पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Db original
  • Air India Flight In Lockdown Amid Threat Of Coronavirus। Pilot And Crew Members Safety Precautions

एयर इंडिया के पायलट का इंटरव्यू:हर फ्लाइट से पहले पायलट का एल्कोहल टेस्ट होता था अब इसके साथ ही बॉडी टेम्प्रेचर और कोविड की जांच भी होगी

नई दिल्लीएक वर्ष पहलेलेखक: राहुल कोटियाल
  • कॉपी लिंक
देश में 25 मई से घरेलू उड़ानें शुरू हो जाएंगी। कई एयरलाइन ने इसके लिए शुक्रवार से ही बुकिंग शुरू कर दीं थीं। - Dainik Bhaskar
देश में 25 मई से घरेलू उड़ानें शुरू हो जाएंगी। कई एयरलाइन ने इसके लिए शुक्रवार से ही बुकिंग शुरू कर दीं थीं।
  • काम पर जाते हुए डर बना रहता है लेकिन उससे ज्यादा डर वापस घर लौटते हुए लगता है, चिंता होती है कि कहीं हम अपने परिवार को ये संक्रमण न दे दें
  • पायलट कहते हैं, हमें भी शायद उतना ही डर है जितना यात्रियों को होगा, जितने सुरक्षित या असुरक्षित वे लोग हैं, उतने ही हम लोग भी

कैप्टन रोहित अगरकर बीते 13 सालों से एयर इंडिया में पायलट हैं। इन दिनों वे बतौर कमांडर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दैनिक भास्कर के साथ हुई इस बातचीत में रोहित बता रहे हैं कि पूरे दो महीने बाद जब हवाई सेवाएं दोबारा शुरू हो रही हैं तो यह कैसी होने वाली हैं..

1. कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर आप लोगों के लिए क्या कुछ विशेष निर्देश जारी हुए हैं?

निर्देश वही हैं जो लॉकडाउन के दौरान भी हम लोगों के लिए थे। डीजीसीए की ओर से सभी के लिए सुरक्षा निर्देश जारी हुए हैं। एयर इंडिया में शुरुआत से ही स्टाफ की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाते रहे हैं। पूरी किट से लेकर लोगों की स्वास्थ्य जांच तक, सभी चीजों का ध्यान रखा जा रहा है। विदेशों के लिए जब सभी फ्लाइट्स शुरू होंगी तब संभवतः जरूर बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं?

2. किस तरह के बड़े बदलाव?

विदेशों में जहां कोरोना का प्रभाव ज्यादा रहा है, वहां संभवतः रुकने से बचा जाएगा। अभी तक हम लोग जब कहीं बाहर जाते थे तो वहां पहुंचने पर रेस्ट मिलता था। अब शायद पायलट तुरंत ही वापस लौट जाया करेंगे। इसके लिए अतिरिक्त पायलट लगेंगे लेकिन ये करना शायद जरूरी होगा।

इस बारे कुछ और विस्तार से बताएं..

मोटे तौर पर अभी तीन तरह के विमान चलते हैं। पहला है एयरबस-320... ये मुख्यतः घरेलू उड़ान भरता है या आसपास के ऐसे देशों तक उड़ान भरता है जिनकी दूरी छह घंटे में तय हो जाए। दूसरा है एयरबस 787 जो उन देशों के लिए जाता है। जिनकी दूरी 14 घंटे में तय हो जाती है और तीसरा है एयरबस 777 जो सबसे लम्बी दूरी के लिए भेजा जाता है।

छह घंटे तक की उड़ान वाले विमान में दो पायलट जाते हैं। ये विमान जहां पहुंचता है वहां पायलट को न्यूनतम 24 घंटे का रेस्ट दिया जाता है और फिर वापस लौटने पर 48 से 72 घंटे का रेस्ट। अगर उड़ान दस घंटे की है तो विमान में तीन पायलट होते हैं और उड़ान 12 घंटे से ज्यादा की है तो चार पायलट विमान में होते हैं। इतनी दूरी वाली जगह पहुंचने पर करीब 52 घंटे का रेस्ट मिलता है। लेकिन अब कोरोना के चलते विदेशों में रुकने से बचा जाएगा। लिहाजा और ज्यादा पायलट भेजे जाएंगे ताकि वे लोग शिफ्ट में काम करते हुए तुरंत ही लौट आएं।

25 मार्च से ही देश में घरेलू उड़ाने बंद थीं। पूरे दो महीने बाद ये चालू होंगीं।
25 मार्च से ही देश में घरेलू उड़ाने बंद थीं। पूरे दो महीने बाद ये चालू होंगीं।

3. सोमवार से शुरू हो रही घरेलू उड़ानों में सफर करने वाले यात्रियों के लिए विशेष निर्देश जारी हुए हैं। उन्हें थोड़ा जल्दी एयरपोर्ट पहुंचना है और स्वास्थ्य जांच भी करवानी हैं। क्या आप लोगों को भी जल्दी रिपोर्ट करने के निर्देश हैं?

