गुजरात / गिर के जंगल में नर और मादा शेर की लड़ाई

गिर के जंगल में सफारी के 10 नंबर के रूट पर नर और मादा सिंह के बीच भिड़ंत हो गई। वैसे नर-मादा के बीच लड़ाई होती रहती है लेकिन इस लड़ाई की वजह मिलन (मेटिंग) हो सकता है। मादा सिंह रास्ते पर ही बैठी थी जबकि नर आस-पास सूंघते-सूंघते उसके पास आता है। सिंह जब अचानक मादा के नजदीक पहुंचता है तो वह आक्रोश में आकर उसे पंजा मार देती है और दोनों में भिड़ंत हो जाती है। थोड़ी देर बाद मादा वहीं बैठ जाती है और सिंह उसके आसपास घूमता रहता है। कुछ ही देर बाद मादा जंगल की ओर चलने लगती है और सिंह भी उसके पीछे-पीछे चलने लगता है। सामान्य तौर पर ऐसा माना जाता है कि सिंह का मेटिंग पीरियड मानसून के दौरान होता है, लेकिन कई बार अन्य सीजन में भी सिंह मेटिंग करते हैं। (फोटो : जुबीन आशरा)

गुजरात / गिर के जंगल में नर और मादा शेर की लड़ाई

‘कुंती…पांडवों के साथ’...: तस्वीर उत्तराखंड के तराई क्षेत्र की है। पांच शावकों के साथ घूमती दिखाई दे रही बाघिन का यह फोटो सुकून देने वाला है। इसे भारतीय वन सेवा अधिकारी परवीन कासवान ने ट्विटर पर पोस्ट किया और कैप्शन दिया- ‘कुंती पांडवों के साथ।’ उन्होंने लिखा-‘बाघ...आज एक दुर्लभ प्रजाति है। उन्हें बचाने के लिए तरह-तरह के तरीके निकाले जा रहे हैं।’ रिपोर्ट के मुताबिक, चार साल में देश के साथ तराई क्षेत्र में बाघों की संख्या बढ़ी है। 2014 में तराई में 79 बाघ थे, जिनकी संख्या 2018 में बढ़कर 119 हो गई है। वहीं देश में 2,226 बाघ थे। 4 साल में उनकी संख्या 30% बढ़कर 2,967 हो गई है।

मौसम / 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड, हिमाचल में झीलें-नदियां जमीं

तस्वीर हिमाचल के केलॉन्ग की है। यहां पर स्पीति नदी पूरी तरह जम गई।

मौसम / 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड, हिमाचल में झीलें-नदियां जमीं

राजस्थान के सीकर के कांवट में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। बाड़बंदी पर जमी बर्फ।

मौसम / 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड, हिमाचल में झीलें-नदियां जमीं

राजस्थान के माउंट आबू में न्यूनतम पारा -1 डिग्री पर है। गुलाब की पत्तियों पर जमी बर्फ।

मौसम / 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड, हिमाचल में झीलें-नदियां जमीं

हिमाचल के किन्नौर में -20 डिग्री में झरना जम गया। यहां पारा और गिरने का अनुमान है।

मौसम / 12 राज्यों में कड़ाके की ठंड, हिमाचल में झीलें-नदियां जमीं

राजस्थान के शेखावाटी के उदासर बीदावतान में हाड़ कंपाऊ ठंड पड़ रही है।

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

महाराष्ट्र / भास्कर के कार्टूनिस्टों की नजर से सियासी घटनाक्रम

उत्तर प्रदेश / काशी में देव दिवाली

यह फोटो वाराणसी के देव दिवाली की है। कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार को गंगा के घाटों पर देव दिवाली के तहत दीये जलाए गए। इस फोटो को ड्रोन से खींचा गया।

