झील का जलस्तर 13 फीट 4 इंच तक पहुंच गया। पृथ्वीराज चौहान के पिता अरुणोराज या आणाजी चौहान ने बारहवीं शताब्दी के मध्य (1135-1150 ईस्वी) इस झील का निर्माण करवाया था। उन्हीं के नाम पर इसे आणा सागर झील बुलाया गया, लेकिन आज इसे आना सागर कहा जाता है।