रिपोर्टिंग का समय तो नहीं बदला है। घरेलू उड़ानों के लिए हमें एक घंटा और विदेशी उड़ान के लिए डेढ़ घंटा पहले रिपोर्ट करना होता है, ये समय वैसा ही रखा गया है। हां, ये जरूर है कि हर फ्लाइट से पहले और बाद में हर पायलट का कोविड टेस्ट किया जाएगा। वैसे भी हर फ्लाइट से पहले पायलट का एथनॉल टेस्ट (एल्कोहल टेस्ट) होता ही है। इसके साथ ही अब बॉडी टेम्प्रेचर और कोविड की जांच भी होगी। इसमें ज्यादा समय नहीं लगेगा इसलिए रिपोर्टिंग टाइम नहीं बदला गया है। यात्रियों की संख्या तो बहुत ज्यादा होती है और स्टाफ सीमित हैं इसलिए उन्हें जल्दी बुलाया जाना स्वाभाविक ही है।

4. कोरोना के मामले देश में लगातार बढ़ ही रहे हैं। उड़ानें भी ऐसे समय पर शुरू हो रही हैं जब देश में संक्रमितों की संख्या अब तक सबसे ज्यादा हो चुकी है। ऐसे में काम पर जाते हुए कुछ डर बने हुए हैं?

शायद उतना ही डर है जितना यात्रियों को भी होगा। जितने सुरक्षित या असुरक्षित वे लोग हैं, उतने ही हम लोग भी। लेकिन व्यक्तिगत तौर पर मुझे लगता है कि फिलहाल कई महीनों लोग यात्राएं करने से बचेंगे। अभी शुरू के एक-दो हफ्ते थोड़ी भीड़ होगी क्योंकि लोग दो महीनों से अटके हुए हैं वो निकल कर अपने जरूरी काम पूरा करने की सोचेंगे लेकिन उसके बाद शायद छह महीनों तक तो उड़ानें खाली-खाली ही रहने की उम्मीद है।

5. कोविड-19 ने एवीएशन क्षेत्र को कितना प्रभावित किया है?

बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। बल्कि शायद सबसे ज्यादा इसी इंडस्ट्री को प्रभावित किया है। एवीएशन सेक्टर की स्थिति पहले भी बहुत अच्छी नहीं थी। कोविड-19 के बाद तो यह और भी बुरी हो गई है। एक दिन के लिए भी अगर उड़ानें रद्द होती हैं तो विमान कंपनियों को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है। इस बार तो पूरे दो महीने तमाम उड़ानें बंद रही हैं।

8 एयरलाइंस को रूट एलॉट हुआ है। 22 मई से ही एयर इंडिया ने 50 शहरों के लिए बुकिंग शुरू कर दी थी।
8 एयरलाइंस को रूट एलॉट हुआ है। 22 मई से ही एयर इंडिया ने 50 शहरों के लिए बुकिंग शुरू कर दी थी।

6. क्या इसके चलते एवीएशन सेक्टर में कार्यरत लोगों पर नौकरी गंवाने का संकट गहरा गया है?

अपनी बात करूं तो क्योंकि एयर इंडिया सरकारी कंपनी है लिहाजा यहां किसी की नौकरी तो नहीं गई है। निजी विमान कंपनियों में नौकरी जाने का यह खतरा कहीं ज्यादा है। बाकी सैलरी-कट तो सभी जगह हुई है। हमारी मार्च से ही दस प्रतिशत सैलरी कट के आने लगी है। इसके अलावा फ्लाईंग अलाउंस का भी अभी निश्चित नहीं है कि ये मिलेगा भी या नहीं। ये सभी के लिए बड़ी चिंता का विषय है।

7. फ्लाईंग अलाउंस कुल सैलरी का लगभग कितना प्रतिशत होता है?