उत्तर प्रदेश / काशी में देव दिवाली

फोटो काशी के दशाश्वमेघ घाट की है। मंगलवार शाम को विशेष गंगा आरती की गई। वाराणसी के स्थानीय लोगों के अनुसार, देव दिवाली के दिन घाटों पर दीये जलाने की परंपरा 1915 में शुरू की गई थी। पंच घाट से शुरू हुई यह परंपरा अन्य घाटों पर आगे बढ़ी। मंगलवार को भी इस परंपरा के तहत दीये जलाए गए।

उत्तर प्रदेश / काशी में देव दिवाली

वाराणसी में कार्तिक पूर्णिमा पर मंगलवार शाम को दीये जलाए गए।

पुष्कर / मेला में सतरंगी छटा, लोगों को लुभा रहे हैं ऊंट और घोड़े

यह फोटो अंतरराष्ट्रीय पुष्कर मेले की है। मेला क्षेत्र में रात के वक्त 2 घंटे में करीब 200 क्लिक लगातार करने के बाद एक खूबसूरत तस्वीर ने कुछ यूं आकार लिया, मानों आसमां में सितारों ने लकीर खींच दी हो। फोटोग्राफर नदीम खान ने एक्सलूसिव फोटो 'भास्कर' को उपलब्ध कराई है। मेले में देश-विदेश से सैलानियों के लगातार आने का सिलसिला जारी है। पर्यटकों को ऊंट और घोड़े-घोड़ियों के करतब लुभा रहे हैं। उधर, पशुओं की सजी मंडी में पशुपालक और व्यापारियों ने खुले आसमान के नीचे डेरे जमा रखे हैं। लाखों रुपए का लेनदेन किया जा रहा है।

पुष्कर / मेला में सतरंगी छटा, लोगों को लुभा रहे हैं ऊंट और घोड़े

यह फोटो पुष्कर सरोवर की है। इन्हें रंग-बिरंगी रोशनी से सजा गया है।

पाकिस्तान / करतार कॉरिडोर का 98% काम पूरा

यह फोटो करतारपुर कॉरिडोर का है। पाकिस्तान के नारोवाल जिला में स्थित कॉरिडोर के निर्माण का 98 फीसदी काम पूरा हो चुका है। अब सिर्फ फिनिशिंग टच देने का काम ही बचा है। दरबार साहिब गुरुद्वारा के विस्तारीकरण के पहले चरण के तहत पाकिस्तान सरकार ने एक साल से भी कम समय में इस प्रोजेक्ट को अंजाम तक पहुंचाया है। यह गुरुद्वारा भारत के डेरा बाबा नानक से 4 किलोमीटर दूर है। सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी करतारपुर के इसी गुरुद्वारा दरबार साहिब स्थान पर 16 साल तक रहे थे।

राजस्थान / रणथंभौर में वर्चस्व की लड़ाई

यह फोटो राजस्थान के रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान की है। यहां टैरेटरी को लेकर बाघों का रण थम नहीं रहा। सोमवार सुबह बाघिन टी-26 की संतान बाघ टी-57 और टी-58 में झगड़ा हो गया। काफी देर तक चले सीधे मुकाबले में दोनों बाघ घायल हुए और पीछे हट गए। सोमवार को यह संघर्ष सोलेश्वर महादेव के पाले के पास तिराहे पर हुआ। यह इलाका जोन नंबर 6 में आता है और यहां टी-57 का राज है।

राजस्थान / रणथंभौर में वर्चस्व की लड़ाई

दावा यह भी किया जा रहा है कि रणथंभौर में सोमवार को बाघिन नूर टी-39 को लेकर दोनों बाघ भिड़े। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों बाघों की उम्र लगभग 9 साल है, ऐसे में यह लड़ाई अभी समाप्त नहीं होगी।

राजस्थान / रणथंभौर में वर्चस्व की लड़ाई

रणथंभौर में 62 बाघ-बाघिन हैं। 1700 वर्ग किमी एरिया है। एक बाघ का एरिया 80 वर्ग किमी माना जाता है। इस एरिया में दो बाघिन ही एडजस्ट हो सकती हैं। आबादी के हिसाब से एरिया छोटा है।

राजस्थान / रणथंभौर में वर्चस्व की लड़ाई

रणथंभौर में टैरेटरी की लड़ाई को लेकर 10 महीने में 2 बाघ मारे जा चुके हैं।

नवरात्र / केरल का 2700 साल पुराना इरिंगोल कावू मंदिर

यह फोटो केरल के एर्नाकुलम जिले के घने जंगलों में स्थित 2700 साल पुराने इरिंगोल कावू मंदिर का है। नवरात्र के पहले ड्रोन से इसका फोटो लिया गया। यह मंदिर केरल के 108 दुर्गा मंदिरों में से एक है। यहां मां भगवती कन्या रूप में विराजमान है। मान्यता है कि योग माया ने कंस के हाथों कृष्ण को बचाने के लिए बालिका का अवतार लिया था। इस कन्या को जैसे ही कंस ने वध के लिए उठाया, वह बिजली बनकर विलीन हो गई। वह बिजली यहीं पर गिरी। ऐसा भी कहा जाता है कि परशुराम ने इस मंदिर का निर्माण किया था। गुड़ और पायसम यहां का प्रमुख प्रसाद है।

नवरात्र / केरल का 2700 साल पुराना इरिंगोल कावू मंदिर

इरिंगोल कावू मंदिर में प्रतिमा की तस्वीर लेना वर्जित है। मंदिर प्रबंधन ने भास्कर को विशेषतौर पर प्रतिमा की पेंटिंग उपलब्ध कराई।

गुजरात / सिंहण बांध के झरने को देखने हजारों लोग पहुंचे

यह फोटो खांभाणिया जामनगर हाईवे पर आराधना धाम के पास स्थित सिंहण बांध का है। बीते सप्ताह भारी बारिश की वजह से यह ओवरफ्लो हो गया है। यहां करीब 22 फीट से पानी गिर रहा है। इस नजारे का आनंद लेने के लिए यहां के आसपास के गांव के हजारों लोग रविवार को पिकनिक मनाने पहुंच गए।

बिहार / गंगा में रेत का अवैध कारोबार

यह फोटो वैशाली में गंगा नदी के तेरसिया घाट का है। यहां बालू खनन और परिवहन का अवैध रूप से किया जा रहा है। रोज 100 से ज्यादा छोटी और बड़ी नावों पर 500 से ज्यादा मजदूर लाल रेत को चढ़ाते और उतारते हैं।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

जोधपुर के निकट रविवार को आयोजित खेजड़ली शाहीदी मेले में गहनों से लकदक होकर पहुंची महिलाएं।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

कई महिलाएं मेले में एक से डेढ़ किलोग्राम सोने के गहने पहन कर आती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

पेड़ों को बचाने के लिए शहीद हुए 363 लोगों की याद में यह मेला आयोजित किया जाता है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

विश्नोई समाज की महिलाओं में इस तरह भारी गहने पहन कर मेले में पहुंचने की परम्परा रही है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

इस मेले की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें महिलाएं बेखौफ होकर घूमती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

मेले में कभी गहनों के लूट की घटना नहीं हुई।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

भारी भीड़ के बावजूद महिलाएं आराम से अपने गहने प्रदर्शित कर घूमती नजर आ जाती है।

गहने / दुनिया का इकलौता मेला जहां महिलाएं गहने छुपाती नहीं, बेफिक्र हो दिखाती हैं

मेला जोधपुर के निकट खेजड़ली गांव में आयोजित किया जाता है।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

ये खूबसूरत नजारा राजस्थान के गोरमघाट का है। यह जगह उदयपुर शहर से 150 किमी दूर है। गोरमघाट के पास रावली टॉडगढ़ अभयारण्य की प्राकृतिक छटा के बीच जब जोगमंड़ी वाटरफॉल के रेलवे ट्रेक से ट्रेन गुजरती है, तो नजारा गोवा के दूध सागर वाटरफॉल जैसा लगता है। गोरमघाट की पहली बार ड्रोन से ली गई तस्वीर।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