सैलरी में सबसे बड़ा हिस्सा फ्लाईंग अलाउंस का ही होता है। ये सैलरी का करीब 60 से 70 प्रतिशत होता है। हर पायलट को महीने में न्यूनतम 70 घंटे की उड़ान का फ्लाईंग अलाउंस मिलता है, जिसके लिए उसे कम-से-कम 40 घंटों की उड़ान पूरी करनी होती है। कोई पायलट अगर 70 घंटे से ज्यादा उड़ान भरता है तब उसे हर अतिरिक्त घंटे का बोनस दिया जाता है। ये समझिए कि फ्लाईंग अलाउंस ही सैलरी का मुख्य हिस्सा है। लेकिन बीते कुछ सालों से फ्लाईंग अलाउंस मिलने में देरी हो रही है। ये हमेशा दो-तीन महीने देरी से मिल रहा है। इसलिए अभी निश्चित नहीं कि अप्रैल-मई का फ्लाईंग अलाउंस कब और कितना मिलेगा।

8. कोविड-19 के चलते हुए लॉकडाउन की सबसे ज्यादा मार एयर इंडिया में किन लोगों पर पड़ी है?

सबसे ज्यादा वे लोग प्रभावित हुए हैं जो संविदा पर रखे गए थे। और ऐसे लोगों की संख्या कम नहीं है क्योंकि बीते कुछ सालों से एयर इंडिया में स्थायी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। लोगों को सिर्फ कॉन्ट्रैक्ट पर ही रखा गया है। ये कॉन्ट्रैक्ट हर छह महीने या साल भर में रिन्यू होते थे लेकिन इस बार लॉकडाउन के कुछ समय बाद ही घोषणा कर दी गई थी कि सभी कॉन्ट्रैक्ट फिलहाल रद्द किए जा रहे हैं। ऐसे में संविदा पर काम कर रहे लोगों पर भारी मार पड़ी है।

9. लॉकडाउन के दौरान भी विशेष विमानों का संचालन तो जारी था। ऐसे में इस दौरान आप लोगों की क्या जिम्मेदारियां थीं?

लॉकडाउन के दौरान भी हम लोग उड़ानें भरते रहे हैं। विदेश में फंसे भारतीयों को वंदे भारत मिशन के तहत हम लोग लेकर आते रहे हैं और कई लोगों को यहां से विदेश भी छोड़ते रहे हैं। ‘रीपेट्रीएशन फ्लाइट’ इस पूरे दौरान चलती रही हैं। अमूमन इन फ्लाइट्स को ‘इवैक्यूएशन फ्लाइट’ कहा जाता है। लेकिन इवैक्यूएशन के समय लोगों से किराया नहीं लिया जाता। इस दौरान किराया लिया गया इसलिए इन्हें इवैक्यूएशन नहीं बल्कि रीपेट्रीएशन फ्लाइट कहा गया। इनके अलावा कार्गो भी चल रहे थे। तो उड़ानें कम थीं लेकिन काम जारी था।

10. कोरोना संक्रमण के डर से जब लोग घरों से भी नहीं निकल रहे, ऐसे में काम पर जाना कैसा अनुभव था?

ये समय हम सभी के लिए अभूतपूर्व है। किसी को भी नहीं पता इससे कैसे निपटना है। इसलिए काम पर जाते हुए डर बना रहता है लेकिन उससे ज्यादा डर वापस घर लौटते हुए लगता है। चिंता होती है कि कहीं हम अपने परिवार वालों को ये संक्रमण न दे दें। मेरी तो पत्नी भी पायलट हैं। वो स्पाइसजेट में फर्स्ट ऑफिसर हैं। इसलिए हमने अपने-मां-पिता जी को अलग घर में शिफ्ट कर दिया है और हम दोनों अलग रह रहे हैं।किस्मत से हमारे पास मुंबई में दो अलग-अलग घर हैं इसलिए हम ऐसा कर पाए। लेकिन सभी लोगों के पास ऐसी सुविधा नहीं होती।

(पायलट का नाम बदला गया है)

पहली घरेलू उड़ान से पहले क्या कहते हैं एयर एशिया के क्रू मेंबर्स: लॉकडाउन के 60 दिनों में हमें 140 घंटे की ट्रेनिंग दी गई, ये भी बताया गया कि फ्लाइट में संदिग्ध मिले तो क्या करना है

खबरें और भी हैं...