गोरमघाट का वाटरफॉल।

राजस्थान / गोवा के दूधसागर वाटरफॉल जैसा गोरमघाट

यह फोटो गोवा के दूध सागर वाटरफॉल की है।

जयपुर / घर में हर जगह हरियाली; सीढ़ियां, पार्किंग से भी पर्यावरण बचाने का संदेश

यह फोटो जयपुर के नवल डागा के घर का है। पूरा घर पेड़-पौधे और बैलों से ढका है। घर में जिन जगहों पर हरियाली नहीं है, वहां पर पर्यावरण बचाने का संदेश है। पिछले डेढ़ दशक से नवल डागा इस तरह से रह रहे हैं। उनका दावा है कि गर्मियों में जहां बाहर का तापमान 45 डिग्री रहता है, तब इस हरियाली की वजह से उनके घर के अंदर का तापमान 36 डिग्री रहता है। इसके अलावा लोगों में जागरूकता आए इसके लिए घर के अंदर और बाहर पेड़, पानी और पर्यावरण बचाने का संदेश दे रहे हैं। छत पर 250 से 300 गमले लगा रखे है। इन्हीं गमलों में सब्जियां उगाकर खाते हैं।

जयपुर / घर में हर जगह हरियाली; सीढ़ियां, पार्किंग से भी पर्यावरण बचाने का संदेश

अमृतसर / श्री गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश पर्व

यह फोटो स्वर्ण मंदिर का है। श्री गुरु ग्रंथ साहिब का पावन प्रकाश पर्व शनिवार को अमृतसर में श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस मौके पर श्रीगुरु ग्रंथ साहिब के संपादन स्थान गुरुद्वारा रामसर साहिब से अलौकिक नगर कीर्तन सजाया गया। जिसमें बड़ी संख्या में गुरबाणी का जाप करते हुए श्रद्धालु शामिल हुए। सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव जी ने 1604 में आज ही के दिन दरबार साहिब में पहली बार गुरु ग्रंथ साहिब का प्रकाश किया था।

पुणे / तांबे से बनी 72 फीट ऊंची बिड़ला गणपति की प्रतिमा, वजन 1000 टन

यह बिड़ला गणपति की प्रतिमा है। पुणे से 30 किमी दूर लोनावला की तरफ सह्याद्री के जंगलों में सोमाटणे फाटा इलाके में 2009 में इसकी स्थापना की गई थी। इसका परिसर 16 एकड़ में फैला है। तांबे से बनी यह प्रतिमा 72 फीट ऊंची है और वजन 1000 टन है। हर चार साल में तांबे का लेप लगाया जाता है। पहली बार इस मंदिर की फोटो ड्रोन से ली गई।

पुणे / तांबे से बनी 72 फीट ऊंची बिड़ला गणपति की प्रतिमा, वजन 1000 टन

झारखंड / 41 साल में 2000 करोड़ रुपए की लागत से बनी नहर टूटी

यह फोटो उत्तरी छोटानागपुर की बहुप्रतीक्षित कोनार परियोजना के तहत बनी नहर का है, जो ज्यादा पानी छोड़े जाने का दबाब सह नहीं पाई और इसके बांध टूट गए। 100 फीट हिस्सा टूटने के कारण कुसमरजा पंचायत के छह गांवों के 100 एकड़ खेत में लगी धान और मक्के की 50 लाख रुपए की फसल बर्बाद हो गई है। कई इलाकों में पानी भर गया। कोनार नहर परियोजना का निर्माण पिछले 41 साल में 2176.25 करोड़ रुपए की लागत से किया गया था। एक दिन पहले ही इसका उद्घाटन हुआ था।

झारखंड / 41 साल में 2000 करोड़ रुपए की लागत से बनी नहर टूटी